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खेल से खेल तक

बुधवार, 15 अगस्त 2012

Review- Ek Tha Tiger

Ek Tha Tiger टिपिकल सलमान खान मूवी है – ‘एक था टाइगर’ बिना दमदार स्क्रिप्ट की एक्शन पैक्ड फिल्म है एक था टाइगर ..जिसे सिर्फ सलमान खान के स्टारडम के लिए देखा जा सकता है ....फिल्म की ओपनिंग से तो साफ है ...कि सलमान ..इस वक्त बॉलिवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार है .....लेकिन वो एक्टर है या नहीं ...ये नहीं कहा जा सकता...एक था टाइगर सलमान खान के फैंस के लिए ईद का तोहफा हो सकती है ...लेकिन जो फिल्म में कहानी या एंटरटेनमेंट तलाश कर रहे हैं...वो मूवी देखने के बाद एक बार फिर कहेंगे..कि सलमान ने इस बार भी अपनी बाकी फिल्मों की तरह एक बार फिर डैश डैश बनाया है...... फिल्म में सलमान बने तो RAW के एजेंट हैं......लेकिन उनकी हरकतें दबंग के चुलबुल पांडे.....जैसी ही है....वो बस अपने एक्शन की वजह से ...फिल्म और फैंस के दिमाग पर छाए हुए हैं.....फिल्म की स्क्रिप्ट इतनी वीक है .....कि पहले हॉफ की स्टोरी ..दूसरे हॉफ से मैच नहीं खाती .....पहले हॉफ में जहां सलमान...लंदन में एक इडिंयन साइनटिस्ट पर नजर रखने के मिशन पर है.......तो दूसरे हॉफ में वो ISI की एजेंट कैटरीना कैफ के प्यार में गिरफ्तार होकर ....एक देश से दूसरे देश में बस भाग ही रहे हैं.......ये ISI एजेंट साइनटिस्ट के घर की केयरटेकर थी..... लेकिन जब से उसे सलमान से प्यार हुआ है ..वो भी नौकरी छोड़ चुकी है......अब दोनों एजेंटों को ...RAW और ISI अपनी इंफॉर्मेशन लीक होने के डर से तलाश कर रहे हैं....खैर वो तो पकड़ में नहीं आते ..लेकिन आखिर में सलमान ये मैसेज जरूर देते हैं—“जब RAW और ISI जैसी एजेंसी खत्म हो जाएंगी तो हम वापस लौट आएंगे” डॉयरेक्टर कबीर खान ने इस फिल्म में सिर्फ सलमान के स्टारडम को भुनाने की कोशिश की है ..वरना ये फिल्म ...एजेंट विनोद की तुलना में कहीं नहीं टिकती.......हां विदेशी लोकेशन्स की वजह से फिल्म की सिनेमाटोग्रॉफी जबरदस्त है .....साजिद-वाजिद का म्यूजिक एक दम औसत है....गाने तो फिल्म में बिलकुल भी फिट नहीं बैठते......फिल्म में सलमान-कैटरीना को छोड़कर 2 कैरेक्टर और है ...रणबीर शौरी सलमान के असिसटेंट के तौर पर अच्छे जमे हैं..गीरीश कर्नाड ने बॉस की भूमिका ठीक-ठीक निभाई है... फिल्म को 15 अगस्त के दिन रिलीज किया गया.....और ईद तक एडवांस बुकिंग फुल नजर आ रही है...यानी बिजनेस तो हिट है......फिल्म भी हिट हो ही जाएगी .... मेरी रेटिंग - **1/2*

मंगलवार, 14 अगस्त 2012


लंदन में नही दिखा विजेंदर का जलवा रिंग के किंग माने जाने वाले भारतीय बॉक्सर विजेंदर सिंह की...विजेंदर सिंह का सफर लंदन ओलंपिक में बिना पदक के ही थम गया... भारत का ये बड़े नाम वाला बॉक्सर क्वार्टरफाइनल से भी आगे नहीं बढ़ सका...लेकिन विजेंदर के इस तरह से बैरंग लौटने के पीछे की वजह उनका खराब प्रदर्शन कम बल्कि ओवर कॉन्फीडेंस ज्यादा लगता है। क्योंकि विजेंदर क्वार्टरफाइनल मुकाबले में उस बॉक्सर से हारे... जिसे वो इससे पहले दो बार हरा चुके थे। कामयाबी जब सिर चढ़ कर बोलने लगे ...तो उसकी आवाज औऱ फितरत...घमंड की शक्ल अख्तियार कर लेती है....क्योंकि कामयाबी का नशा...नशीला ही नहीं बल्कि...ज़हरीला भी होता है....ये बातें आपको लोकोक्ती सी लग रही होंगी...लेकिन ये किसी की हकीकत है...जी हां हम बात कर रहे हैं.... लंदन ओलंपिक में भारतीय बॉक्सिंग टीम के स्टार बॉक्सर विजेंदर सिंह की...जिसने अपने खराब प्रदर्शन से 121 करोड़ हिंदुस्तानियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। 75 किलोग्राम की कैटेगरी में...विजेंदर का सफर क्वार्टरफाइनल मैच में ही थम गया...हार के बाद इस बड़बोले खिलाड़ी ने यहां तक कह दिया कि...कई बार गलतियां हो जाती हैं....जिसके बारे में वो कुछ भी नहीं कर सकते है.... लेकिन यही गलती अगर ओवर कॉफिडेंस के चलते हो तो उसे क्या कहा  जाता है ये पूरी दुनिया जानती है.....बीजिंग में ब्रॉज जीतने के बाद..विजेंदर पर स्टारडम इस कदर हावी हुआ कि...लंदन में उसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा....हालांकि 2010 में हुए एशियन गेम्स में गोल्ड हासिल करने बाद भारत के रॉकी से काफी उम्मीदें भी की जाने लगी थी...लेकिन स्टारडरम एक बार फिर विजेंदर पर सवार हो गया और वो मायानगरी की गलियोँ में गुम होते चले गए....चैलेंज मिलने पर भी ट्रेनिंग में कोताही बरतने और ग्लैमर की दुनिया में मौज करने के लिए विजेंदर की अक्सर  आलोचना की जाने लगी... विजेंदर ने 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल से संतुष्ट होकर...2011 के अपनी फॉर्म खोते चले गए...जिसकी वजह से लंदन ओलंपिक में उन्होंने मेडल पर संदेहों की गुंजाइश छोड़ दी ....और विजेंदर ने बॉक्सिंग स्टार का तमगा जो हासिल किया.. वो भी संभाल नहीं सके....जिसका खामियाजा उन्हें इस अंदाज में भुगतना पड़ेगा ये विजेंदर ने सपने में भी नहीं सोचा होगा.....मिशन ओलंपिक चाहे मामला बदकिस्मती का हो या विशुद्ध आत्मसंतोष का...क्वार्टरफाइनल में मिली हार से विजेंदर अपने चरम से कोसों दूर हो गए...औऱ इसका जिम्मेदार कोई औऱ नहीं बल्कि खुद...विजेंदर सिंह ही हैं...क्योंकि अपने फैन्स की उम्मीदों पर पानी फेरने की वजह...अगर सिर्फ खेल होती तो बात कुछ औऱ होती....लेकिन विजेंदर के ओवर कॉफिडेंस पंच ने एक ही झटके में सब कुछ खत्म कर दिया...अब देखना ये दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में विजेंदर सिंह...तीखे सवालों का जवाब...तीखे अंदाज में देते हैं या फिर अपने खेल से देंगे...

लंदन ओलंपिक में भारतीय तीरंदाज ऐसा नहीं है कि उम्मीदों को तोड़ने में सिर्फ टेनिस खिलाड़ी औऱ शूटर्स ही सबसे आगे रहे...बल्कि तीरंदाजी टीम ने भी फैंस को निराशा के भंवर में धकेल दिया....ओलंपिक की शुरूआत से ही भारतीय तीरंदाजी टीम की नाकामी शुरू हो गई....एक के बाद एक तीरंदाज...अपने खराब प्रदर्शन की वजह से मेडल की उम्मीदों को तोड़ते चले गए....आलम ये रहा कि...दीपिका कुमारी जैसे टॉप तीरंदाज भी मेडल पर निशाना साधने में नाकाम रहे.... खेलों के सबसे बड़े महाकुंभ में मेडल की उम्मीद लिए जब भारतीय तीरंदाजी टीम ने लंदन की सरजमी पर कदम रखा...तो हर किसी की जुबां पर यही था... कि अर्जुन की नगरी से उसका दूत आया है... और इस बार भारतीय तीरंदाज..मेडल पर सटीक निशाना साधेंगे...तीरंदाजी में लगातार कई साल से पदक के सूखे को खत्म करने के लिए...भारतीय तीरंदाज भी..इंडिविजुअल और टीम इवेंट में अपनी मजबूत चुनौती का दावा कर रहे थे...लेकिन कहते हैं ना कि...हवाओं का ऱूख कभी भी...नतीजे को बदल सकता है.... और हुआ भी ऐसा ही...तीरंदाजी टीम के सपने इसी हवा की भेंट चढ़ गए...3 महिला और 3 पुरूष खिलाड़ी समेत 6 सदस्यीय तीरंदाजी टीम ने लंदन ओलंपिक में फैंस को निराशा कर दिया... कोई भी तीरंदाज मेडल राउंड की दहलीज़ तक भी नहीं पहुंच सके...   भारतीय पुरूष तीरंदाजी टीम भारतीय पुऱूष तीरंदाजी टीम ने लंदन ओलंपिक में अपने अभियान की शुरूआत जब लार्ड्स के मैदान से की...तो ऐसा लगा कि इस बार मेडल मिलना तय है... लेकिन शायद किस्मत में हार और निराशा काफी पहले से तय थी....टीम इवेंट में भारतीय पुरुषा टीम को प्री क्वार्टरफाइनल मुकाबले में जापान के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा...जयंत ताल्लकुदार, राहुल बनर्जी और तरूणदीप रॉय की तिकड़ी ने अपने निराशाजनक प्रदर्शन से फैंस को उम्मीदों को तोड़ने का शुभारंभ कर दिया....और भारतीय तीरंदाजी टीम सबसे आखिरी पायदान 12वें नंबर पर रही... भारतीय महिला तीरंदाजी टीम भारत की पुरुष तीरंदाजी टीम की शिकस्त के बाद.. महिला टीम भी लंदन ओलंपिक में निराशाजनक प्रदर्शन जारी रखा और हार के दर्द को दोगुना कर दिया...लॉ‌र्ड्स के मैदान पर टीम इवेंट के क्वार्टर फाइनल में भारतीय महिला तीरंदाजी टीम को डेनमार्क ने 211-210 से अंतर से हराया...दुनिया की नंबर वन तीरंदाज दीपिका कुमारी, बोम्बाल्या देवी और सी. सुरो की टीम महज 1 प्वाइंट से हार गई....   व्यक्तिगत स्पर्धा में भारतीय तीरंदाज   टीम इवेंट में मिली हार के बाद...जब भारतीय तीरंदाज अपने अपने इंडिविजुअल मुकाबले में उतरे...तो यहां भी...नाकामी ने पीछा नहीं छोड़ा...राहुल बनर्जी..जयंत तालुकदार...तरूणदीप रॉय जैसे दिग्गज तीरंदाज अपने अपने मुकाबले में...मेडल राउंड तक भी नहीं पहुंच सके...इंडिविजुअल इवेंट में भी राहुल...जयंत औऱ तरूणदीप सटीक निशाना साधने में नाकाम रहे...महिला टीम में शामिल सी सुरो... दीपिका कुमारी औऱ बोम्बाल्या देवी की हालत भी हार के रंग में रंगी रही...सी सुरो व्यक्तिगत एलिमिनेशन राउंड में हारी तो.... बोम्बाल्या देवी ने अपने निशाने का थोड़ दम दिखाया लेकिन..उनकी भी किस्तम में हार ही लिखी थी...ओलंपिक में बची कुची कसर दीपिका ने पूरी कर दी...भारत की सबसे बड़ी उम्मीद दीपिका कुमारी मैच के पहले ही राउंड में हारकर हंसते हुए बाहर हो गई...दीपिका की हार के साथ ओलंपिक के तीरंदाजी खेल में भारत की चुनौती बिना कोई मेडल हासिल किए खत्म हो गई..उम्मीदों के रथ पर सवार होकर भारतीय तीरंदाजी टीम लंदन तो बहुत कुछ लेकर पहुंची थी लेकिन जब देश वापस लौटी तो उनके हाथ खाली और चेहरे पर निराशा के सिवा कुछ भी नहीं था...क्योंकि फैंस के साथ साथ खुद खिलाड़ी को भी मेडल ना हासिल होने का दर्द था...

लंदन ओलंपिक में भारतीय शूटर लंदन ओलंपिक में अगर भारत को किसी ने जोर का झटका दिया है...वो हैं भारत के दिग्गज शूटर्स...खेलों के इस महाकुंभ में शूटिंग ही एक वो इंवेट था...जिसके इम्तिहान में भारत को अव्वल आने की सबसे ज्यादा उम्मीद थी...लेकिन क्या बीजिंग ओलंपिक के गोल्ड ब्वाय अभिनव बिंद्रा...और क्या रॉन्जन सोढ़ी और मानवजीत सिंह संधू...2 दो छोड़ दिया जाए...तो बाकी 9निशानेबाज़ों के प्रदर्शन ने भारत को निराश ही किया। लंदन ओलंपिक में उम्मीदें बड़े नामों का बदहाल प्रदर्शन 9 शूटर्स के निशानों पर ''गिरी गाज'' हासिल हो सके सिर्फ 2 मेडल       TAKE MONTANGE ON INDIAN SHOOTERS...   अभिवन बिंद्रा...गगन नांरग...रॉन्जन सोढ़ी...और मानवजीत सिंह संधू जैसे...बड़े-बड़े धुरंधर भारतीय निशानेबाजों ने जब लंदन ओलंपिक के लिए उड़ान भरी...तो सभी को उम्मीद थी कि हो ना हो...शूटिंग में कम से कम हमारे शूटर्स शानदार प्रदर्शन कर दुनिया को अपना लोहा ज़रुर मनवा देंगे...लेकिन ओलंपिक जैसे महाकुंभ के मैदान में जैसे ही भारतीय निशानेबाज़ों ने किस्मत आज़मानी शुरु की...मानों निशानेबाज़ों के बाहर होने की ऐसी आंधी चली...कि भारतीय उम्मीदें हवा हो गई... hold... लंदन ओलंपिक से...सबसे पहले खबर आई...बीजिंग ओलंपिक के गोल्डन ब्वॉय अभिवन बिंद्रा के बाहर होने की...बिंद्रा के लिए लंदन ओलंपिक किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हुआ...   TAKE GFX PLATE... लंदन ओलंपिक में अभिनव बिंद्रा 10 मीटर एयर राइफल के फाइनल में भी अपनी जगह नहीं बनाए पाए...इवेंट के पहले ही दौर में बाहर हो गए...बिंद्रा ने क्वालीफाइंग राउंड में लक्ष्य से दूर निशाने लगाए...और 60 गोलियां चलाने के बाद उनका स्कोर महज 578 ही रहा। GFX OUT...   हालाकि इसके बाद गगन नांरग की गरज ने कुछ हद तक भारत को तस्सली ज़रुर दी...   take gfx plate... नांरग ने 10 मीटर एयर राइफल मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए 701.1 पॉइंट हासिल कर ब्रॉन्ज मेडल जीता।   gfx out...   नांरग के निशाने के बाद फिर ये उम्मीद जगी...कि शूटर्स रंग में लौट रहे हैं...लेकिन ये उम्मीद टूटने में भी देर नहीं लगी...क्योंकि इसके बाद गगन फिर भारतीय उम्मीदों को पंख नहीं लगा पाए... GFX IN... तो रॉन्जन भी एक ही झटके में टूर्नामेंट से बाहर हो गए...शूटिंग के मेन्स डबल ट्रैप मुकाबले में सोढ़ी फाइनल के लिए क्वॉलिफाई भी नहीं कर सके... GFX OUT...   भारत के जॉयदीप करमाकर लंदन ओलम्पिक की पुरुषों की 50 मीटर प्रोन रायफल स्पर्धा के फाइनल में चौथे नंबर पर रहे और कांस्य पदक से चूक गए। करमाकर ने 50 निशानेबाजों के क्वालीफाइंग दौर में 595 अंक हासिल किए और संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर रहे। फाइनल में टॉप 8 में से वे चौथे नंबर पर रहे और पदक से चूक गए।   तीन ओलंपिक खेलों में हिस्सा ले चुके मानवजीत सिंह का अनुभव भी किसी काम नहीं आया... GFX IN... मानवजीत सिंह संधू मेंस ट्रैप शूटिंग इवेंट में 16वें स्थान पर रहे... जबकि उस इवेंट में टॉप छह शूटर ही फाइनल के लिए क्वॉलिफाई करते हैं। GFX OUT...    लेकिन इस मायूसी के आलम में विजय कुमार ने सिल्वर मेडल जीत... भारतीय शूटर्स की नाकामी पर जरूर मरहम लगाया...    TAKE GFX PLATE... विजय ने 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल के क्वालिफाइंग राउंड में कुल 585 अंक हासिल किए थे...और फाइनल में छह निशानेबाज़ों के बीच उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया। GFX OUT...   बस इन्हीं दो मेडल के साथ ही लंदन ओलंपिक से भारतीय निशानेबाज़ों के निराशाजनक सफर का अंत हो गया...लेकिन इन सबके बीच...बड़ा सवाल ये है कि क्या भारत ने अपने 11 धुरंधर निशानेबाज़ों से सिर्फ एक ब्रॉन्ज़ और एक सिल्वर मेडल की ही उम्मीद की थी...शायद नहीं क्योंकि बीजिंग के बाद लंदन की लड़ाई में शूटिंग ही एक वो इंवेट था...जिसके इम्तिहान में भारत को अव्वल आने का भरोसा था...जिस पर हमारे शूटर्स खरे नहीं उतर सके।

लंदन ओलंपिक में भारतीय बॉक्सर इस बार भारत के 8 -8 मुक्केबाज़ों ने जब लंदन ओलंपिक के लिए उड़ान भरी...तो उम्मीद थी कि कुछ भी हो...भारतीय मुक्केबाज़ इसबार मेडल टैली में अपनी एंट्री ज़रुर करवाएंगे...लेकिन लंदन की सरज़मी पर कुछ साज़िशों के चलते...तो कुछ अपने बेहाल प्रदर्शन की वजह से...बॉक्सिंग में शामिल 8 में 7 पुरुष बॉक्सर फेल हो गए...लेकिन इनमें शामिल महिला मुक्केबाज़ यानि एमसी मैरीकॉम ने वो कमाल कर दिखाया...जिसने दुनिया भर में देश का नाम रौशन कर दिया। खेलों के सबसे बड़े महाकुंभ में शामिल हुए थे... भारत के 8-8 मुक्केबाज़ 7 सितारों ने तोड़ दिए सपने लेकिन एक अकेली महिला मैरीकॉम ने बॉक्सिंग में बचाई भारत की साख      take montange indian boxers...     खेलों के सबसे बड़े मंच यानि ओलंपिक में इस बार...भारतीय फैंस की निगाहें इस महाकुंभ में अपने उन 8 मुक्केबाज़ों पर टिकी थी...जिनमें विजेंदर सिंह जैसे स्टार खिलाड़ी शामिल थे...इस बार ओलंपिक में आस थी...कि हो ना हो...हमारे बॉक्सर्स देश का नाम ज़रुर बढ़ा करेंगे...लेकिन जिन स्टार खिलाड़ियों से सबसे ज्यादा उम्मीदें थी...वो एक ही झटके में हवा हो गए...जबकि स्टारडम से दूर...ओलंपिक में पहली बार शामिल हुई भारत की महिला मुक्केबाज़ मैरीकॉम ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीत...कुछ हद तक देश की इज्ज़त बचा ली... HOLD... बॉक्सिंग के इवेंट में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद थी...बीज़िंग ओलंपिक के ब्रॉन्ज़ मेडलिस्ट और भारतीय बॉक्सिंग के सबसे बड़े स्टार विजेंदर सिंह से... TAKE GFX... लेकिन क्वार्टरफाइनल का पड़ाव पार करते ही...सेमीफाइनल घमासान में विजेंदर का वार कुंद पड़ गया...और भारत को लगा जोर का झटका... GFX OUT...  विजेंदर के अलावा आस जय भगवान से भी थी...लेकिन उनका सफर तो प्री-क्वार्टर फाइनल में ही थम गया... GFX PLATE... जयभगवान को कजाकिस्तान के गानी जैलावुवोव ने 16-8 से हराया...तो वहीं ओलंपिक में हिस्सा ले रहे भारत के सबसे युवा बॉक्सर शिव थापा तो अपना पहला ही मैच हार कर बाहर हो गए...उन्हें मैक्सिको के मुक्केबाज वालदेज़ फेरेरो के हाथों हार झेलनी पड़ी GFX OUT...  हालाकि इस सबके बीच...भारतीय मुक्केबाज़ विकास कृष्षन से मेडल की उम्मीद बंधी... TAKE GFX IN... लेकिन लंदन की लड़ाई में अमेरिकी जोर ने भारतीय बॉक्सर की जीत को हार में तब्दील करवा उन उम्मीदों को परवान चढने से पहले ही हवा कर दिया... GFX OUT...     लंदन की लड़ाई में भारतीय बॉक्सर्स के साथ बेइमानी का ये सिलसिला...सुमित सांगवान की हार के साथ शुरु हुआ... TAKE GFX IN... सुमित को जीते हुए मुकाबले में...ब्राजील के यामागूची फालकाओ फ्लोरेंटिनो के हाथों 14-15 से हारा हुआ घोषित किया गया...इस फैसले पर भारत ने आपत्ति भी दर्ज कराई...लेकिन हासिल कुछ ना हो सका... GFX OUT...  विकास और सुमित की ही तरह...धोखेबाजी का ये मामला...भारतीय मुक्केबाज़ मनोज के साथ भी पेश आया... TAKE GFX IN... मनोज कुमार को 64 किलो ग्राम वर्ग में लोकल बॉक्स थामस स्टाकर के हाथों 16-20 से हारा हुआ घोषित किया गया...जिसपर मनोज ने कई सवाल खड़े किए... GFX OUT...     और आखिर में उम्मीदें देवेंद्रों पर आकर टिकी थी... TAKE GFX IN... लेकिन 49 किग्रा वर्ग में लैशराम देवेंद्रो सिंह क्वार्टर फाइल मुकाबले में आयरलैंड के पैडी बार्नस से हार कर ओलंपिक्स से बाहर हो गए। GFX OUT...    यानि एक-एक कर भारत के सात स्टार बॉक्सर खेलों के सबसे बड़े महाकुंभ से बिना मेडल जीते बाहर हो गए...यानि चारों ओर मायूसी का माहौल...लेकिन इन सबके बीच सामने आया...एमसी मैरीकॉम का वो नाम...जिन्होनें मायूसी भरे माहौल में भारतीय फैंस को मुस्कुराने का एक नायाब मौका दे दिया...ओलंपिक में पहली बार शामिल की गई महिला बॉक्सिंग में मैरीकॉम के मुक्कों ने दुनिया भर में भारत का नाम रौशन कर दिया...2 बच्चों की मां मैरीकॉम की मेहनत खूब रंग लाई...हालाकि 5 बार की इस विश्वविजेता से उम्मीदें गोल्ड की थी...लेकिन सेमीफाइनल में मिली हार ने उन उम्मीदों को तो पूरा नहीं होने दिया...लेकिन बॉक्सिंग के इवेंट में मैरी ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीत...उन स्टार मुक्कों बाज़ों की नाक ज़रुर बचा ली...जिन्होनें बॉक्सिंग में भारत को जीत दिलाने के दावे किए थे।   RISHABH SHARMA,LIVE INDIA, LONDON    

लंदन ओलंपिक में भारतीय बैडमिंटन लंदन ओलंपिक अब अपने आखिरी पड़ाव पर आ चुका है... और अब भारत की मेडल की उम्मीदें सिर्फ रेसलर्स से ही बची हैं... लेकिन खेलों के इस महाकुंभ में रेसलिंग के अलावा दूसरे ऐसे कई खेल थे... जिनमें भारत को सफलता कम और निराशा ज्यादा हाथ लगी। बात करे बैडमिंटन की... तो यहां सायना नेहवाल ने जहां सबसे बड़ी सफलता हासिल की... और भारत को मेडल दिलाया... तो भारत के दूसरे बैडमिंटन खिलाड़ी पूरी तरह फ्लॉप ही रहे। लंदन ओलंपिक 2012 में भारतीय शटल स्टार्स ने किया कमाल 'बैडमिंटन क्वीन' सायना नेहवाल ने.. मेडल जीतकर रचा इतिहास तो कश्यप ने भी जीता दिल लेकिन ज्वाला, पोनप्पा और दीजू..  हुए पूरी तरह फेल   खेलों के महाकुंभ यानि लंदन ओलंपिक के बैडमिंटन इवेंट में भारतीय शटलर्स ने वो कर दिखाया जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद थी...सुपर सायना ने बैडमिंटन मे भारत को पहला पदल दिलाकर  इस स्पोर्ट को नए मुकाम तक पहुचा दिया...वहीं मेंस सिंगल्स मे पी कश्यप पदक तो नहीं दिला सके लेकिन उन्होंने से अपने खेल से सभी को impress जरूर किया....लेकिन ज्वाला पोनप्पा और दीजू उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए...आईए एक नजर डालते है भारतीय बैडमिंटन के ओलंपिक सफर पर...  सबसे पहले बात करते है लंदन ओलंपिक में सुपर हिट साबित हुई सायना नेहवाल की     PLATE GFX :- सायना नेहवाल रही सुपर हिट   लंदन ओलंपिक में भारत के लिए बैडमिंटन में पहला मेडल जीत कर इतिहास रचने वाली सायना नेहवाल ने दिखाया कि उन्हें यूँ ही भारत की बैंडमिंटन क्वीन नहीं कहा जाता....अपनी मेहनत, हिम्मत और लगन से खेलों के महाकुंभ कहे जाने वाले ओलंपिक मे ब्रान्ज़ मेडल जीत भारत की सायना ने आसमान की ऊंचाइयों पर अपना नाम लिख लिया है...लंदन ओलंपिक में सायना के सफर की बात करें तो ...  अपना आक्रमक खेल दिखाने वाली सायना ने बड़ी आसानी से ग्रुप स्टेज को पार कर क्वार्टरफाइल में और फिर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की की... जहां उनका समाना हुआ दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी चीन की WANG YIHAN से....WANG की चुनौती को सायना पार नहीं कर पाई और गोल्ड की दौड़ से बाहर हो गईं..लेकिन सायना ने ओलंपिक सेमीफाइनल में जगह बना बैडमिंटन में मेडल जीत.. भारत के लिए इतिहास जरूर रचा दिया...   पारुपल्ली कश्यप   लंदन ओलंपिक के मेन्स बैडमिंटन सिंगल्स में भारत के लिए स्टार बनकर उभरे...पी कश्यप....ओलंपिक शुरू होने से पहले उनसे किसी ने भी कुछ खास उम्मीद नहीं की थी...लेकिन कश्यप ने क्वार्टर फाइनल में जगह पक्की कर ना सिर्फ अपने TALENT क सबूत दिया... बल्कि साबित कर दिया की आगे जाकर वो भारत को ऐसे ही बड़े टूर्नामेंट में पदक दिलाने का मद्दा रखते है. ....ओलंपिक क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाले कश्यप भारत के पहले पुरुष खिलाड़ी बने... हालांकि सेमीफाइनल में वो नहीं पहुंच पाए.... लेकिन दुनिया के नंबर वन खिलाड़ी को उन्होंने अच्छी चुनौती दी...जो काबिलेतारीफ है...   ज्वाला, दीजू और अश्विनी पोनप्पा   सायना नेहवाल और पी कश्यप ने लंदन ओलंपिक के बैंडमिंटन इवेंट के सिंगल्स में... भारत को नई पहचान दिलाई... लेकिन मिक्स्ड डबल्स में ज्वाला गुट्टा और वी दीजू की जोड़ी एकदम फ्लॉप रही...ग्रुप लेवल के अपने सारे मुकाबलों में एकतरफा हार झेलने वाली ज्वाला-दीजू की जोड़ी ने ओलंपिक में अपने फैंस को पूरी तरह निराश कर दिया...ऐसा ही  कुछ हाल महिलाओं के डबल्स में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा का भी रहा... हालाकिं इस जोड़ी ने खराब शुरूआत के बाद वापसी की लेकिन जीत के बावजूद ज्वाला और अश्विनी थोड़ी दुर्भाग्यशाली रही... ग्रुप स्टेज का अपना पहला मुकाबला हारने के बाद...ज्वाला और अश्विनी की जोड़ी ने अपने दूसरे मैच में वापसी की ... लेकिन समीकरणों में उलझकर वो क्वार्टर फाइनल में नहीं पहुंच पाई.

सोमवार, 13 अगस्त 2012


लंदन ओलंपिक में भारतीय पहलवानों का बोलबाला लंदन ओलंपिक में वैसे तो भारत को पहला मेडल 30 जुलाई को मिला था... लेकिन खेलों का आखिरी यानि 17वां दिन भारतीय फैंस के लिए सबसे खास रहा... क्योंकि इस दिन ही पहलवान सुशील कुमार ने मेडल्स का छक्का लगाया। सुशील के सिल्वर मेडल से ही खेलों के सबसे बड़े महाकुंभ में इतिहास रचा गया। और भारतीय पहलवानों का रूसूख इंटरनेशनल लेवल पर और बढ़ गया। लंदन ओलंपिक में ... भारतीय रेसलर्स ने रचा इतिहास सुशील ने तय किया ब्रॉन्ज़ से सिल्वर का सफर तो योगेश्वर ने भी लगाया ... कुश्ती में ब्रॉन्ज़ पर दांव   खेलों के महाकुंभ के आखिरी दिनों में शुरू हुए रेसलिंग इवेंट से करोड़ो हिन्दुस्तानियों को काफी उम्मीदें थी...बीजिंग ओलंपिक में रेसलिंग से मिले मेडल के चलते... लंदन में भी पहलवानों से मेडल टैली में इजाफा करने की आस थी... और भारतीय पहलवान उम्मीदों पर खरे उतरे भी... और जिसमें सबसे अव्वल रहे सुशील कुमार ...सुशील ने लंदन ओलंपिक में भी अपने शानदार प्रदर्शन से ... ब्रॉन्ज़ से सिल्वर मेडल का सफर तय कर नया इतिहास रच दिया...ये कारनामा कर सुशील लगातार दो ओलंपिक खेलों मे मेडल जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए है...साथ ही सुशील रेसलिंग मे भी सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले भारतीय  बन गए है...   सुशील के अलावा योगेश्वर दत्त भी कुश्ती के किंग साबित हुए... हालांकि योगेश्वर के दांव भी सुनहरे साबित तो नहीं हुए... लेकिन ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर भारत के इस पहलवान ने देश को 5वां मेडल दिलाया...  योगेश्वर ने repechage round के दौरान 45 मिनट में 3 विरोधी पहलवानों को चित करके ब्रॉन्ज़ मेडल पर कब्ज़ा किया...    ब्रॉन्ज़ से चूके अमित हालांकि सुशील और योगेश्वर को छोड़ कर बाकी तीन भारतीय पहलवान लंदन ओलंपिक मे मेडल से चूक गए... 55 किलोग्राम वेट कैटेगरी में अमित कुमार के हाथ निराशा लगी... क्वार्टरफाइल मैच में हारने के बाद...अमित के पास repechage round मे ब्रॉन्ज़ जीतने का अच्छा मौका था... लेकिन वो इस मौके को नहीं भुना पाए...    नरसिंग के दांव में नहीं था दम 74 वेट कैरेगरी में नरसिंग पहले ही राउंड में बाहर हो गए... जबकि लंदन में इकलौती महिला रेसलर गीता फोगट के हाथ भी निराशा ही लगी... हालांकि गीता को ब्रॉन्ज जीतने का मौका मिला था... लेकिन गीता उसमें भी नाकाम ही रहीं...  बहरहाल तीन रेसलर्स की नाकामी के बावजूद .... भारतीय रेसलर्स खेलों के महाकुंभ में अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे। रजनीश कुमार खेल पत्रकार

लंदन ओलंपिक में भारतीय टेनिस का निकला दम लंदन ओलंपिक का आगाज़  होने से पहले ही...भारत के टेनिस खिलाड़ी आपसी गुटबाज़ी में उलझे थे...बावजूद इसके फैंस को उम्मीद थी कि लंदन गई बड़े बड़े दिग्गजों की टीम... जरूर कोई कारनामा करेगी.... लेकिन लंदन ओलंपिक में इन दिग्गजों का प्रदर्शन देखकर ऐसा लगा... मानो टेनिस की टेंशन दूर हुई ही नहीं थी। देखिए कैसे खेलों के सबसे बड़े महाकुंभ में भारतीय टेनिस खिलाड़ियों ने उम्मीदों को तार-तार कर दिया। लंदन ओलंपिक में...उदास चेहरों के साथ फैंस की उम्मीदों पर पानी फेरने वाले भारतीय टेनिस के ये खिलाड़ी....ना तो मेडल का सपना पूरा कर पाएं...और ना ही हिंदुस्तानियों का दिल जीतने में कामयाब हो सके....लंदन ओलंपिक से पहले भारतीय टेनिस मे जो विवादों का कड़वा बीज बोया गया था...उसका परिणाम आज पुरी दुनिया के सामने है...लिएंडर पेस...महेश भूपति..सानिया मिर्जा समेत 7 सदस्यीय टीम जब विवादों का दामन थामकर लंदन पहुंचे... तो हर किसी की जुबां पर यही था...कि इस बार टेनिस में मेडल मिलना तय है...लेकिन जब मुकाबला शुरू हुआ...तो महेश भूपति की जिद का असर कोर्ट पर खूब दिखाई दिया....भूपति और बोपन्ना नै मनचाही जोड़ी तो बनाई गई...लेकिन मनचाहा नतीजा देने में हर उनके साथ हर खिलाड़ी नाकाम रहा.... लंदन ओलंपिक में महेश भूपति और रोहन बोपन्ना ओलंपिक में जोड़ी बनाने को लेकर... चयन विवाद को जन्म देने वाले महेश भूपति और रोहन बोपन्ना को इस खेलों के महाकुंभ में मेंस डबल्स के दूसरे राउंड में हार का सामना करना पड़ा... भूपति और बोपन्ना की सातवीं वरीयता प्राप्त जोड़ी को जुलियन बेनातू और रिचर्ड गास्केट की फ्रांसीसी जोड़ी के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा था। विवादों में सबसे आगे रहने वाले भूपति मेडल की दौड़ में सबसे पीछे नजर आए। लंदन ओलंपिक में लिएंडर पेस और विष्णु वर्धन मेंस डबल्स कैटेगरी में लिएंडर पेस और उनके जोड़ीदार विष्णु वर्धन से ...हर फैंस मेडल की उम्मीद लगाए बैठा था...लेकिन पेस और विष्णु की जोड़ी को... दूसरे राउंड में ही शिकस्त का सामना करना पड़ा....हालांकि कमजोर जोड़ीदार होने के बावजूद पेस ने हिम्मत तो दिखाई...लेकिन ग्रास कोर्ट पर ज्यादा देर पेस और विष्णु अपना सफर जारी रखने में कामयाब नहीं हो सके.... सिंगल्स कैटेगरी में भी फेल भारतीय टेनिस के उभरते सितारे सोमदेव देवबर्मन लंदन ओलंपिक में मेंस सिंगल्स कैटेगरी के पहले राउंड में फिनलैंड के जाकरे निमिनेन से हार गए...तो वहीं विष्णु वर्धन भी सिंगल्स कैटेगरी में कोई खास कमाल नहीं दिखा सके थे...डबल्स में निराशा हाथ लगने के बाद सिंगल्स में मेडल की चुनौती काफी पहले खत्म हो गई थी.... सानिया-रूश्मि ने भी तोड़ा दिल ओलंपिक में मेडल की सबसे तगड़ी दावेदार मानी जाने वाली...सानिया और रूश्मि चक्रवर्ती की जोड़ी ने... डबल्स कैटेगरी के पहले राउंड में ही अपने फैंस का दिल तोड़ दिया... मेडल से चूकने के बाद दोनों ने यहां तक कह दिया कि हम कभी मेडल की रेस में थे ही नहीं.... पेस-सानिया का भी नहीं चला जादू लंदन में मेडल की लड़ाई में  सानिया और पेस की जोड़ी फैंस की उम्मीदों पर उतरने की कोशिश तो की...लेकिन वो भी जयादा देर टिक नही पाए...मिक्सड डबल्स कैटेगरी के क्वार्टरफाइनल में पहुंचकर सानिया और पेस ने मेडल की उम्मीद तो जगाई.. लेकिन विवादों का बोझ इतना भारी था कि...सफलता भी पेस और सानिया के कदम चूमने से इनकार कर दिया...सानिया और पेस को क्वार्टरफाइनल में बेलारूस की विक्टोरिया अजारेंका और मैक्स मिर्नी की जोड़ी से 5-7, 6-7  से हार का सामना करना पड़ा... गौरतलब है कि टेनिस में खाली हाथ लौटने के बाद खिलाड़ियों की आलोचना तो नही की जा रही... लेकिन खेल मंत्रालय ने ओलंपिक के लिए टेनिस खिलाडियों की तैयारियों के लिए जिन तीन करोड़ 49 लाख रपए का भारी भरकम खर्च किया ... अब वो बेमानी सा लगने लगा है...क्योंकि लंदन ओलंपिक में टेनिस स्टार मेडल नहीं बल्कि विवादों का ऐसा पुलिंदा छोड़ गए जिसे फैंस कभी नही भूल पाएंगे...बहरहाल अब लंदन ओलंपिक में हार का पोस्टमार्टम कर रहे दिग्गजों का मानना है कि खेलों के इस महाकुंभ में टेनिस का निरर्थक डांस के अलावा कुछ भी देखने को नहीं मिला... रजनीश कुमार खेल पत्रकार