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खेल से खेल तक

शनिवार, 5 सितंबर 2009

डॉ प्रवीण तिवारी की कलम से...

खिलाड़ियों और खेल संघों के बीच मीडिया
मेरीकॉम आजकल सुर्खि़यों में हैं लेकिन सिर्फ़ खेल रत्न मिलने के लिए नहीं बल्कि उनके द्वारा स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के हिसार में लगाए जाने वाले ट्रैनिंग कैंप पर उठाए गए गंभीर सवालों की वजह से। मेरिकॉम ने बॉक्सिंग में नौ साल का लम्बा करियर देखा है, पद्मश्री से लेकर खेल रत्न जैसे सम्मान हासिल किए है लेकिन वो पहली बार किसी टेलिविजन चैनल के स्टूडियो में पहुंची। इस एक्सक्लुसिव बातचीत में मेरीकॉम ने जो ख़ुलासे किए वो चौंकाने वाले थे। विश्व चैंपियन बॉक्सर कैंप में जाते वक़्त अपने साथ अपने पति को या भाई को लेकर जाती हैं क्योंकि उन्हे डर रहता है की कोई बदमाश उनके साथ छेड़छाड़ न करें। ये उन लड़कियों और महिलाओं के लिए एक बड़ा धक्का हो सकता है
जो बॉक्सिंग, जूडो या ताइक्वांडो सीखकर करकर ख़ुद को इन बदमाशों के ख़िलाफ़ तैयार कर रही हैं। सबसे बड़ा बवाल उनके उस ख़ुलासे से हुआ जिसमें उन्होंने SAI (स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलते हुए ये कहा कि बार-बार मना करने के बावजूद हिसार में ही ट्रेनिंग कैंप लगाया जाता है जबकि यहां पर महिला खिलाड़ी सुरक्षित नहीं है। महिला खिलाड़ियों के साथ छेड़छाड़ होती है और उन पर अश्लील फ़ब्तियां कसी जाती है। हांलाकि इटरव्यू के दौरान मैंने एक बात ग़ौर की, कि वो इस बात से घबरा भी रही थी की कही उन पर अथॉरिटी कोई कार्रवाई न कर दे। मैंने सवाल किया की नौ साल के लंबे करियर में आपने कई कैंप हिसार में किए होंगे, फिर अब अचानक ये परेशानी क्यों सामने आई? कहीं खेल रत्न चुने जाने के बाद आपका कॉन्फिडेन्स तो नहीं बढ़ गया और अथॉरिटी के ख़िलाफ़ अब आपने आवाज़ उठाई? मेरिकॉम इंटरव्यू के दौरान कई बार चुप हुई और मुझसे उन्होंने कहा कि मैं इस पर अभी कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हूं। ज़ाहिर था कि मेरिकॉम भले ही खेल रत्न हो गई हो लेकिन मन में एक डर तो है कि कहीं अथॉरिटी कोई ऐक्शन न ले ले।
गंभीर बात ये है कि जब इतनी बड़ी खिलाड़ी झिझक के साथ इतनी गंभीर परेशानी को रख रही हैं तो बाक़ी नये ख़िलाड़ियों की स्थिति का क्या कहना। मीडिया की सकारात्मक भूमिका से मेरीकॉम ख़ुश है क्योंकि जो बात ये खिलाड़ी अधिकारियों से कई बार कह चुके थे उसका असर अब मीडिया में इस ख़बर के आने के बाद हुआ है। अथॉरिटी इस मामले को गंभीरता से ले रही है। सहवाग का डीडीसीए पर ग़ुस्सा हो, सायना नेहवाल की वाडा को लेकर टीम इंडिया को दी गई नसीहत हो या फिर ताज़ा मामला एम। सी. मेरीकॉम का ख़ुलासा हो खेल संस्थानों और खिलाड़ियों के बीच की दूरियां साफ है और मीडिया इसमें ब्रिज का काम कर रहा है।
रजनीश कुमार

गुरुवार, 27 अगस्त 2009

फाइनल में भिड़ सकते हैं फेडरर व नडाल




साल के आखिरी ग्रैंड स्लैम में टेनिस होगा रोमांच पर

साल के आखिरी ग्रैंड स्लैम एक बार फिर रोमांच से भरा होगा। क्योंकि फेडरर के चिर प्रतिद्वंदी स्पेन के राफेल नडाल पूरी तरह से फिट होकर कोर्ट पर वापसी कर चुके हैं। आखिरी ग्रैंड स्लैंम में उम्मीद लगाई जा रही है किल टेनिस किंग रोजर फेडरर और बादशाह राफेल नडाल फाइनल की जंग में एक-दूसरे से भिड़ सकते हैं। इन दोनों को हालांकि 2005 के बाद पहली बार किसी ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट में शीर्ष दो वरीयता नहीं मिली है।
यूएस ओपन के ड्रा के मुताबिक स्विटजरलैंड के वर्ल्ड नंबर वन टेनिस प्लेयर फेडरर और स्पेन के स्टार नडाल को एक दूसरे के उलट ग्रुप हाफ में जगह मिली है। पहली बार ब्रिटेन के एंडी मरे दूसरी रैंकिंग पर काबिज है ।सर्बिया के नोवाक जोकोविच और अमेरिका के एंडी रोडिक भी फेडरर के हाफ में शामिल हैं और एक-दूसरे से भिड़ सकते हैं। फिर विजेता का सामना शीर्ष वरीय से हो सकता है।

नडाल का मानना है कि ड्रॉ उनकी जीत की राह का रोड़ा बन ही नहीं सकती औऱ कोर्ट पर उनके सामने कोई भी उनको और उनके खेल पर उसका फर्क नहीं पड़ता है यानि नडाल के आत्मविश्वास को देखकर तो ऐसा लगता है कि इस बार फेडरर को ग्रैंड स्लैम में जीत हासिल करनें में एक बार फिर कोई रोक सकता है तो वो सिर्फ औऱ सिर्फ क्ले कोर्ट के बादशाह नडाल ही होंगे। यानि आखिरी ग्रैंड स्लैंम में टेनिस के जब दो धुरंधर फाइनल की जंग में आमने सामने होंगे तो उस वक्त टेनिस फैंस को वर्ल्ड का सबसे बेहतरीन टेनिस देखने को मिलेगा।
रजनीश कुमार स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट

सुपरस्टार नहीं रॉक स्टार हैं धोनी


धोनी रॉक


क्रिकेट के मैदान पर कई खिलाड़ी आए और गए। लेकिन दुनिया उन खिलाड़ियों को ज्यादा याद रखती है जिन्होने उन्हे एन्टरटेनमेंट दिया...यानी मैदान पर जिनके छक्के चौके देखकर...उन्हे रोमांच मिला ...यहीं वजह है ॥कि लोग द्रविज़ जैसे महान बल्लेबाज़ को भूल जाते हैं ...और सौरव गांगुली उन्हे ॥याद हैं...साफ तौर पर बात साफ है कि गंगुली ॥मैच में रोमांच को जन्म देते थे......धोनी के बारे में यही बात ....सच है ...माही मैदान पर होते हैं...तो मैच का रोमांच ही अलग होता ...स्टेडियम और बाहर का माहौल ही बदल जाता है ...सचिन के बाद शायद ही ऐसा क्रेज़ किसी खिलाड़ी के लिए आया हो......लेकिन धोनी सचिन से इस बात को लेकर अलग है ॥कि लोग ॥उनके स्टाइल के भी दिवाने हैं,,,,उनपर जितनी लड़कियां मरती है ...पुरुश फैंस की संख्या भी कई ज्यादा है ...जैसे एक रॉक स्टार ॥अपनी प्रेसेंटेशन से दर्शकों को बैठने नही देता ॥वैसे ही मैदान पर धोनी की प्रजेंस ...स्टेडियम में मैजूद फैंस को खामोश नही होने देती ...धोनी का यही असर ॥टीम पर भी लागू होता है ...जब नेपियर में धोनी मैच में नही उतरे थे ॥तो जीत के रथ पर सवार टीम इंडिया की बॉडी लेंग्वेज ही बदल गई थी.....
धोनी का सुर ...टीम और दर्शकों में जान डाल देता है ॥और इसलिए वो सिर्फ सुपरस्टार नही ॥बल्कि वो वर्तमान क्रिकेट के रॉक स्टार भी हैं...


रवीश बिष्ट (लेखक धोनी आर्मी के संस्थापक हैं)

बुधवार, 26 अगस्त 2009

दूध के धुले नहीं है सहवाग


सहवाग के सच का सामना


पिछले दिनों ...सहवाग और उनके होम बोर्ड डीडीसीए की जंग ने खूब सुर्खियां बटोरी ...लोग इस बात की पडताल करते रहे कि आखिऱ किस हद तक डीडीसीए में धांधली होती है...संयोग की बात है इनी दिनों ..फिरोज शाह कोटला में दिल्ली रणजी टीम का कंडिशनिंग कैंप भी आयोजित हुआ ...अब इसमें जो खिलाड़ी आता उसे ..डीडीसीए के साथ मान लिया जाता ...और जो खिलाड़ी चाहे वो किसी भी ..वजह से कैंप में हिस्सा नही पाता था..उसे सहवाग के साथ मान लिया जाता था ...कमाल की बात ये हैं ..कि जैसे ही ..वो खिलाड़ी अगले दिन कैंप में पहुंचता ...उस पर डीडीसीए के दबाव की बात मान ली जाती ......आखिरकार कई दिनों के अनुमान और आकलनों के बाद डीडीसीए प्रेसीडेंट की प्रेंस कॉफेंस हुई और सारा मामला ...साफ हुआ ..और असली तस्वीर सामने आई ....कुछ डीडीसीए झुका और कुछ सहवाग ...लेकिन डीडीसीए मामले में सहवाग का इतना साथ देने वाली मीडिया को सहवाग की तरफ से थैंक्यू तक सुनने को नही मिला...बल्कि ..सहवाग को तो ऐसा लगा कि उन्होने मीडिया को नया टॉपिक देकर उनपर एहसान किया है ... क्या सहवाग भूल गए कि अगर मीडिया ने उनका साथ ना दिया होता ...तो डीडीसीए पर कभी दबाव ना बनता ...वो कहते रहते .....और काम चलता रहता ...वैसे भी सहवाग के दिल्ली छोड़ने से डीडीसीए की सेहत पर कोई फर्क नही पड़ता ....उलटा सहवाग को ही नुक्सान उठाना पड़ता ..खैर छोडिए..असली मामला ये है कि सहवाग इस खेल के मैन ऑफ द मैच रहे ...लेकिन हकिकत कुछ और है ...क्या हमेशा डॉमेस्टिक क्रिकेट से दूर रहने वाले सहवाग को ..अचानक घरेलू क्रिकेट में धांधली की कहां से याद आ गई ....फिर उसपर अंडर 15 और अंडर 19 की बात समझ से परे हैं....पिछले साल वीरू ने सिर्फ एक मैच खेला ..और वो भी इसलिए ...क्योंकि भारत दौरे पर आई इंग्लैंड टीम ..मुंबई हमले के चलते ..अपने देश रवाना हो गई थी ..उससे पिछले सीज़न में उन्होने दिल्ली के लिए बल्ले नही उठाया ..आगे भी सीज़न व्यस्त है ...और उन्हे घरेलू क्रिकेट नही खेलनी ...तो फिर सहवाग इतना ड्रामा क्यों कर रहे थे.....साफ है स्पोर्ट्स कमेटी ....के राज में उनकी एक नही चल रही थी ...वो अपनी चलाना चाहते थे...वो अपनी मन मर्ज़ी के माफिक खिलाड़ी चुनना चाहते थे ....वो सलेक्शन में अपना दबदबा चाहते थे ...जब ऐसा नही हुआ ...तो छेड़ दिया बगावत का बिगुल ..उन्हे पता था ..कि इंडियन मीडिया इतनी ..वेली है ...कि बिना तह तक जाए ....इस मुद्दे को उठाएगी ..हुआ भी ऐसा ही ...अब कोई सहवाग से पूछे ...कि उनके दिल की तो हो गई ...उनके एक-दो आदमी को टीम में जगह भी मिल जाएगी .....लेकिन क्या वो ...ट्रांसपेरेंसी के नाम पर धूल नही झोंक रहे.....क्या वो वही काम नही करना चाहते जिसके वो दूसरों पर आरोप लगा रहे हैं...सच्चाई तो यही है ..और यही है सहवाग का सच का सामना..

रवीश बिष्ट

खेल पत्रकार

मंगलवार, 25 अगस्त 2009

क्रिकेट का बिगड़ैल बच्चा छोड़ गया टेस्ट क्रिकेट को


अलविदा फ्रेडी

ओवल टेस्ट कई मायनों में इंग्लिश टीम के लिए यादगार रहा......ऐशेज़ सीरीज़ पर कब्जा करने के साथ ही इंग्लैंड के स्टार ऑलराउंडर एंड्रूय फ्लिटॉफ ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया है......ओवल टेस्ट में मिली शानदार जीत से इंग्लिश टीम ने अपने सबसे चहेते क्रिकेटर को यादगार विदाई दी है इंग्लिश टीम के खिलाड़ी अपने फ्रेडी को नम आंखों से विदाई तो दे दी लेकिन इतिहास हमेशा इस खब्बू क्रिकेटर को याद रखेगा क्योंकि ये क्रिकेटर हार कर नहीं बल्कि जीत का डंका बजाकर क्रिकेट से अलविदा कह रहा है..

फ्लिंटॉफ भले ही अब टेस्ट क्रिकेट में दोबारा नजर आए......लेकिन वर्ल्ड क्रिकेट के ऑलटाइम ग्रेट ऑलराउंडर्स में शुमार एंड्रयू फ्लिंटॉफ को क्रिकेट फैंस अपनी ताउम्र नहीं भूल पाएंगे... ओवल टेस्ट मे इंग्लैंड टीम की शानदार जीत ने जहां लाखो इंग्लिश क्रिकेट फैन्स को.....ऐशेज़ का यादगार तोहफा दिया.....वहीं फ्लिंटॉफ की टेस्ट क्रिकेट से विदाई ने क्रिकेट फैन्स की आंखों को नम भी कर दिया.....हालांकि ये फ्लिंटॉफ के बुलंद हौसलों का ही कमाल था.....कि घुटने की चोट के दर्द को मात देकर फ्लिंटॉफ ने ओवल टेस्ट के लिए खुद को फिट किया......

इंग्लिश टीम के सबसे बड़े मैच विनर माने जाने वाले फ्लिंटॉफ.....ओवल टेस्ट में कुछ खास नहीं कर सके......लेकिन फ्लिंटॉफ की मैदान पर मौजूदगी ने ही इंग्लिश टीम के लिए टॉनिक का काम किया....साथ ही ऑस्ट्रेलिया कैंप में फ्लिंटॉफ की वापसी ने हड़कंप मचा दिया.....क्योकि ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पॉन्टिंग फ्लिंटॉफ का कहर.....साल 2005 की ऐशेज़ सीरीज़ में भी झेल चुके थे......तब अकेले फ्लिंटॉफ ही कंगारुओं टीम पर भारी पड़ गए थे......और एक बार फिर फ्लिंटॉफ ने कंगारुओं को हार के ताबूत तक पहुंचने का काम किया.....फ्लिंटॉफ ने मैच के चौथे दिन खतरनाक अंदाज में खेल रहे ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पॉन्टिंग को पैवेलियन भेजने में अहम भूमिका निभाई.....हस्सी के कॉल पर जैसे ही पॉन्टिंग एक रन लेने के लिए आगे बढ़े......तो मानो मिड ऑन पर खड़े फ्लिंटॉफ इसी मौके का इंतजार कर रहे थे.....फ्लिंटाफ ने चीते की फुर्ती से बॉल पकड़ी और स्टंप्स की बेल्स उड़ी दी.....और ऑस्ट्रेलियाई टीम को हार की ओर धकेल दिया.....ऐशेज़ में यादगार जीत दिलाकर फ्लिंटॉफ ने ना केवल इंग्लैंड को उसकी साख वापस दिलाई है.....बल्कि शानदार अंदाज में संन्यास लेकर क्रिकेट जानकारों को ये कहने पर मजबूर भी कर दिया है.....कि रिटायरमेंट हो.....तो ऐसा। शान से विदाई तो फ्रेडी ने टेस्ट क्रिकेट से ले ही ली है लेकिन फैंस को निराश होने की जरूरत नहीं क्योंकि फ्लिंटॉफ का जलवा वनडे क्रिकेट औऱ ट्वेंटी-ट्वेंटी में जरूर दिखता रहेगा..।


रजनीश कुमार स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट

क्या कंगारू हुए कंगाल ?


पॉटिंग का सूर्य अस्त ?

ऑस्ट्रेलिया की बादशाहत अगर खत्म हुई है..तो उसमें पोन्टिंग का बैड लक भी शामिल रहा...जिस कप्तान ने लगातार दो वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया का झंडा बुलंद किया....2003 से टेस्ट रैंकिंग में अपनी टीम को नम्बर वन के दर्जे पर बनाए रखा...आज एक अदद जीत के लिए तरसता नज़र आ रहा है...अब इसे पॉन्टिंग का बैड लक नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे

एक खिलाड़ी
एक कप्तान
वो कभी ऑस्ट्रेलिया का सुरज हुआ करता था
लेकिन आज वो सूरज अस्त हो गया है
किसने सोचा था...कि एक वर्ल्ड चैम्पियन कप्तान औंधे मुंह ज़मीन पर गिर पड़ेगा.... वो भी इस तरह की फिर कभी उसे उठने का मौका ही नहीं मिलेगा... ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पॉन्टिंग कभी अपनी टीम पर नाज़ किया करते थे.... लेकिन किस्मत का फेर तो देखिए....आज मंज़र ऐसा है कि इस कप्तान को इसी की टीम ने कहीं का नहीं छोड़ा...

रिकी पॉन्टिंग की किस्मत ने ऐसी पलटी मारी...कि वो सीधे अर्श से फर्श पर आ गिरे..
पॉन्टिंग को ऐशेज़ सीरीज़ 2009 शुरू होने से पहले शायद ही ये अंदाज़ा रहा होगा...कि अगर सीरीज़ गंवाई तो एक ऐसा रिकॉर्ड उनके नाम हो जाएगा...जिसे हासिल करना कोई भी कंगारू कप्तान नहीं चाहेगा....
लेकिन अन्जाने में ही...पॉन्टिंग को ये सदमा भी लग गया...
1890 में बिली मर्डॉक के बाद पॉन्टिंग दूसरे ऐसे कप्तान बन गए, जिन्हें अपनी कप्तानी में इंग्लैंड की सरज़मीं पर लगातार दो एशेज़ सीरीज़ गंवानी पड़ी हो...
बतौर कप्तान पॉन्टिंग का ये हश्र...दर्शाने के लिए काफी है कि अब ये सुरज ढ़ल चुका है
हालांकि इस बीच यकीन करना भी थोड़ा मुश्किल है....कि जिस खिलाड़ी ने कप्तानी की ज़िम्मेदारी को बखूबी निभाते हुए...ऑस्ट्रेलियाई टीम को टेस्ट क्रिकेट में सालों तक नम्बर वन के पायदान पर बनाए रखा.... दो बार क्रिकेट वर्ल्ड कप का ताज पहनाया....आज वही कप्तान कटघरे में खड़ा है.... ऑस्ट्रेलियाई मीडिया, जो कभी अपने सुपर कप्तान के गुण गाया करती थी....आज उसी से सवाल पूछ रही है.... ज़ाहिर है जब किस्मत साथ छोड़ती है...तो इंसान को जवाब देना भी मुश्किल हो जाता है...पंटर यानी रिकी पॉन्टिंग के साथ भी अब कुछ ऐसा ही हो रहा है।


रजनीश कुमार स्पोर्ट्स खबर

गुरुवार, 30 जुलाई 2009

स्पीड किंग की वापसी


शूमाकर के लिए सड़के आसान नहीं !


हर खेल में कुछ ना कुछ ऐसे नाम हुए ...हैं ..जिनके नाम से खेल को जाना जाता है ...और उन्ही में से एक है...माइकल शूमाकर..जो एक बार फिर फॉर्मूला वन सर्किट में वापसी को तैयार हैं....फॉर्मूला वन या कार रेसिंग को जितनी पहचान ...माइकल शूमाकर ने दिलाई...उतनी शायद किसी ने नही ...भारत जैसे देश में जहां लोग क्रिकेट को दिवाने है...और दूसरे खेल के ज्यादातर खिलाड़ियों को नही जानते...लोकिन जो लोग दूसरे खेल के बारे में इंटरेस्ट रखते होगे ... शर्तिया कह सकता हूं कि वो ...माइकल शूमाकर के नाम से अनिभिज्ञ नही होंगे ...शूमाकर के नाम कई रिकॉर्ड दर्ज है ...वो 7 बा र फॉर्मूला वन चैंपियनशिप जीतने वाले ...अकेले ड्राइवर है....भला कोई कैसे भूल सकता है कि....साल 2000-2005 तक उन्होने 5 बार लगातार चैंपियनशिप जीतकर ...तहलका जो मचा दिया था......इसमें भी खास बात ये हैं कि ...साल 2002 में उन्होने सारी रेस में पोडियंम फिनिश किया...जिसे हासिल करने वाले वो एकलौते ड्राइवर है....जब शूमाकर अपने करियर की सुपर फॉर्म में थे ..उन दिनों मैं कॉलेज हुआ करता था...रोज़ अखबार में उनकी फोटो देखकर ..मेरा भी इंटरेस्ट ..फॉर्मूला वन की तरफ बढ़ा...शूमाकर मुझे बहुत अच्छे लगने लगे....मुझे याद है कि ...मैं उनका पोस्टर ढूढ़ने मार्केट में निकला ...लेकिन खरीद नही पाया......क्योंकि कोटद्वार ( मेरा गृह नगर )जैसी छोटी जगह में ये मुमकिन नही था.....रिटायरमेंट के अपने आखिरी साल में ...शूमाकर के करोड़ो फैंस की तरह मैं भी चाहता था ..कि वो चैंपियनशिप जीते...लेकिन तब ओलोंसों लय पकड़ चुके थे.....और शूमाकर के लिए फैरारी को दौड़ाना ..उतना आसान नही था.....वो कुछ ग्रा प्री जीतने के बाद ..तीसरे स्थान पर रहे...लेकिन फेरारी और फॉर्मूला वन को पॉपुलैरिटी दिलाने में शूमाकर का बड़ा हाथ रहा.....अब शूमाकर ...दोबारा वापसी को तैयार हैं....वो फेरारी के कंसलटेंट हैं...और फिलिपे मासा की चोट ने उन्हे सर्किट में लौटने के लिए मजबूर किया.....हालांकि ...2006 के बाद ये शूमाकर की पहली फॉर्मूला वन रेस होगी.....और बेशक सड़के उनके लिए नई ना हो ...लेकिन अब हालात बिलकुल जुदा होंगे....

रवीश बिष्ट ( खेल पत्रकार)

मंगलवार, 28 जुलाई 2009

सानिया ने खत्म किया खिताबी सूखा

लेक्सिंगटन ओपन सानिया के नाम
भारत की सर्वोच्च वरीयता प्राप्त महिला टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा ने अपने देश के प्रशंसकों की जबरदस्त हौसला अफजाई के बीच 50 हजार डालर ईनामी अंतरराष्ट्रीय टेनिस महासंघ [आईटीएफ] लेक्सिंग्टन चैलेंजर टेनिस टूर्नामेंट का एकल खिताब जीत लिया। सानिया ने छह साल बाद कोई चैलेंजर खिताब जीता है।
सानिया ने मुकाबलें में फ्रांस की जूली कोइन को 7-6, 6-4 से हराया। सानिया ने सेमीफाइनल मुकाबले में चीन की खिलाड़ी युआन मेंग को तीन सेट तक चले मुकाबले के बाद 6-1, 4-6, 6-4 से हराया था। विश्व की 83वीं वरीयता प्राप्त खिलाड़ी सानिया को अपने करियर का दूसरा चैलेंजर खिताब हासिल करने के लिए छह साल इंतजार करना पड़ा। इससे पहले सानिया ने 2003 में चैलेंजर खिताब जीता था। अगस्त में खेले जाने वाले साल के चौथे ग्रैंड स्लैम अमेरिकी ओपन के लिहाज से सानिया की यह जीत काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सानिया इसको लेकर खासा उत्साह थी। आयोजन समिति के एक सदस्य ने बताया, 'सानिया का कद बहुत बढ़ा है। उन्हे यहां खेलते देख आसपास के सभी भारतीय टेनिस प्रेमी यहां पहुंच गए थे। इनमें केंटुकी विश्वविद्यालय के छात्र और सेंट्रल केंटुकी शहर के भारतीय मूल के लोग शामिल है। सबने सानिया की जबरदस्त हौसलाअफजाई की।' जीत के बाद सानिया ने कहा, 'मैं अपने प्रदर्शन से खुश हूं। मेरी सबसे बड़ी ताकत यह है कि मेरे फोरहैड शॉट को कोई नहीं समझ सकता। मैं फोरहैड शॉट कहीं भी लगा सकती हूं। फोरहैड की ताकत और अनुभव के कारण मुझे जीत मिली है। मैं इससे खुश हूं।'

रजनीश कुमार स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट

गुरुवार, 23 जुलाई 2009

सानिया की सगाई



सानिया की मुसीबत

10 जुलाई दिन शुक्रवार यानि जुम्मे का दिन यू कहें तो इस्लाम धर्म में ये दिन पाक माना जाता है औऱ इसी दिन टेनिस फैंस के दिलों की धड़कन सानिया मिर्जा ने सोहराब मिर्जा को व्हाइट गोल्ड का रिंग पहनाकर अपनी जिंदगी में शामिल कर लिया। सोहराब को एक आम इंसान से खास बना दिया...खैर सोहराब का कबूलनामा का जामा तो सानिया ने पहन लिया लेकिन अब नई चुनौती सानिया के सामने आ खड़ी हुई है। हालांकि ये चुनौती इतना मुश्किल नहीं है जितना की सानिया के लिए उनकी कलाई की चोट रहा। लाखों करोड़ों फैंस के सवालों को सानिया ने कोर्ट में वापसी का इरादा जताकर एक झटके में तो दे दिया लेकिन क्या अब वो अपने होने वाले शौहर सोहराब मिर्जा के सवालों का जवाब दे पाएंगी। ये सवाल नहीं ये एक सानिया के लिए मुसीबत है।
सानिया ने सोहराब से दो साल बाद शादी करने का फैसला की है...दो साल तक सानिया ने जमकर टेनिस खेलने का फैसला किया है....इस बीच सोहराब ने सानिया से एक सवाल किया कि तुम दो सालों में बेहतरीन टेनिस खेलोगी अगर खेलोगी तो क्या सिंगल्स कैटेगरी में ग्रैंड स्लैम जीत पाओगी ?
ये सवाल सुनकर सानिया ने उनका जवाब न देकर कोर्ट में जमकर अभ्यास कर रही है यानि इशारा साफ है कि इसका जवाब आने वाला वक्त देगा...ये सवाल तो सोहराब का मजाक भरा सवाल लगता है क्योंकि हर कोई जानता है कि सानिया के लिए सिंगल्स कैटेगरी में ग्रैंड स्लैम जीतना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।
सोहराब साहब की एक औऱ मुसीबत है वो है सानिया की ड्रेस...सोहराब मिर्जा सानिया को यूं छोटे कपड़े में खेलते ही नहीं देखना चाहते है लेकिन बेचारे सोहराब मिर्जा दिल की ये बात सानिया से जाहिर नहीं कर सकते है क्योंकि वो जानतें है कि कपड़ों के मामलें में सानिया से सवाल पूछना सही नहीं होगा। हालांकि न चाहते हुए भी सोहराब ने ये एलान कर दिया था कि सानिया शादी के बाद भी टेनिस खेलती रहेंगी...ये बात सुनने में अच्छा लगता है लेकिन शादी के बाद सानिया के लिए टेनिस खेलने की चुनौती आसान नहीं होगी....शादी से पहले तो सानिया का प्रदर्शन कुछ सालों से खराब चल रहा है चाहे वो ओलंपिक में रोते हुए बीच खेल के हटना हो या फिर चोट के कारण लंबे वक्त से कोर्ट से दूर रहना है । सानिया जिंदगी में कुछ अच्छा हुआ है तो वो है 2009 ऑस्ट्रेलियन ओपन में मिक्सड डबल्स कैटेगरी में खिताब जीतना हालांकि ये खिताब भी महेश भूपति के बदौलत जीत गई। सानिया जी शादी के बाद टेनिस खेलने का जो वादा कर रही है वो फैंस को एक पल के लिए ठीक लग रहा है लेकिन आगे सोचने पर पता चलता है कि शादी के पहले ही जब कुछ नहीं कर पाई तो शादी के बाद कौन सा पहाड़ तोड़ देंगी। इसलिए सानिया के लिए शादी से पहले दो साल का वक्त है अपने टेनिस खेलने का जिसे आप यूं ही न जाने दो .

रजनीश कुमार

रविवार, 19 जुलाई 2009

धोनी से प्रभावित हैं रविश विष्ट


धोनी मेनिया का फैलता प्रभाव

जब कोई बीमार होता है तो हम उसे डॉक्टर के पास ले जाकर उसका इलाज करवातें है। आप ही सोचिए अगर कोई बीमार होते हुए भी बीमार नहीं हो तो आप क्या करेंगे। चक्कर खा गए न आप..मैं भी सोच में पड़ गया था इन सवालों को लेकर। लाइव इंडिया के एंकर और खेल संवाददाता रविश विष्ट एक मेनिया के शिकार है ये मेनिया बुरा नहीं बल्कि बहुत अच्छा है रविश धोनी मेनिया के शिकार है। रविश जब भी धोनी के बारें में सोचतें या पढ़तें है या फिर साफ शब्दों में धोनी का भूत इनके सर सवार हो गया तो उस दिन रविश धोनी पर एक लेख लिखे बिना मानतें नहीं है। ये अच्छी बात है कि मीडिया की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी से थोड़ा वक्त निकालकर रविश अपने मन की शांति के लिए कुछ लिख तो लेते है।
स्पोर्ट्स के ऑफिसियल ब्लॉग पर अपने लेख लिखने वाले रविश के बारें में मैं एक बात आप लोंगों से शेयर करना चाहता हूं । बात उन दिनों की जब टीम इंडिया कुछ दिनों के लिए क्रिकेट से दूर छुट्टियां मना रहीं थी उस वक्त हमारें धोनी महाशय फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में एक निजी चैनल के लिए एक एड की शूटिंग कर रहें थे..ये बात रविश को पता चली तो रविश सीधे कोटला स्टेडियम पहुंच गए....रविश पहुंच तो गए लेकिन एक समस्या उनके सामने खड़ी हो गई ...कैमरा मैन को स्टेडियम के अंदर जाना मना था ऐसी स्थिति में रविश ऑफिस फोन करके कैमरे वाला फोन मंगवाया औऱ शूट किया। ये पढ़ कर तो आप समझ ही गए होंगे की रविश बीमार नहीं बल्कि घोनी मेनिया जर्नलिस्ट है। इसके अलावा आईपीएल के दौरान चेन्नई सुपरकिंग्स के मैच वाले दिन अगर चेन्नई सुपरकिंग्स की टीशर्ट गलती से कोई औऱ पहन लें तो उसे उतारना पड़ता था क्योंकि धोनी टीम के सपोर्टर रविश ये कतई बर्ताश्त नहीं कर सकतें थे कि कोई औऱ उनकी फेवरेट टीम की जर्सी को हाथ लगाए।
ऐसे में एक दिन हमारे ऋषभ भाई ने एक दिन चेन्नई टीम की जर्सी पहन ली तो ऐसी स्थिति में रविश ने एंकरिंग करने से मना कर दिया आखिर में हमारें ऋषभ भाई को जर्सी उतारनी पड़ी। तो ये था रविश की धोनी मेनिया की कुछ राम कहानी। इंसानी जिंदगी में लोगों की मानसिकता ऐसी होती ही है कि वो किसी न किसी क्रिकेटर का मुरीद हो जाता है। अगर कोई क्रिकेटर का मुरीद नहीं होता तो वो हीरो का हो जाएगा या फिर किसी नेता हो जाएगा या फिर किसी महापुरूष का मुरीद हो जाता है। ऐसी स्थिती में लोग सबकुछ भूलकर अपने फेवरेट के बारें में सोचना शुरू कर देता है ऐसा करना कोई बीमारी नहीं बल्कि ये एक प्रकार का मेनिया होता है जो जिंदगी भर उस आदमी के साथ जुड़ा रहता है। रविश आज कामयाबी की ओर अग्रसर है धोनी भी अपनी किस्मत की बदौलत नए नए कारनामें कर रहा है तो हम यही कह सकते है रविश औऱ धोनी की जोड़ी है बेमिसाल।

रजनीश कूमार
खेल संवाददाता

1983 वर्ल्ड कप से बड़ी है 2007 टी-20 w'cup की जीत


कई दिनों से मेरे मन मे ये सवाल उठ रहा था ..कि भारत ने क्रिकेट के मैदान मे दो वर्ल्ड कप जीते ..लेकिन आखिर कौनसी जीत सबसे बड़ी है....साफ ये युग अलग-अलग थे ...इसलिए दोनों की तुलना नही की जा सकती .....लेकिन फिर भी मैने आकलन करके पाया...कि 2007 में धोनी की कप्तानी में जीता गया वर्ल्ड कप की जीत भारतीय क्रिकेट के लिहाज़ से सबसे बड़ी जीत है...इसके कुछ ठोस कारण हैं.......ये सच है कि 1983 वर्ल्ड कप की जीत के पहले भारतीय टीम को ज्यादा महत्व नही दी जाती थी...लेकनि कपिल के कारनामे के बाद ..भारतीय क्रिकेट को नई पहचान मिली...और रुतबा भी...वहीं 2007 में वेस्टइंडिज़ में वन डे वर्ल्ड कप गंवाने के बाद ...भारतीय क्रिकेट को बड़ी झती पहुंची...लोग का इंटरेस्ट कम होने लगा ..हर तरफ भारतीय क्रिकेट की आलोचना हो रही थी....टीम को लेकर निरासा का माहौल था.....और अब क्रिकेट फैंस मानने लगे थे ..कि क्रिकेट ...सिर्फ समय बर्बाद करने का जरिया है...इस दौरान बीसीसीआई के मुनापे में भी कमी आई.....और भारतीय बोर्ड भारतीय फैंस के इंटरेस्ट को बनाने के लिए ...रोज़ नई बात रखता ...यहां तक कि वर्ल्ड कप के बाद तुंरत आयोजित की गई ...बांग्लादेश सीरीज़ में भी नए खिलाड़ियों को चांस दिया गया ...और सीनियर खिलाड़ियों को आराम ...बीसीसीआई को लगा कि इससे लोगों का गुस्सा शांत हो जाएया.....
भारतीय क्रिकेट के लिए हालात बेहद खराब थे......और टीम का मनोबल टूट चुका था...ऐसे समय में भारत को ट्वेंटी-20 वर्लड में शिरकत करनी थी...और सीनियर खिलाड़ियों जैसे सचिन..सौरव ..और राहुल के अपना नाम वापस लेने के बाद टीम की कमान युवा महेंद्र सिंह धोनी के कंधों पर सौंपी गई..वर्लड कप में भारत ने शुरुआत पाकिस्तान के खिलाफ जीत के साथ की .....लोगों का इंटरेस्ट खेल में लौटने लगा ....इसके बाद ...इंग्लैंड ...साउथ अफ्रीका .....और ऑस्ट्रेलिय़आ जैसी टीमों को धूल चटाने के बाद टीम इंडिया फाइनल में थी......मुकाबला फिर पाकिस्तान से था.....और भारत के सामने था ...क्रिकेट फैंस के खोए विश्वास को पाने का सुनहार मौका.......जंग आखिरी ओवर तक गई ...क्रिकेट का रोमांच अपने चरम पर पहुंचा ..और एक हाइवोल्टेज ड्रामे में ..भारत ..वर्ल्ड चैंपियन बन गया.......क्रिकेट फैस जश्न मनाने सड़को पर उतर आए...टीम का भव्य स्वागत हुआ....और भारतीय क्रिकेट एक बार फिर बुलदियों पर था.. शायद 1983 में कपिल आर्मी के साथ ऐसा ना हुआ हो ...लेकिन ...धोनी के धुरंदरों ने उस पल को एक बार फिर जीवित कर दिया....जो भारतीय फैंस ने करीब 24 साल पहले देखा था......और भारतीय क्रिकेट को भी नई जान मिल गई...टीम इंडिया तुम्हे सलाम..


रवीश बिष्ट ( लेखक धोनी आर्मी के संस्थापक हैं)

रविवार, 12 जुलाई 2009

धोनी को मिले डॉक्टरेट की उपाधि

डॉ ..... महेंद्र सिंह धोनी ?
कुछ दिनों पहले एक खबर ने ज़ोर पकड़ा ..कि धोनी बी कॉम के एक्जाम में फेल हो गए हैं.....और अब आगे की पढ़ाई उनके लिए मुशकिल हो सकती है...खास बात ये रही कि. फिछले साल धोनी और टीम इंडिया ने जमकर क्रिकेट खेला ..इस दौरान ट्रैवलिंग भी बुत ई..तो फिर एक क्रिकेटर को कहा से वक्त मिलता ...कि वो किताब खोलकर बी कॉम के एक्जाम की तैयारी करे...धोनी..भारत को लगातार सीरीज़ जीताकर वो काम कर रे हैं...जो ...कई पढ़े लिखे लोगों ने भी नही किया.....फिर भी वो चाहते हैं..कि कम से कम ..वो ग्रेजूएट तो बन जाएं...हालांकि इसके पीछे उनकी असली मंशा कुछ भी हो सकती है..भारत मे पढ़ाई लिखाई को बेहद जरुरी माना जाता है ...कि धोनी के करनामे किसी से छुपे नही है...सवालस यो उठता है कि ..जब ..सचिन तेंदुलकर ..सुनील गावस्कार ..और यहा तक की सानिया मिर्जा को भी डॉक्टरेट की उपाधि मिल सकती है.तो फिर सिर्फ दो सालों में ही टीम को बुलंदियों पर पहुंचाने वाले धोनी को क्यों नहीं.??...क्यों उनकी कॉलेज उन्हे बार-बार फेल करके सुर्खियां बटोर लेता है?...क्या रांची के सेंट जेवियर कॉलेज को नही लगता कि धोनी की शख्सियत इतनी बड़ी हो चुकी है...कि उन्हे डॉक्टरेट की मानद उपाधि से नवाज़ा जाए...धोनी जैसे खिलाड़ी किसी भी प्रदेश के लिए विभूती हो सकता है...फिर भी ...प्रदेश सरकार ने इस दिशा में कभी गंभीरता से नही सोचा ..अब ववक्त आ चुका है ...कि टीम इंडिया के कप्तान को ...उनका उचित सम्मान दिया जाए ..ताकी क्रिकेट की पढाई टॉप करने वाले धोनी को ...क्रिकेट के बाहर भी डॉक्टर धोनी के नाम से जाना जाए...

रवीश बिष्ट ( लेखक धोनी आर्मी के संस्थापक हैं)

शनिवार, 11 जुलाई 2009

लीजेंड फेडरर ने रचा इतिहास


इतिहास पुरूष हैं फेडरर


रिकॉर्ड बनते ही है टूटने के लिए औऱ जो रिकॉर्ड तोड़ता है वो इतिहास पुरूष कहलाता है। दुनिया के सबसे मंहगें गेम टेनिस में रिकॉर्ड बनाना भी मंहगा होता।
रिकार्ड 15वां ग्रैंड स्लैम जीतने के लिए रोजर फेडरर को रविवार को एंडी रोडिक के खिलाफ सवा चार घंटे तक मैराथन मुकाबला करना पड़ा। सात साल से टेनिस जगत पर राज करने वाले फेडरर ने आखिर बाजी अपने नाम की और विंबलडन में छठा और रिकार्ड 15वां ग्रैंड स्लैम खिताब जीतकर नया इतिहास रच डाला।

दुनिया में दूसरे नंबर के फेडरर ने मुश्किल घड़ी में भी धैर्य बनाए रखकर रोडिक को 5-7, 7-6, 7-6, 3-6, 16-14 से हरा दिया। अमेरिका के पीट संप्रास के 14 ग्रैंड स्लैम खिताब के रिकार्ड को पीछे छोड़ा जो टेंशन से भरे इस मैच के दौरान रायल बाक्स में उपस्थित थे। स्विट्जरलैंड के फेडरर को अमेरिका के छठी वरीय रोडिक ने कड़ी टक्कर दी। रोडिक ने पहला सेट जीता और दूसरे सेट में उनके पास एक समय चार सेट प्वाइंट थे लेकिन यहीं पर फेडरर ने ग्रास कोर्ट पर अपने अनुभव का अच्छा इस्तेमाल करके बराबरी की। रोडिक ने इसके अलावा मैच के अंतिम गेम से पहले तक कोई सर्विस नहीं गंवाई थी। यह बेजोड़ फाइनल था जिसमें अंतिम सेट 95 मिनट तक चला जो विंबलडन में नया रिकार्ड है।
27 वर्षीय फेडरर ने अब तक छह विंबलडन, पांच अमेरिकी ओपन, तीन आस्ट्रेलियाई ओपन और एक बार फ्रेंच ओपन जीता है। इस जीत से वह फिर से राफेल नडाल की जगह दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी भी बन गए हैं जिन्होंने पिछले साल यहां पांच सेट में जीत दर्ज की थी।


अपना छठा विंबल्डन खिताब जीतने के साथ ही फेडरर ने पीट संप्रास को पीछे छोड़ दिया। टेनिस के इतिहास पुरुष को यह दिग्गज खिलाड़ी संप्रास की सलामी देने की ललक ही थी, जो उन्हें 7 साल बाद आल इंग्लैंड क्लब के सेंटर कोर्ट तक खींच लाई। फेडरर द्वारा खुद उनका ही सर्वाधिक ग्रैंडस्लैम खिताब [14] जीतने का रिकार्ड तोड़ता हुआ देखने के लिए। संप्रास ने वर्ष 2002 में स्विट्जरलैंड के गैर वरीय जार्ज बास्टल के हाथों हार के बाद आल इंग्लैंड क्लब में कदम नहीं रखा था। इस अनमोल पल को अपनी यादों में सहेजने के लिए महान खिलाड़ियों व हस्तियों की लंबी कतार देखी जा सकती थी, जिनमें 1969 में चारों ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने वाले महान राड लेवर, ब्योन बोर्ग, बोरिस बेकर सहित सचिन तेंदुलकर भी पत्नी अंजलि सहित मौजूद थे। यहां तक की हर अंक पर फेडरर की पत्नी मिर्का वावरिनेक व रोडिक की जीवनसाथी ब्रूकलिन डेकर के चेहरे के हाव-भाव हर किसी को विचलित कर रहे थे। इस मैच में जीत के साथ ही फेडरर ने एक और मामले में संप्रास को पछाड़ दिया। वहीं संप्रास ने 14 ग्रैंडस्लैम खिताब के लिए 52 टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था। संप्रास ने 2002 में अमेरिकी ओपन के रूप में 14वां ग्रैंडस्लैम खिताब जीता था। फाइनल में हमवतन आंद्रे अगासी को हराने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कैरियर को अलविदा कह दिया था।
15 ग्रैंड स्लैम जीत कर फेडरर ने इतिहास रच तो दिया लेकिन आगे ये देखना दिलचस्प होगा की फेडरर का रिकॉर्ड तोड़ने वाला कौन टेनिस होगा ?


रजनीश कुमार
टेनिस एक्सपर्ट

टेनिस के धोनी हैं फेडरर


धोनी
आगे या
फेडरर







टेनिस के दिग्गज रोजर फेडरर नें करियर का 15वां ग्रैंडस्लैम जीतकर इतिहास रच दिया...इसी दिन ....एक और इतिहास रचा गया...भारत ने वेस्टइंडिज़ में वन डे सीरीज़ जीतकर वर्ल्ड कप की हार के कलंक को धो दिया......और इस जीत के सबसे बड़े सूत्रधार बने कप्तान महेंद्र सिंह धोनी .वहीं फेडरर की जीत कई माइनों में अहम थी...वो पिछले साल विंबल्डन में चूक गए थे....लेकिन इस बार पूरे खेल में उन्होने अपना कॉन्सनट्रेशन बनाए रखा ..जैसे .धोनी हर पल ..मैच में अपनी पकड़ कमज़ोर नही होने देते....फेडरर... धोनी की ही तरह आक्रामक होने के बाद भी कभी ये दिखाने की कोशिश नही करते ...कि उन्होने विरोधी को पस्त कर दिया है...या किसी भी प्रकार का अंहकार ...उनसे काफी दूर रहता है...याद करिए ..साल 2007 के उस पल को जब माही ने भारत को ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप में जीत दिलाई थी...मैच के आखिरी रोमांचक पलों में भी धोनी के माथे पर चिंता की एक भी लकीर नही थी...ऐसा ही कुछ फेडरर के साथ भी था...वो भी बस रॉडिक की हर सर्व का बेहतरी से जवाब दे रे थे...धोनी की तरह उन्हे भी पता था..की गलती दूसरे खेमे से होगी.....दरअसल फेडरर ने भी धोनी की तरह कामयाबी की सीढ़ी को बड़ी तेज़ से चढ़ा है...अपने सात साल के करियर में वो 15 ग्रैंड स्लैम जीत चुके हैं...वही धोनी का रिकॉर्ड कम समय में और भी शानदार है....अपने डेब्यू के पांच साल बाद ..धोनी ने हर मिशन इंपॉसिबल को पॉसिबल किया...वर्ल्डकप का ताज़ दिलाया...आईसीसी के नंबर वन प्लेयर बने....आईसीसी के बेस्ट कप्तान भी बने...100 करोंड़ के देश में जहां ..उम्मीदों का पहाड़ हमेशा टीम इंडिया के कप्तान पर होता है...उस ज़िम्मेदारी को धोनी से बेहतर शायद ही किसी ने अंजाम दिया हो..वहीं फेडरर भी नडाल से मिल रही लगातार टक्कर से आलोचनाओं के घेरे में थे....लेकिन विंबल्डन 2009 जीतकर उन्होने साबित कर दिया ..कि टेनिस के कोर्ट पर ...वो भी धोनी जैसे धुरंदर ही है....

रवीश बिष्ट ...( धोनी-आर्मी के संस्थापक)
क्रिएटिड बाय रजनीश कुमार

बुधवार, 1 जुलाई 2009

सपना सच हुआ जब ‘हम लंदन गए ’

Rishabh
ऋषभ शर्मा से खास मुलाकात " रजनीश कुमार के साथ"

“4 साल पहले जब मैं इंडिया टीवी में काम करता था तो उस वक्त मैंने एक सपना देखा कि मैं इंग्लैंड जाउंगा औऱ क्रिकेट के मक्का लार्ड्स में लाइव मैच देखने का आनंद उठाउंगा इसके साथ साथ पीटीसी भी जरूर मारुंगा।“ ये लाइनें कहते हुए लाइव इंडिया के वरिष्ठ खेल संवाददाता ऋषभ शर्मा ने हमें बताया कि लंदन वाकई सपनों का शहर है।"

कहतें है कि किताबें शक पैदा करती है आप जितना पढ़ते है उतनी इच्छाओं औऱ सपनों में जीना शुरू कर देते है। लेकिन कभी-कभी हर ख्वाब हकीकत में बदल जाता है ।हर सपना सच हो जाता है ऐसा ही कुछ हमारे ऋषभ भाई के साथ हुआ।

लाइव इंडिया की ओर ऋषभ शर्मा ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप कवर करने के लिए इंग्लैंड गए। ये लाइव इंडिया के लिए न कि बल्कि ऋषभ शर्मा के लिए ऐतिहासिक मौका था क्योंकि लाइव इंडिया के इतिहास में कोई भी रिपोर्टर विदेश दौरे पर नहीं गया था। हालांकि ऋषभ शर्मा लंदन जाने से पहले काफी मेहनत की. जिसका परिणाम उन्हें मिला औऱ वो लंदन मैच कवर करने के लिए चले गए। हालांकि टीम इंडिया का सफर टूर्नामेंट में जल्द खत्म होने के काऱण भारत में 20-20 वर्ल्ड कप क्रेज नहीं रह गया था। लेकिन फिर भी ऋषभ भाई ने मेहनत करके वहां की साइड एंगल स्टोरिंयां भेज कर इंग्लैंड की सैर हमें दिल्ली में बैठे बिठाए ही करवा दी।
सबसे पहले मैं उन ऐतिहासिक जगहों से आपकी परिचय करवा दूं जहां की यादें समेटे ऋषभ भाई कहते है कि “हम लंदन गए थे”
सबसे पहले रॉबिन हुड की कहानियों की स्टोरी हमने ऑनएअर की
उसके बाद टॉवर ब्रिज का जायजा क्रिकेट के मक्का लार्ड्स का जायजा फिर शरलॉक हॉम्स ऑल्डेस्ट बार इन नॉटिंघम मैडम तुसाद इसके अलावा की कुछ स्टोरियों को भी ऋषभ भाई ने कवर की । इन सभी स्टोरियों को देख कर ऐसा लगता है कि हां ऋषभ भाई लंदन गए थे।

लंदन और ट्वेंटी-20 की यादगार लम्हें समेटे आखिर ऋषभ भाई वापस वतन लौटे तो फिर वही रोजमर्रे की जिंदगी फिर से याद आ गई। खैर लंदन की यादें अभी भी जेहन मे तारो ताजा थी। मेरे जेहन में एक ही सवाल था जो मैं न जाने ऋषभ भाई से कितनी बार पूछ चुका था । जब वो लंदन में थे तब भी मैं फोन पर पूछा करता था कि लार्ड्स में बैठकर मैच देखना और लंदन से पीटीसी भेजना कैसा लगता ? न जाने मैं कितनी बार ये सवाल पूछ चुका था फिर भी उनके जवाबों से जब मेरा दिल नहीं भरा तो मैंने एक दिन फिर पूछा। मगर ऋषभ भाई का वही जवाब “मानों हर सपना जल्दी जल्दी सच हो रहा है और ये लम्हें जाहिर नहीं किए जातें है बल्कि महसूस किए जाते है।“
खैर उनकी बातों को सुनकर ऐसा लगता है कि ऐसे लम्हें जाहिर नहीं बल्कि ये लम्हें एक एहसास की तरह होता है जिन्हें शायद महसूस ही किया जाता हो ।
अपने सवालों का पुलिंदा लिए मैं ऋषभ भाई के सामने हाजिर हो गया ऋषभ भाई भी अपनी लंदन टूर की कहानियों की जरिए मेरे सवालों के जवाब दे रहे थे उन जवाबों में एक बात कॉमन थी कि हम लंदन गए थे औऱ हो भी क्यों न ।
हर स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट का सपना होता है कि वो फॉरेन टूर कवर करे और वो भी खासकर इंग्लैंड ।
मैंने आज किसी के हकीकत को अपनी आंखो के सामने सच होता देखा है । मेरे दिल में एक ही सवाल उठता है कि क्या सच में सपने जब हकीकत का रूप ले लेता है तो बयां करना मुश्किल हो जाता है ?
ऋषभ भाई अपने लंदन यात्रा को हर तरीके से सफल बनाया है चाहे वो प्रोफेसनली हो .या पर्सनली हो ।

जब पर्सनली बात हुई तो मुझे एक बात याद आई कि जब ऋषभ भाई ऑफिस ज्वाइन किया तो बहुत से लोगों ने आकर ऋषभ भाई को हैलो बोला। हैलो बोलने वालों में कुछ ऐसे भी लोग थे जो इससे पहले शायद आज तक ऋषभ भाई को हैलो नही बोला था । खैर ऐसे मौके पर सभी ऐसे व्यवहार करते है कि जैसे कि हम आपके वर्षों से हिमायती रहे हैं।
बहुत से लोग अपने अपने सवालों की बौछार किए जा रहे थे इन्ही सवालों की आंधी में मुझे एक सवाल सुनाई दिया कि “ऋषभ लंदन जाकर गोरी मेम के साथ मस्ती किया या नहीं।“
ऋषभ भाई इन मामलों में साफ छवि के व्यक्ति है उन्होंने इन सवालों को बड़े आसानी के साथ हंसते हुए टाल दिया औऱ कुछ शब्दों में जवाबों के रूप में बोला.. कि यार मैं वहां लाइव इंडिया का काम करने गया था और जब मैं अगली बार पर्सनली विजिट पर जाउंगा तो जरूर ट्राई करुंगा।

लंदन की सड़कों पर खुली बसों में आनंद लेते हुए ऋषभ शर्मा अपनी जिंदगी के बेहतरीन लम्हों में से एक मानते हैं। फिल्मों में तो शायद हमने न जानें कितनी बार ऐसा दृश्य देखा है खासकर मुझे वो रहना है तेरे दिल में फिल्म में आर माधवन बीयर पीते हुए खुली बस में घूमता है।
खैर जब सपना जब हकीकत में बदलता है तो किसी फिल्म का सीन नहीं बल्कि खुद के रोमांच से भऱे पल याद आतें है।
ऐसे बहुत सारे लम्हों को याद करके ऋषभ शर्मा एक ही बात कह रहें हैं औऱ शायद आगे भी कहेंगे कि औऱ कहें भी क्यो न.. "
जब हम लंदन गए थे।"

बुधवार, 24 जून 2009

बचपन का हर सपना सच हुआ है पेस का


भारतीय टेनिस को नई ऊंचाईयों पर पहुंचाने वाले लिएंडर पेस ने 1985 में 12 साल की उम्र में जब चेन्नई की अमृतराज टेनिस अकादमी में कदम रखा तो उनका सपना था, भारत का सर्वश्रेष्ठ टेनिस खिलाड़ी बनना, ओलंपिक पदक जीतना और डेविस कप में सर्वश्रेष्ठ रिकार्ड रखना।

और देखिए कि अपने दमखम और कभी हार न मानने के जज्बे के कारण हाल में फ्रेंच ओपन के रूप में नौवां ग्रैंडस्लैम खिताब जीतने वाले पेस का हर सपना पूरा हुआ। वह निर्विवाद रूप से भारत के सर्वश्रेष्ठ टेनिस खिलाड़ी हैं। उन्होंने 1996 अटलांटा ओलंपिक में एकल का कांस्य पदक जीता और डेविस कप में 84 जीत के साथ वह दुनिया के चोटी के दस खिलाड़ियों में शामिल हैं। हाकी ओलंपियन वेस पेस और भारतीय बास्केटबाल टीम की कप्तान जेनिफर के घर में 17 जून 1973 को गोवा में जन्में और कोलकाता में पले बढ़े लिएंडर ने टेनिस को समर्पित होने से पहले हर खेल में अपने हाथ आजमाए।

पेस ने एक साक्षात्कार में कहा था, 'मैंने प्रत्येक खेल खेला है क्योंकि मैं ओलंपियन परिवार में पैदा हुआ। मैंने हाकी, बास्केटबाल, क्रिकेट, फुटबाल, रग्बी, स्कूबा डाइविंग सभी में हाथ आजमाए हैं।' पेस का नाम लोगों की जुबान 1990 में तब चढ़ा था जब उन्होंने विंबल्डन में जूनियर वर्ग का एकल खिताब जीता था। इसके बाद उन्होंने अमेरिकी ओपन में यही कारनामा दिखाया और एक साल बाद पेशेवर टेनिस खिलाड़ी बने। अपना 36वां जन्मदिन मना रहे पेस ने 16 साल की उम्र से भारत की तरफ से डेविस कप में खेलना शुरू किया।

उन्होंने अब तक भारत की तरफ से डेविस कप में रिकार्ड 115 मैच खेले हैं जिसमें 84 [48 एकल और 36 युगल] में उन्हें जीत मिली जबकि केवल 31 [22 एकल और नौ युगल] में ही उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा अब तक पांच युगल और चार मिश्रित युगल सहित नौ ग्रैंडस्लैम, एक एटीपी एकल खिताब तथा 40 युगल खिताब जीतने वाले पेस हालांकि अपने कैरियर का सबसे यादगार पल उसे मानते हैं जबकि वह अटलांटा में आंद्रे अगासी और सर्गेई बु्रगएरा के साथ पोडियम पर खड़े थे। उन्होंने कहा, 'तब मेरे गले में कांस्य पदक लटक रहा था और मेरे पिता और पूरा परिवार दर्शकों में शामिल थे।'

चावल और रसम के शौकीन पेस को अपने कैरियर में सबसे अधिक दुख एथेंस ओलंपिक 2004 में हुआ था जब वह और भूपति कांस्य पदक के लिए खेले गए मैच में मैच प्वाइंट गंवाकर हार गए थे। अटलांटा ओलंपिक में अपनी उपलब्धि के लिए देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न और पद्मश्री से नवाजे गए पेस ने अपना एकमात्र एटीपी एकल खिताब 1998 में न्यूपोर्ट में जीता था। इसी वर्ष उन्होंने न्यू हैवन में पीट संप्रास को हराकर तहलका मचा दिया था। वैसे डेविस कप में भी उन्होंने वायने फरेरा, गोरान इवानिसेविच, जिरी नोवाक जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को पराजित किया।

पेस अब 36 साल के हो गए हैं। ऐसी उम्र जो किसी भी टेनिस खिलाड़ी के लिए बहुत अधिक मानी जाती है लेकिन हाल में फ्रेंच ओपन में उन्होंने इस तरह का खेल दिखाया जैसे कि वह 25 साल की उम्र में खेला करते थे। उन्होंने लुकास डुलोही के साथ मिलकर युगल का खिताब जीता जो रोलां गैरां की लाल बजरी पर उनका तीसरा खिताब था। पेस ने बाद में कहा, 'यह मेरा तीसरा फ्रेंच ओपन खिताब है और यह विशेष है क्योंकि वहां क्ले कोर्ट है और मैं कोलकाता के घास के मैदान पर टेनिस खेल कर बड़ा हुआ हूं। फ्रेंच ओपन खिताब जीतने के लिए मैंने कड़ी मेहनत की थी।'

इससे पहले पेस ने महेश भूपति के साथ 1999 और 2001 में फ्रेंच ओपन खिताब जीता था। भूपति के साथ उनकी जोड़ी यादगार रही और उन्होंने 1999 में चारों ग्रैंडस्लैम के फाइनल में जगह बनाई तथा विंबल्डन में भी खिताब जीता। पेस ने तब मिश्रित युगल का खिताब भी अपने नाम किया था। पेस यदि इस उम्र में भी दमखम से खेलते हैं तो उनके लिए प्रेरणा का स्रोत कोई और नहीं बल्कि लंबे समय तक टेनिस में बने रहने वाली मार्टिना नवरातिलोवा है जिनके साथ उन्होंने 2003 में आस्ट्रेलियाई ओपन और विंबलडन के मिश्रित युगल खिताब जीते थे। नवरातिलोवा फ्रेंच ओपन फाइनल के दौरान भी उनका हौसला बढ़ाने के लिए दर्शकदीर्घा में मौजूद थी।

एटीपी रैंकिंग में पांचवें नंबर के युगल खिलाड़ी पेस की निगाह अब विंबल्डन पर होगी। उन्हें पांच सेट तक खेलने में मजा आता है और विंबल्डन में युगल मुकाबले पांच सेट तक चलते हैं।

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पाकिस्तान ने पहना टी 20 का ताज


"एक होने का मौका तो मिला"



जोहांसबर्ग में दो साल पहले भारत के हाथों आखिरी ओवर में दिल तोड़ने वाली हार झेलने वाले पाकिस्तान ने क्रिकेट के मक्का ला‌र्ड्स में रविवार को अब्दुल रज्जाक के शुरुआती कहर और शाहिद अफरीदी की नाबाद अर्धशतकीय पारी से श्रीलंका को आठ विकेट से हराकर ट्वंटी 20 विश्व चैंपियन बनने की अपनी मुराद पूरी की।

रज्जाक [20 रन पर तीन विकेट] के शुरुआती कहर से श्रीलंका का स्कोर एक समय चार विकेट पर 32 रन था जिसके बाद कप्तान कुमार संगकारा ने 52 गेंद पर नाबाद 64 रन की पारी खेली और सातवें विकेट के लिए एंजेलो मैथ्यूज [24 गेंद पर 35 रन] के साथ 68 रन की अटूट साझेदारी की। इससे श्रीलंका छह विकेट पर 138 रन के सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचने में सफल रहा। कामरान अकमल [37] से मिली शानदार शुरुआत और फिर अफरीदी [40 गेंद पर 54 रन] के तीखे तेवरों के कारण पाकिस्तान ने हालांकि आसानी से 18.4 ओवर में दो विकेट पर 139 रन बनाकर क्रिकेट के सबसे छोटे प्रारूप का विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।

मैच में पहले ओवर से पाकिस्तान का दबदबा रहा और आखिर तक वह अपने दक्षिण एशियाई प्रतिद्वंद्वी पर हावी रखा। पाकिस्तान के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस साल मार्च में श्रीलंकाई खिलाड़ियों पर आतंकी हमले के बाद वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से वंचित है। पाकिस्तान ने इस बार टूर्नामेंट में अंडरडाग के रूप में शुरुआत की तथा पहले दौर और फिर सुपर 8 में पहला मैच गंवाने के बाद जोरदार वापसी की लेकिन सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका और अब फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ उसने एकतरह से एकतरफा जीत हासिल की। ला‌र्ड्स की बल्लेबाजी के लिए माकूल पिच पर अपेक्षाकृत कम लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तानी बल्लेबाजों ने धैर्य से काम लिया और किसी तरह की जल्दबाजी नहीं दिखाई। अफरीदी जैसे बल्लेबाज ने 40 गेंद खेली तथा अपनी पारी में दो चौके और इतने ही छक्के लगाए। उन्हें शोएब मलिक का अच्छा साथ मिला जिनके साथ उन्होंने 76 रन की अटूट साझेदारी की। मलिक 22 गेंद पर 24 रन बनाकर नाबाद रहे।

श्रीलंका की तरफ से पहले तीन ओवर अच्छे गए लेकिन चौथे ओवर में इसुरु उदाना ने जब 14 रन लुटा दिए तो संगकारा ने तुरंत अपने विश्वसनीय सारथी मुथैया मुरलीधरन को गेंद सौंप दी। उन्होंने दूसरे स्पिनर अजंथा मेंडिस को भी पावरप्ले ही गेंदबाजी के लिए बुलाया जिनका अकमल ने मिडविकेट पर छक्का जड़कर स्वागत किया। पाकिस्तानी विकेटकीपर बल्लेबाज ने मैथ्यूज की गेंद भी छह रन के लिए भेजी लेकिन सनथ जयसूर्या की गेंद भी आगे बढ़कर सीमा रेखा पार पहुंचाने के चक्कर में वह चूक गए और संगकारा ने उन्हें स्टंप आउट करने में कोई गलती नहीं की। अकमल की 28 गेंद की पारी में दो चौके और दो छक्के शामिल हैं।

दूसरे सलामी बल्लेबाज शाहजेब हसन ने मेंडिस पर लगातार दो चौके जमाने के बाद मुरलीधरन को भी सबक सिखाने की आतुरता दिखाई और अगले ओवर में इस आफ स्पिनर की पहली गेंद पर जयसूर्या को कैच देकर पवेलियन लौटे। अफरीदी और मलिक ने इसके बाद रणनीति के साथ बल्लेबाजी की। तूफानी अंदाज में बल्लेबाजी करने वाले अफरीदी ने किसी तरह की जल्दबाजी नहीं दिखाई और केवल ढीली गेंदों को सबक सिखाया जबकि मलिक ने सहयोगी की भूमिका अच्छी तरह से निभाई। अफरीदी ने मुरलीधरन पर मिडविकेट पर छक्का और फिर चौका लगाकर अपने तेवर दिखाए और बीच में कुछ देर तक एक दो रन लेकर स्कोर आगे बढ़ाने के बाद उडाना की गेंद भी छह और चार रन के लिए भेजकर अपना अर्धशतक पूरा किया। मालिंगा की गेंद पर लेग बाई बनते ही पाकिस्तानी खिलाड़ी खुशी में उछलने लगे और एक दूसरे को गले लगाने लगे।

इससे पहले पाकिस्तान का हर क्रिकेट प्रेमी और कप्तान यूनुस खान टॉस गंवाने के बाद जैसा आगाज चाहते थे युवा तेज गेंदबाज आमिर और आधिकारिक क्रिकेट में अपनी दूसरी पारी शुरू कर रहे रज्जाक ने टीम को वैसी ही शुरुआत दिलाई। बेहतरीन फार्म में चल रहे तिलकरत्ने दिलशान पहले ओवर में बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए और खतरनाक सनथ जयसूर्या [17] लय पकड़ते ही ढेर हो गए। यही नहीं पिंच हिटर के तौर पर आए जेहान मुबारक [0] और भरोसेमंद महेला जयवर्धने [1] का बल्ला भी श्रीलंका को धोखा दे गया।

वेस्टइंडीज के खिलाफ सेमीफाइनल में नाबाद 96 रन बनाकर श्रीलंका को अकेले दम पर मजबूत स्कोर तक पहुंचाने वाले दिलशान ने पहले ओवर में ही आमिर की गेंद स्कूप करने की कोशिश की लेकिन उनकी टाइमिंग सही नहीं थी और शार्ट फाइन लेग पर शाहजेब हसन के बढि़या प्रयास से वह कैच में बदल गया। इसके बाद रज्जाक की बारी थी जिन्होंने अपने पहले तीन ओवर में तीन विकेट निकालकर श्रीलंका को गंभीर संकट में डाल दिया। मुबारक ने उनके पहले ओवर में गेंद मिडविकेट के ऊपर से मारने के प्रयास में मिड आफ पर खड़े हसन को आसान कैच दिया।

उनके अगले ओवर में जयसूर्या ने पहली गेंद मिडविकेट पर छह रन के लिए भेजी और अगली गेंद पर चौका जमाया लेकिन आखिर में जीत रज्जाक की हुई। जयसूर्या फिर से पुल करना चाहते थे लेकिन गेंद बल्ले से लगकर विकेट उखाड़ गई। जयवर्धने से ऐसे में धैर्यपूर्ण पारी की अपेक्षा थी लेकिन उन्होंने रज्जाक के तीसरे ओवर में बैक कट करने की कोशिश में स्लिप में मिसबाह उल हक को कैच दे दिया। संगकारा ने एक छोर संभाले रखा और उन्हें कुछ देर के लिए चामरा सिल्वा [14] से सहयोग मिला जिन्हें गुल ने अपने शुरुआती ओवर में पवेलियन की राह दिखाकर लंबी साझेदारी नहीं बनने दी। सिल्वा भी सही टाइमिंग से पुल नहीं कर पाए और मिडविकेट पर कैच दे बैठे। शाहिद अफरीदी ने इसके अगले ओवर में गुगली पर इसुरु उडाना की गिल्लियां बिखेरी। संगकारा ने गुल की गेंद पर मिडविकेट पर चौका जड़कर अपना अर्धशतक पूरा किया जिसके लिए उन्होंने 43 गेंद खेली। मैथ्यूज ने आमिर के अंतिम ओवर में चौका और फिर छक्का जमाया।



BaBa

लाज भी नहीं बचा सकी टीम इंडिया


तू-तू मैं-मैं में लुट गया सम्मान



खिताब की दौड़ से बाहर होने के बाद प्रतिष्ठा बचाने के लिए उतरा भारत चोटी के बल्लेबाजों की एक और असफलता से दक्षिण अफ्रीका के हाथों 12 रन की हार के साथ आईसीसी ट्वंटी 20 विश्व कप के सुपर 8 में सांत्वना जीत दर्ज करने में भी नाकाम रहा।

ट्रेंटब्रिज की स्पिन लेती पिच पर भारतीय स्पिनरों ने कमाल दिखाया लेकिन महेंद्र सिंह धौनी के बल्लेबाज भी स्पिन जाल में फंस गए और इस तरह से पिछले चैंपियन को सुपर आठ में बिना जीत दर्ज किए ही बैरंग स्वदेश लौटना होगा। दक्षिण अफ्रीका की इस जीत के नायक एबी डीविलियर्स और जोहान बोथा रहे। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी के लिए उतरा दक्षिण अफ्रीका पांच विकेट पर 130 रन ही बना पाया। उसकी तरफ से डीविलयर्स ने 51 गेंद पर सात चौकों की मदद से 63 रन बनाकर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया।

गौतम गंभीर [21] और रोहित शर्मा [29] ने पहले विकेट के लिए 48 रन जोड़कर भारत को अच्छी शुरुआत दिलाई लेकिन 21 रन के अंदर पांच विकेट गंवाने से टीम गहरे संकट में फंस गई। युवराज सिंह [25] ने आस बंधाए रखी लेकिन उनके आउट होते ही भारत कम लक्ष्य का बचाव नहीं कर पाया और आठ विकेट पर 118 रन ही बना पाया। बोथा ने 16 रन देकर तीन विकेट लिए।

दक्षिण अफ्रीका इस जीत से ग्रुप ई में पहले नंबर पर रहा और अब वह पहले सेमीफाइनल में पाकिस्तान से भिड़ेगा जबकि दूसरा सेमीफाइनल श्रीलंका और वेस्टइंडीज के बीच खेला जाएगा। भारतीय बल्लेबाजों को भी तेज गेंदबाजों के सामने रन बटोरने में कोई दिक्कत नहीं हुई लेकिन स्पिनरों के जिम्मा संभालते ही वे संकट में पड़ गए। गंभीर आउट होने वाले पहले बल्लेबाज थे जिन्होंने बोथा की गेंद पर जेपी डुमिनी को एक्स्ट्रा कवर पर आसान कैच थमाया। इस आफ स्पिनर ने अपने अगले ओवर में सुरेश रैना [3] को भी पवेलियन की राह दिखाई जो रीलोफ वान डर मार्व के ओवर में मिले जीवनदान का फायदा नहीं उठा पाए। डुमिनी ने रोहित की 28 गेंद की पारी का अंत किया जिन्होंने बैकवर्ड प्वाइंट पर डेल स्टेन को हवा में लहराते कैच का अभ्यास कराया। धौनी से ऐसे में जिम्मेदारी भरी पारी की आस थी लेकिन वह तब रन के लिए दौड़ पड़े जबकि गेंद वाइड होकर विकेटकीपर के हाथों में गई थी जबकि अगले ओवर में वान डर मर्व ने यूसुफ पठान को आसान कैच देने के लिए मजबूर किया। भारत का स्कोर पांच विकेट पर 69 रन था। ग्रीम स्मिथ ने यहां पर तेज गेंदबाज स्टेन को गेंद सौंपकर भारतीयों को राहत पहुंचाई। आठ ओवर तक गेंद सीमा रेखा पार नहीं गई थी लेकिन उनके ओवर में युवराज और हरभजन सिंह ने चौके जमाए। युवराज ने इसके बाद वान डर मर्व पर मैच का पहला छक्का जमाया जबकि रविंदर जडेजा ने उूपर बल्लेबाजी के लिए उतरे हरभजन ने भी मोर्ने मोर्कल की गेंद छह रन के लिए भेजी। भारत को हालांकि जब अंतिम तीन ओवर में 31 रन की दरकार थी तब बोथा ने हरभजन [14] को अपना तीसरा शिकार बनाया जबकि स्टेन ने 19वें ओवर में युवराज और जहीर खान को आउट करके रही सही कसर पूरी कर दी।



भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने कहा कि उनके चोटी के बल्लेबाजों की लचर फार्म के कारण टीम को आईसीसी ट्वंटी 20 विश्व कप सुपर आठ में दक्षिण अफ्रीका के हाथों हार का सामना करना पड़ा।

भारत की मजबूत बल्लेबाजी 131 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 118 रन ही बना पाई और इस तरह से उसे सुपर आठ में लगातार तीसरी हार झेलनी पड़ी। धौनी ने हार के लिए बल्लेबाजों को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा, 'मैं नहीं मानता कि यहां की परिस्थितियां कोई मुद्दा है। इस हार के लिए हमारे कुछ प्रमुख खिलाड़ी, जिनमें मैं भी शामिल हूं, जिम्मेदार हैं।' धौनी ने कहा, 'हम छह मुख्य बल्लेबाजों के साथ खेल रहे थे और सातवां आलराउंडर है। जब इनमें से तीन बल्लेबाज इस तरह के मैच में नहीं चल पाते हैं तो वास्तव में मुश्किल बढ़ जाती है। पूरे टूर्नामेंट में मैं अपने गेंदबाजों के प्रदर्शन से खुश रहा लेकिन बल्लेबाजी में हम अपेक्षानुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाए।'

भारतीय कप्तान ने कहा, 'बल्लेबाजी में वास्तव में हम अपनी क्षमता से नहीं खेले और दुर्भाग्य से पूरे टूर्नामेंट में ऐसा हुआ।' धौनी ने हालांकि टीम के प्रशंसकों से अगले साल के अप्रैल में वेस्टइंडीज में होने वाली चैंपियनशिप में बेहतर प्रदर्शन करने का वादा किया। उन्होंने कहा, 'मुझे आशा है कि नौ महीने बाद जब हम फिर से [ट्वंटी 20 विश्व कप] वापसी करेंगे तो बेहतर तैयारियों के साथ अच्छा प्रदर्शन करेंगे।' टूर्नामेंट में टीम की लगातार हार से धौनी की लोकप्रियता भी कम हुई है और मैच के बाद दर्शकों ने उनकी हूटिंग भी की। उन्होंने इस बारे में कहा, 'हमें इंग्लैंड में अच्छा समर्थन मिलता है लेकिन इसके लिए मैच जीतना जरूरी है, नहीं तो मैच के आखिर में हमारी हूटिंग होगी।'

दक्षिण अफ्रीकी कप्तान ग्रीम स्मिथ ने टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने पर खुशी जताई और जीत का श्रेय अपने गेंदबाजों को दिया। स्मिथ ने कहा, 'यह बहुत अच्छा विकेट नहीं था और इस लिहाज से हमारा स्कोर अच्छा था। इससे हमारे पास मौजूद विकल्पों का पता चलता है। हमारे धीमी गति के गेंदबाजों ने बेहतरीन गेंदबाजी की। उन्होंने आज शानदार भूमिका निभाई और क्षेत्ररक्षकों से उन्हें पूरा सहयोग मिला।' टूर्नामेंट की आगे की संभावना के बारे में स्मिथ ने कहा, 'अब हम प्रत्येक पिच से अच्छी तरह वाकिफ हो गए हैं। हमने जीत की लय पकड़ी हैं और सेमीफाइनल में पाकिस्तान से भिड़ने को लेकर बहुत उत्साहित हैं।'

दक्षिण अफ्रीकी पारी में 63 रन बनाने वाले एबी डीविलियर्स को मैन ऑफ द मैच चुना गया। उन्होंने हालांकि इसे अपनी सर्वश्रेष्ठ पारी मानने से इंकार कर दिया। डीविलियर्स ने कहा, 'मैं नहीं मानता कि यह मेरी सर्वश्रेष्ठ पारी थी। मेरी रणनीति शुरुआती 20 गेंद तक पांव जमाना और फिर खुलकर शॉट खेलना थी। जब अच्छी गेंदबाजी हो रही थी तब एक दो रन लेकर स्कोर बढ़ाना महत्वपूर्ण था। ऐसे में पारी के आखिर में आप लंबे शाट खेल सकते हो।'

BaBa

मंगलवार, 26 मई 2009

अलविदा साउथ अफ्रीका


रंगारग रहा IPL का समापन समारोह

साउथ अफ्रीका में अपने शानदार आगाज़ की ही तरह ... आईपीएळ की विदाई भी शानदार ही रही । जोहॉन्सबर्ग के वॉन्डरर्स मैदान पर फाइनल की जंग के बाद ... देर शाम हुई भव्य क्लोज़िंग सेरेमनी ... जिसमें हॉलीवुड और बॉलीवुड के मिले-जुले ;तड़के के साथ ... देश-भक्ती का रंग भी था।



इंडियन प्रीमियर लीग के अंजाम ने आगाज को भी पिछे छोड़ दिया। आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी की offical speech के साथ शुरू हुई ipl- सीज़न-2 की closing cermony .....जो करीब दो घंटे तक चली। इस दौरान ..न तो जॉहन्सबर्ग में ही कोई हिल सका और न ही टेलिवजन पर इस ceremony को देख रहे करोड़ों फैन्स ;हिल सके होंगे।
दुनिया भर में मशहूर ;अमेकिरन rock star AKON;ने इस भव्य और अदभूत closing cermony की शुरूआत कुछ इस अंदाज़ में
Akon के rocking अंदाज़ के साथ ही इंटरनेशनल पॉप स्टार ENDY GRANT का भी जादू सिरचढ़कर बोला।
लीग भले ही परदेसी हो... लेकिन closing cermony में इंडियन flavour किसी भी इंटरनेशनल स्टार performance से कम नहीं था।

choreographer shyam makdabar और बॉलीवुड की the best beauty कैटरीना कैफ के स्टेज़ पर आती है.. फिर एक बार परदेस में भारत की जय-जय कार गूंज उठी।जय हो गाना और इस जय-जय़ कार के बाद shyam makdavabar ने साउथ अफ्रीका में बंदे मातरम की धुन सजा आईपीएल में देशभक्ती का रंग भर दिया।

साउथ अफ्रीका में भारतीय रंग को लौंहा मनवाने के असली हकदार ललित मोदी भी इस शमां में खुद को नाचने से नहीं रोक सके। Johannesburg के New Wanderers Stadium में आतिशबाज़ियों की इस रंग बिरंगी रोशनी के साथ भले ही आईपील ने साउथ अफ्रीका को कह दिया हो.. लेकिन इस बार आईपीएल ने न सिर्फ साउथ अफ्रीका में बल्कि वर्ल्ड क्रिकेट फैन्स के दिलों में ऐसी छाप छोड़ी है ...जो एक लंबे अर्से तक सबके दिलो-दिमाग पर छाई रहेगी।

स्पोर्ट्स डेस्क
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आईपीएल में चले बूढ़े घोड़े


आईपीएल में OLD ईज GOLD


आईपीएळ के 37 दिनों के इस महासमर में फैन्स को ... क्रिकेट का लगभग हर रंग देखने को मिला। लेकिन खेल के मद्देनज़र आईपीएल सीज़न-2 ने ... क्रिकेट फैन्स को एक बात ज़रूर मानने के लिए मजबूर कर दिया ... कि क्रिकेट का फॉर्मेट भले ही टेस्ट हो ;वन-डे हो ... या ट्वेंटी-20 लेकिन ओल्ड हमेशा गोल्ड होता है।


सीज़न-2 में लगभग हर टीम के लिए ... सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी सीनियर ब्रिगेड के ही रहे जिन्होंने अपने दमदार प्रदर्शन से साबित कर दिया कि शेर भले ही बूढ़ा क्यों ना हो जाए शिकार करना नहीं भूलता।

ऑस्ट्रेलियाई पूर्व दिग्गजों में से मैथ्यू हेडन औऱ एडम गिलक्रिस्ट के साथ शेन वॉर्न ... एक बार फिर आईपीएल-2 में धूम मचाते दिखाई दिये तो ये सोचना मुश्किल हो गया ... कि क्या वाक्यी ये खिलाड़ी बढ़ती उम्र के चलते इंटरनेशल क्रिकेट को अलविदा कह चुके हैं। अपने दमदार SHOTS ... और भरोसमंद खेल के चलते चेन्नई सुपर किंग्स के मैथ्यू हेडन 598 रन बनाकर आईपीएल के पूरे सीज़न किसी भी दूसरे बल्लेबाज़ से ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ रहे।

वहीं एडम गिलक्रिस्ट ने अपने तूफानी अंदाज़ और आसमानी छक्कों से फैन्स को ये सोचने पर मजबूर कर दिया ... कि गिली 39 साल के बूढें हैं या 39 साल के जवान। आईपीएल-2 में गिली बतौर बल्लेबाज़ ही नहीं .. बतौन कप्तान भी सफल रहे ... वो गिलक्रिस्ट की ही कप्तानी का जादू था जिसने सीज़न-1 की सबसे कम़ज़ोर टीम रही डेक्कन चार्जर्स में एक नया विश्वास पैदा कर उसे जीत के ट्रैक पर डाल दिया।

वहीं सीज़न-2 में फिरकी किंग शेन-वॉर्न की गेंदों में भी पुरानी लय औऱ ताज़गी नज़र आई। सीज़न-1 की डिफेंडिग चैंपियन राजस्थान रॉयल्स हालांकि सीज़न-2 में कुछ खास तो नहीं कर सकी ... लेकिन अपनी गेंदों पर वॉर्न ने बल्लेबाज़ों को पैवेलियन की राह दिखाकर पुराने दिन ज़रूर याद दिला दिये। अपने 13 मैचों में 26 की औसत से वॉर्न ने 14 विकेट लेकर ये साबित कर दिया ... आज भी वॉर्न कई इंटरनेश्नल गेंदबाजों से ज्यादा फिट और काबिल हैं।

ऑस्ट्रेलियाई पराक्रम के बाद आपको दिखाते हैं भारतीय सीनियर क्रिकेटर्स का जहां क्लॉलिफाइंग राउंड के शुरूआती दौरे में ही लगभग बाहर हो चुकी बैंगलोर रॉयल चैलेंजर्स को ... पूर्व भारतीय कप्तान अनिल कुंबले अपनी कप्तानी से ना सिर्फ फाइनल तक का रास्ता दिखाया ... बल्कि गेंदबाज़ी में अपने शानदार प्रदर्शन से कई रिकॉर्ड्स भी अपने नाम कर लिये। राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ महज़ 3.1 ओवर में 5 रन देकर ... कुंबले ने 5 विकेट लिये जो आईपीएल इतिहास का दूसरा बेस्ट परफॉर्मेंस बन गया।


वहीं इंटरनेश्नल क्रिकेट में ट्वेंटी-20 फॉर्मेंट से संन्यास से चुके मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने भी ... अपने प्रदर्शन से टी-20 के दीवानों को दिखा दिया ... कि आईपीएळ में मुंबई टीम की कल्पना उनके बिना सोची भी नहीं जा सकती। सीज़न-2 में सचिन की मुंबई इंडियन्स भी नाकाम तो रही लेकिन सचिन का बल्ला लय में ज़रूर दिखा। अपने खेले 14 मैंचों में सचिन ने 2 अर्धशतकों के साथ 33.09 की औसत से 364 रन बनाए .. जिसमें 39 चौकों और 10 छक्कों के साथ मास्टर ब्लास्टर का स्ट्राइक रेट रहा 120.13।
वहीं टीम इंडिया से रूख्सती के बाद सीज़न-2 में कई पूर्व भारतीय खिलाड़ियों ने भी ... अपने प्रदर्शन से फैन्स को पुरानी यादें ताज़ा कर दीं ... ये खिलाड़ी रहे आशीष नेहरा औऱ बालाजी।
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नाम बड़े मगर दर्शन छोटे


IPL नहीं चला महंगे खिलाड़ियों का जादू


आईपीएल सीज़न-2 में हर टीम की ये कोशिश थी कि जीत सिर्फ और सिर्फ उसे ही मिले .... ;इसीलिए टीम के मालिकों ने वर्ल्ड क्रिकेट के कई बड़े खिलाड़ियों को ... मोटी कीमत अदा कर खरीदा ... लेकिन सबसे बदकिस्मती की बात तो ये रही ... कि सीज़न-2 में ज़्यादातर महंगे खिलाड़ी फ्लॉप ही रहे। जिसके बाद फैन्स के साथ-साथ टीम के मालिकों ने भी कहा ... दाम बड़े और दर्शन छोटे।


आईपीएल सीज़न-टू में लगभग तमाम टीमों ने बड़े घोड़ों पर दांव खेले ... लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि उनके ये अरबी घोड़े रेस लगाए बिना ही हार जाएंगे। आप भी देखिये आईपीएल सीज़न-2 के कुछ ऐसे ही फिसड्डी घोड़ों की दास्तान।
सीज़न 2 में सबसे बड़े घोड़े के रूप में सामने आए बैगलोर रॉयल चैलेंजर्स के केविन पीटरसन .... जिन्हें टीम के मालिक विजय माल्या ने करीब साढ़े सात करोड़ रूपये खर्च टीम की कमान सौंपी। सीज़न-2 में पीटरसन को 6 मैचों में खेलने का मौका मिला ... जिसके लिए उन्हें मिला मेहनताना 3 करोड़ रूपयों का ... लेकिन इस दौरान पीटरसन के बल्ले से निकले सिर्फ 93 रन। यानि पीटरसन का हर रन की कीमत रही करीब 3 लाख 23 रुपये ।

वहीं आईपीएळ सीज़न-2 के दूसरा सबसे बड़ा फ्लॉप शो रहा ... चेन्नई सुपर किंग्स के एंड्रयू फ्लिंटॉफ का। फ्लिंटॉफ को भी साढ़े सात करोड़ रूपयों की मोटी बोली में खऱीदा गया था ... लेकिन वो भी खराब फिटनेस के चलते सिर्फ 3 मैचों में ही टीम को अलविदा कह गये। मेहनताना रहा करीब डेढ करोड़ रूपयों का ... जबकि बल्ले से निकले सिर्फ 62 रन। यानि फ्रैडी का हर रन रहा 2 लाख 42 हज़ार ;रूपयों का।

आईपीएळ सीज़न टू में बैंगलोर रॉयल चैलेंजर्स के लिए ... एक और फिसड्डी ;घोड़े रहे ;न्यूज़ीलैंड के जैसी राइडर .... राइडर को खरीदने के लिए माल्या साहब ने खर्चे करीब 75 लाख 54 हज़ार रूपये। लेकिन उनका बल्ला भी रहा शांत ... और 5 मैचों में राइडर के बल्ले से निकले सिर्फ 56 रन। यानि राइडर के हर रन के लिए बैंगलोर की जेब से ढीले हुए करीब ...1 लाख 35 हज़ार रूपये।
अब बात करते हैं कोलकाता नाइट राइडर्स के अरबी घोड़े ... मशरफे मुर्तजा की


बांग्लादेश के लिए इंटरनेश्नल क्रिकेट में कई यादगार पारियां खेलने चुके मुर्तजा पर नाइटराइडर्स का दिल आ गया था। और खरीदा था करीब 2 करोड़ 83 लाख रूपयों में ... लेकिन आईपीएळ में खेलने के लिए मिले अपने इकलौते मैच में मुर्तजा ने ऐसा झटका दिया ... कि नाइटराइडर्स जीता-जिताया मैच हार गये।

हालांकि आईपीएल सीज़न-टू में ऐसे में कई नाम रहे जिनसे उम्मीदें तो सभी को थीं ... लेकिन खुद इन्हीं की टीम मैनेजमेंट ने उनपर भरोसा करना ज़रूरी नहीं समझा। ग्लैन मैक्ग्रा, पॉल कालिंगवुड, काइल मिल्स, टायरन हेंडरसन और फरवीज माहरूफ
जैसे कई बड़े नाम रहे जिन्हें आईपीएळ की टीमों ने या तो एक भी मैच खेलने का मौका नहीं दिया....या फिर कुछ मैचों में ही मौका दिया यानि ये वो खिलाड़ी रहे जिन्होंने मैदान पर कुछ किये बिना ही अपनी जेंबे नोटों से गर्म ज़रूर कर लीं। ज़ाहिर है अब तो आप भी यही कहेंगे ... कि दाम बड़े और दर्शन छोटे।


स्पोर्ट्स डेस्क
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IPL में चीयरगर्ल्स की मस्ती


कम कपड़ों में पूरा मजा...यही है चीयरगर्ल्स का फंडा


बॉलीवुड़ के सितारों की टीमें भले ही आईपीएल में अपना ग्लैमर नहीं बिखेर पाईं हो ... लेकिन टूर्नामेंट के आगाज़ से अंजाम तक एक चीज़ ऐसी थी ... जिसका ग्लैमर हर दिन अपनी ताज़गी बरकरार रखे हुए था। आप पहचान गये होंगे बात हो रही है आईपीएल की चीयरगर्ल्स की ... जिनपर परदेसी लीग में ना तो कपड़ों को लेकर पाबंदी थी ... और ना अदाओं को लेकर।

चीयरगर्ल्स की कातिल अदाओं के क्या कहने.....इंडियन प्रीमियर लीग सीज़न टू में क्रिकेट के बाद....अगर कुछ देखने लायक था...तो वो था इन हसीनाओं का बेबाक अंदाज़....

सीज़न वन में यही वो चीयरगर्ल्स थीं जिनके तंग कपड़ों और भड़कीले अंदाज़ ने .... देश के कई फैन्स को नाराज़ कर दिया था ... नतीजा ये रहा कि बीच टूर्नामेंट ही चीयरगर्ल्स के बदन पर पूरे कपड़े पहना दिये गये।

लेकिन आईपीएळ साउथ अफ्रीका क्या पहुंचा मानो चीयरगर्ल्स के कपड़ों पर लगी पाबंदी और पूरे कपड़े फुर्र हो गये ... और दिखा ऐसा नज़ारा जहां चीयरगर्ल्स के कपड़े पहले से भी छोटे हो चुके थे।
चाहे चौकों-छक्कों की बात हो ... मैच में गिरती विकेटों की ... या फिर आईपीएल सीज़न टू के मुकाबलों के हासिल हुई टीमों को जीत की ... चीयरगर्ल्स ने हर मौके अपने लटके-झटके दिखाकर फैन्स का रोमांच औऱ मज़ा दोगुना कर दिया।
ऐसा नहीं था कि सीज़न-टू में चीयरगर्ल्स का अंदाज़ सिर्फ छोटे कपड़ों की ही वजह बदला-बदला नज़र आय़ा ... हकीकत में आईपीएल-2 के दौरान चीयरिंग का मौका सिर्फ साउथ अफ्रीकी गर्ल्स को ही मिला ... जिनका अनोखा अंदाज़ ... कभी-कभी अश्लील हरकतें बन ... आम क्रिकेट फैन्स को शर्मसार भी कर गया। अब इसे इन चीयरगर्ल्स का आत्मविश्वास कहा जाए ... ;या फिर इनका अनोखा अंदाज़ लेकिन वर्ल्ड क्रिकेट के सुपरस्टार्स की मौजूदगी के बावजूद .. इन चीयरगर्ल्स ने ये तय ज़रूर कर दिया ... कि उनकी मौजूदगी नज़रअंदाज़ ना हो। कुल मिलाकर ... परदेसी बने आईपीएळ सीज़न-टू को हिट बनाने में चीयरगर्ल्स का रोल इतना अहम रहा ... जिसे शायद ही कोई भुला पाए।

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दास्तां-एं-IPL

सफर PL का

IPL परदेसी हुई तो लीग के हिट होने पर कई सवाल थे...लेकिन परदेसी होने के बावजूद भी आईपीएल ने ऐसा हल्ला बोला कि साउथ-अफ्रीका भी भारतीयता के रंग में रंग गया। आईपीएळ सीज़न-टू के 37 दिन .... जिसमें याद रखने के लिए बहुत कुछ था ... मज़ा-मस्ती, जुनून और जज्बे के अलावा ... विवाद, चियरलीडर्स और पैसों की बरसात।

देश में चुनावी महासमर के चलते ;सरकार से सीधी चोट खाने के बाद देसी लीग यानि आईपीएल परदेसी बन गई। लेकिन क्रिकेट का तड़का वो भी मसाला मारकर जब केपटाउन की गलियों से गुज़रा ... तो साउथ अफ्रीका की आबो हवा ..में सिर्फ औऱ सिर्फ आईपीएल का जलवा नज़र आय़ा। ;जिसके बाद ओपनिंग सेरेमनी मे भी ... साउथ अफ्रीका की संस्कृति की झलक देखने को मिली। ढ़ोल नगाडों और जश्न के बीच आईपीएल ;टीमों के कप्तानों ने स्पिरिट ऑफ गेम के लिए साइन भी किए। लीग के शुरआती मैचों में बारिश ;जमकर विलेन बनी ... और आईपीएल के साउथ अफ्रीका शिफ्टिंग पर सवाल भी खड़े होने लगे ... लेकिन जैसे-जैसे आईपीएल का कारवां आगे बढा तो ;मौसम ने भी करवट बदलते हुए अपने कदम थाम लिए।

जिसके बाद देश औऱ दुनिया में परवान चढ़ा ... आईपीएल का नशा। पिछले सीज़न औंधें मुंह गिरने वाली कुछ टीमो का ग्राफ नये सीज़न नई ऊंचाइयां छूता दिखाई दिया ... जबकि विवादों से घिरी नाइटराइडर्स ने इस सीज़न भी ना सुधरने की कसम खाई। टीम ने लगातार मैच गंवाए और फैन्स के साथ-साथ किंग खान को भी निराश किया ... सेमीफाइनल की दौड़ से तो टीम पहले ही बाहर हो चुकी थी ... लेकिन अपने आखिरी लीग मैच में डिफेंडिंग चैंपियन राजस्थान रॉयल्स को हराकर नाइटराइडर्स ने
वॉर्न आर्मी के सेमीफाइनल में पहुंचने के सपने को भी पूर्ण विराम लगा दिया।

भारी भरकम रकम ... और हार्ड हिटर के तमगे के साथ बैंगलोर रॉयल चैलेंजर्स और चेन्नई सुपरकिंग्स में शामिल हुए कैविन पीटरसन औऱ एंड्र्यू फिलंटाफ खुद को मिले मौकों में फ्लॉप रहे यानि वर्ल्ड क्रिकेट के दो बड़े महारथियों को शामिल किया ... लेकिन आईपीएल की पिच पर ... ये दोनों ही बम टांय-टांय फिस्स हो गए। बैंगलोर रॉयल चैलेंजर्स के लिए तो असली सफलता कुंबले को कप्तानी संभालने के बाद ही मिली ... बैंगलोर के लिए युवा ;मनीष पांडे सरप्राइज़ पैकेज़ बनकर सामने आए ... जिन्होने आईपीएल में शतक लगाने वाले पहले भारतीय होने का गौरव हासिल किया। वहीं पूरे टूर्नामेंट में ग्लेन मैक्ग्रा को मैदान पर नही उतारने वाली दिल्ली डेयरडेविल्स सेमीफाइनल की जंग में गिलक्रिस्ट के बल्ले की आंधी मे बह गई। वहीं साउथ अफ्रीका में जाने के बावजूद मुनाफा कमाने वाली ... आईपीएल की गवर्निंग काउंसिंल ने हर मैच की कमाई का कुछ हिस्सा .... साउथ-अफ्रीकी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करने का फैसला लिया। ... अपनी विदाई से पहले आईपीएल ने मिस बॉलीवुड कॉन्टेस्ट आयोजित कराया ... और क्रिकेट के साथ-साथ बॉलीवुड को भी अफ्रीकी फैंस के दिलों पर राज करने का मौका दे दिया।

स्पोर्ट्स डेस्क
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हैदराबाद बना चैंपियन

चैंपियन की दास्तान

आईपीएल में सुपरसंडे का दिन ... एक सुपरमुकाबले का दिन था। और इसी सुपरसंडे के दिन खेला गया ... सीज़न-2 का फाइनल। जहां डेक्कन चार्जर्स ने बैंगलोर रॉयल चैलेंजर्स को 6 रनों से डिस्चार्ज तो किया ही ... साथ ही सीज़न-2 की बादशाहत भी अपने नाम कर ली।

आईपीएल सीज़न -2 के फाइनल में जब सीज़न -1 की दो फिसड्डी टीमें आमने सामने आई....तो कहानी एक नए क्लाइमैक्स की डिमांड कर रही थी........फैंस में भी इस बात को लेकर जबरदसत् क्रेज़ था ...की मैदान पर कौन बाज़ी मारेगा
गिली के किलर्स या फिर जंबो के जांबांज़….
आईपीएल में सुपरचेर्सर्ज के नाम ;से मशहूर बैगलोर ने अपनी ताकत को ध्यान में रखते हुए एक बार फिर ....गेंदबाज़डी करने का फैसला किया.....


पहला ओवर फेंकने कुंबले आए...और भेज़ दिया डेंजर मैन ....गिलक्रिस्ट को डगआउट एऱिया में आराम करने के लिए...गिली अपना खाता भी नही खोल सके......इसके बाद टी सुमन को भी विनय कुमार ने चलता कर चार्जर्स की बैटरी को डिस्चार्ज करने की कोशिश की ......

लेकिन अब मैदान पर वर्ल्ड क्रिकेट को दो हार्ड हिटर्स मौजूद थे जिनके बल्ले पर गेंदबाज़ के लिए NO MERCY लिखा था.......साइमों- गिब्स की जोड़ी ने रॉयल चैलेंजर्स की नींद उड़ा दी ...और एक बार फिर कप्तान कुंबले को गेंद को हाथ में लेना पड़ा ....गेंदबाज़ी के लिहाज़ से ये कुबंले का दिन था...और जंबो ने साइमंड्स और रोहित शर्मा को आउट करके ...डेक्कन की स्कोरिंग पर ब्रेक लगा दिए...हर्शेल गिब्स के नाबाद 53 रनों की मदद से डेक्कन चार्जर्स 143 के स्कोर तक पहुंचे .....लेकिन बैंगलोर की फॉर्म को देखते हुए ....लक्ष्य ज्यादा बड़ा नही था....

कैलिस ..कोहराम मचाने को तैयार थे.....तो मनीष से पुरानी पारी की उम्मीद थी....शुरआती ओवर्स में कैलिस के जलवे से लगा कि बैंगलोर ....15 ओवर में ही आईपीएल ट्राफी को उठाना चाहते हैं....लेकिन नाउम्मीदी के इस दौर में हरमीत सिंह गिलक्रिस्ट को उम्मीद दे गए ...और कैलिस के लौटने से खुल गया ...चैलेंजर्स के किले में सेंध मारने का मौका....लंबे छक्के लहगाने वाले वैनडर मर्व और मनीश पांडे के आउट होने के बाद तो....सेमीफाइनल में जमकर उछलने वाले माल्या भी अब अपनी कुर्सी से छिपक चुके थे....क्योकि असली पिक्चर तो अब शरु हुई थी...यहां टेलर के जबरदस्त हिट्स थे...तो ओझा और हरमीत की थ्रीलिंग गेंदबाज़ी ...मैच किस ओर जाएगा.....किसी को ;पता नही था....चैलेजर्स का चैलेंज बढ़ता जा रहा था....तो चार्जर्स भी हर ;उस तरीके को आज़मा रहे थे ..जिससे जीत के दरवाज़े खुल जाते ....तभी गिली को ट्रम्प कार्ड की याद आई ...और ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट के बैड ब्वाय....चैलेंजर्स के लिए बैडलक बन गए...एक ही ओवर में टेलर और कोहली को आउट करके साइमंड्स ने मैच को डेकक्न की तरफ मोड़ दिया....इसके बाद बाउ चर कब आए और कब गए ..किसी को पती नही चला...आखिरी उम्मीद रॉबिन उथप्पा से थी...कि कभी नहीं तो कम से कम फाइनल में तो उथप्पा कुछ करेंगे .....लेकिन आखिरी ओवर में 15 रनों का लक्ष्य भी चैलेंजर्स के लिए मील का पथ्तर साबित हुआ ......और गिली के शेरो ने दिखा दिया ..की सीज़न-2 बिते ज़माने की बात है...और आईपीएल के असली चैपियन तो वही हैं....

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सितारें जमीं पे

सितारों की टीम का नहीं चला जादू
[आईपीएळ का सीज़न-2 ... बॉलीवुड सितारों की क्रिकेट टीमों के लिए एक बार ;फिर नाकामी लेकर आया क्या शाहरुख खान, क्या प्रीति ज़िंटा और क्या शिल्पा शेट्टी। तीनों ही फिल्मी सितारों को आखिरकार मालूम चल गया कि फिल्मों की ही तरह ... क्रिकेट में भी हर बार जीत नहीं मिलती। ;आलम ये रहा कि जिन सितारों के चेहरों पर ... आईपीएळ की शुरूआत के दौरान मुस्कान थी ... टूर्नामेंट खत्म होते-होते आंसू आ चुके थे।

क्रिकेट के कर्मयुद्ध यानि आईपीएल सीज़न-2 में ... खेल एक बार फिर ग्लैमर पर इक्कीस ही साबित हुआ। और बॉलीवुड सितारों की टीमें एक बार फिर IPL-2 के मोर्चे पर फ्लॉप साबित हुआ ... बाज़ीगर शाहरुख खान की कोलकाता नाइट राइडर्स ने बाज़ी ;तो गंवायी ही ... साथ ही साथ प्रीति ज़िंटा के किंग्स पंजाब भी मेगा लीग के किंग्स बैटल में पानी भरते नज़र आये। उम्मीदें थी पिछले सीज़न की ;डिफैंडिंग चैपियन यानि राजस्थान रॉयल्स से ... लेकिन शिल्पा शेट्टी का इस टीम ;से मिलन ;ऐसा हुआ ... की रॉयल्स का राज ;भी खत्म होते देर ना लगी। टूर्नामेंट के आगाज़ से पहले अपनी टीम की ताकत और दूसरी टीमों की कमज़ोरियों पर बढ़-चढ़कर बहस करने वाले सितारों का मकसद पैसा कमाना भी था। ज़ाहिर है परदेस में खेली जा रही लीग के प्रोमोशन के लिए भी ये सितारे सामने आये ... फिल्मी तड़का लगाकर नये सिरे से लटकों-झटकों भरे वीडियो भी जारी किये। क्रिकेट और बॉलीवुड का कॉकटेल प्रोमोशन ... रिज़ल्ट ऐसा लाया कि तीनों ही टीमों को सपोर्ट करने के लिए स्टेडियम में जमकर फैन्स सपोर्ट पहुंची। लेकिन फैन्स की उम्मीदों के बीच ... अपनी टीम के खिलाड़ियों के खेल में ... ज़रूरत से ज़्यादा दखल खुद इन्हीं की टीमों ;को ले डूबा। टीमें हारने लगीं ... जिसके बाद ;इस ;हार का सिलसिला तोड़ने के लिए ...

टीम के फिल्मी मालिकों ने हर फिल्मी कोशिश की। कोच बुकानन के फैसलों पर इन्तहां भरोसा कर चुके शाहरुख ने ... खिलाड़ियों में भरोसा जगाने के लिए टीम से नाराज़गी का ;नाटक ;भी किया। कहा कि जीतोगे ... तभी साउथ अफ्रीका लौटूंगा ... लेकिन ना टीम की हार का सिलसिला थमा और ना ही शाहरुख साउथ अफ्रीका लौटे। वहीं प्रीति औऱ शिल्पा ने अपनी टीमों के प्रदर्शन को सुधारने के लिए जादू की झप्पियों से लेकर ... भगवान के प्रसाद और प्रार्थनाओं का भी सहारा लिया। लेकिन रील लाइफ से रियल लाइफ क्रिकेट में आए इन सितारों की उम्मीदें ... तब और भी टूट गई जब एक-एक कर ;तीनों ही टीमों को ... आईपीएळ के सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो जाना पड़ा।
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विवादों में KKR


IPL सीज़न-2 में विवादित टीम बनी नाइटराडर्स


IPL सीज़न-1 में नाकाम रही कोलकाता नाइटराइडर्स के लिए ... सीजन-2 भी किसी नाइटमेयर से कम नही रहा। टीम का प्रदर्शन इस बार भी बेहद खराब रहा ... और लगातार विवादों से जुड़ने की वजह से ... नाइटराइडर्स बनी ... आईपीएल सीज़न-2 की किंग OF CONTROVERSIES

हार के जीतने वाले को बाज़ीगर कहते हैं...लेकिन ....विवादों के बाप को ...शाहद नाइटराइडर्स कहा जाता है.....आईपीएल सीज़न -2 की तारीखों का ऐलान क्या हुआ....नाइटराइडर्स के लिए विवादों की राइड भी शुरु हो गई
सबसे पहले कोच बुकानन नें एक ही मैच में चार कप्तानों की अनोखी थ्योरी ऱखकर सबको हैरत में डाल दिया......हालांकि बुकानन के इस बेतुके प्रयोग में टीम के मालिक शाहरुख खान उनके साथ नज़र आए.....शाहरुख पर बुकानन का का जादू इस कदर चढ़ चुका था.....कि किंग खान ने भारत के पूर्न सलामी बल्लेबाज़ गावस्कर को भी चुप रहने की नसीहत दे डाली.....लेकिन ये तो बस शुरआत थी
>नाइटराइडर्स के लिए विवादों की असली पिक्चर शुरु हुई साउथ अफ्रीका में ....अफ्रीका की सरज़मी पर कदम रखते ही....गांगुली की ;कप्तानी से छुटटी कर दी गई...और बुकानन की पहली ;पसंद ब्रैंडन मैक्कुल्म को टीम का नया कप्तान बनाया गया...मैक्कुलम के कप्तान बनते ही...टीम में भारतीय और विदेशी खिलाड़ियों के बीच दरार पैदा हो गई...और जहां.कुछ युवा खिलाड़ी पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के साथ नज़र आए....तो वहीं...मैक्कुलम और बुकानन की जोड़ी को विदेशी खिलाड़ियों का साथ मिला....टीम में बढ़ती इस दरार ने खाई कगा रुप ले लिया...और शुरु हो गया टीम के लगातार हार का सिलसिला.....अपनी टीम की हार से शाहरुख को भी ज़िल्लत झेलनी पड़ी ..और किंग् खान के भारत लौटने पर नाइटराइडर्स को बेचने की खबरों ने ;भी ;ज़ोर पकड़ा...
इसी बीच खुद को नाइटराइडर्स का खिलाड़ी बताने वाले एक ब्लॉग फेक आईपीएल प्लेयर के ज़रिए..टीम की अंदरुनी बातें भी लीक होने लगी.. खिलाड़ियों ;से लैपटॉप छीन लिए गए......और फेक ब्लागर होने के शक पर आकाश चोपड़ा और संजय बांगड़ को भारत वापस भेज दिया गया...वहीं रिएलिटी शो के जरिए चुनी गई चीयरलीडर्स से भी शाहरुख अपना वादा पूरा नही कर सके ..और भारतीय चीयरलीडर्स को भी बैरंग वापस आना पड़ा......टीम में चल रहे जबरदस्त विवादों नें ;तब एक बड़ा रुप ले लिया ...जब पूर्व क्रिकेटर अजय जडेज़ा ने नाटराइडर्स में भारतीय खिलाड़ियों के साथ हो रहे नस्लभेद ;का खुलासा किया ;हालांकि टीम मैनेजमैंट ने इस पूरे मामले पर कुछ भी ;कहने से इंकार कर दिया......लेकिन विवादों के दलदल में फंसी नाइटराइडर्स आईपीएल सीज़न -2 से बाहर होने वाली पहली टीम बनी


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IPL सीज़न-2 में विवाद




विवादों का बाप आईपीएल सीज़न-2

कहने के लिए तो आईपीएल सीज़न-2 का आयोजन भारत से साउथ अफ्रीका में शिफ्ट होना भी किसी विवाद से कम नहीं था ... लेकिन क्रिकेट के कर्मयुद्ध में इसके अलावा भी विवादों की लंबी फेहरिस्त देखने को मिली ... जहां खिलाड़ियों के साथ-साथ, टीम के मालिक और आईपीएल के आका भी विवादों के साय़े से खुद को नहीं बचा सके।
मंदी के दौर में परदेसी हुई आईपीएळ का पहला विवाद रहा COST CUTTING के नाम पर खिलाड़ियों की छुट्टी।; राजस्थान रॉयल्स के कप्तान और कोच शेन वॉर्न ने मोहम्मद कैफ समेत 7 घरेलू;भारतीय खिलाड़ियों को ... फटाफट क्रिकेट में;अनफिट बताकर टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही वापसी का टिकट थमा दिया।

खिलाड़ियों के साथ बेरुखी दिखाने को लेकर ... चर्चाओं में तो वॉर्न पहले से ही थे ... लेकिन एक बार फिर वॉर्न का नाम विवाद में तब उठ गया ... जब जेंटलमैन गेम कहे जाने वाले क्रिकेट में वॉर्न अपनी स्पोर्ट्स मैन स्पिरिट भूल फैन्स से बीयर मांगकर पीते देखे गये
शराब और नशे से ही जुड़ा कुछ ऐसा ही विवाद टीम के मालिकों को भी चर्चाओं में ले आया ... जहां कोलकाता नाइट राइडर्स टीम के मालिक शाहरुख खान अपनी टीम की हार को भुलाने के गम में ... अपनी सिगरेट छोड़ने की कसम भूल गये। आईपीएळ मैच के दौरान शाहरुख को ... एक बार फिर कैमरे के सामने सिगरेट पीते देखा गया।

हालांकि किंग्स इलेवन पंजाब के को-ओनर नेस वाडिया तो विवाद के नाम पर शाहरुख को भी एक कदम पीछे छोड़ गये ... नेस वाडिया और उनके दोस्त की ... मैच को दौरान तब लात-घूंसों से पिटाई हो गई ... जब वो वीआईपी बॉक्स में शराब पीकर एक महिला से छेड़छाड़ करते देखे गये।

वहीं आईपीएळ की कई टीमें इस बात को लेकर विवादों में रहीं कि उन्होंने कई दिग्गज खिलाड़ियों को अहम मैचों के दौरान भी प्लेयिंग इलेवन में खेलने का मौका नहीं दिया। दिल्ली डेयरडेविल्स के कप्तान वीरेंद्र सहवाग ने पूरे सीज़न ग्लेन मैक्ग्रा जैसे दिग्गज़ गेंदबाज़ को बेंच पर बिठाए रखा। वहीं इंग्लैंड के पॉल कॉलिंगवुड और ओवेस शाह को भी खेलने का मौका नहीं दिया गया। वहीं चेन्नई सुपर किंग्स के लिए मखाया एंटिनी, डैक्कन चार्जर्स से स्कॉट स्टाइरिस, वीवीएस लक्ष्मण जैसे खिलाड़ी भी खेलने के लिए बैंच पर इंतज़ार ही करते रह गये।

पैसा कमाने के लिए मैच के 10 ओवर के बाद लिया जाने वाला strategic-break भी विवादों में रहा ... जहां सचिन तेंदुलकर, ब्रैंडन मैक्कुलम और कैविन पीटरसन समेत कई टीमों के कप्तानों ने ब्रेक से टीम की लय बिगड़ने जैसे आरोप लगाये।

साउथ अफ्रीका में चल रही लीग के विवादों का बवंडर भारत भी पहुंचा जब केंद्रीय खेल मंत्री ms-gill ने ... आईपीएल के दौरान कमिश्नर ललित मोदी के sms game को सट्टेबाजी से जोड़ दिया। गिल के इस बयान के बाद एक बार फिर बीसीसीआई ने घुटने टेके और sms game बंद कर दिया।

हालांकि आईपीएल सीज़न-2 के दौरान एक विवाद ऐसा भी रहा जिसे बिना जांच ही बीसीसीआई ने मानने से इंकार कर दिया। इस बार मैच फिक्सिंग में शामिल रहे पूर्व साउथ अफ्रीकी कप्तान हैंसी कॉन्जी के साथी ... हामिद कासिम आईपीएळ मैच के दौरान स्टेडियम में बैठे देखे गये ... मैचों पर फिक्सिंग की काली छाया की खबरें भी उड़ी ... जिसके बाद आईसीसी ने भी चिंता जताई ... लेकिन अपने फैसले पर काबिज़ बीसीसीआई ने icc की anti- corruption unit की भी सेवाएं लेने से मना कर दिया।


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शनिवार, 25 अप्रैल 2009

प्रीति का टोटका..ले ले भई...जीत तो मिलेगी ही.

प्रीति का टोटका ले ले भई...

सुपर संडे को सीज़न टू के 15वें मुकाबले में भिड़ंत होने वाली है बॉलीवुड की दो बालाओं प्रीति ज़िन्टा और शिल्पा शेट्टी के बीच। प्रीति के पास है टीम के साथ टोटकों की ताकत ..तो नाटराइडर्स को हराने के बाद ..शिल्पा के सूरमाओं ने भी कमर कस ली है....सुपर संडे को सीज़न टू के 15वें मुकाबले में भिड़ंत होने वाली है बॉलीवुड की दो बालाओं प्रीति ज़िन्टा और शिल्पा शेट्टी के बीच। प्रीति के पास है टीम के साथ टोटकों की ताकत ..तो नाटराइडर्स को हराने के बाद ..शिल्पा के सूरमाओं ने भी कमर कस ली है...


प्रीती कह रही हैं शिल्पा से कि पंगा मत लेना....नहीं तो महंगा पड़ जाएगा......(..पंगा ना ले..)..ज़ाहिर है डिंपल गर्ल प्रीति ज़िन्टा बॉलीवूड की ही तर्ज पर क्रिकेट के मैदान में भी शिल्पा को पटखनी देने के लिए तैयार खड़ी हैं......और भला वो मात दे भी क्यों ना....भई प्रीति इन दिनों जादू टोना जो कर रही हैं.....यकीन नहीं आता...तो याद कीजिए बैंग्लोर रॉयल चैलेंजर्स के खिलाफ किंग्स इलेवन का पिछला मुकाबला.......

पहले दो मुकाबलों में हार के बाद..तीसरे मुकाबले में प्रीति ने अपनी टीम को ऐसा प्रसाद खिलाया....जिसका स्वाद भी मीठा था और मैच का रिज़ल्ट भी.....प्रीति के टोटके का असर ऐसा था कि किंग्स इलेवन ने बैंग्लोर रॉयल चैलेंजर्स को रौंद डाला.....भई इसे कहते हैं टोटके का प्रकोप......[पहले दो मुकाबलों में हार के बाद..तीसरे मुकाबले में प्रीति ने अपनी टीम को ऐसा प्रसाद खिलाया....जिसका स्वाद भी मीठा था
और मैच का रिज़ल्ट भी.....प्रीति के टोटके का असर ऐसा था कि किंग्स इलेवन ने बैंग्लोर रॉयल चैलेंजर्स को रौंद डाला.....भई इसे कहते हैं टोटके का प्रकोप.....


अब इस टोटके से बचने के लिए शिल्पा को लगानी होगी कोई जुगत......लेकिन क्या करेंगी वो....क्या शिल्पा भी अपने राजस्थानी रॉयल्स के लिए किसी मंदिर का प्रसाद लेकर आएंगी....ताकि वो कर सकें सामना प्रीति के प्रसाद का सामना....लगता तो कुछ ऐसा ही है....क्योंकि अगर शिल्पा ने कोई जुगाड़ नहीं किया......तो प्रीति का प्रसाद उन्हें और उनकी टीम को महंगा पड़ सकता है।
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राजस्थान ने किया वापसी का वादा


राजस्थान रॉयल्स का वादा


आईपीएल सीज़न-1 की Defending चैंपियन राजस्थान रॉयल्स को ... अभी से चूका मानना लीग की बाकी टीमों के लिए बड़ा खतरा हो सकता है। दरअसल आंकड़ों की नज़र में शेनवॉर्न की कप्तानी में राजस्थान रॉयल्स ने सीज़न-1 में भी खराब शुरूआत की थी .. लेकिन एक बार जो राजस्थान ने लय पकड़ी तो फिर टूर्नामेंट का खिताब जीतकर ही दम लिया।

आईपीएळ सीज़न-1 का वो मैच जब दिल्ली के फिरोज़शाह कोटला स्टेडियम में राजस्थान रॉयल्स को दिल्ली डेयरडेविल्स ने एक तरफा मुकाबले में हराया था। लेकिन इस मैच में राजस्थान को हार क्या मिली ... मानो कोई शेर अपनी नींद से जाग गया हो। बस फिर क्या था ... वॉर्न की कप्तानी में राजस्थान के रॉयल्स ने जीत की ऐसी इबारत लिखी कि ... टूर्नामेंट में सिर्फ एक ही विजेता नज़र आ रहा था। शायद सीज़न-2 में भी राजस्थान रॉयल्स को कुछ ऐसे ही झटके का इंतज़ार था ... बैंगलोर रॉयल चैलेंजर्स के खिलाफ सीज़न-2 में अपना पहला मैच गंवाने वाली राजस्थान को ... हालांकि दूसरे मैच में बारिश के चलते ... मुंबई इंडियंस के साथ खेलने का मौका नहीं मिला ... लेकिन तीसरे मैच में कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ मैच जीतकर वॉर्न के वीरों ने दिखा दिया ... कि उन्हें पुरानी गल्तियां दोहराने की आदत नहीं पड़ी है। नाइट राइडर्स के खिलाफ टाई तक खिंचे मैच के बाद ... सुपर ओवर में वो रॉयल्स ही थे जिन्होंने मैच में विजयश्री हासिल की। एक तरफ ... कप्तान वॉर्न को साउथ अफ्रीकी पिचों का मिजाज़ समझ आने लगा है ... तो दूसरी ओर टीम के बल्लेबाज़ भी नई लय पकड़ते दिखाई दे रहे हैं। ज़ाहिर है टीम के फैन्स ... ये उम्मीद कर सकते हैं कि आईपीएल सीज़न-2 के मिशन साउथ अफ्रीका में रॉयल्स के रथ को रोकना आसान नहीं होगा।
दिल्ली के फिरोज़शाह कोटला स्टेडियम में राजस्थान रॉयल्स को दिल्ली डेयरडेविल्स ने एक तरफा मुकाबले में हराया था। लेकिन इस मैच में राजस्थान को हार क्या मिली ... मानो कोई शेर अपनी नींद से जाग गया हो। बस फिर क्या था ... वॉर्न की कप्तानी में राजस्थान के रॉयल्स ने जीत की ऐसी इबारत लिखी कि ... टूर्नामेंट में सिर्फ एक ही विजेता नज़र आ रहा था। शायद सीज़न-2 में भी राजस्थान रॉयल्स को कुछ ऐसे ही झटके का इंतज़ार था ... बैंगलोर रॉयल चैलेंजर्स के खिलाफ सीज़न-2 में अपना पहला मैच गंवाने वाली राजस्थान को ... हालांकि दूसरे मैच में बारिश के चलते ... मुंबई इंडियंस के साथ खेलने का मौका नहीं मिला ... लेकिन तीसरे मैच में कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ मैच जीतकर वॉर्न के वीरों ने दिखा दिया ... कि उन्हें पुरानी गल्तियां दोहराने की आदत नहीं पड़ी है। नाइट राइडर्स के खिलाफ टाई तक खिंचे मैच के बाद ... सुपर ओवर में वो रॉयल्स ही थे जिन्होंने मैच में विजयश्री हासिल की। एक तरफ ... कप्तान वॉर्न को साउथ अफ्रीकी पिचों का मिजाज़ समझ आने लगा है ... तो दूसरी ओर टीम के बल्लेबाज़ भी नई लय पकड़ते दिखाई दे रहे हैं। ज़ाहिर है टीम के फैन्स ... ये उम्मीद कर सकते हैं कि आईपीएल सीज़न-2 के मिशन साउथ अफ्रीका में रॉयल्स के रथ को रोकना आसान नहीं होगा।

Sports Desk
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