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खेल से खेल तक

रविवार, 24 मार्च 2013

आज सचिन का दिन है.....क्या ये यादगार विदाई थी ?


टीम इंडिया ने तो सचिन की विदाई को यादगार बना दिया... लेकिन जिस तरह से दिल्ली टेस्ट और पूरी सीरीज़ में सचिन ने औसत प्रदर्शन दिखाया ... वो जरूर फैंस को निराश कर गया...खासतौर पर दिल्ली टेस्ट की दोनों पारियों में जिस तरह से सचिन आउट हुए... वो ये दिखाता है कि अब सचिन पर उनकी उम्र हावी होने लगी है। क्रिकेट फैंस की हज़ारों उम्मीदों के बीच एक बार फिर सचिन दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में उतरे... उम्मीद था कि जो कसर... जो कसक ...पहली पारी में अधूरी रह गई थी... उसको टीम इंडिया का ये भगवान दूसरी पारी में जरूर जीत के साथ पूरा करेगा... क्योंकि जिस वक्त सचिन तेंदुलकर विकेट पर आए थे... उस वक्त टीम इंडिया जीत से महज़ 32 रन दूर थी... सबको लगा कि यहां से सचिन तेंदुलकर टीम इंडिया को जीत दिलाकर ही लौटेंगे... लेकिन इसे सचिन की किस्मत कहें... या फिर बढ़ती उम्र का तकाजा ... मास्टर ब्लास्टर चाहकर भी फैंस की इस ख्वाहिश पूरी नहीं कर सके... अभी सचिन विकेट पर खड़े ही हुए थे कि नाथन लियोन की एक गेंद ने सचिन को अपने आकिरी टेस्ट में एक बार फिर सस्ते में लौटने पर मजबूर कर दिया... सचिन दूसरी पारी में भी महज़ 1 रन पर आउट हो गए... इसे इत्तेफाक कहें... या फिर सचिन की बदकिस्मती ... लेकिन हकीकत यही रही कि सचिन कोटला के मैदान में मौजूदा हज़ारों फैंस की उम्मीदों को तोड़कर मायूस होकर पवेलियन लौट गए... वैसे ये पहला मौका नहीं था... जब सचिन के बल्ले ने खामोशी इख्तियार की थी...बल्कि चेन्नई टेस्ट को छोड़ दिया जाए... तो सीरीज़ में ज्यादातर मौकों पर मास्टर के बल्ले ने मायूसी ही दिखाई... और यही वजह रही कि सीरीज़ में जहां चेतेश्वर पुजारा... और मुरली विजय जैसे बल्लेबाज़ रनों का अंबार लगा गए ...वहां सचिन 200 रनों का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके...   सचिन ने 4 टेस्ट मैचों की 7 पारियों में 32.00 की औसत से सिर्फ 192 रन ही बनाए .. जिसमें चेन्नई टेस्ट की 81 रनों की पारी भी शामिल रही... यानि चेन्नई की पारी को छोड़ दिया जाए... तो सचिन के बल्ले से बाकी 6 पारियों में सिर्फ 111 रन ही निकले...   बहरहाल ये बहुत मुमकिन है कि सचिन को अब भारत में खेलने को नहीं मिले... ऐसे में अगर मास्टर ब्लास्टर घेरलू सरज़मीं पर बल्ले से ब्लास्ट दिखाते ...तो ये सीरीज़ टीम इंडिया के साथ साथ ... सचिन के लिए भी ऐतिहासिक हो सकती थी। लेखक रजनीश कुमार

रवींद्र जडेजा ने रचा इतिहास...सबसे कामयाब ऑलराउंडर


दिल्ली टेस्ट में टीम इंडिया को जीत दिलाने में रवींद्र जडेजा ने भी अहम रोल अदा किया... कोटला में वो जडेजा की ही फिरकी का कमाल था कि ऑस्ट्रेलियाई टीम दूसरी पारी में 164 रनों पर ढेर हो गई... जडेजा ने पूरी सीरीज़ में 24 विकेट झटके।   टीम इंडिया को मिला फिरकी का नया फनकार...सीरीज़ का सबसे बड़ा सरताज...रवींद्र जडेजा ने खुद को साबित किया सबसे बड़ा जांबाज़.. जी हां...कंगारूओं के खिलाफ सीरीज़ में वो रवींद्र जडेजा ही रहे जिन्होनें गेंद से ऐसा जलवा बिखेरा...जिसने फैंस का दिल जीत लिया... कोटला टेस्ट के चौथे 272 रनों पर सिमटने के बाद...कंगारूओं ने पिच के पेंच को समझते हुए...तीखे तेवरों के साथ वॉर्नर के साथ मैक्सवेल को मारममार मचाने के लिए मैदान पर उतारा.. कंगारूओं ने तेज़ी से 15 रन भी जोड़ लिए...जिसके बाद कप्तान ने जडेजा ने हाथों में गेंद थमा दी...और फिर क्या था...फिरकी के इस नए फनकार ने कंगारूओं को अपनी फिरकी में फंसाना शुरु कर दिया...पहले मैक्सवेल और फिर वॉर्नर के वार को थाम...रवींद्र जडेजा ने जीत की उम्मीदों को परवान चढ़ाना शुरु कर दिया...लेकिन कोटला में कड़ी चुनौती देने की कसम खा चुके कंगारू फिर भी प्रहार करने से बाज़ नहीं आए...और कोटला की कंरट देती पिच पर...लंच तक कंगारू टीम ने 5 विकेट खोकर 89 रन जोड़ लिए.. लेकिन लंच के बाद जैसे ही जडेजा ने अपने पहले ओवर के लिए गेंद थामी...कंगारूओं को काम तमाम होना शुरु हो गया....पहली गेंद पर क्रीज़ पर जमे एड कोवॉन...और जडेजा की अगली ही डिलिवरी मिचेल जॉनसन की गिल्लियां ले उड़ी...   हालाकि इसके बाद जडेजा टेस्ट करियर की पहली हैट्रिक से चूक गए...लेकिन अपने करियर में उन्होनें पहली बार 5 विकेट हासिल करने का कारनामा कर दिखाया...ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 4 टेस्ट मैचों में रवींद्र जडेजा 24 विकेट हासिल कर अश्विन के बाद दूसरे सबसे ज्यादा सफल गेंदबाज़ रहे   ज़ाहिर है...कंगारूओं के खिलाफ रवींद्र जडेजा फिरकी के वो फनकार रहे...जिनके जलवे ने ना सिर्फ टीम इंडिया की सीरीज़ जीत में अहम भूमिका निभाई...बल्कि इस सीरीज़ से जडेजा ने खुद को टेस्ट टीम के लिए पूरी तरह से फिट भी साबित कर दिया।  लेखक रजनीश कुमार  

आर. अश्विन बने मैन ऑफ द सीरीज


ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक जीत हासिल करने में भारतीय स्पिनर्स का भी अहर रोल रहा... खासतौर पर आर अश्विन की फिरकी कंगारुओं के लिए किसी काल से कम साबित नहीं हुई... अश्विन ने सीरीज़ में सबसे ज्यादा 29 विकेट हासिल किए... और मैन ऑफ द सीरीज़ भी बने।     ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज़ में चली ये टीम इंडिया के फिरकी के फनकार...यानि आर.अश्विन की आंधी ही थी...जिसने पूरी सीरीज़ के दौरान कंगारूओं की कमर तोड़े रखी...पहले घमासान से लेकर आखिरी मुकाबले तक अश्विन की मार से कंगारू थर्राते ही नज़र आए... ज़रा इन आंकड़ों पर नजर डालिए सीरीज़ के पहले यानि चेन्नई टेस्ट में आर.अश्विन ने कुल 12 कंगारूओं का शिकार किया...हैदराबाद में अश्विन ने 6 विकेट झटके...और मोहाली में फिरकी के इस उस्ताद को 4 विकेट हासिल हुए...और कोटला में तो कंगारूओं पर अश्विन सबसे बड़ी आफत बन कर टूटे...सीरीज़ के आखिरी टेस्ट में अश्विन ने 7 विकेट झटक...सीरीज़ में अपनी विकेटों की संख्या...29 तक पहुंचा दी...     कंगारूओं के खिलाफ फिरकी के उस्ताद..यानि आर.अश्विन के आंतक की यही वो कहानी रही...जिसने बल्लेबाज़ों के बोलबाले के बीच...खुद की ऐसी कहानी लिखी...जिसकी वजह से उन्हें इस ऐतिहासिक सीरीज़ के बीच मैन ऑफ द सीरीज़ के खिताब से नवाज़ा गया... ज़ाहिर है...कंगारूओं के खिलाफ चेन्नई से शुरु हुए आर.अश्विन के सफर ने... दिल्ली तक आते-आते भारतीय स्पिन के इतिहास में वो इम्तिहान पास किया...जिसके बाद ये कहा जा सकता है...कि भारतीय क्रिकेट में फिरकी के फनकार रहे कुंबले और हरभजन सिंह जैसे दिग्गजों की विरासत सही हाथों में है...जिसकी सबसे बड़ा उदहारण...आर.अश्विन की उड़ान के रुप में दुनिया के सामने है।    लेखक रजनीश कुमार

क्या खत्म हो सचिन तेंदुलकर का टेस्ट करियर ?


सचिन की उम्र और घरेलू सरज़मीं पर टीम इंडिया की अगली टेस्ट सीरीज़ को देखकर ये माना जा रहा है कि सचिन भारत में अपना आखिरी मैच खेल रहे हैं... लेकिन अगर बीसीसीआई ने चाहा तो फिर मास्टर ब्लास्टर को घरेलू सरज़मीं पर खेलने का एक और मौका मिल सकता है। टीम इंडिया भले ही कोटला की किंग बनती नज़र आ रही हो...भले धोनी के धुरंधर इस टेस्ट को क्लीन स्वीप के साथ सचिन के लिए यादगार बनाने की कोशिशों में जुटे हों... लेकिन बावजूद इसके मुमकिन है ... ये टेस्ट भारतीय सरज़मी पर सचिन के टेस्ट करियर का आखिरी टेस्ट ना हो ... मुमकिन है कि घरेलू फैंस को एक बार फिर भारतीय पिचों पर सचिन के दीदार हो जाए... सचिन क्रीज़ पर एक बार बल्ला थामे नज़र आए... हालांकि इसकी संभावना लगभग ना के बराबर हैं... लेकिन अगर BCCI ने चहा और श्रीलंका बोर्ड ने उनकी इस ख्वाहिश को हरी झंडी दे दी तो सचिन का भारतीय सरज़मीं  पर कम से कम एक दफे और संग्राम दिख सकता है ....    दरअसल ICC की FPC के मुताबिक टीम इंडिया को मौजूदा सीरीज़ के बाद घरेलू सरज़मीं पर अपनी अगली सीरीज़ अक्टूबर 2014 में खेलनी है ...      तब तक सचिन के टेस्ट क्रिकेट में बने रहने की उम्मीद ना के बराबर ही है ... लिहाजा सचिन की विदाई को यादगार बनाने  इरादे से ...   BCCI टीम इंडिया के नवंबर में होने वाले अफ्रीकी दौरे से पहले सितंबर-अक्टूबर के महीने में श्रीलंका के साथ दो मैचों की सीरीज़ का आयोजन कर सकती है ...    और अगर ऐसा हुआ तो कुछ हद तक मुमकिन भी है कि भारतीय फैंस... मास्टर के दिलकश शॉट्स का नजारा भारतीय सरज़मी पर एक बार फिर देख सकें। लेखक रजनीश कुमार

क्या धोनी ने दी सचिन को शानदार विदाई ?


दिल्ली टेस्ट की पहली पारी में जब सचिन तेंदुलकर 32 रन और दूसरी पारी में 1 रन पर आउट हुए तो लगा कि कहीं भारत में सचिन का आखिरी मैच फीका ना रह जाए... लेकिन टीम इंडिया ने सचिन की इस विदाई को फीका नहीं होने दिया... दिल्ली में जीत का चौका लगाकर धोनी ब्रिगेड ने साबित कर दिया कि सचिन भले ही बल्ले से नाकाम रहे हों... लेकिन उनकी विदाई शानदार ही होगी।     सचिन का बल्ला ना चला ..तो ना सही ...सचिन दूसरी पारी में भी 1 रन के स्कोर पर आउट हुए ...तो कोई नहीं ... लेकिन धोनी के बल्ले से निकला जीत का ये चौका ऐलान है अपने उस सरताज़ के लिए जिसने 24 सालों तक अपने फैंस को जश्न मनाने के ना जाने कितने ही मौके दिए....RELIEF ...ना जाने कितने ही मौकों पर भारतीय क्रिकेट में नई जान फूंकी ...RELIEF ... और शायदा इनको ही देख ... ना जाने ऐसे कितने ही युवाओं ने क्रिकेट को अपनी ज़िदगी बनाया...relief ...लेकिन जब बारी आई ... सचिन को उन्हीं के अंदाज़ में सज़दा करने की ...तो माही ने भी अपने मतवालों के साथ मिलकर 4-0 की जीत के साथ सचिन को विदाई देने में कोई कसर नहीं छोड़ी... क्योंकि खुद टीम इंडिया का कप्तान भी ये अच्छी तरह समझ चुके थे कि अब शायद ही उनकी सरपस्ती में सचिन अगली दफे... अपनी घरेलू सरज़मनी पर खेलते दिखाई दें..वो भी तब जब भारत में अगली सीरीज़ अक्टूबर 2014 में होगी ... जहां सचिन के खेलने की संभावना अब लगभग ना के बराबर ही है... जिसे मास्टर के भावनात्मक पलों के देखकर आसानी से समझा जा सकता है ...Relief ...हालांकि विदाई को शानदार बनाने की शुरूआत तो माही ने चेन्नई टेस्ट से ही कर दी ती ...जहां दोहरा शतक लगा कंगारुओं को पूरे तरह नकार दिया ...इसके बाद...हैदराबाद और मोहाली में भी वही जो सचिन की सानदार विदाई के लिए बेहद ज़रूरी था ...RELIEF .... फिर टीम कोटला पहुंची को तमाम उतार चढ़ाव के बाद  दिन... भारतीय सरज़मी पर सचिन के आखिरी मुकाबले का था तो ... जडेजा दम भरा ...और इन 5 विकेटों के साथ जीत तय़ कर दी ... बारी बल्लेबाज़ी की आई तो माही ने पुजारा के साथ मिलकर... विजय की ऐसी उदघोष्णा की ...कि 4-0 की इतिहासिक जीत के साथ कंगारुओं के गुरूर को कुचलते हुए ऐलान कर दिया कि ..सचिन तुझे सलाम ।   लेखक रजनीश कुमार

ले लिया बदला...धोनी ब्रिगेड की यादगार जीत


कोटला में मिली जीत सिर्फ ऐतिहासिक नहीं है... बल्कि ये बदला है... उन ज़ख्मों का ... जो धोनी ब्रिगेड को 15 महीने पहले कंगारुओं ने ही दिए थे... लेकिन देर से सही ... टीम इंडिया ने दिखा दिया कि उन्हें हार का बदला लेना ना सिर्फ आता है... बल्कि सूद के साथ वसूलना भी आता है।      ज़ख्म क्या होते हैं...ये कोई टीम इंडिया के पूछे ... जो ऑस्ट्रेलिया ने उसे अपने घर में दिए थे ... लेकिन जख्मों को पाला कैसे जाता ये भी माही के मतवालों से बेहतर भला कौन बता सकता है ... तभी तो उनका हिसाब भी ठीक उसी अंदाज़ में चुकता किया गया जैसा कि ऑस्ट्रेलिया ने किया था .... बदले हर वो किस्त के साथ जख्मों पर मरहम हू ब ही उसी अंदाज़ में लगाया गया जिस अंदाज़ में कंगारुओं ने दिए थे ... RELIEF ...   बदले की पहली किस्त   ऑस्ट्रेलिया गए तो ..पहले मुकाबले यानी मेलबर्न टेस्ट में कंगारुओं ने टीम इंडिया को 122 रनों से हराया ...तो टीम इंडिया ने मेहमानों को चेन्नई टेस्ट में 8 विकेट से चित बदले की पहली किस्त वसूल कर ली   बदले ही दूसरी किस्त   मौका सिडनी टेस्ट का आया तो टीम इंडिया को पारी और 68 रनों से हार का सामना करना पड़ा ... तो दूसरी किस्त के तौर पर टीम इंडिया ने हैदराबाद टेस्ट में कंगारुओं की किस्मत में पारी और 135 रनों से ऐसी हार लिखी कि ऑस्ट्रेलियाई मीडिया...ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की मौत का ऐलान करने को भी मज़बूर हो गई   बदले की तीसरी किस्त   ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर टीम इंडिया ने तीसरा टेस्ट पर्थ में गवांया...जहां उसे पारी और 37 रनों से हार का सामना करना पड़ा... तो बदले का मौका मोहाली में मिला ... इस बार टीम इंडिया बदले को इतनी बेताब थी कि ... बारिश के चलते 1 दिन का खेल धुलने के बावजूद...नतीजा ना आने वाले मैच में  भी उसने कंगारुओं के 4 दिन में चित करते हुए 6 विकेट से सानदार जीत दर्ज की   बदले की आखिरी किस्त   शुरूआती 3 मुकाबले से टीम इंडिया के इरादे साफ हो चुके थे ...सीरीज़ पर वो 3-0 से कब्जा कर चुकी थी ..लेकिन इरादा था ...कि बदला तो लेकर रहेंगे ...हर हार का हिसाब तो होकर रहेगा...नतीजा ...298 रनों के जख्म जो कंगारुओं ने उसे चौथे यानी एडिलेड टेस्ट में दिए थे ..उसके ऐवज में टीम इंडिया ने 3 दिन में ही दिल्ली टेस्ट पर कब्जा कर कंगारु-क्रिकेट के ताबूत में वो आखिरी कील भी ठोंक दी  ...जिसका फैंस को बेसब्री से इंतज़ार था RELIEF ... जिसके साथ ही टीम इंडिया और उसके फैंस ने जश्न से ऐलान कर दिया... कि हार हिसाब अब पूरा हुआ।    लेखक रजनीश कुमार

दिल्ली में टीम इंडिया ने रचा इतिहास ---ऑस्ट्रेलिया को 4-0 से हराया


दिल्ली टेस्ट में जीत... भारतीय क्रिकेट के इतिहास की सबसे बड़ी जीत है... वो जीत जो टीम इंडिया को 81 साल के लंबे अंतराल के बाद मिली है... दूसरे लफ्जों में कहें... तो जो कारनामा सुनील गावस्कर ... कपिल देव ... और अज़हरुद्दीन जैसे कप्तान नहीं कर सके वो धोनी ने कर दिखाया।   भारतीय क्रिकेट का सबसे सुनहरा दिन इतिहास के पन्नों में अमर हो गई 24 मार्च 2013 की तारीख क्योंकि मिली है इतिहास की सबसे 'बड़ी जीत'     जी हां...भारतीय क्रिकेट के इतिहास में जीत तो बहुत सी देखी...लेकिन ऐसी ऐतिहासिक जीत 81 सालों के लंबे इतिहास में पहली बार नसीब हुई है...टीम इंडिया को हासिल हुआ है वो मुकाम...जिसे पटौदी...अहज़र...कपिल...गावस्कर...और गांगुली जैसे धुरंधर भी हासिल ना कर सके...4-0 की क्लीन स्वीप का ऐसा धमाका...धोनी के धुरंधरों ने कर दिखाया है...वो भी मज़बूत मानी जाने वाली कंगारू टीम के खिलाफ... relief टीम इंडिया ने हासिल की ऐसी जीत...जिसने 15 महीने पहले ऑस्ट्रेलिया में मिले हार के उन जख्मों पर ठीक वैसा ही मरहम लगाया...जैसे ही शिक्स्त के घाव सीने पर लगे थे...इस जीत के मायने कामयाबियों के इतिहास में सबसे खास है...   क्योंकि कंगारूओं के खिलाफ इससे पहले कभी भी टीम इंडिया को 4-0 से जीत नहीं मिली...और तो और कभी वर्ल्डक्रिकेट पर राज करने वाली खुद कंगारू टीम को 43 सालों के इतिहास में पहली बार 0-4 की बड़ी हार का सामना करना पड़ा है...    और तो और इस सीरीज़ में सबसे खास रहा...टीम इंडिया का गिर कर संभलना...और यंगिस्तान का वो जलवा...जिसने कंगारूओं के गुरुर को रौंध कर रख दिया...ज़ाहिर है 24 मार्च का ऐतिहासिक दिन जश्न का दिन है...भारतीय क्रिकेट में उस त्यौहार का दिन है...जिसने होली से पहले ही जीत के रंगों से सराबौर कर करोड़ों फैंस को ऐसी जीत का तोहफा दिया है...जैसी इससे पहले ना कभी देखी...ना सुनी।...वाकई ये भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे बड़ी जीत के जश्न का दिन है।  लेखक रजनीश कुमार

बुधवार, 20 मार्च 2013

टेस्ट टीम में वापसी को बेताब है युवराज- शबनम सिंह


कैंसर से जंग जीतने की बात हो या फिर वर्ल्डकप कप ट्रॉफी हाथों में उठाने का सपना...युवराज ने क्रिकेट की पिच पर अपना हर ख्वाब पूरा किया है...लेकिन युवराज की एक ख्वाहिश ऐसी भी है...जो अभी तक अधूरी है...जो अंदर ही अंदर युवराज को हमेशा सालती है...और वो है टेस्ट टीम में जगह बनाने की...जिसका खुलासा ना सिर्फ युवराज सिंह ने...बल्कि उनकी मां शबनम सिंह ने भी किया। ... SHABNAM SINGH MOTHER OF YUVRAJ SINGH ON TEST CRICKET ... ( मैं इसकी मां हूं ... ये बोलता नहीं है लेकिन एक क्रिकेटर होने के नाते हर किसी का ख्वाब होता है कि वो टेस्ट क्रिकेट खेले। ये टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहता है ... ) एक बेटे को क्या चाहिए ... मां सब जानती है । आपने सही सुना वर्ल्ड क्रिकेट के सबसे बड़े फाइटर युवराज सिंह के दिल में देश के लिए ... फिर से टेस्ट क्रिकेट खेलने की हसरत आज भी उतनी ही शिद्दत के साथ घर किए हुए है ... जितना कैंसर से खिलाफ ज़िंदगी की जंग के दौरान ... वो ठीक होकर जीना चाहते थे। औऱ एक बार जो युवराज की किताब के लांच के दौरान उनकी मां ने अपने बेटे की ये ख्वाहिश जगज़ाहिर की ... तो युवी ने ये कहने में हिचकिचाहट नहीं दिखाई ... कि टेस्ट टीम में फिर से अपनी जगह बनाने के लिए उनकी कोशिश जारी रहेगी। अपने 12 साल के करियर के दौरान कभी फिटनेस तो कभी फॉर्म की फांस में फंसने के चलते ... अक्सर टेस्ट टीम से ड्रॉप होते आए युवराज को आज भी भरोसा है कि एक दिन उनकी मेहनत उन्हें टेस्ट टीम का Permanent सदस्य ज़रूर बना देगी। शायद यही वजह भी है कि अब युवराज अपनी फिटनेस पर भी ज़्यादा मेहनत कर रहे हैं । एक तरफ जहां उन्होंने अपना काफी वज़न कम किया है ... तो वहीं वो टीम में अपनी जगह वो फिर से पक्का करने के लिए वो भविष्य में मिलने वाले हर मौके वो भुनाना चाहते हैं ... जिससे उन्हें सेलेक्टर्स का भरोसा एक बार फिर हासिल हो सके। बहरहाल अपने 40 टेस्ट के करियर में 1900 रन बनाने वाले युवी की मेहनत कब रंग लाएगी ... या फिर से उन्हें टेस्ट टीम में कब खेलने का मौका मिलेगा ... ये तो आने वाला वक्त बताएगा ... लेकिन युवी के कभी न हार मानने वाले जज़्बे को देखते हुए उम्मीद ज़रूर की जा सकती है कि ... युवराज भी अपनी मंज़िल को हासिल किए बिना ... चैन से नहीं बैठेंगे। रजनीश कुमार के साथ, ऋषभ शर्मा के साथ लाइव इंडिया दिल्ली । लेखक रजनीश कुमार http://www.youtube.com/watch?v=Jp0bQYLYGZ0

युवराज मेरा दोस्त नहीं ..भाई है---हरभजन सिंह


कैंसर के खिलाफ इस जंग में वैसे तो युवराज सिंह का कई साथियों ने साथ दिया...तो वहीं फैंस की दुआएं भी रंग लाईं ...लेकिन युवी का एक दोस्त ऐसा भी रहा ... जिसने युवराज को इस गंभीर बीमारी से निजात दिलाने के लिए एक ऐसा तरीका अपनाया ... जिसे जानकार शायद आपके होंठो पर भी मुस्कान आ जाए ... तो युवराज को तो हंसना ही था ... कौन है युवराज का वो दिलचस्प साथी क्रिकेट की पिच पर जीत का जश्न मनाते ... औऱ आपस में मज़ाक करते युवराज और हरभजन सिंह की दोस्ती की ऐसी हज़ारों तस्वीरें ... कई बार देखने को मिली हैं। लेकिन कैंसर से ज़िंदगी की जंग लड़ने के दौरान ... दोस्ती की जो मिसाल भज्जी ने पेश की ... उसे युवराज अपने दिल के सबसे करीब मानते हैं। अपनी किताब में युवराज ने लिखा है कैसे इलाज के दौरान ... उनसे मिलने और बात करने वाला हर शक्स ... उनकी सेहत और जल्द ठीक होने की बातें किया करता था। लेकिन इस दौरान वो सिर्फ हरभजन सिंह ही थे जिन्होंने कभी ... युवी को इस बात का अहसास नहीं होने दिया कि उनकी जंग कैंसर जैसी बीमारी से जारी थी। Harbhajan Singh ... (मैं उसके हालात समझ सकता था क्योंकि मैं भी कुछ ऐसे ही हालात से गुज़र चुका था ... जब मैं काफी छोटा था तब मेरे पिता की मौत हो गई थी । लेकिन यहां सवाल परिवार में किसी की जान का नहीं ... बल्कि खुद युवराज की ज़िंदगी का था औऱ वो लड़ाई भी आसान नहीं थी ) यही वजह थी कि युवराज के किसी दूसरे शुभचिंतक की तरह भज्जी ने युवराज से कभी उनके दर्द की बात नहीं की ... दिल में अपने दोस्त की ज़िंदगी की दुआ और ज़ुबान पर मज़ाकिया लहज़े में भज्जी लगातार युवराज से उन लम्हों की बातें किया करते थे ... जब दोनों ने एक साथ मिलकर क्रिकेट की ABCD सीखने के अलावा ... ज़िंदगी की नीजि बातें भी साझा की थीं । Harbhajan Singh (मैं युवी से बातें करता था कि याद है जब हम साथ में Under-16-19 क्रिकेट खेला करते थे। उस दौरान हम कैसे मज़ाक करते थे ... मैं इससे लड़कियों की बातें भी करता था कि आजकल किसे घुमा रहा है ... कल किसे घुमाएगा ...मुझे किससे मिलवाएगा ?) अपने इलाज के दौरान भज्जी का यही वो अपनापन था ... जिसके युवराज भी कर्ज़दार बन गए ... और इसीलिए उन्होंने ये कहने में भी बिल्कुल देर नहीं लगाई कि हरभजन मेरा दोस्त नहीं ... बल्कि भाई है। वैसे भी कहते हैं कि सच्चा दोस्त वही होता है ... जो अच्छे और बुरे हर हालात में आपका साथ दे ... ऐसे में युवी और भज्जी की जोड़ी को दोस्तों की सबसे मज़बूत जोड़ियों में गिना जा सकता है ... जो आज एक मिलास भी बन चुकी है। लेखक रजनीश कुमार http://www.youtube.com/watch?v=Nsj7YWuj9yA

युवराज से लगता था डर - महेंद्र सिंह धोनी


कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को किसी से डर लगता है...सुनने में ये बात अजीब सी लगती है...लेकिन सच यही है...कि कप्तान धोनी भी कभी किसी से डरा करते थे...धोनी आज जिस इंसान को तु कह कर बुला लेते है...उसे कभी कैप्टन कूल आप कहा करते थे...कौन है वो इंसान जिससे धोनी खौफ खाते थे दुनिया की बड़ी से बड़ी टीमों के लिए...काल कहे जाने वाले टीम इंडिया के कप्तान एम एस धोनी अगर कहे की उन्हें किसी से डर लगता है...तो शायद ही आपको इस बात पर यकीन होगा...लेकिन ये सच है कि धोनी को भी डर लगता है...और इस डर के राज पर से पर्दा खुद कप्तान धोनी ने ही उठाया है...माही की माने तो दुनिया में एक ऐसा श्ख्स है जिससे उन्हें को डर लगता है...जिसके गुस्से का सामना करना धोनी के बस की बात नहीं है... जी हां और ये शख्स कोई ओर नहीं बल्कि धोनी के सबसे करीबी दोस्त...और टीम इंडिया के सिक्सर किंग युवराज सिंह है...युवी की BOOK 'THE TEST OF MY LIFE' के RELEASE पर पहुंचे धोनी ने युवी के साथ अपने शुरूआती दिनों की यादों को ताजा करते हुए...कहा की मैदान पर युवी के बैखोफ अंजाद के चलते उन्हें युवी से डर लगाता था...साथ ही ड्रैसिंग रूप में युवराज के दबदबे के चलते वो युवी को आप कह कर बुलाते थे...लेकिन उसके बाद धोनी और युवी की जोड़ी मैदान के साथ-साथ मैदान के बाहर भी सुपर हिट साबित गई...सबसे बड़े मैच फीनीशर के तौर पर मशहूर...और मैदान पर विरोधियों का मिल कर सफाया करने वाली...इस जोड़ी के लिए क्रिकेट का सबसे खास पल तब आया...जब दोनों ने मिल कर टीम इंडिया को 28 सालों बाद वर्ल्ड चैंपियन बनाया धोनी ने इस कार्यक्रम के दौरान माना की खेल के सभी डिपार्टमेंट में हिट ऑलराउंडर युवी...उनके के हर मैच में उनके लिए तुरूप के इक्के जैसे है... साफ है जिंदगी से जंग जीत कर मैदान पर वापसी करने वाले युवी के बारे में धोनी की कहीं ये बाते साबित करती है... कि सिक्सर किंग भारतीय क्रिकेट का वो अहम हिस्सा है...जिनकी मौजूदगी ना सिर्फ फैंस के लिए बल्कि कप्तान के लिए भी जीत की गांरन्टी है... लेखक रजनीश कुमार
http://www.youtube.com/watch?v=8r3MZ_Xu99w

युवराज को देखकर मैं रोना नहीं चाहता था- सचिन तेंदुलकर


युवराज सिंह के संघर्ष की वैसे तो कई कहानियां हैं ... लेकिन अब युवराज सिंह ने अपनी किताब के ज़रिए ... अपनी ज़िदगी के उस दौर को दुनिया के सामने रखा है ... जिसके दौरान देश का बच्चा-बच्चा युवी के लिए दुआएं मांग रहा था। कैंसर के खिलाफ अपनी ज़िंदगी की जंग जीतकर ... जिस किताब को लिखने का वादा युवराज ने किया था आखिरकार वो किताब अब रिलीज़ हो गई है ... किताब का नाम है THE TEST OF MY LIFE ... कहीं छलक ना पड़े आंसू ... कहीं टूट ना जाए ख्वाहिश ... औऱ कहीं हार ना जाए जिंदगी । अमेरिका में इन सवालों के बीच जब बीते साल युवराज सिंह कैंसर ... या कहें मौत से अपनी ज़िदगी की जंग लड़ रहे थे तो खुद युवराज भी नहीं जानते थे ... कि आने वाला वक्त दुनिया के सामने उन्हें एक प्रेरणा ... एक मिसाल बनाकर खड़ा कर देगा। लेकिन हकीकत यही है कि युवी का पहले तो कैंसर के खिलाफ अपनी ज़िंदगी की बाज़ी जीतना ... और फिर क्रिकेट की पिच पर कामयाब वापसी करना ... वजह बना संघर्ष औऱ जज़्बे की वो कहानी लिखने के लिए जिसका नाम टीम इंडिया के सिक्सर किंग ने ... The Test Of My Life रखा है। (इस किताब में ऐसी कई बातें हैं जो किसी के लिए प्रेरणा बनेंगी ... मैंने लिखा है इसके पीछे मेरा कोई औऱ मकसद नहीं है) 200 पन्नों की अपनी किताब में युवी ने विस्तार से बताया है कि कैंसर के कारण उनकी जिंदगी में क्या-क्या बदलाव हुए। कैसे भारत को 2011 में क्रिकेट वर्ल्ड कप जिताने वाले युवी को खुद को हुई इस जानलेवा बीमारी का पता चला ... औऱ कैसे अमेरीका के बोस्टन शहर में दो महीनों से भी ज्यादा समय तक अपने इलाज के दौरान उन्हें रिश्तों, दोस्तों और ज़िंदगी के असल मायनों का अहसास हुआ। अपनी ज़िंदगी के सबसे मुश्किल वक्त के बारे में लिखकर युवी ने ... किताब में ये बताने की कोशिश भी की है कि कैसे अमेरिका में इलाज के दौरान कई छोटी-छोटी बातें उन्हें भावुक कर देती थीं। (ये आसान नहीं था कि उस दौर को फिर से याद करूं जब मैं कैंसर से जूझ रहा था ... लेकिन वो बातें मेरी ज़िंदगी का ही हिस्सा थीं और मुझे लगा कि ऐसी तमाम बातें अगर कैंसर से लड़ाई लड़ रहे दूसरे लोगों को जानने को मिलेंगी तो इसका सिर्फ फायदा ही होगा।) अमरीका से इलाज कराने के बाद भारत लौटने के अनुभवों को भी युवराज ने अपनी किताब में विस्तार से लिखा है ... The Test Of My Life युवराज की वो कहानी है ... जिसे उन्होंने कैंसर से पहले जिया ... कैंसर के दौरान जिया ... औऱ जिसे वो कैंसर के बाद जीना चाहते हैं। ये कहानी है संघर्ष की ... इंकार की ... कबूलने की ... और उसके बाद नए संघर्षों की। दूसरे लफ्ज़ों में युवराज इस किताब के ज़रिए वो कहानी उन लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं ... जिससे ऐसे हालात में जी रही लोग ये न समझें कि वो अकेले हैं। लेखक रजनीश कुमार http://www.youtube.com/watch?v=rvlUUEW0lmo

बुधवार, 6 मार्च 2013

हैदराबाद में धोनी का धमाका

5 मार्च 2013 को टीम इंडिया ने दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को 1 पारी और 135 रनों से हराया

------------------------------------------------------------------- टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को पारी और 135 रनों से मात दी ... इस जीत के सफर में मेहमान ऑस्ट्रेलिया के तमाम खिलाड़ी जहां दोनों पारियों में संघर्ष करते नज़र आए ... तो वहीं टीम इंडिया के लिए बल्लेबाज़ों के साथ-साथ ... सभी गेंदबाज़ों ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। === बदला है 2011 का... ये बदला है मेलबर्न टेस्ट का... ये बदला है सिडनी में मिले ज़ख्मों का... जी हां... हैदराबाद में मिली ये जीत ... सिर्फ टीम इंडिया को दूसरे टेस्ट मैच में विजेता नहीं बना रही ... बल्कि ये जीत उन ज़ख्मों पर मरहम लगा रही है... जो कंगारुओं ने करीब डेढ़ साल पहले अपने सरज़मीं पर दिए थे... लेकिन देर से ही सही और अपनी सरज़मीं पर ही सही... टीम इंडिया ने कंगारूओं से ज़ख्मों का ऐसा हिसाब किया है... जिसे क्लार्क एंड कंपनी बरसों तक याद रखेगी... चेन्नई में बदले की पहली किश्त वसूलने के बाद ... बारी हैदराबाद टेस्ट में हल्ला बोलने की थी... ज़ाहिरतौर पर मुकाबले में फेवरेट तो टीम इंडिया ही थी... लेकिन धोनी ब्रिगेड मौजूदा सीरीज़ के इस दूसरे टेस्ट में ऐतिहासिक जीत हासिल कर लेगी... इसका अंदाज़ा कम ही था... मुकाबले की शुरूआत ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाज़ी से हुई... और टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को 237 रन पर ही ढेर कर दिया... इसके बाद बारी बल्लेबाज़ों की आई... जहां टीम इंडिया ने रनों का ऐसा पहाड़ खड़ा किया... जिसके बाद दूसरी पारी में बल्लेबाज़ी की नौबत ही नहीं आई... टीम इंडिया ने चेतेश्वर पुजारा और मुरली विजय के शानदार शतकों की बदौलत 503 रनों की स्कोर खड़ा किया... जिसके दबाव में ऑस्ट्रेलियाई टीम ऐसी दबी कि टीम इंडिया ने चौथे दिन के पहले ही सेशन में कंगारुओं का काम तमाम करके ... उसने बदले की दूसरी किश्त वसूल कर ली... टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया पर दूसरी सबसे बड़ी जीत हासिल करते हुए पारी और 135 रन से करारी मात दी...और ले लिया दूसरा बदला... बहरहाल टीम इंडिया ने चेन्नई के बाद हैदराबाद में जीत हासिल करके ..बदले की दो किश्त तो वसूल कर ली हैं... लेकिन ऑस्ट्रेलिया से मुकम्मल बदला तभी पूरी होगा... जब टीम इंडिया कंगारुओं को 4-0 से हराकर वापसी भेजेगी। ---------------------------------------------------------------------------------------- ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम इंडिया को हासिल हुई जीत से ... कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी भी अपने आलोचकों को बुरी तरह मात देने में कामयाब रहे हैं। आज टीम इंडिया के Comeback के लिए धोनी को Credit दिया जा सकता है ... लेकिन खास बात ये है कि इस जीत के दौरान धोनी ने एक ऐसी उपलब्धि भी अपने नाम कर ली है ... जिसके बाद किसी भी दूसरे कप्तान के आंकड़े उनके सामने छोटे नज़र आ रहे ============ क़िस्मत और कामयाबी जब बुलंदियों के आसामान तक पहुंच जाए... तो उसकी शक्ल टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के जैसी हो जाती है... जी हां ट्वेंटी ट्वेंटी....और वनडे में कई कीर्तीमान बनाने वाले.... दुनिया के सबसे दबंग कप्तान.... अब व्हाइट जर्सी के खेल में भी... हिंदुस्तान के शीर्ष पर कब्जा जमा चुके हैं ... टेस्ट की दुनिया में कभी सौरव गांगुली को कप्तान के तौर पर भारत में सबसे सफल माना जाता था...लेकिन आज वो इतिहास की बातें हो गई है... क्योंकि जहां माही का लक पहुंचता है... वहां हर रिकॉर्ड धोनी के कदमों में मिलता है.... हैदराबाद टेस्ट में एक पारी और 135 रनों से जीत हासिल कर धोनी ने अपनी कप्तानी में 22 टेस्ट में जीत का आंकड़ा छू लिया... जिसे आज तक ना तो सौरव गांगुली... ना ही अजहरूद्दीन औऱ ना ही गावस्कर औऱ सचिन जैसे कप्तान छू पाए....धोनी ने अब तक 45 टेस्ट में टीम इंडिया की कप्तानी का जिम्मा संभाला... GFX IN जहां 22 बार उन्होंने विजय तिलक लगाया तो ... वहीं 12 टेस्ट में हार और 11 टेस्ट को ड्रॉ पर खत्म कर दिया....इससे पहले सौरव गांगुली के नाम 49 टेस्ट की कप्तानी में 21 जीत दर्ज थी... जबकि गांगुली को 13 बार हार का सामना करना पडा था... गांगुली ही नहीं अजहरूद्दीन जैसे कप्तान भी 47 टेस्ट में कप्तानी कर महज 14 में जीत हासिल करने के बाद भी....GFX OUT धोनी की चमक से सामने फीके ही हैं... धोनी की महान कप्तानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि....सिर्फ गांगुली और अजहरूद्दीन ही धोनी से पीछे नहीं है...जिसके नाम पर ये सीरीज खेली जा रही है...वो भी धोनी के सामने पानी भरते नजर आ रहे हैं........GFX IN ... सुनील गावस्कर और मंसूर अली खां पटौदी की कप्तानी में टीम इंडिया ने नौ-नौ टेस्ट...राहुल द्रविड़ की अगुवाई में आठ टेस्ट....बिशन सिंह की बेदी की कप्तानी में 6 टेस्ट...जबकि अजित वाडेकर, कपिल देव और सचिन तेंदुलकर के नेतृत्व में टीम इंडिया महज चार-चार मैच में ही जीत दर्ज की है.....GFX OUT इन आंकड़ों की बातें आज अगर की जा रही है...तो उसकी सबसे बड़ी वजह भी कप्तान धोनी हैं...जिन्होंने टेस्ट में ऐसा मुकाम हासिल किया...जिसके बाद हर कोई माही का मुरीद हो गया है... बहरहाल एक महान कप्तान का ओहदा हासिल करने वाले धोनी आज कामयाबी के ऐसे शिखर पर खड़ें हैं...जहां से हिंदुस्तान के क्रिकेट का नजारा बेहद खूबसूरत हो चला है... ऐसे में फैंस भी यही उम्मीद कर रहे हैं... कि धोनी आने वाले दिनों में ऐसे और कई मुकाम हासिल करें..जिसे बदलना किसी के बस की बात ना हो.. =================================================================================== ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम इंडिया को हासिल हुई जीत से ... कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी भी अपने आलोचकों को बुरी तरह मात देने में कामयाब रहे हैं। आज टीम इंडिया के Comeback के लिए धोनी को Credit दिया जा सकता है ... लेकिन खास बात ये है कि इस जीत के दौरान धोनी ने एक ऐसी उपलब्धि भी अपने नाम कर ली है ... जिसके बाद किसी भी दूसरे कप्तान के आंकड़े उनके सामने छोटे नज़र आ रहे हैं। क़िस्मत और कामयाबी जब बुलंदियों के आसामान तक पहुंच जाए... तो उसकी शक्ल टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के जैसी हो जाती है... जी हां ट्वेंटी ट्वेंटी....और वनडे में कई कीर्तीमान बनाने वाले.... दुनिया के सबसे दबंग कप्तान.... अब व्हाइट जर्सी के खेल में भी... हिंदुस्तान के शीर्ष पर कब्जा जमा चुके हैं ... टेस्ट की दुनिया में कभी सौरव गांगुली को कप्तान के तौर पर भारत में सबसे सफल माना जाता था...लेकिन आज वो इतिहास की बातें हो गई है... क्योंकि जहां माही का लक पहुंचता है... वहां हर रिकॉर्ड धोनी के कदमों में मिलता है.... हैदराबाद टेस्ट में एक पारी और 135 रनों से जीत हासिल कर धोनी ने अपनी कप्तानी में 22 टेस्ट में जीत का आंकड़ा छू लिया... जिसे आज तक ना तो सौरव गांगुली... ना ही अजहरूद्दीन औऱ ना ही गावस्कर औऱ सचिन जैसे कप्तान छू पाए....धोनी ने अब तक 45 टेस्ट में टीम इंडिया की कप्तानी का जिम्मा संभाला... GFX IN जहां 22 बार उन्होंने विजय तिलक लगाया तो ... वहीं 12 टेस्ट में हार और 11 टेस्ट को ड्रॉ पर खत्म कर दिया....इससे पहले सौरव गांगुली के नाम 49 टेस्ट की कप्तानी में 21 जीत दर्ज थी... जबकि गांगुली को 13 बार हार का सामना करना पडा था... गांगुली ही नहीं अजहरूद्दीन जैसे कप्तान भी 47 टेस्ट में कप्तानी कर महज 14 में जीत हासिल करने के बाद भी....GFX OUT धोनी की चमक से सामने फीके ही हैं... धोनी की महान कप्तानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि....सिर्फ गांगुली और अजहरूद्दीन ही धोनी से पीछे नहीं है...जिसके नाम पर ये सीरीज खेली जा रही है...वो भी धोनी के सामने पानी भरते नजर आ रहे हैं........GFX IN ... सुनील गावस्कर और मंसूर अली खां पटौदी की कप्तानी में टीम इंडिया ने नौ-नौ टेस्ट...राहुल द्रविड़ की अगुवाई में आठ टेस्ट....बिशन सिंह की बेदी की कप्तानी में 6 टेस्ट...जबकि अजित वाडेकर, कपिल देव और सचिन तेंदुलकर के नेतृत्व में टीम इंडिया महज चार-चार मैच में ही जीत दर्ज की है.....GFX OUT इन आंकड़ों की बातें आज अगर की जा रही है...तो उसकी सबसे बड़ी वजह भी कप्तान धोनी हैं...जिन्होंने टेस्ट में ऐसा मुकाम हासिल किया...जिसके बाद हर कोई माही का मुरीद हो गया है... बहरहाल एक महान कप्तान का ओहदा हासिल करने वाले धोनी आज कामयाबी के ऐसे शिखर पर खड़ें हैं...जहां से हिंदुस्तान के क्रिकेट का नजारा बेहद खूबसूरत हो चला है... ऐसे में फैंस भी यही उम्मीद कर रहे हैं... कि धोनी आने वाले दिनों में ऐसे और कई मुकाम हासिल करें..जिसे बदलना किसी के बस की बात ना हो.. ======================================================================================= हैदराबाद टेस्ट में मिली शानदार जीत के बाद अगर धोनी ने ... रिकॉर्ड बुक्स में अपने नाम एक खास उपलब्धि दर्ज कर ली है ... तो साथ ही अपने प्रदर्शन से भी कई दूसरे सवालों का जवाब दे दिया है। मौजूदा सीरीज़ से पहले धोनी की टीम में जगह को लेकर सवाल उठाए जाते थे ... लेकिन अपने मौजूदा प्रदर्शन से धोनी ने साबित कर दिया है कि वो टीम की ज़रूरत ही नहीं बल्कि ... कप्तान नंबर-1 भी हैं। -------------------------------------------------------------------------------------- ये जीत जवाब है उन सवालों के तीरों का... जो चंद दिनों पहले तक टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर रह-रह कर चल रहे थे... टीम इंडिया को 2-2 विश्वकप और टेस्ट में बेस्ट बनाने वाले कप्तान धोनी जब लगातार दो विदेशी दौरों पर और अपने ही घर में इंग्लैंड के हाथों हारे...तो ऐसे ही ना जाने कितने सवालों ने कप्तान को घेरे रखा... लेकिन वक्त ने एक बार फिर करवट बदली... पहले धोनी ने वनडे क्रिकेट में पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज़ में टीम इंडिया की ओर से सबसे ज्यादा 203 रन बनाए...और फिर इंग्लैंड के खिलाफ 148 रन जमा खुद को साबित करने की सीढ़ियां फिर चढ़नी शुरु कर दी... लेकिन क्रिकेट के सबसे बड़े फॉर्मेट में सवालों के जवाब देने अभी बाकी थे...फिर माही को मौका मिला उसी ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाफ...जिसके हाथों हार के ज़ख्मों ने माही की महानता पर सवाल खड़े किए थे... RELIEF सबसे पहले बारी आई... चेन्नई टेस्ट की...जहां चैम्पियन कहते किसे हैं...धोनी के एक ही धमाके ने इसका जवाब सभी को दे दिया...कप्तानी में कमाल के साथ-साथ... चेन्नई टेस्ट में धोनी के 224 रनों के एक ही धमाके ने जीत टीम इंडिया के नाम लिख दी... तो हैदराबाद में भी धोनी का धमाका ना सिर्फ टीम इंडिया का काम आसान कर गया...बल्कि कप्तानी के मामले में भी धोनी ने आलोचकों को करारा जवाब दे दिया...RELIEF ज़ाहिर है...कंगारूओं पर मिली ये जीत...जीत कम जवाब ज्यादा है...जवाब उन सवाल उटाने वालों को...जो कप्तान धोनी की उड़ान को हल्के में ले गए...और शायद भूल गए कि धोनी भारतीय कप्तानों में कि उस लिस्ट में पहला पायदान हासिल कर चुके हैं...जहां से कद्दावर कप्तानों के नामों की शुरुआत होती है। ====================================================================================== हैदराबाद टेस्ट में जीत हासिल करके टीम इंडिया ने सिर्फ सीरीज़ में 2-0 की बढ़त नहीं बनाई है ... बल्कि क्रिकेट इतिहास में कंगारुओं के खिलाफ अपनी दूसरी सबसे बड़ी जीत भी हासिल कर ली है । 1998 के बाद ये पहला मौका है ... जब टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को पारी और 135 रन के अंतर से हराया। ======================================================================================= जीत की इन तस्वीरों ने ... टीम इंडिया के साथ साथ 121 करोड़ हिंदुस्तानियों के जश्न को दोगुना कर दिया ... क्योंकि ये वो है जिसने टीम इंडिया को 15 साल के ऐतिहासिक लम्हों के सबसे करीब ला खड़ा कर दिया है... जी हां... हैदराबाद टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को पारी और 135 रन से हराकर टीम इंडिया ने कंगारूओं के खिलाफ दूसरी सबसे बड़ी जीत हासिल की है... पहली सबसे बड़ी जीत 1998, कोलकाता टेस्ट टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलिया पर सबसे बड़ी जीत 1998 में कोलकाता टेस्ट में मिली थी...जहां अजहर की कप्तानी में GFX टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को एक पारी और 219 रन से हराया दूसरी सबसे बड़ी जीत 2013, हैदराबाद टेस्ट हैदराबाद में मिली जीत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम इंडिया की दूसरी सबसे बड़ी जीत है... जहां टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया और एक पारी और 135 रन से करारी मात दी... तीसरी सबसे बड़ी जीत साल 1979, मुंबई टेस्ट भारत ने ऑस्ट्रेलिया पर तीसरी बड़ी जीत 1979-80 में मुंबई के वानखेडे स्टेडियम में दर्ज की थी। GFX IN:-इस टेस्ट को भारत ने एक पारी और 100 रन से जीता था...इस मैच में गावस्कर ने 123 रन की शानदार शतकीय पारी खेली थी... और टीम इंडिया के स्कोर को पहली पारी में 400 के पार पहुचाया था। चौथी सबसे बड़ी जीत साल 2008, मोहाली टेस्ट साल 2008-09 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टीम इंडिया ने धोनी की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया को 320 रनों से हराया था... इस मैच में धोनी ने कप्तानी पारी खेलते हुए पहले 92 और दूसरी पारी में 68 रनों की नाबाद पारी खेली पांचवी सबसे बड़ी जीत साल 1978, मेलबर्न टेस्ट टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलिया पर चौथी बड़ी जीत 1978 में मेलबर्न टेस्ट में मिली थी... जब बिशन सिंह बेदी की कप्तानी में टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को 222 रनों से हराया... ऑस्ट्रेलिया पर छठी सबसे बड़ी जीत साल 2013, चेन्नई टेस्ट ऑस्ट्रेलिया पर छठी बड़ी जीत... टीम इंडिया ने मौजूदा सीरीज़ में ही हासिल की... टीम इंडिया ने चेन्नई टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को 8 विकेट से हराया। ---------------------------------------------------------------------------------------

सोमवार, 4 मार्च 2013

हैदराबाद में पुजारा की कहानी


भले ही हैदराबाद टेस्ट में चेतेश्वर पुजारा का दोहरा शतक ... आज हर तरफ सुर्खियां बटोर रहा हो । लेकिन एक हकीकत ये भी है कि क्रीज़ पर अगर पुजारा को ... मुरली विजय का साथ नहीं मिला होता तो शायद टीम इंडिया इतनी मज़बूत स्थिती में नहीं होती। हैदराबाद टेस्ट में पुजारा औऱ मुरली विजय की 370 रनों की पार्टनरशिप ने ... ना सिर्फ कंगारूओं का जीना मुहाल कर दिया ... बल्कि रिकॉर्ड बुक्स में भी शानदार ढंग से एंट्री दिला दी।  एक तरफ से हो रहा था मुरली विजय का वार...तो दूसरी तरफ से जारी था पुजारा का पुरज़ोर प्रहार...एक तरफ था एम विजय का विश्वास...तो दूसरी तरफ ...चट्टान की तरह क्रीज़ पर खड़े  थे चेतेश्वर पुजारा ....जी हां...हैदराबाद टेस्ट में टीम इंडिया की पहली पारी में ये वो कहानी थी...जिसने क्लार्क एंड कंपनी के गेंदबाजों की बखिया उधेड़ कर रख दी...देखते ही देखते हैदराबाद के इन HEROES ने वो कारनामा कर दिया..जिसके बाद भारतीय क्रिकेट के इतिहास में उनका नाम सुनहरे अख्शरों में दर्ज हो गया ...370 रनों की पहाड़ जैसी साझेदारी करने के बाद टीम इंडिया की नई दीवार पुजारा और मुरली विजय भारत की ओर से दूसरे विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी करने वाले बल्लेबाज बन गए है...  GFXIN:- मुरली विजय और चेतेश्वर पुजारा ने दूसरे विकेट के लिए रिकॉर्ड तोड़ साझेदारी करते हुए 109.4 ओवर्स में 370 रन बना डाले जिसमें पुजारा के 198 और मुरली विजय के 159 रनों का योगदान रहा GFX OUT   इस साझेदारी के साथ ही पुजारा और मुरली विजय ने GFX IN:-35 साल पुराने सुनिल गावस्कर और दिलीप वेंगसरकर के 344 रनों की साझेदारी को रिकॉर्ड को तोड़ा जो उन्होंने 1978 में वेस्टइंडीज के खिलाफ कोलकाता मे बनाई था GFX OUT       दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक 294 की साझेदारी कर चुकी...टीम इंडिया की इस जोड़ी ने तीसरे दिन का खेल शुरू होते ही टीम इंडिया के साथ-साथ वर्ल्ड क्रिकेट के की दिग्गज जोड़ियों का रिकॉर्ड तोड़ने का सिलसिला शुरू कर दिया...फिर चाहे वो द्रविड़ और गंभीर की जोड़ी हो या डॉन ब्रैड मैन और आर्थर मौरिस यी फिर इंग्लैंड के बल्लेबाज ट्रॉट और एलिस्टर कुक की...आलम ये रहा की 167 के नीजि स्कोर पर मुरली विजय विकेट गिरने तक   370 की साझेदारी के साथ ये जोड़ी वर्ल्ड क्रिकेट में दूसरे विकेट के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाली छठी जोड़ी बन गई   साफ है...इस शानदार प्रदर्शन के साथ ही चेतेश्वर पुजारा और मुरली विजय ने...लगातार कमजोर दिख रहे टीम इंडिया के ना सिर्फ टॉप आर्डर की परेशानी को दूर कर दिया है...बल्कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हैदराबाद में ऐसा हल्ला बोला...जिसने मैच के तीसरे ही दिन जीत की उम्मीदों को भी पंख लगा दिए।  इसमें कोई शक नहीं कि हैदराबाद टेस्ट में अगर टीम इंडिया ... जीत का दहलीज़ पर खड़ी है तो उसके पीछे सिर्फ और सिर्फ ... चेतेश्वर पुजारा का दोहरा शतक ही ज़िम्मेदार है।  वो पुजारा ही थे जिनकी हैदराबाद में खेली 204 रनों की मैराथन पारी ने ... ना सिर्फ कंगारू गेंदबाज़ों का आत्मविश्वास तोड़ा ... बल्कि टीम इंडिया को पहली पारी में ऐसी बढ़त भी दिला दी ... जिसकी खुद धोनी ने भी शायद ही उम्मीद की थी। टीम इंडिया की नई दीवार के बल्ले से निकला ये वही डबल धमाका था...जिसने रफ्तार को दम भर रहे कंगारूओं को कोना पकड़ कर रोने के लिए मजबूर कर लिया...पहली पारी में सिर्फ 17 रनों पर सहवाग का विकेट हासिल करने के बाद...ऑस्ट्रेलियाई आंधी अपने उफान पर थी...लेकिन चेतेश्वर जैसी चट्टान ने उनका ऐसे रास्ता रोक लिया...जिसका जवाब कंगारूओं की पूरी बटालियन के पास दिखाई तक नहीं दिया...RELIEF   क्या तेज़ गेंदबाज़ और स्पिनर्स कंगारू कप्तान ने अपना हर हथियार आज़मा कर देख लिया...लेकिन चेतेश्वर नाम की चट्टान टस से मस नहीं हुई...पुजारा के प्रहार का मानो किसी के पास कोई जवाब था ही नहीं...RELIEF   क्या कवर ड्राइव...क्या अपर कट...पुल शॉट्स...स्टेट ड्राइवस और क्या डिफेंस...पुजारा ने अपनी बल्लेबाज़ी में वो प्रहार किए...जिसे कंगारूओं के पास खड़े रह कर देखने के अलावा कोई ओर चारा था ही नहीं...RELIEF बात चेतेश्वर नाम की चट्टान की हो...तो  पुजारा के बल्ले से बने पहले 15 रन 55 गेंदों पर निकले...   लेकिन जब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पुजारा आक्रामक हुए...   तो डबल धमाके को उन्होनें 332 गेंदों पर पूरा कर डाला...यानि 204 रनों में से 186 रन उन्होनें 277 गेंदों पर ही ठोक डाले...पुजारा के दोहरे शतक में 30 चौके और 1 छक्का शामिल रहा .   ज़ाहिर...तौर पर हैदराबाद में टीम इंडिया की नई दीवार के डबल धमाके का यही वो दम रहा...जिसने ना सिर्फ धोनी ब्रिगेड को जीत का डंका बजाने की दहलीज़ पर ला खड़ा किया...बल्कि खुद पुजारा को टेस्ट क्रिकेट का सबसे बड़ा लड़ैया साबित कर दिया।     हैदराबाद टेस्ट में चेतेश्वर पुजारा की दोहरी शतकीय पारी ने ... टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ड्राइविंग सीट पर बिठा दिया है । आज हर कोई पुजारा की तारीफों के पुल बांध रहा है ... तो साथ ही ये भी कह रहा है कि टीम इंडिया को अब प्लेइंग-11 में राहुल द्रविड़ की कमी नहीं खलेगी ... क्योंकि पुजारा ही हैं धोनी ब्रिगेड की नई दीवार। भारतीय क्रिकेट की दीवार के नाम से जाने-जाने वाले राहुल द्रविड़ के संन्यास लेने के बाद ... क्रिकेट फैन्स को फिक्र थी कि जेंटलमैन गेम मे तीसरे नंबर पर आखिर कौन द्रविड़ की जगह लेगा ?  लेकिन पहले इंग्लैंड और फिर ऑस्ट्रेलिया जैसी दमदार टीमों के खिलाफ एक के बाद एक दो-दो दोहरे शतक जमाने वाले ... चेतेश्वर पुजारा ने आखिर साबित कर दिया है कि अगर टीम इंडिया में कोई भी बल्लेबाज़ राहुल द्रविड़ का विकल्प ... या फिर तीसरे नंबर पर खेलने की ज़िम्मेदारी उठाने का उत्तराधिकारी है ... तो वो सिर्फ चेतेश्वर पुजारा ही हैं। सिर्फ 25 साल की उम्र में गज़ब का आत्मविश्वास ... औऱ चट्टान के जैसा संयम दिखाकर पुजारा ने एक बार फिर ... टीम के प्लंइंग-11 में अपनी जगह और ज़रूरत दोनों को पक्का कर लिया है।     मैच दर मैच औऱ सीरीज़ दर सीरीज़ खुद को ... टेस्ट फॉर्मेट में साबित करते आ रहे पुजारा ने जहां इंग्लैंड के खिलाफ अपने करियर के छठे ही मैच में ... दोहरा शतक जमाया था । तो हैदराबाद में भी कंगारूओं के खिलाफ अपनी बल्लेबाज़ी से ऐसा समां बांधा की क्रिकेट के दिग्गज भी उन्हें दीवार कहकर पुकारने को मजबूर हो गए।  राहुल द्रविड़ को अपना आदर्श मानने वाले चेतेश्वर पुजारा की बल्लेबाज़ी में ... हैदराबाद टेस्ट के दौरान वो ज़िम्मेदारी का अहसास दिखा जो कभी ... टीम इंडिया का सीनियर होने के नाते राहुल द्रविड़ में दिखाई देता था। इतना ही नहीं 341 गेंदों पर खेली 204 रनों की पारी के अलावा ... हैदराबाद टेस्ट में पुजारा की मुरली विजय के साथ ... 370 रनों की पार्टनरशिप साफ दिखा रही थी कि ... चेतेश्वर कंगारूओं पर बढ़त बनाने के लिए किसी भी औऱ बल्लेबाज़ पर ... भरोसा करने को तैयार नहीं थे ।  ऐसी मुश्किल विकेट जिसपर टीम इंडिया के 9 विकेट सिर्फ 116 रनों पर गिर गए थे ... पुजारा ने ना सिर्फ कंगारूओं का दीवार की तरह सामना किया ... बल्कि साबित कर दिया कि वही राहुल राहुल द्रविड़ के टीम में अगले उत्तराधिकारी हैं। सिर्फ 11 टेस्ट मैच के छोटे से करियर में दो-दो दोहरे शतक बना चुके चेतेश्वर पुजारा ... आज अपनी इन्हीं बड़ी पारियों की बदौलत टीम इंडिया में अलग पहचान बना चुके हैं।  लेकिन हकीकत तो ये है कि घरेलू क्रिकेट खेलने के दिनों से ही ... पुजारा छोटी नहीं बल्कि बड़ी पारियों के लिए ही जाने जाते रहे हैं। आंकड़े गवाह है कि एक बार पुजारा के विकेट पर कदम जमे ... तो गेंदबाज़ उनकी विकेट लेने के लिए सिर्फ तरसते रहे हैं। महज़ 11 टेस्ट मैचों के करियर में पुजारा ने एक और दोहरा शतक अपने नाम कर लिया ... RELIEF जो वाकई लाजवाब है ... लेकिन जो पुजारा को जानते हैं...उनके लिए पुजारा की ये एक और सुपर पारी ... शायद ही हैरान करनी वाली हो... क्योंकि टीम इंडिया का ये नया दबंग बल्लेबाज़ तो पहले से सी बड़ी पारियों का बादशाह है ... RELIEF ... वो जानते हैं कि पुजारा का बल्ला अगर मैदान में अपना खूंटा गाड दे ...तो फिर विरोधी गेंदबाज़ कितना ही ज़ोर क्यों ना लगा लें ... पुज़ारा को हिला पाना भी नामुमकिन हैं... RELIEF ... जिसकी मिसाल फैंस ने हैदराबाद में भी देख ली ... लेकिन डोमेस्टिक सर्किट के उनके रिकॉर्ड पर नज़र डाले तो आपको भी यकीन हो जाएगा ... कि सेट होने के बाद पुजारा कितने खतरनाक हो  जाते हैं       रणजी ट्रॉफी में साल 2006/07 में तमिलनाडू के खिलाफ 177 की पारी ... फिर साल 2008/09 में उड़ीसा के खिलाफ 302 रन ... इसके बाद इसी साल पंजाब के खिलाफ 189 रन ...तो मुंबई के खिलाफ 176... फिर अगले सीज़न (साल 2009/10) माहाराष्ट्र के खिलाफ नाबाद 204 रन की  पारी भी पुजारा के बल्ले से आई... इसके बाद इसी सीज़न मध्य प्रदेश के खिलाफ नाबाद 203 रन भी बने....और फिर हाल ही में ... कर्नाटक के खिलाफ कहर बरपाते हुए रणजी के क्वार्टरफाइनल मुकाबले में 352 रनों की मैराथन पारी ने तो सबको उनका मुरीद ही बना दिया     साफ है पुजारा के बल्ले से निकलीं एक से बढ़कर एक इन मैराथन पारियों को देख अब तो ये अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है...कि पुजारा के वार में कितना दम है ...जो एक बार अगर सेट हो जाए ...तो वक्त के साथ और घातक ही होता जाता है ... यानी कहा जा सकता ... अगर पुजारा आगे भी टीम इंडिया के लिए कुछ इसी नज़र आए...तो किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए । चेतेश्वर पुजारा को क्रीज़ पर खेलते हुए देखकर उनके संयम की तारीफ करने का मन करता है ... लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी ... कि अगर बात क्रिकेट की पिच से हटकर की जाए तो भी ... चेतेश्वर पुजारा जैसी संकल्प और मज़बूत इच्छा शक्ति शायद ही ... इतनी कम उम्र के किसी और क्रिकेटर में देखने को मिले।  आप भी देखिए कैसे कुछ ही महीनों पहले तक बैसाखियों के सहारे चलने वाले चेतेश्वर ... आज चैंपियन क्रिकेटर बन गए। पहले मोटेरा में इंग्लैंड के खिलाफ ... और फिर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हैदराबाद टेस्ट । जेंटलमैन गेम के सबले बड़े फॉर्मेट में दो-दो दोहरे शतक बनाने के बाद ...  चेतेश्वर पुजारा के चेहरे पर दिखी सुकून भरी ये मुस्कान ... भले ही आम क्रिकेट फैन्स को सिर्फ उनके दोहरे शतक के जश्न की तस्वीर लगी हो। लेकिन हकीकत में ये तस्वीर उस मेहनत और साधना का फल है ... जिसके दर्द का अहसास सौराष्ट्र के इस चैंपियन क्रिकेटर ने पिछले 4 साल में किया है। हकीकत में बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं ... कि टीम इंडिया में नई दीवार के नाम से अपनी पहचान बना चुके पुजारा साल 2009 में ऐसी चोट से गुज़रे थे कि उन्हें ... डॉक्टर्स तक ने क्रिकेट छोड़ने तक की सलाह दे डाली थी।   . साल 2009 में लगी चोट   जी हां ... फटाफट क्रिकेट की मेगालीग IPL के दूसरे सीजन में चेतेश्वर पुजार को बाएं घुटने में ऐसी चोट लगी थी ... जिसके बाद उनका क्रिकेट करियर दांव पर लग गया था। आलम ये था कि डॉक्टर्स की सलाह पर उन्हें अपने घुटने का ऑपरेशन कराना पड़ा था ... इतना ही नहीं उन्हें क्रिकेट पिच से महीनों तक दूर भी रहना पड़ा था। कई जानकारों को लगा कि पुजारा फिर कभी क्रिकेट नहीं खेलेंगे ... लेकिन पुजारा ने हार नहीं मानी और सिर्फ 6 महीने बाद क्रिकेट की पिच पर वापसी कर जानकारों को गलत साबित कर दिया।     - साल 2012 में फिर लगी चोट   वक्त और किस्मत पुजारा पर धीरे-धीरे मेहरबान होने लगे थे ... लेकिन आईपीएल एक बार फिर पुजारा की किस्मत में ब्रेक लगाने की बड़ी वजह बना। इस बार सीजन-5 में पुजारा को उनके दाएं घुटने में चोट लगी। वो भी ठीक उस वक्त जब उनकी टीम इंडिया में जगह बिलकुल तय थी ... इस बार भी पुजारा को ऑपरेशन से गुजरना पड़ा ... जिसके बाद पुजारा 4 महीने तक अपने पैरों पर खडे नहीं हो पाए। लेकिन हार ना मानते हुए पुजारा ने पिच पर अपनी अगली वापसी के लिए ... फिर से मेहनत की औऱ वक्त को भी धोखा दे दिया।     बहरहाल अंत भला तो सब भला ... क्योंकि आज चेतेश्वर पुजारा वो नाम है ... जिसे ना सिर्फ भारतीय बल्कि वर्ल्ड क्रिकेट में किसी पहचान की ज़रूरत नहीं। सिर्फ 11 मैच लंबे टेस्ट करियर में दो-दो दोहरे शतक बना चुके पुजारा की मेहनत का इस्तेकबाल ... आज पूरी दुनिया कर रही है। या कहें आज हौसले औऱ जज्बे की वो मिसाल हैं जिससे भविष्य में भारतीय क्रिकेट को ना जाने कितने पुजारा मिलेंगे।