sportskhabar.blogspot.in

sportskhabar.blogspot.in
खेल से खेल तक

रविवार, 29 मार्च 2009

माही की छोटी सी दास्तान


सफरनामा

कभी रांची और आसपास के इलाकों में अपने बल्ले की चमक से नाम कमाने वाले
टीम इंडिया के मौजूदा कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी... अब विश्व में अपने जौहर का परचम
लहरा रहे हैं....लेकिन आज भी उनके कई फैन्स इस बात से तस्दीक नहीं रखते कि... कैसे
एक स्मॉल टाउन बॉय ने गली क्रिकेट से लेकर अपनी जगह आईसीसी के नंबर वन बल्लेबाज
या फिर टीम इंडिया के अब तक के बेहतरीन कप्तानों में से एक में बनाई है।
शुरू से बाइक्स के शौकीन रहे माही शायद अपने अंदर छिपे हुनर को
बहुत पहले भाप चुके थे..तभी तो स्कूल लीग के फाइनल में उनके द्वारा लगाई गई ताबड़तोड़
डबल सेंचुरी हो या फिर इंडिया ए की ओर से खेलते हुए केन्या में बनाई गई सेंचुरी हो.
हर मोर्चे पर महेंद्र सिंह धोनी कामयाबी की ओऱ बढ़ रहे थे और लगातार अपने आप को साबित भी करते जा रहे थे।

माही ने चयनकर्ताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिरकार छोटे शहरों में भी बड़े
लेवल पर प्रतिभा दिखाने वाले प्लेयर्स की कमी नहीं है...यही वजह थी की ईस्ट जोन के
चयनकर्ताओं के बीच माही ने अपने चयन को लेकर बहुत पहले ही खलबली मचा दी थी..
धोनी ने विकेट के पीछे अपने शानदार कीपिंग और पिच पर अपने विस्फोटक बल्लेबाजी से ये साबित कर दिया कि उनके जैसे प्रतिभाशाली प्लेयर को टीम इंडिया की सख्त जरुरत है..क्योंकि बीसीसीआई भी नयन मोंगिया जैसे कीपर के बाद कभी भी एक स्थाई और भरोसेमंद कीपर-बल्लेबाज नहीं ढ़ूढ़ पाए...जबकि दुनिया की टॉप टीमों के पास गिलक्रिस्ट,परोरे,बाउचर जैसे शानदार कीपर और बल्लेबाज थे..माही भी इसी लिस्ट में शुमार होना चाहते थे...

लेकिन इस दावे को और पक्का किया झारखंड क्रिकेट एसोशिएसन के प्रमुख अमिताभ चौधरी ने जिन्होंने धोनी के अपने सामने क्रिकेट को तराशते देखा है...एक प्रभावशाली आईपीएस अधिकारी के साथ चौधरी एक कुशल मैनेजर भी हैं..जिसकी बदौलत बीसीसीआई ने उन्हें विदेशी दौरे पर टीम इंडिया का मैनेजर भी नियुक्त किया था..चौधरी के साथ सौरभ गांगुली से बेहतर रिश्ते भी इस बात का प्रमाण है कि धोनी ने आखिरकार कैसे टीम इंडिया में दस्तक दी...भले ही धोनी ने अपने बलबूते पर आज भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई रिकॉरड्स पर सालों से लगे ब्रेक को बदलने में देर नहीं की हो लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए अपने माही ने सपनों का रेला जरुर लगाया था...तो फिर ये माही को हम क्यों न कहें...माही देट्स द वे माही वे ।
-----------कुमार विकास सिंह पत्रकार

रविवार, 22 मार्च 2009

सचिन जैसा पहले, अब भी वैसा ही........!




पुरानी बोतल में पुरानी ही शराब


टीम इंडिया के मास्टर बलास्टर सचिन तेंदुलकर ने हैमिल्टन टेस्ट में 160 रनों की शानदार पारी खेलकर ये साबित कर दिया कि उनके करियर की राह में कभी उम्र रोड़ा बन ही नही सकता।
हैमिल्टन टेस्ट में मिली जीत पूरी टीम इंडिया के लिए और भारत के क्रिकेट फैंस के लिए तो खास था ही इसके साथ –साथ क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन के लिए काफी यादगार रहेगा। 33 साल बाद किवी की सरजमीं पर मिली जीत से कप्तान माही इतने खुश हुए कि वो जीत का सेहरा मैन ऑफ द मैच रहे सचिन के सर ही बांध दिया। सचिन भी इस लम्हे को जीने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। और छोड़े भी क्यों क्योंकि ये प्रदर्शन सचिन के अब तक का न्यूज़ीलैंड दौरे पर सर्वश्रेष्ट प्रदर्शन था। सचिन को सन्यास लेने की सलाह देने वाले आलोंचको ने भी अपने सुर अब बदल लिए है औऱ मास्टर ब्लास्टर को लंबी रेस का घोड़ा बता रहे है।

खैर हैमिल्टन टेस्ट जीत कर तो टीम इंडिया ने इतिहास तो रच ही दिया इसके साथ साथ सचिन की बल्लेबाजी और जवां भी कर दिया है। सचिन के बारें में जितनी भी तारीफें की जाए वो कम है ...सचिन जैसा पहले थे अब भी वैसा ही है...यानि सचिन की बल्लेबाजी में जो अंदाज उनके डेब्यू टेस्ट मैच कराची में था वो अब भी बरकरार है..हालांकि भले ही सचिन अपने पहले टेस्ट मैच में ज्यादा रन स्कोर करने में कामयाब नहीं हुए थे लेकिन उनकी बल्लेबाजी का स्टाइल उस वक्त सब कुछ बयां कर गया। सचिन को अपना पहला टेस्ट शतक जमाने में करीब एक साल लग गए।
1990 में मैनचेस्टर में इंग्लैड के खिलाफ खेलते हुए सचिन दूसरी पारी में नाबाद 119 रन बनाए। तब से शुरू मास्टर का शतक बनाने का सिलसिला अब भी चल रहा है। पहला टेस्ट शतक 1990 में औऱ 42 टेस्ट शतक 2009 में यानि अपने 20 साल के अब तक के करियर में सचिन ने अपने अंदाज को नहीं बदला और न ही नाकामयाबी को कभी अपने ओऱ बढने दिया...इतिहास गवाह है जब जब सचिन पर सवाल उठा है तो मास्टर ब्लास्टर ने उसका जवाब अपने बल्ले से दिया है। अपने खेलने के अंदाज के बारे सचिन कहते है कि उनका अंदाज जो 20 साल पहले था अब भी वही है। इस 20 साल के दौरान क्रिकेट बदल गया, जुनून बदल गया, हालात बदल गए, अगर कोई नहीं बदला तो सचिन नहीं बदले। यानि हम कह सकते है कि पुरानी बोतल में पुरानी ही शराब।
-----रजनीश कुमार खेल पत्रकार

बुधवार, 18 मार्च 2009

न्यूज़ीलैंड की नई उम्मीद हैं राइडर


राइडर की रफ्तार

वन डे सीरीज़ शुरु होने से पहले न्यूज़ीलैंड टीम के कुछ खास बल्लेबाज़ों को ही टीम इंडिया के लिए खतरा माना जा रहा था...इसमें सबसे आगे नाम था विकेटकीपर बल्लेबाज़ ब्रैंडन मैंक्कुलम और आक्रामक बल्लेबाज़ रोस टेलर का...लेकिन सीरीज़ के परवान चढ़ते ही...एक तीसरा ही नाम सबके सामने आ गया ..जिसके बल्ले की रफ्तार ने राजधानी एक्सप्रेस ईशांत शर्मा को भी पटरी से उतार दिया....पिछले कुछ दिनों में भारतीय पेस बैटरी ने विरोधी बल्लेबाज़ों पर खासा दबाव बनाया है..लेकिन न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ जेस्सी राइडर के सामने टीम इंडिया के गंदबाज़ बेबस नज़र आए....राइडर सहवाग से खासे प्रभावित लगते है...और उनके शॉट खेलने का अंदाज़ बताता है कि ये बल्लेबाज़ किसी भी वक्त जोखिम उठाने की क्षमता रखता है...एक और खास बात ये है कि राइडर कभी भी गेंदबाज़ को उसके नाम के आधार पर सम्मान नही देते..तभी तो ऑकलैंड में राइडर ने ईशांत और ज़हीर को दिन में ही तारे दिखा दिए..
हालांकि लोगों को लगा कि राइडर की रफ्तार सिर्फ क्रिकेट के छोटे फॉर्मेंट तक ही सीमित है और इस बल्लेबाज में विकेट पर ज्यादा देर तक टिकने की काबिलियत नही है...इसलिए राइडर टेस्ट की चढ़ाई नही कर पाएंगे...लेकिन भारत के खिलाफ पहले ही टेस्ट में राइडर ने अपने आलोचको के मुंह में ताला जड़ दिया...विपरीत परिस्थिति और भारतीय गेंदबाज़ों की कहर बरपाती गेंदें ...राइडर के हौसंले को डगमगा नही सकी...राइडर ने धैर्य से बल्लेबाज़ी करते हुए टेस्ट क्रिकेट में अपना पला शतक पुरा किया....हालांकि नवर्स नाइंटीज के स्कोर पर पहुंचने के वक्त कप्तान धोनी ने राइडर के दुश्मन ईशांत को गेंदबाज़ी पर लगाया...पर राइडर नें संयम न ही खोया ...और चौक्के के साथ अपना शतक पूरा कर लिया....राइडर की ये पारी उनके विश्वास को जरुर बढ़ाएगी..और आने वाले वक्त में उनका बढ़ता आत्मविश्वास टीम इंडिया के लिए बड़ा खतरा हो सकता है...इसके अलावा अगर राइडर आईपीएल के सीज़न -2 में खेलते हैं...तो भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए उनकी बल्लेबाज़ी किसी ट्रीट से कम नही होगी...साथ ही पिछले सीज़न फ्लॉप रही बैंगलोर रॉयल चैंलेजर्स को राइडर के रुप में एक मैच विनिर भी मिल जाएगा ।

---- रवीश बिष्ट खेल पत्रकार

मंगलवार, 17 मार्च 2009

धोनी किस्मत का बाज़ीगर ?


धोनी किस्मत का बाज़ीगर ?


टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी... इंडिया के लक्की चार्म होने के साथ साथ... किस्मत के बाजीगर भी है..किवी देश का दौरा करने से पहले टीम इंडिया सीरीज को लेकर काफी सकते में थी...इसका काऱण टीम इंडिया का न्यूज़ीलैंड में खराब प्रदर्शन का इतिहास था...एक तरफ टीम के सारे खिलाड़ी औऱ पूर्व क्रिकेटर इस दौरे में जीत के लिए दुआ कर रहे थे...तो दूसरी ओर कप्तान धोनी श्रीलंका में सीरीज जीत कर कामयाबी के रथ पर आगे बढ़ते जा रहे थे....न्यूज़ीलैंड में जब टीम इडिंया किवी टीम से पहले दो 20 – 20 मैच में हारी तो सबने हार का पोस्टमार्टम कर ये फैसला लिया कि 2003-04 के दौरे की तरह इस बार भी टीम इंडिया की वतन वापसी खाली हाथ होगी....लेकिन मजबूद इरादे वाली धोनी की सेना और किस्मत के धनी खुद माही कहां आसानी से हार मानने वाले थे..20-20 का हार बदला लेने को बेताब माही की सेना जब पहले वनडे में मैदान पर उतरी तो टीम का हौसला बयां कर गया कि इस बार इतिहास रचना ही रचना है...और माही के मतवाले ने पहले ही वनडे में शानदार प्रदर्शन कर मुकाबले को 53 रनों से जीत लिया...इसके बाद किस्मत के धनी धोनी एक के बाद एक जीत हासिल करते..हालांक पांचवें और अंतिम वनडे मैच में किवी टीम टीम इंडिया पर भारी पड़ी और अंतिम वनडे में टीम इंडिया को हराने में कामयाब हो गई...लेकिन तब तक टीम इंडिया किवियों से सीरीज जीतकर 33 साल के भारत के सपने को पूरा कर दिखाया...वनडे सीरीज का खिताब जब कप्तान धोनी के हाथ में था...तब दुनिया के सारे दिग्गज क्रिकेटरों ने एक सुर में कहा...माही है किस्मत का बाज़ीगर...और पूरी दुनिया में धोनी की अगुवाई वाली टीम सबसे सुपर औऱ श्रेष्ठ है....झारखंड का ये राजकुमार अपने कारनामों से पूरी दुनिया को चकित कर दिया है...किवीलैंड के कांटो भरी पिचों पर जो काम लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर , वर्ल्ड चैंपियन कपिलदेव , अजहरूद्धीन ,मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर और प्रिंस ऑफ कोलकाता सौरव गांगुली नहीं कर सके वो काम माही ने अपने मतवालों के साथ एक झटके में कर दिखाया....औऱ धोनी के बारें में सबको कहना पड़ा ...माही इज द बेस्ट।


-----------रजनीश कुमार खेल पत्रकार

गुरुवार, 5 मार्च 2009

सचिन की जगह लेते सहवाग


फैंस की नई उम्मीद हैं सहवाग

अपनी बल्लेबाज़ी से मैच का नक्शा बदलने वाले सहवाग...अब क्रिकेट फैंस की नज़रों में भी सबसे उम्दा बल्लेबाज़ हैं....नब्बे के दशक में क्रिकेट फैंस जो उम्मीद सचिन तेंदुलकर से किया करते थे...वही उम्मीद अब सहवाग पर आकर टिकती है...लोग चाहते हैं...सहवाग बल्लेबाज़ी करने आए..गेंदबाज़ों की जमकर खबर ले....मैदान पर चौक्के छक्को की बरसात करे..और कभी आउट ना हों...नब्बे के दशक में क्रिकेट फैंस ये उम्मीद सचिन से करते थे...तब सचिन अकेली बैटिंग लाइन अप का ज़िम्मा संभालते थे...सचिन आउट.. तो मैच गया काम से...करोड़ो क्रिकेट फैन बस इस आस में ऱहते थे..कि कब सचिन एक और आतिशी पारी खेल कर उनके दिल की मुराद पूरी कर दें....सचिन ऐसा करते भी थे...उस दौरे में सचिन के आउट ने के बाद शायद ही कोई मैच दजेकना पसंद करता था..और जिस मैच में सचिन को आराम दिया जाता ...उसमें दर्शकों को फैंस की दिलचस्पी घट

जाती थी...अब यही बात सहवाग पर लागू होती है...सचिन टीम में हो या ना हो इससे फर्क नी पड़ात टीम ने उनके बिना भी वन डे में जीतना सीख लिया है...लेकिन सहवाग के बिना टीम इंडिया में कुछ अधूरा लगता है.. विरोधी टीम के गेंदबाज़ भी सचिन से बड़ा खतरा सहवाग को मानने लगे हैं...और सहवाग का आतिशी अंदाज़ तो टीम इंडिया की शुऱुआत का ट्रेड मार्क बन गया है ..कहना गलत ना होगा...कि टेस्ट क्रिकेट में जो कुछ भीड़ नज़र आती है..वो सहवाग जैसे बल्लेबाज़ों की कृपा से है...यही वजह है कि अब क्रिकेट फैंस सहवाग के खेल से ज्यादा मज़ा लूटते हैं..

रवीश बिष्ट (खेल पत्रकार)



बुधवार, 4 मार्च 2009

इंडीज़ के बल्लेबाज़ों की याद दिलाते हैं यूसुफ


ही-मैन यूसुफ पठान


यूसुफ पठान की बल्लेबाज़ी में दिन ब दिन निखार आता जा रहा ...है...यूसुफ ने एक ऐसे बल्लेबाज़ को तौर पर टीम इंडिया में जगह बना ली है...जो कभी भी मैच का पासा पलट सकता है....यूसुफ की खास बात ये है ..कि ये बल्लेबाज़ ...किस, भी गेंदबाज़ के आगे शॉट लगाने से नही डरता .....और मैच की कोई भी परिस्थिती हो...यूसुफ को अगर शॉट लगाने हैं तो वो जरुर खेलेंगे...यूसुफ की कद-काठी और उनका बैटिंग स्टाइल..सत्तर और अस्सी के दशक में खेलने वाले बेस्टइंडिज़ के बल्लेबाज़ों की याद दिलाता है... उस दौरे में पूरे वर्ल्ड क्रिकेट में इंडिज़ के बल्लेबाज़ो को जलवा था..वो किसी भी गेंदबाज़ का बुरा सपना हुआ करते थे...और गेंद को मैदान से बाहर पहुंचाना तो उनके बाएं हाथ का खेल था....यूसुफ पठान की बल्लेबाज़ी में भी ये सारी बातें नज़र आती है....आईपीएल फाइनल में जिस तरह से बड़े पठान ने वर्ल्ड क्रिकेट के सबसे कंजूस गेंदबाज़ मुरलीधरन पर छक्के लगाए थे...वो ये बताने के लिए काफी था...कि यूसुफ पर नाम का असर नही पड़ता ..वो मुरली को भी ऐसे खेल रहे थे..जैले कोई मंझा हुआ बल्लेबाज़ किसी नवोदित गेंदबाज़ को खेलता है.. इसके बाद यूसुफ का जलवा श्रीलंका दौरे पर भी देखने को मिला जब वन डे और फिर एकलौते ट्वेंटी-ट्वेंटी मैच में यूसुफ ने अपनी पावर हिटिंग से मैच को टीम इंडिया की झोली में डाल दिया....यूसुफ बेशक तकनीक से दक्ष बल्लेबाज़ ना हो लेकिन बढ़ती ट्वेंटी-ट्वेंटी क्रिकेट और वन डे क्रिकेट के लिए पठान एक लंबी रेस का घोड़ा है...


रवीश बिष्ट..खेल पत्रकार


कहां गई धोनी की हिटिंग ?


सिक्सर हीरो बने सिंगल किंग


कभी गली क्रिकेट से छक्के की बरसात करके टीम इंडिया में जगह बनाने वाले टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ...अब अपने खेल के विपरीत बल्लेबाज़ी करते हुए दिखाई दे रहे है ...धोनी ने जब इंटरनेशनल क्रिकेट में एंट्री की थी...तो उनके बड़े-बड़े हिट...क्रिकेट फैंस में काफी पॉपुलर हुआ करते थे...भलो कौना भूल सकता है जयपुर और उसके बाद विशाखापटनम में खेली गई उनकी पारियों को ...धोनी के बल्ले से रन ऐसे निकल रहे थे..मानों कोई मशीन गन से गोलियां बरसा रहा हो...धोनी ने गिलक्रिस्ट का रिकॉर्ड तोड़ा...और छक्के के साथ टीम इंडिया को मैच जिताना तो धोनी का अंदाज़ ही हो गया था...लंबी-लंबी जुल्फें...और लंबे-लंबे शॉट्स...धोनी को टीम इंडिया का नया सिक्सर बॉय कहा जाने लगा...शुरुआत में धोनी का स्ट्राइक रेट भी करीब 100 के आस-पास हुआ करता था...लेकिन जैसे ही धोनी के कंधो पर कप्तानी की ज़िम्मेदारी ...दी गई...टीम इंडिया का ये हार्ड हिटर सिंग्लस में खेलता नज़र आया...यानी धोनी के बल्ले से रन सिर्फ सिंगल्स में निकल रहे थे....छ्क्के तो छोड़िए ..चौक्के निकालना भी धोनी के लिए मुश्किल हो रहा है...क्या धोनी के खेल में आया बदलाव..कप्तानी की ज़िम्मेदारी की वजह से है...या फिर धोनी अब अपने खेल को लेकर ज्य्दा ही सतर्क हो गए है.....कहीं इसकी एक वजह आईसीसी रैंकिंग तो नही ..जिसमें करीब दो महीने से धोनी का राज चल रहा है.....धोनी के खेल को देखकर लग रहा है...कि वो आखिरी में नॉटआउट रहकर अपने औसत को भी बेहतर बनाने में लगे हैं....वेलिंग्टन टी-ट्वेंटी में धोनी की धीमी पारी ने दर्शकों को भी चौंका दिया...और दर्शकों ने पोस्टर के जरिए धोनी को ये संकेत दिए कि ये टेस्ट मैच नही है...साफ है धोनी की बैटिंग स्टाइल में आए बदलाव से क्रिकेट फैन भी नाराज़ हैं...और अब वो धोनी को भी इस बात का अहसास कराना चाहते हैं....धोनी की बैटिंग स्टाइल किसी की कॉपी नही है...नाही...उनके शॉट्स को किसी क्रिकेट बुक में देखा जा सकता है....लेकिन क्रिकेट फैंस अपने ही अंदाज़ से बॉल को हिट करने वाले इस बल्लेबाज़ से पुराने जलवे की उम्मीद कर रहे हैं...धोनी कुछ करो !
रवीश बिष्ट




टीम इंडिया की सुरक्षा बढ़ी

धोनी ब्रिगेड के लिए सुरक्षा ब्रिगेड।

लाहौर में हुआ हमला....

और क्रिकेट वर्ल्ड आ गया सकते में ....
क्या आतंकवादियों के निशाने पर अब क्रिकेटर्स हैं....
श्रीलंकाई टीम पर हुआ हमला...तो इसी ओर इशारा कर रहा है...पाकिस्तान में खेल भावना का संदेश देने आई...श्रीलंकाई टीम तो किसी बड़ी दुर्घटना से बच गई.... लेकिन इस घटना ने वर्ल्ड क्रिकेट को सतर्क तो कर ही दिया है....बीसीसीआई भी जानती है...कि आतंकवाद के हाथ किसी सीमा के मोहताज नही है....और इसलिए न्यूज़ीलैंड में खेल रही टीम इंडिया को बेहतर सुरक्षा मुहैया करना बेहद जरुरी है....बीसीसीआई से पहले टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी कड़ी सुरक्षा की मांग कर चुके हैं...लेकिन धोनी की चिंता आतंकवाद को लेकर नही बल्कि मैदान पर टीम इँडिया पर बोतल फेंकने वाले दर्शकों से थी....वहीं श्रीलंकाई खिलाड़ियों पर हुए हमले ने वर्लड क्रिकेट की नींद उड़ा दी हैं.....और न्यूज़ीलैंड क्रिकेट बोर्ड ने बीसीसीआई की बात मानते हुए ...टीम इँडिया की पुख्ता सुरक्षा की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं.....टीम इंडिया को न्यूज़ीलैंड में अभी 4 और वन डे और 3 टेस्ट मैच खेलने हैं ..इसके अलावा टेस्ट टीम में शामिल टीम इंडिया के 6 खिलाड़ियों को न्यूज़ीलैंड में घरेलू क्रिकेट भी खेलनी है..जाहिर हैं....टीम इंडिया के न्यूज़ीलैंड दौरे की अभी केवल शुरुआत ही हुई है...और टीम इँडिया को न्यूज़ीलैंड में काफी वक्त गुज़ारना है....ऐसे में बीसीसीआई को इस बात पर भी ध्यान देना होगा...कि विदेंशी दोरे पर टीम इंडिया की पुख्ता सिक्योरिटी...दौरा खत्म होने तक कायम रहे....और इसे सिर्फ कुछ दिनों की बात मानकर सिक्योरिचटी में किसी भी तरह की ठील ना दी जाए......साथ ही बीसीसीआई को खिलाड़ियों को भी ज्यादा सुरक्षा के बीच भी बेहतर माहौल देने की कोशिश करनी होगी..जिससे टीम के खेल पर असर ना पड़े .


-----रविश बिष्ट खेल पत्रकार

हमले का आईपीएल पर असर




क्या होगा IPL का ?




पाकिस्तान की सरज़मी पर श्रीलंकाई क्रिकेट टीम पर हुए हमले की गूंज चारो और सुनाई दे रही है...और बीसीसीआई की मेगा लीग आईपीएल पर भी इन हमलों का असर दिखाई दे रहा है। आईपीएल के आयोजन को लेकर आशंकाए इस लिए भी ज्यादा जताई जा रही है क्योंकि उसी दौरान देश में लोकसभा चुनाव है और सुरक्षा के लिहाज से क्या भारत दो मेगा EVENT एक साथ संभाल सकता है।
क्रिकेट के काले दिन के बाद ...
अब आईपीएल पर आ गई है ...
आयोजन की आफत ...
क्योंकि ...
फिर निशाने पर है क्रिकेट ...
जी हां ... पाकिस्तान में श्रीलंकाई क्रिकेट टीम पर हमला क्या हुआ वर्ल्ड क्रिकेट सकते में आ गया है ... और अब इस हमले की गूंज का असर पड़ रहा है ... बीसीसीआई की मेगा लीग यानि इंडियन प्रीमियर लीग पर । मुंबई पर हुए आतंकी हमलों के बाद वैसे ही देश में बड़े खेल आयोजनों के दौरान विदेशी खिलाड़ियों की सुरक्षा पर चिंता बढ़ रही थी। लेकिन अब गृह मंत्रालय ने भी ये कहते हुए साफ कर दिया है कि चुनावी फिज़ा में आईपीएळ का सीज़न-टू आयोजित करना सुरक्षा के मद्देनज़र बड़ जुआ हो सकता है। आगामी दो महीनों के दौरान ऐसा वक्त रहेगा जब सत्ता के गलियारों में पहुंचने के लिए ... देश के कोने-कोने में राजनेता मतदाताओं के पास अपने प्रचार और रैलियों में व्यस्त रहेंगे। वहीं दूसरी ओर यही वो वक्त रहेगा जब इंडियन प्रीमियर लीग के दौरान ... देश के करीब आठ-आठ बड़े शहरों में क्रिकेट अपनी करवट ले रहा होगा। ज़ाहिर है चुनावों के साथ-साथ क्रिकेट के मेगा टूर्नामेंट में सुरक्षा को चाक-चौबंद रखना सरकार के लिए सिरदर्दी की वजह बना हुआ है। ऐसे में मुमकिन है कि आईपीएळ के तय कार्यक्रम में बदलाव कर दिया जाए। लेकिन बदकिस्मती ये है कि लीग के 40 मैचों के आयोजन के लिए बोर्ड को साल में दूसरा कोई मौका दिखाई नहीं दे रहा। मतलब साफ है कि दूसरे सीज़न में आईपीएळ के टलने का मतलब होगा नुक्सान ही नुक्सान... जो एक अनुमान कते मुताबिक करीब 1000 करोड़ का आंकड़ा पार कर सकता है। साफ है कि सीज़न-टू में आईपीएल के आकाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ और सिर्फ आयोजन रहेगा ... क्योंकि अब ये मुद्दा पैसों के साथ-साथ ... सबके लिए साख का सवाल भी बन चुका है।


----रविश बिष्ट


खेल पत्रकार