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खेल से खेल तक

रविवार, 28 अप्रैल 2013

मास्टर से महान माही !


27 APRIL 2013 वर्ल्ड क्रिकेट में कामयाबियों की मिसाल बन चुके सचिन तेंदुलकर औऱ महेन्द्र सिंह धोनी की तुलना तो आए दिन होती रहती है ... लेकिन अगर कोई ये कहे कि धोनी सिर्फ सचिन से ही नहीं बल्कि ... इतने महान हैं जितना 21वीं शताब्दी में किसी भी खेल का कोई दूसरा खिलाड़ी नहीं तो आप क्या कहेंगे ? जी हां सचिन औऱ धोनी की इसी महानता की इसी बहस एक बार फिर शुरू हो गई है ... आपके सामने रखेंगे वो आंकड़ें जो कभी सचिन को ... तो कभी धोनी को बताते हैं महान। क्रिकेट की पिच से दूर एडवर्ल्ड के में भी सचिन नहीं बल्कि धोनी को कहा जाता है जेंटलमैन का पारस पत्थर। -------------------------------------------------------------------------------------------------- DHONI THE MICHAEL JORDAN OF 21ST CENTURY वर्ल्ड क्रिकेट के सबसे महान खिलाड़ियों में शुमार हो चुके सचिन तेंदुलकर ... और महेन्द्र सिंह धोनी के खेल के बारे में तो अक्सर तुलनाएं देखने को मिलती रही हैं । लेकिन मौजूदा वक्त में जिस बात का ज़िक्र होने से ... एक नई बहस का जन्म हो गया है वो ये है कि क्या धोनी इतने महान हैं ... कि उन्हें ना सिर्फ क्रिकेट बल्कि खेलों की ही दुनिया के ऑलटाइम ग्रेट कहे जाने वाले अमेरिकी बॉस्केटबाल लेंजेंड माइकल जॉर्डन के जितना महान मान लिया जाए। जी हां ... अक्सर भारतीय खिलाड़ियों की खामियां निकालने के लिए जानी जाने वाली ब्रिटिश मीडिया अब धोनी की इतनी मुरीद हो गई है कि उसने ... माही को 21वीं सदी का सबसे महानतम खिलाड़ी घोषित कर दिया है। ब्रिटिश अखबार ... The Telegraph ने धोनी की तुलना 20वीं सदी के सबसे महान खिलाड़ी माइकल जॉर्डन से की है। अखबार के मुताबिक जैसे धोनी मुश्किल से मुश्किल परिस्थिती में भी अपना धैर्य रखते हुए टीम को जीत दिला देते हैं ... कुछ वैसा ही 80 और 90 के दशक में माइकल जॉर्डन भी NBA की अपनी बॉक्सेटबॉल टीम शिकागो बुल्स के लिए किया करते थे। अखबार के मुताबिक धोनी ने बार-बार इस बात को साबित भी किया है ... फिर चाहे बात इंटरनेशनल क्रिकेट की हो जहां उन्होंने टीम इंडिया को कई मौकों पर जीत दिलाई ... या Indian Premier League की जहां वो अपनी टीम चेन्नई सुपरकिंग्स की सबसे मज़बूत कड़ी बन चुके हैं। अखबार में IPL-6 में खेले गए चेन्नई के पिछले मैच का भी ज़िक्र है ... जहां धोनी की तारीफ करते हुए ये भी लिखा गया है ... कि कैसे हैदराबाद के खिलाफ अंतिम 4 ओवरों में 46 रनों की दरकार के बावजूद ... धोनी ने अपना धैर्य नहीं खोया। और जीत के लिए ज़रूरी 46 में से 41 रन महज 12 गेंदों में बना दिए। शायद यही वजह है कि धोनी को भी उनकी काबिलियत की वजह से ... कैप्टन कूल कहा जाता है। लेकिन महानता की बहस में उनकी तुलना ऑलटाइम ग्रेट में किया जाना यकीनन वो उपलब्धि है ... जिसका सिर्फ ज़िक्र होना भी बड़ी बात है। ---------------------------------------------------------------------------------- COMPARISON OF SACHIN N DHONI ONFIELD STATS एक का बल्ला करता हैं ब्लास्ट ... तो दूसरे के बल्ले से निकलती हैं आग । एक है शतकों का शहंशाह तो दूसरा है गेंदबाजों के लिए काल ... जी हां टीम इंडिया के दो सबसे धुंरधर बल्लेबाजों सचिन तेंदुलकर और महेंद्र सिंह धोनी के बारे में आज जेंटलमैन गेम के जानकार सिर्फ यही कहते हैं। हकीकत तो यही है कि इन दोनों के बल्ले ... जब बेखौफ होकर आक्रमण करते हैं तो दुनिया का बड़े से बड़ा गेंदबाज भी बौना नजर आता है। बतौर कोई शक नहीं कि बतौर कप्तान धोनी ना सिर्फ टीम इंडिया बल्कि वर्ल्ड क्रिकेट की किसी भी टीम के कप्तान से ज़्यादा कामयाब हैं ... लेकिन अगर बात अकेले बल्लेबाज़ी के आंकड़ों की होगी तो ... बात चाहे मैचों की हो, रनों की, शतकों या अर्धशतकों की ... इंटरनेश्नल क्रिकेट की पिच पर करीब ढाई दशक या 24 साल बिता चुके सचिन ... धोनी से कही आगे खड़े नज़र आते हैं। करियर में 198 टेस्ट खेल चुके सचिन ने 53.86 की औसत से रिकॉर्ड 15837 रन बनाए हैं। जिसमें 51 शतक और 67 अर्धशतक शामिल हैं । वहीं बात करें धोनी की तो 8 साल के अपने करियर में खेले 77 मैचों में माही करीब 40 की औसत से सिर्फ 4209 रन बना पाए हैं। इसमें 6 शतक और 28 अर्धशतक शामिल हैं। इसी तरह वनडे क्रिकेट में भी जहां सचिन ने किसी भी दूसरे बल्लेबाज़ से ज्यादा लंबे करियर में 463 मैचों में 44.83 की औसत से सबसे ज़्यादा 18426 रन बनाए हैं... इसमें भी सचिन के नाम 49 शतक और 96 अर्धशतक शामिल हैं। वहीं धोनी की बात करे तो धोनी ने टीम इंडिया की ब्लू जर्सी में खेलते हुए अब तक 219 मैचों में 51.85 की औसत से 7259 रन बनाए हैं ... जिसमें 8 शतक और 48 अर्धशतक शामिल हैं इसी तरह करियर की अन्य कामयाबियों में सचिन की एक और उपलब्धि उन्हें मिले मैन ऑफ द मैच हैं ... जहां मास्टर ब्लास्टर धोनी से आगे नज़र आते हैं। अपने क्रिकेट करियर में सचिन को 62 बार वन-डे जबकि 14 बार टेस्ट मैचों में मैन ऑफ द मैच का खिताब मिल चुका है ... जबकि मैन ऑफ द सीरीज़ खिताब से वो 5 बार नवाज़े जा चुके हैं। GFX जबकि धोनी को करियर में 18 बार वन-डे और सिर्फ 2 बार टेस्ट क्रिकेट में मैन ऑफ द मैच का खिताब मिला है। हालांकि धोनी मैन ऑफ द सीरीज़ के खिताब से 6 बार नवाज़े जा चुके हैं ... लेकिन ये सभी मौके वन-डे फॉर्मेट में ही देखने को मिले। साफ है रिकॉर्ड्स के मामले में सचिन फिलहाल धोनी से कहीं आगे हैं ... लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि जिस रफ्तार से माही की कामयाबियों का ग्राफ बढ़ रहा है वो अपना करियर खत्म होते-होते शायद इस फासले को कम ज़रूर कर देंगे। ------------------------------------------------------------------------------------ DHONI BETTER FINISHER THAN SACHIN एक है शतकों का शहंशाह तो दूसरा है मैच जिताने में महारथी एक नाम दर्ज हैं ...एक दो नहीं पूरे सौ शतक... तो दूसरे ने दिलाया ... इतिहासिक वर्ल्डकप.... जी हां ...आज माही अगर मास्टर की महानता को ललकारते नज़र आ रहे हैं ..तो उसमें धोनी की वो अदम्य शाहस भी शामिल है..जहां उन्होंने टीम इंडिया को एक दो नहीं बल्कि की बार मैच जिताए ... जबकि इसके उलट सचिन ने टीम इंडिया के शतकों का शतक तो पूरा किया ... लेकिन बेस्ट मैच फिनिशर का तमगा आज भी धोनी के नाम है ... ... मैच कहां फंसा है ..उसे फिनिसिंग टच कैसे देना है ... कैसे टीम इंडिया के सरताज़ बनाना है ...धोनी इसमें माहिर हैं ... ... जिसकी सबसे बड़ी मिसाल वो इतिहासिक वर्ल्डकप फाइनल है.. जहां बैक फुट पर नज़र आ रही टीम इंडिया को हाई प्रेशर गेम में धोनी ने 91 रनों की नाबाद पारी के साथ कुछ इस अंदाज़ में चैंपियन बनाया ... RELIEF जबकि सचिन मुहाने पर की बार फसते ही दिखे हैं यकीन ना हो तो ये आंकड़े देखिए सचिन ने अपने 23 साल लंबे करियर में टीम इंडिया के लिए 463 वनडे मुकाबले खेले हैं ..जिसमें से टीम इंडिया 200 मौकों पर हार का सामना करना पड़ा है ... जिसमें से 49 शतक लगाने वाले सचिन 14 मौकों पर शतकीय पारी खेलने के बावजूद टीम इंडिया का हार नहीं टाल सके हैं जबकि दूसरी ओर धोनी के धमाके का असर ये हैं ...219 वनडे मुकाबलों में माही 79 बार नाबाद लौटे हैं ..जिसमें से 62 बार वो टीम इंडिया को जीत दिलाने में कामयाब हुए हैं ..जबकि वो सिर्फ 6 बार ऐसा करने से चूके हैं इतना ही नहीं मैच जिताने के मामले में सचिन धोनी से पीछे हैं ही ...लेकिन खुद के लिए खेलने का सवाल भी सचिन पर हमेसा उठते रहे हैं ..जहां जानकारों के मुताबिक अपने सौवें शतक के लिए सचिन इतना धीमा खेले ..कि टीम इंडिया को बांग्लादेश के खिलाफ भी मैच गवांना पड़ गया साफ है ... इस मुहाने पर भी माही से मास्टर के सामने महान नज़र आते हैं... क्योंकि अगर मैच फंसा हो ..और रन रेट की दरकार 10 से उपर की भी हो ...तो आज के युवा की मांग मास्टर नहीं माही हैं। ------------------------------------------------------------------------------------ DHONI THE PROVEN LEADER SACHIN THE FAILURE ... ट्वेंटी-20 वर्ल्डकप, टेस्ट क्रिकेट की नंबर-1 की कुर्सी औऱ फिर वन-डे वर्ल्डकप ... महेन्द्र सिंह धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया को हासिल हुई ये वो उपलब्धियां हैं ... जिनकी बदौलत भारतीय क्रिकेट के फैन्स को बादशाहत का जश्न मनाने का मौका तीन-तीन बार मिला । अपने कभी ना हार मानने वाले जज़्बे और धैर्य के साथ टीम को मुश्किल से मुश्किल हालात से उबारना धोनी को बखूबी आता है ... फिर बात चाहे इंटरनेशनल क्रिकेट की हो ... या फिर IPL जैसी घरेलू फटाफट क्रिकेट की लीग की। माही की कप्तानी के मुरीदों की कमी नहीं ... धोनी के फैन्स तो यहां तक कहते हैं कि अगर उनका कैप्टन कूल क्रीज़ पर मौजूद है तो हर अनहोनी ... धोनी के रहते होनी बन जाती है। धोनी आज भारत के सबसे सफल कप्तान हैं ... धोनी की कप्तानी में अब तक टीम इंडिया खेले कुल 47 टेस्ट खेले हैं ... जिनमें से टीम इंडिया को 24 में जीत और सिर्फ 12 में हार मिली है। इसी तरह वन-डे क्रिकेट में भी धोनी ने बतौर कप्तान टीम को ... 135 मैचों में से 77 जीत दिलाई हैं। इनमें से 47 मैचों में टीम को हार मिली है ... 3 मैच टाई रहे जबकि 8 मैच बेनतीजा रहे। वहीं सचिन तेंदुलकर भले ही बतौर क्रिकेट के ऑलटाइम ग्रेट्स में शुमार माने जाते रहे हों ... लेकिन बतौर कप्तान उनमें कभी भी आत्म विश्वास नज़र नहीं आया। बल्कि हालात तो ऐसे रहे कि कप्तानी के दबाव में ... उनका खुद के खेल पर असर पड़ने लगा था। जिससे बचने के लिए उन्होंने टीम की कप्तानी खुद ही छोड़ भी दी थी ... बल्लेबाज़ी में रिकॉर्ड्स के शिखर पर बैठे सचिन बतौर कप्तान टीम इंडिया को 25 टेस्ट में से सिर्फ 4 में ही जीत दिला सके ... जबकि 9 में उन्हें हार मिली। इसी तरह वन-डे क्रिकेट में भी टीम को बतौर कप्तान 73 में से सिर्फ 23 मैचों में जीत दिला सके ... जबकि 6 मैच टाई रहे ... इसमें भी एक मैच बेनतीजा रहा था। ... दूसरी तरफ धोनी की कप्तानी की खास बात ये है कि ज़िम्मेदारी के साथ उनके खेल में और भी निखार आ गया है ... टेस्ट, वन-डे औऱ ट्वेंटी-20 हर फॉर्मेंट में धोनी ... टीम में अलग-अलग मोर्चे पर ऐसा आत्मविश्वास भर चुके हैं । IPL में भी धोनी की कप्तानी का जलवा खूब बोलता है जहां वो अपनी टीम को लीग के खेले पिछले हर सीज़न में टॉप-4 में पहुंचाने के अलावा ... 2 बार खिताब भी जिता चुके हैं। आज धोनी वर्ल्ड क्रिकेट के इकलौते ऐसे कप्तान हैं ... जिनके नाम क्रिकेट के हर फॉर्मेट में अपनी टीम को ना सिर्फ जीत दिलाने बल्कि चैंपियन बनाने की उपलब्धि भी दर्ज हो चुकी है। ज़ाहिर तौर पर बतौर कप्तान धोनी वो शक्सियत हैं जिस जैसी दूसरी मिसाल वर्ल्ड क्रिकेट में ढूंढने से भी नहीं मिलेगी। ------------------------------------------------------------------------------------ DHONI BIGGER BRAND THAN SACHIN महेंद्र सिंह धोनी और सचिन तेंदुलकर सिर्फ भारतीय ही नहीं बल्कि वर्ल्ड क्रिकेट की पिच के भी ... सबसे कामयाब चेहरे हैं। इनकी शख्सियत का पूरी दुनिया सजदा करती हैं ... । यही वजह है कि क्रिकेट की पिच पर प्रदर्शन की बदौलत ... इन दोनों पर शौहरत औऱ कामयाबी की भी अच्छी खासी बारिश होती है। हालांकि फर्क सिर्फ इतना है कि यहां हालिया बरसों में धोनी ... सचिन से काफी आगे निकल गए सचिन रमेश तेंदुलकर औऱ महेन्द्र सिंह धोनी ... जेंटलमैन गेम क्रिकेट के इन दो सितारों के बारे में क्या कहा जाए। अगर 23 साल से जारी अपने बेमिसाल करियर के दम पर ... सचिन वर्ल्ड क्रिकेट के सबसे बड़े नाम हैं ... तो दूसरी तरफ महज़ साढे 8 साल के क्रिकेट करियर ... औऱ 5 साल की कप्तानी के करियर के दम पर महेन्द्र सिंह धोनी हैं ... जिन्हें दुनिया जेंटलमैन गेम का सबसे शातिर कप्तान मानने लगी है। रिकॉर्ड्स औऱ उपलब्धियों के मंच पर भले ही दोनों की तुलना ना हो सके ... लेकिन अगर बात बड़े ब्रांड की होगी ... तो कहा जा सकता है कि धोनी सचिन से एक-तिहाई करियर होने के बावजूद मास्टर से बड़े बड़े ब्रांड बन चुके हैं। पिछले कुछ बरसों में 22 गज की पिच पर बतौर कप्तान और बल्लेबाज़ मिली बेशुमार कामायाबी से धोनी एड वर्ल्ड का नए किंग बन चुके हैं। धोनी आज बाज़ार के वो पारस पत्थर हैं ... जिसके छूते ही चीज सोना बन जाती है। और इस बात की तसदीक ब्रांड एक्सपर्ट, मीडिया analyst और स्पोर्ट्स मार्केटिंग एजेंसियों के आंकड़े भी साफ-साफ करते हैं। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक धोनी की मौजूदा ब्रांड वेल्यू 300-350 करोड़ रुपयों से भी ज़्यादा की है ... जबकि 40 के हो चुके सचिन की ब्रैंड वेल्यू 150-200 करोड़ रूपयों की है। धोनी फिलहाल 24 ब्रांड्स को एंडोर्स कर रहे हैं ... जबकि सचिन का नाम 17 ब्रांड्स के साथ जुड़ा हुआ है। मौजूदा वक्त में धोनी एक ब्रांड को प्रमोट करने के सालाना 10 से 12 करोड़ रुपये लेते हैं ... तो दूसरी तरफ सचिन एक ब्रांड एंडोर्समेंट के लिए सालाना 7 से 9 करोड़ रूपए लेते हैं इतना ही नहीं एड वर्ल्ड से होने वाली कमाई के मामले में भी धोनी सचिन से मीलों आगे हैं। इस कमाई के नाम पर जहां धोनी ने पिछले साल 128 करोड़ रूपयों की कमाई की ... तो वहीं सचिन ने सिर्फ 70 करोड़ रूपए ही कमाए। मतलब साफ है कि धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया को मिली कामयाबियों ने ... माही के सेलीब्रिटी STATUS और ब्रांड वेल्यू दोनों को ब्रांड सचिन से मीलों आगे पहुंचा दिया है। जिससे फिलहाल तो कोई औऱ टक्कर देता नज़र नहीं आ रहा। --------------------------------------------------------------------------------- COMPARISON OF ACHIEVEMENTS BETWEEN SACHIN N DHONI सवाल है कि धोनी के धमाके की गूंज ज्यादा है या फिर मास्टर के ब्लास्ट की ... जबाव ढूंढना यकीनन आसान भी नहीं है। क्योंकि एक ने जहां 23 साल से भी ज़्यादा अरसे से वर्ल्ड क्रिकेट पर राज किया है ... तो दूसरे ने भी मौजूदा वक्त के सिर्फ 8 साल के करियर में वो मुकाम हासिल किया जिसे दुनिया सलाम करती है। सचिन औऱ धोनी दोनों की ही ज़िंदगी से जुड़ी कुछ और उपलब्धियों पर जब आप नजर डालेंगे तो आपको खुद ब खुद पता चल जाएगा कि महान कौन है सचिन महान हैं ..इसमें कोई शक नहीं ....लेकिन महानता कि इस मिसाल में आज जमाना धोनी का है .... आज सचिन के रिकॉर्ड्स की फैंस दाद देते है ... तो धोनी का धमाका उन्हें झूमने पर मज़बूर कर देता है ..और शायद यही वजह है कि वर्ल्ड क्रिकेट के इतिहास में सचिन ने मैदान के बाहर जो कुछ 23 सालों के लंबे करियर में हासिल किया...उतना तो नहीं लेकिन काफी हद तक उसे धोनी ने ...महज़ 8 साल में अपने नाम करवा लिया ... बात ICC के दुनिया के दबंग ODI खिलाड़ियों की फेहरिस्त में जगह बनाने की हो ... या ICC PLAYER OF THE YEAR बनने की माही आज हर जगह मास्टर को टक्कर देते हैं ... सचिन को तीन बार ICC World ODI XI में (2004, 2007, 2010) तो धोनी को चार मौकों पर ICC World ODI XI में (2008, 2009, 2010, 2011) में शामिल किया गया है सचिन को अगर वायूसेना में ग्रुप कैप्टन की उपाधी से नवाज़ा गया तो धोनी भी टेरेटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल की ऑन्रेरी रैंक से सम्मानित हुए सचिन को साल 1997 में विज़डन क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुना गया तो धोनी को दो बार (2008, 2009) ODI प्लेयर ऑफ द ईयर के खिताब से नवाज़ा गया सचिन के पास ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया का सम्मान है ..तो धोनी को De Montfort University से डॉक्टरेट की उपाधी पा चुके हैं बात सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न की करें ..तो सचिन को ये सम्मान लेने में जहां 6 साल लग गए ... तो धोनी ने अपने इंटरनेशनल करियर के तीसरे साल में ही इस पर कब्जा कर लिया हालांकि ....Padma Vibhushan....Padma Shri....Sir Garfield Sobers trophy...जैसे कुछ एक सम्मान के साथ सचिन ज़रूर धोनी से आगे खड़े नज़र आते हैं ... लेकिन दोनों के क्रिकेटिंग करियर के सालों के अंतर को देखे तो ...23 और 8 साल के बीच फासला साफ बताता है... कि धोनी के धमाके की गुंज का असर ..मास्टर के ब्लास्ट से कहीं ज्यादा है। रजनीश कुमार खेल पत्रकार

गुरुवार, 25 अप्रैल 2013

कब मिलेगा सचिन को भारत रत्न ?


MA. पद्म विभुषण जिसे मिला... पद्मश्री से जिसको नवाज़ा गया... राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड से... जिसको सम्मानित किया गया ... अपार कामयाबियों के लिए... जिसको दिया गया अर्जुन अवॉर्ड... उसे कब मिलेगा देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ... ? ... जी हां... बात सचिन की महानता की चली है... तो एक बार फिर ज़िक्र भारत रत्न का आ गया है... क्योंकि यही वो सम्मान है... जिससे सचिन अब तक महरूम है... दुनिया जानती है और मानती है कि सचिन देश के सबसे बड़े रत्न हैं... उन्होंने अपने शानदार खेल के दम पर पूरी दुनिया में हिन्दुस्तान का जो नाम रौशन किया है... वो शायद कोई दूसरे क्रिकेटर नहीं कर सका है... ऐसे में सवाल यही है कि सचिन को देश का ये सबसे बड़ा नागरिक सम्मान आखिर कब मिलेगा... हालांकि ऐसा नहीं है कि सचिन इस सम्मान के लायक नहीं हैं... बल्कि क्रिकेट के इस भगवान का पिछले 24 साल का बेमिसाल करियर लगातार ये मांग कर रहा है कि अगर कोई स्पोर्ट्स मैन भारत रत्न का सबसे बड़ा हकदार है... तो वो सिर्फ और सिर्फ सचिन तेंदुलकर हैं... और यही वजह है कि हिन्दुस्तान के कौने-कौने से एक बार नहीं बल्कि सैंकड़ों पार ये आवाज़ उठी है कि सचिन को भारतरत्न से नवाज़ा जाना चाहिए... क्या खास और क्या आम ... क्या बॉलीवुड की हस्तियां और क्या राजनेता... हर कोई चाहता है कि सचिन को देश का ये सबसे बड़ा नागरिक सम्मान अब दे देना चाहिए... USE CELEBRITIES BYTE ON SACHIN BYTE ... और तो और अब तो भारतरत्न और सचिन के बीच आने वाली वो दीवार भी गिर चुकी है... जो सचिन को भारतरत्न बनने से रोक रही थी... दरअसल भारतरत्न दिए जाने वालों में खेल और खिलाड़ी शामिल नहीं थे... लेकिन स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री की पहल के बाद ... इसके भी नियमों में बदलाव किया जा चुका है... यानि सारी अड़चने खत्म हो चुकी हैं... वैसे भी ऑस्ट्रेलिया जैसा मुल्क भी सचिन को अपने देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान यानि ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया देकर ये दिखा चुका है कि सचिन की शख्सियत क्या है... सचिन का क्रिकेट की दुनिया में क्या रूतबा है...ऐसे में भारत सरकार ... सचिन को भारत रत्न से नवाजती है... तो फिर सचिन और उनके फैंस के लिए उनके चालीसवें जन्मदिन पर इससे बड़ा तोहफा कोई और नहीं हो सकता।  

सच्चू से सचिन तेंदुलकर तक का सफर


  बच्पन ... शरारतों का वो दौर... जहां हर बच्चे को मस्ती सूझती है... लेकिन सच्चू के सचिन बनने की कहानी इसी बचपन से शुरू हुई ... सचिन एक आदर्श स्टुडेंट और एक आदर्श शिष्य की तरह अपने गुरू की हर बात मानते चले गए... हालांकि सचिन को उनका पहला गुरु उनके घर में ही यानि बड़े भाई के रुप में मिला... वो बड़े भाई अजीत तेंदुलकर ही थे... जिन्होंने टेनिस प्लेयर बनने की चाहत रखने वाले सचिन को क्रिकेट से रूबरू कराया... शायद अजीत ने दूर कहीं आने वाले सचिन तेंदुलकर को... अपने इस भाई में देख लिया था... और यही वजह रही कि उन्होंने सचिन को ... क्रिकेट के उस द्रोणाचार्या से मिलवाया ... जिसके मार्ग दर्शन में सच्चू आज सचिन बने... और वो थे बॉम्बे के मशहूर क्रिकेट कोच रमाकांत आचरेकर ... आचरेकर साहब पहली बार सचिन से मुंबई के शिवाजी पार्क में मिले... और उन्होंने सचिन के टैलेंट को पहचाना और सच्चू को सचिन बनाने की कामयाब कोशिशें शुरू कर दी... और यही से शुरू हुआ एक आदर्श शिष्य का क्रिकेटिंग करियर ... हालांकि सचिन के लिए सर रमाकांत आचरेकर से क्रिकेट की बारीकियां सीखना आसान नहीं था... क्योंकि जहां आचरेकर सचिन को कोचिंग दिया करते थे... वो क्रिकेट के इस भगवान के घर से दूर था... लिहाज़ा आचरेकर साहब ने सचिन को दादर के पास ही शरदआश्रम स्कूल में शिफ्ट करने की सलाह दी ... सचिन ने भी आदर्श शिष्य की तरह अपने गुरु की बात को माना और अपना दाखिला शरदआश्रम में करा लिया ... अब सचिन के सामने स्कूल और कोचिंग दोनों की जिम्मेदारियां थी... लिहाज़ा सचिन अर्ली मोर्गिंग प्रैक्टिस करके स्कूल जाते और फिर शाम को दोबारा प्रैक्टिस करने के लिए आ जाते... सचिन के बारे में कहा जाता है कि वो घंटों प्रैक्टिस किया करते थे... आचरेकर को भी सचिन को प्रैक्टिस करवाने में बड़ा मज़ा आता था... सचिन जब प्रैक्टिस करके थक जाते थे... तो आचरेकर साहब विकेट पर एक एक रुपये का सिक्का रखते... और गेंदबाज़ से कहते कि जो इस सिक्के को गिराएगा ... सिक्का उसी का हो जाएगा... लेकिन वो नौबत कभी नहीं आई ... क्योंकि पूरे सेशन तक कोई भी गेंदबाज सचिन को आउट नहीं कर पाता था... लिहाज़ा एक रुपये का सिक्का ज्यादातर मौकों पर सचिन का ही हो जाता था...आज भी सचिन के पास अपने गुरू के दिए 13 सिक्के मौजूद हैं... इतना ही महान सचिन तेंदुलकर बनने के बाद भी जब कभी भी सचिन अपने गुरू आचरेकर से मिलते हैं... तो एक आदर्श शिष्य बनकर ही मिलते हैं।  

युवओं को प्रेरित करते हैं सचिन तेंदुलकर


ख्वाहिशें जब परवान चढ़ती हैं... तो सचिन तेंदुलकर का चेहरा सामने आता है... तमन्नाएं जब जवां होती हैं... तो सचिन का खेल रास्ता दिखाता है ... नाकामियों से जब वास्ता पड़ता है... तो सचिन का करियर सहारा देता है... जी हां... सचिन के बेमिसाल 24 साल के करियर को अगर हकीकत के आइने में उतारा जाए... तो कुछ ऐसी ही तस्वीरें सामने आती हैं... क्योंकि सचिन तेंदुलकर क्रिकेट की दुनिया का वो कोहिनूर हीरा हैं... जिसकी चमक से ना जाने कितने बैट और गेंद पकड़ने वाले नौसिखिए खिलाड़ी ... क्रिकेटर बन चुके हैं... सचिन को आदर्श मानकर ... सैकड़ों क्रिकेटर्स ने वर्ल्ड क्रिकेट में अपना मुकाम हासिल किया है... और जिसकी मिसाल मौजूदा टीम इंडिया में ही दी जा सकती है... सचिन का 24 साल का क्रिकेटिंग करियर इस बात का गवाह है कि सचिन से एक नहीं दो नहीं ... बल्कि तीन तीन पीढ़ियां ...क्रिकेट की बारीकियां सीखीं हैं...कपिल देव से लेकर मौजूदा कप्तान धोनी की टीम में कई ऐसे युवा क्रिकेटर्स आए ... जिन्होंने सचिन को अपना आदर्श मानकर क्रिकेट सीखा और साथ में खेला... और यही वजह है कि जब उन क्रिकेटर्स का ड्रेसिंग रूम में सचिन से सामना होता है ... तो उनकी की भी खुशी का ठिकाना नहीं रहता ... उन्हें विश्वास नहीं होता कि जो क्रिकेटर उनके लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहा... वो उसी के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर कर रहे हैं...... सचिन के साथ खेलने की ये कहानी सिर्फ भारतीय युवा क्रिकेटर्स की ही नहीं होती है... बल्कि वर्ल्ड क्रिकेट के ऐसे सैकड़ों क्रिकेटर हैं... जिनका सपना ... भारतीय क्रिकेट का ये भगवान पूरा करता है... क्योंकि हिन्दुस्तान की सरज़मीं पर जब भी कोई विदेशी टीम खेलने आती है... तो उनके युवा बल्लेबाज़ों की ख्वाहिश सचिन जैसा ही बनने की होती है... बल्लेबाज़ तो बल्लेबाज़ वर्ल्ड क्रिकेट में ऐसे गेंदबाज़ों की भी कमी नहीं होती ... जो सचिन का विकेट हासिल करके खुद को धन्य समझते हैं... हालांकि इसे सचिन की कमज़ोरी कहें या फिर कुछ और ... अक्सर सचिन भी ऐसे युवा गेंदबाज़ों को अपना विकेट थमा देते हैं ... जो इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू कर रहे होते हैं... लेकिन हकीकत यही है कि सचिन की इस नाकामी में भी ... विदेशी क्रिकेटर्स के सपने सच होते हैं...

सचिन तेंदुलकर...एक कामयाब क्रिकेटर


  सचिन तेंदुलकर... ये नाम आज किसी पहचान का मोहताज नहीं।  लेकिन 23 साल पहले जब 1989 में टीम इंडिया के पाकिस्तान दौरे पर ... महज़ 16 साल की छोटी सी उम्र के सचिन को टीम इंडिया में जगह मिली थी ... तो शायद ही किसी ने ये सोचा था कि भविष्य में जेंटलमैन गेम को यही छोटा सा बच्चा ... ना सिर्फ देश में बल्कि पूरी दुनिया में एक नई परिभाषा और पहचान दे देगा। हकीकत तो ये है कि आज क्रिकेट की पहचान सचिन से है ... इंटरनेशनल क्रिकेट में करीब 24 साल से जारी सचिन का सफर आज भी पहले की तरह जारी है ... अपने जज़्बे और बल्ले से प्रदर्शन से क्रिकेट की सबसे बड़ी मिसाल बन चुके सचिन को ... हाथ में बल्ला थमाने के असली श्रेय उनके बड़े भाई अजित तेंदुलकर को जाता है। मुंबई के शारदाआश्रम विद्यामंदिर में पढ़ाई के दौरान जो सचिन ने ... अपने कोच रमाकांत अचरेकर से क्रिकेट के गुर सीखे ... वो आज रिकॉर्ड बुक्स में असंख्य आंकड़ों के साथ मील का पत्थर बन चुके हैं। हालांकि शुरूआत में सचिन तेज़ गेंदबाज़ बनना चाहते थे ... औऱ इसी के गुर सीखने के लिए वो एमआरएफ़ पेस फ़ाउंडेशन भी गए। लेकिन डेनिस लिली की सलाह पर उन्होंने गेंदबाज़ी छोड़कर ... अपना ध्यान बल्लेबाज़ी पर दिया। इसी के बाद रमाकांत अचरेकर की देखरेख में सचिन की बल्लेबाज़ी फली-फूली । आचरेकर का विकेट पर 1 रूपए का सिक्का रखकर ... नेट्स में गेंदबाज़ों को सचिन को आउट करने का चैलेंज देना ... औऱ हर बार नॉट-ऑउट रहने पर सचिन का लगातार 13 सिक्के जीतना ... क्रिकेट के भगवान की ज़िंदगी से जुड़ी ऐसी कहानी है जो देश का बच्चा-बच्चा जानता है। सचिन की ज़िंदगी की एक और कहानी भी साल 1988 में देश भर में सुर्खियां बटोरने की वजह बन गई थी। इस दौरान लॉर्ड हैरिस शील्ड इंटर स्कूल मैच में GFX सचिन ने विनोद कांबली के साथ मिलकर ...664 रनों की नाबाद पार्टनरशिप की ... जो दशकों तक अजेय रिकॉर्ड रही। हालांकि अपने पहले ही टेस्ट में सचिन सिर्फ़ 15 रन बनाकर ... वक़ार यूनुस की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए थे। लेकिन जिस तरह से मैच में सचिन ने पाकिस्तानी गेंदबाज़ों का सामना किया ... सचिन अपनी अलग पहचान बना चुके थे। इसी दौरे पर एक बाउंसर से चोट खाने के बाद सचिन की नाक से ख़ून निकलने लगा था ... लेकिन उन्होंने पैवेलियन लौटने से इंकार कर दिया ... क्रिकेट के लिए सचिन का ये वो समर्पण जिसकी पूरी दुनिया कायल हो गई। एक प्रदर्शनी मैच में अब्दुल क़ादिर की गेंदों पर छक्के लगाते हुए सचिन का सिर्फ़ 18 गेंदों पर 53 रन बनाना भी ... उन्हें छोटी सी उम्र में फैन्स का चहेता बना गया। बात चाहे इंग्लैंड के ख़िलाफ़ 1990 में ओल्ड ट्रैफ़र्ड के मैदान पर बनाए ... करियर के पहले टेस्ट शतक की हो ... या 1991-92 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर सिडनी टेस्ट में खेली नाबाद 148 रनों की ज़िम्मेदार पारी की ... सचिन का करियर मैच दर मैच सिर्फ परवान ही चढ़ा। 1994 में पहली बार उन्हें वन-डे क्रिकेट में टीम के लिए ... पारी की शुरुआत करने का मौका मिला जिसके बाद ... इसी साल उन्होंने वनडे फॉर्मेट अपना पहला शतक लगाकर ... उम्मीदों के नए सिलसिले का आगाज़ कर दिया। इंग्लैंड में 1999 वर्ल्डकप के दौरान अपने पिता की मृत्यु के बावजूद ... टीम की ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए ... सचिन का शोक के बावजूद वापस वर्ल्डकप खेलने जाना और देश के लिए शतक बनाना ... सचिन की शक्सियत की ऐसी मिसाल बनीं जिसने किसी भी दूसरे क्रिकेटर से ... उन्हें कोसों आगे पहुंचा दिया।  क्रिकेट की पिच पर करीब-करीब बिताए अपने ढाई दशक के करियर में सचिन के नाम आज इतनी उपलब्धियां औऱ रिकॉर्ड हैं कि क्या कहें ... सबसे ज़्यादा रन ... सबसे ज़्यादा शतक ... सबसे लंबा करियर ... और वर्ल्ड क्रिकेट का सबसे सफल क्रिकेटर होने की उपलब्धियों के साथ आज सचिन क्रिकेट की असली पहचान हैं। जिस पर आने वाली पीढ़ियां सिर्फ नाज़ ही करेंगी।

एक बार फिर सचिन का जन्मदिन


तस्वीरें भले ही पुरानी हों लेकिन क्रिकेट को धर्म की तरह पूजने वाले देश हिंदुस्तान में 24 अप्रैल का दिन हर साल ऐसे ही मनाया जाता है ।  वजह भी साफ है ... क्योंकि इसी रोज़ जेंटलमैन गेम यानी क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का जन्मदिन जो है । GFX मुंबई में 24 अप्रैल 1973 को जन्मे सचिन तेंदुलकर ... बुधवार को अपने 40वां जन्मदिन मनाएंगे।  किसी गैर-भारतीय के लिए ये चौंकाने वाली बात हो सकती है लेकिन 1989 में सिर्फ 16 साल की उम्र में अपने इंटरनेशनल करियर का आगाज़ करने वाले सचिन का जन्मदिन ... हर साल देश में करोड़ों फैन्स किसी त्यौहार की तरह ही मनाते रहे हैं।  इसे सचिन के लिए उनके फैन्स की चाहत नहीं तो औऱ भला क्या कहा जाएगा ... कि इस रोज़ कहीं देश में फैन्स मास्टर ब्लास्टर की सलामती औऱ लंबी उम्र के लिए भगवान के दरबार में  पूजा-अर्चना करते हैं ... कहीं गरीबों में दान दिया जाता है ... तो कहीं सचिन के नाम केक काटकर सेलीब्रेट किया जा सकता है।  यूं तो क्रिकेट के कोहीनूर सचिन को चाहने वालों के लिए ये दिन हमेशा ही खास रहा है ... लेकिन बीते साल की तरह इस बार भी सचिन के फैन्स अपने हीरो को ... क्रिकेट की पिच पर खेलते हुए देख पाएंगे।  जी हां ... खुशकिस्मती से इस बार भी 24 अप्रैल की शाम IPL में सचिन की टीम मुंबई इंडियन्स ... मैदान पर खेलती नज़र आएगी। जहां उसका मुकाबला पिछले साल की डिफेंडिग चैंपियन कोलकाता नाइट राइडर्स से उसी के घरेलू मैदान ईडेन गार्ड्न्स पर होगा।  वन-डे क्रिकेट से संन्यास का ऐलान करने के बाद क्रिकेट की पिच पर सचिन तेंदुलकर का ये पहला जन्मदिन होगा ... वैसे भी मैदान औऱ फॉर्मेट चाहे जो भी हो लेकिन अगर सचिन खेल रहे हैं ... तो फैन्स का तांता तो लगना तय ही है।  हालांकि ये टक्कर कोलकाता की घरेलू टीम केकेआर के खिलाफ होने जा रही है ... लेकिन सचिन मेनिया के सामने  कोई और जादू चलेगा इस बात की संभावना ना के बराबर है। फिर उम्मीद की जा सकती है है कि ईडेन के मैदान पर ... जब बर्थ-डे ब्वॉय़ सचिन के बल्ले से बनने वाले हर रन पर 75 हज़ार से ज़्यादा दर्शक एक सुर में सचिन-सचिन के नारे के साथ मास्टर ब्लास्टर का जन्मदिन मनाएंगे ... तो नज़ारा देखने वाला होगा।

सचिन एक कामयाब पति...एक कामयाब पिता ...

क्रिकेट के PERFECTIONIST कहे जाने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर... सिर्फ मैदान पर ही एक बल्लेबाज के तौर पर परिपक्व नहीं हैं... बल्कि मैदान से बाहर अपनी निजी जिंदगी में भी अपना हर किरदार उतनी ही शिद्दत से निभाते आए हैं फिर चाहे वो किरदार एक पति का हो...या फिर एक पिता का ... पारिवारिक पिच पर भी सचिन उतने ही PERFECT हैं जितने क्रिकेट की पिच पर... सचिन के छोटे से परिवार में उनकी पत्नी अंजलि और उनके दो बच्चे हैं...बड़ी बेटी सारा तेंदुलकर हैं... और छोटा बेटा अर्जुन तेंदुलकर है...अपने BUSY SCHEDULE के बावजूद सचिन ने कभी भी अपने परिवार को नजरअंदाज नहीं किया...खेल के साथ-साथ मास्टर ब्लास्टर फैमिली लाइफ भी BALANCE करना जानते हैं...परिवार में एक पति पिता के तौर पर सचिन ने उन सारी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है ... जो उन्हें एक PERFECT FAMILY MAN बनाता है... एक पिता के तौर पर सचिन ने अपने बच्चों को ना सिर्फ अच्छी परवरिश दी है बल्कि उन्हें वो शिक्षा और संस्कार भी दिए जो उन्हें उनके माता पिता ने दिए थे... विदेशी दौरों के चलते अपना ज्यादातर वक्त घर से दूर बिताने के बाद जब भी सचिन घर आते हैं तो वो अपना सारा वक्त अपने बच्चों के मन-मुताबिक बिताना पसंद करते हैं...BYTE SACHIN TENDULKAR (NOT MORE THAN 15 SEC) क्रिकेट से छुट्टियां मिलते ही सचिन अपने परिवार के साथ घूमने के लिए निकल जाते हैं फिर चाहे वो मंसूरी की वादियां हो या फिर LONDON... क्रिकेट के लिए अपने प्यार के बावजूद सचिन ने कभी भी अपने बेटे को क्रिकेटर बनने के लिए नहीं मजबूर किया... उन्होंने अपने दोनों बच्चों को खुद अपनी जिंदगी के फैसले लेने की पूरी आज़ादी दी... हालांकि सचिन के बेटे अर्जुन ने जहां अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए... क्रिकेट को ही अपनी पसंद बनाया... तो वहीं सचिन की बेटी सारा अपनी मां की तरह मेडिकल लाइन में जाने की तैयारी कर रही हैं। साफ है एक आदर्श पिता बनकर सचिन ने साबित कर दिया की वो सिर्फ क्रिकेट ही नहीं... बल्कि जिंदगी के हर मोर्चे पर बाजी मारने का माद्दा रखते हैं ... वो एक LEGENDARY क्रिकेटर होने के साथ-साथ एक आइडियल पती और पिता भी हैं।

सोमवार, 22 अप्रैल 2013

क्रिकेटर्स की प्रेम कहानी


तेरा मेरा प्यार अमर कहते हैं हर इंसान की जिंदगी में एक मौका ऐसा आता है....जब उसका दिल किसी के लिए धड़कने लगता है, शायद इसी को प्यार कहते हैं। सचिन तेंदुलकर की लाइफ में भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब उनका दिल किसी के लिए जोरों से धड़कने लगा। सचिन का दिल चुराने वाली कोई और नहीं बल्कि उनकी पत्नी अंजली थीं, 17 साल के तेंदुलकर और 21 साल की अंजली की मुलाकत मुंबई एयरपोर्ट पर हुई। सचिन 1990 में इंग्लैंड दौरे पर अपना पहला शतक लगाकर वापस लौटे थे और अंजली अपनी मां को लेने एयरपोर्ट आई थीं, दोनों ने एक-दूसरे को देखा और इनके प्यार ने सात जन्मों की उड़ान भर दी। कहने को अंजली सचिन से चार साल बड़ी थीं और वो एक गुजराती परिवार से थी, लेकिन प्यार तो प्यार है, सचिन ने अंजलि को प्रपोज किया और अंजलि सारी दुनिया छोड़कर सचिन के साथ आ गई। फिर 24 मई 1995 को सचिन-अंजलि सात जन्मों के लिए के हो गए। अंजलि अच्छी तरह जानती थीं कि सचिन क्रिकेट नहीं छोड़ सकते हैं, क्योंकि उनका खेलना देश के लिए जरुरी है। ऐसे में अंजलि ने अपना मेडिलक करियर छोड़ दिया, क्योंकि उस समय सचिन को अंजलि की ज्यादा जरुरत थी। शादी से पहले इन दोनों ने अपने दोस्तों के साथ फिल्म देखने का प्लान बनाया और सचिन को कोई पहचान न पाए इसके लिए सचिन को नकली दाढ़ी लगाकर चश्मा पहना दिया, लेकिन जब लोगों ने इन्हें पहचान लिया तो फिल्म को आधी छोड़कर ही भागना पड़ा। शादी से पहले और शादी के बाद सचिन-अंजलि की जिंदगी में ऐसे कई वाक्ये हुए, जो इनके यादगार लम्हों में शामिल हैं। शादी के दो साल बाद सचिन-अंजलि की जिंदगी में उस समय खुशियों की बारिश हुई जब 12 अक्टूबर 1997 को इनके घर एक नन्ही परी ने जन्म लिया। अंजली ने इसका सचिन के नाम पर सारा रखा। सारा के साथ अभी खुशियों के दो साल पूरे भी नहीं हुए थे, कि 24 सितंबर 1999 को सचिन के घर लिटिल तेंदुलकर का जन्म हुआ और सचिन ने इसका नाम अंजलि के नाम पर अर्जुन रखा गया। अर्जुन के आने से सचिन की परिवार पूरा हो गया और ये कंप्लीट हो गई सचिन की फैमली। क्रिकेट के बाद सचिन के लिए उनका परिवार ही सबकुछ है। सचिन कितने भी बिजी रहें लेकिन वो अपने परिवार के लिए हमेशा वक्त निकाल ही लेते हैं। उन्हें जब भी मौका मिलता है वो अपनी बेटी सारा और बेटे अर्जुन के साथ वक्त बिताते हैं। सचिन ने कभी भी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ा, फिर वो खेलप्रेमियों के लिए रही हों या फिर उनके परिवार के लिए। वाकई सचिन तुम्हारी और अंजलि की जोड़ी सुपरहिट है और तुम रीयल हीरो। रब ने बना दी जोड़ी धड़ल्ले से चौके-छक्के मारने वाले माही ने चुपके चुपके मोहब्बत की किताब भी पढ़ डाली और धोनी ने छुपे रुस्मत की तरह 4 जुलाई 2010 को साक्षी रावत से शादी रचा ली। लेकिन धोनी और साक्षी की मुकालात कब हुई, कैसे माही का दिल साक्षी ने चुरा लिया, ये सवाल हर कोई नहीं जानता। तो आप खुद ही पढ़ लीजिए कि कब साक्षी ने टीम इंडिया के कैप्टन कूल को क्लीन बोल्ड कर दिया। दरअसल साक्षी रावत उन दिनों औरंगाबाद के इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रही थीं और वो कोलकाता के होटल ताज में इंटर्नशिप कर रही थीं। उन्हीं दिनों जॉन अब्राहम ने एक पार्टी दी, जिसमें टीम इंडिया को भी न्यौता भेजा गया। इसी पार्टी के दौरान पहली बार धोनी की नजर साक्षी पर पड़ी और फिर वो उनकी खूबसूरती के दीवाने हो गए। फिर क्या धोनी ने साक्षी को प्रपोज कर दिया और दोनों के बीच प्यार परवान चढ़ने लगा। ऐसे में धोनी ने शादी के बारे में अपने परिवार से बात की और महेंद्र सिंह धोनी की शादी खूबसूरत साक्षी से तय हो गई। साक्षी से धोनी की सगाई तो हो गई है लेकिन धोनी और साक्षी का ये सिर्फ एक मुलाकात में हुआ प्यार नहीं था। धोनी, साक्षी से मिलने के लिए कभी कोलकाता, कभी मसूरी तो कभी औरंगाबाद के चक्कर लगाते नजर आए। जाहिर है माही और साक्षी की मुलाकात कोई नई नहीं थी। धोनी और साक्षी की मुलाकात कभी भी हुई हो, लेकिन माही ने कभी भी साक्षी को सुर्खियों में नहीं आने दिया। धोनी की इसी अदा सभी को दीवान बना देती है। इन दोनों के बीच प्यार की बगिया ऐसे ही महकती रहे, माही के फैन्स की यही शुभकामनाएं हैं। मोहब्बत जिंदाबाद घर के पड़ोस में रहने वाली लड़की या लड़के को आपस में प्यार हो जाए, ये किस्सा कोई नया नहीं है। इस तरह के सीन ज्यादातर हिन्दी फिल्मों में देखने को मिल जाते हैं, लेकिन तारीफ तो उन प्यार करने वालों की है। जो इस प्यार को शादी का सर्टिफिकेट दिला दे। प्यार की ऐसी ही स्टोरी टीम इंडिया को पूर्व कप्तान सौरव गांगुली और उनकी पत्नी डोना की है। डोना और गांगुली के परिवार पड़ोसी थे, यहां तक की कोलकाता के बेहाला स्थित इन दोनों घरों की बाउंड्री वॉल एक ही थी और फिल्मी कहानी की तरह दोनों परिवारों में दुश्मनी थी, लेकिन सौरव और डोना तो बचपन से ही एक दूसरे को चाहने लगे थे। गांगुली सेंट जेवियर में पढ़ा करते थे और डोना लोरेटो कॉन्वेंट में, गांगुली डोना की एक झलक पाने के लिए उनके स्कूल के चक्कर काटा करते थे और किसी दिन वो नहीं दिख पाती थी, तो गांगुली उन्हें याद करके ही मुस्कुरा लिया करते थे। जब डोना 12वीं क्लास में आईं तो दोनों अपने रिश्ते को लेकर सीरियस हो गए, लेकिन दोनों के परिवार इस शादी के खिलाफ थे। खासकर गांगुली की फैमिली किसी गैर ब्राह्ममिन लड़की को अपनी बहू नहीं बनाना चाहते थे। समय अपनी रफ्तार से चलता रहा और दोनों अपने-अपने करियर को संवारने में लग गए। सौरव का चयन भारतीय टीम में हो चुका था। इंग्लैंड के लॉर्ड्स मैदान पर अपने पहले ही मैच में शतक जमाकर सौरव मशहूर हो गए और फिर दोनों ने कोर्ट मैरिज करने का फैसला कर लिया। गांगुली ने इसके लिए अपने साथी खिलाड़ी मोलोय बेनर्जी को राजी कर लिया, लेकिन मीडिया से बचने के लिए गांगुली ने रजिस्ट्रार को बेनर्जी के घर ही बुलवा लिया और 12 अगस्त 1996 में सौरव और डोना कानूनी तौर पर एक-दूसरे के हो गए। उस समय सौरव 23 और डोना 20 साल की थीं, लेकिन शादी की बात भला कब तक छुपती। जल्द ही दोनों परिवारों को मिस्टर एंड मिसेज गांगुली के बारे में पता चल गया। पहले दोनों के परिवार वाले नाराज हुए, लेकिन बाद में अपने बच्चों की खुशी में शरीक हो गए और 21 फरवरी 1997 को दोनों परिवारों ने मिलकर एक बार फिर दोनों की शादी रस्मो-रिवाज के साथ करवा दी। गांगुली और डोना की ये थी फिल्मी लव स्टोरी, लेकिन रीयल। नज़र न लगे प्यार की कोई जुबां नहीं होती इसे तो महसूस किया जाता है और जब कोई इंसान इसे समझने लगता है। तो वो प्यार में डूब जाता है। भारत के ज्यादातर क्रिकेटरों की कुछ ऐसी ही कहानी है। किसी का दिल साधारण सी लड़की पर आ गया, तो किसी का दिल बॉलीवुड की हसीना पर। प्यार की कुछ ऐसी ही कहानी टीम इंडिया के वीरेंद्र सहवाग की है। तब वीरू नौ साल के थे और आरती छह साल की। आरती की बुआ वीरेंद्र सहवाग की नजदीकी रिश्तेदारी में ब्याही थीं, लिहाजा दोनों ही एक-दूसरे को बचपन से जानते थे और दोनों का एक दूसरे के यहां आना जाना भी रहता था, लेकिन दोनों की बीच नजदीकियां 2001 में आईं। वीरू, आरती के इस कदर कायल हुए कि उन्होंने अपने दिल की बात उन्हें बता दी। वैसे आरती को इस दिन का इंतजार बहुत पहले से था। लेकिन दोनों की शादी इतनी आसान नहीं थी। फिर भी दोनों ने अपने प्यार की ताकत पर घरवालों को मना लिया और हमेशा के लिए एक दूसरे के हो गए। ये कहानी है एक क्रिकेटर और साधारण लड़की की। जिन्होंने दिखा दिया कि प्यार के आगे दुनिया को भी झुकाया जा सकता है। जोड़ी कमाल की अब आपको बताते हैं एक क्रिकेटर और बॉलीवुड एक्ट्रेस की रीयल लव स्टोरी। इस लव स्टोरी के हीरो हैं टीम इंडिया के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन और हीरोइन हैं संगीता बिजलानी। कहने को जब इन्हें एक दूसरे से प्यार हुआ तो दोनों शादीशुदा थे। लेकिन प्यार किसी चीज का मोहताज नहीं होता, वो तो कभी भी किसी से हो सकता है। अजहर, संगीता के प्यार में इस कदर डूबे, कि उन्होंने अपनी पहली पत्नी को तलाक दे दिया। तो संगीता भी अपना सबकुछ छोड़कर अजहर के पास चली आईं। एक दूजे के लिए सफेद रंग के गाउन में लारा दत्ता और ब्लैक रंग के सूट में महेश भूपति जैसे-जैसे आगे बढ़ रहे थे, उनका एक-एक सपना सच होता जा रहा था। वो सपने जो इस दिन से पहले दोनों ने एक साथ अपनी पलकों पर संजोए थे। लारा दत्ता को देखकर तो ऐसा लग रहा था, मानों आसमान से कोई परी जमीं पर आ गई हो। तो वहीं भूपति ब्लैक आउटफिट में किसी हीरो से कम नहीं दिख रहे थे। दोनों अपनी शादी में ऐसे झूमकर नाचे, कि कुछ देर के लिए वो सारी दुनिया भूल गए। टेनिस के स्टार खिलाड़ी महेश भूपति और बॉलीवुड की हसीन तारिका लारा दत्ता एक दूसरे के पास कैसे आ गए। ये सवाल आप सभी के जहन में दस्तक दे रहा होगा। अपनी शादी पर 32 साल की हो चुकीं लारा दत्ता ने 2000 में मिस यूनिवर्स बनी। न्यूयॉर्क में रहते हुए कुछ दिनों तक उन्होंने बेसबॉल खिलाड़ी डेरेक जेटर के साथ डेटिंग की। महेश भूपति भी अमेरिका में रह चुके हैं और उनकी पहली शादी 2001 में मॉडल श्वेता जयशंकर से हुई थी। इसी बीच दोनों की मुलाकात हुई और पहली नजर में प्यार भी हो गया, फिर क्या दोनों ने सात जन्मों तक साथ रहने के वादे कर लिए और साथ जीने-मरने की कसमें खा लीं। फिर क्या दोनों ने जरा भी देर नहीं की और शादी से कुछ दिनों पहले मुंबई में कोर्ट मैरिज कर ली। दोनों ने अपनी कोर्ट मैरिज की गोवा में अपने चाहने वालों को दावत भी दी और फिर वो दिन आ गाय जब 16 फरवरी 2011 को दोनों ने ईसाई रीति रिवाज से एक बार फिर शादी रचा ली। शादी के वक्त महेश भूपति ने जहां लारा को पूरा साथ देने का वादा किया। तो वहीं लारा की आंखों से खुशी के आंसू निकल आए। इन दोनों के चेहरे की चमक बता रही थी कि वाकई ये जोड़ी एक-दूजे के लिए बनी है। BaBa Mehta

शनिवार, 6 अप्रैल 2013

IPL-6: बीसीसीआई को होगी 950 करोड़ की कमाई!


आईपीएल का सीज़न सिक्स। सिर्फ टाइटल ही 396.8 करोड़ रुपए में बिका है। पांच साल तक रही डीएलएफ की स्पांसरशिप से दोगुना। आईपीएल-6 से बीसीसीआई को 950 करोड़ की कमाई का अनुमान है। आईपीएल अब खेल से ज्यादा मनोरंजन बन गया है। इसलिए भास्कर ने एक कदम आगे बढ़कर आईपीएल की आलोचनात्मक तुलना सबसे ज्यादा देखे गए टीवी प्रोग्राम, हाल की हिट फिल्म और अन्य स्‍पोर्ट्स से की। दबंग-2 से तो लगभग चार गुना कमाई करने जा रहा है। लेकिन विज्ञापन केबीसी पर एक लाख रुपए महंगा था। अब भी चार स्पोर्ट्स ब्रांड आईपीएल से बड़े दुनिया में फीफा, विंबलडन, सुपरबॉल और एफ1 के बाद सबसे बड़ा स्‍पोर्ट्स ब्रांड आईपीएल। सुपरबॉल में दस सेकंड के विज्ञापन की दर 22 करोड़ रुपए तक पहुंच जाती है। ऑस्ट्रेलिया ने बिग बैश टी-20 टूर्नामेंट और इंग्लैंड ने अपने टी-20 टूर्नामेंट को आईपीएल के बराबर सफल बनाने की कोई कोशिशें की, जो नाकाम रही। फिर होगी कोला-वॉर पेप्सी आईपीएल का ऑफिशियल पार्टनर है। तो कोकाकोला भी दस-दस सेकंड के स्पॉट खरीदकर अपनी मार्केटिंग कर रहा है। यह जंग शुरू हुई थी 1996 के क्रिकेट विश्वकप से। जब कोकाकोला को ऑफिशियल पार्टनर बनाया गया था। तब पेप्सी ने स्पॉट खरीदकर हर ओवर के बाद मार्केटिंग की थी- ‘नथिंग ऑफिशियल अबाउट इट’।

फुटबॉल में मैच फिक्सिंग के बदले लिया 'मुफ्त सेक्स सेवा'


दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेलों में शुमार फुटबॉल की खास पर एक के बाद एक दाग लगता जा रहा है। फुटबॉल जगत अभी मैच फिक्सिंग के आरोपों से निजात पाने की कोशिश में जुटा ही था कि इस खेल से जुड़े एक और विवाद ने खेल प्रेमियों को स्तब्ध कर दिया है। एक रेफरी और उसके दो सहयोगियों पर एशियन फुटबॉल कांडफेडरेशन कप के एक मैच के दौरान 'मुफ्त सेक्स सेवा' के बदले मैच फिक्स कराने का केस दर्ज किया गया है। सिंगापुर की भ्रष्टाचार विरोधी जांच ब्यूरो के अनुसार तीनों लोग लेबनान के नागरिक हैं और तीनों पर एक ही मामले का केस दर्ज किया गया है। ब्यूरो ने बताया कि जिन पर सेक्स सेवा का उपयोग करने का आरोप है उनके नाम रेफरी अली साबाग और दो सहायक रेफरी अली ईद और अब्दल्लाह तालेब है। 33 साल के साबाग फीफा से मान्यता प्राप्त रेफरी हैं जिन्होंने 2014 विश्व कप क्वालीफायर्स के लिए काम किया हुआ है। आज शुक्रवार को तीनों आरोपियों की पेशी होनी है। भ्रष्टाचार निरोधी एजेंसी ने कहा कि जांच उस आरोप के बाद शुरू की गई जिसमें कहा गया था कि बुधवार को सिंगापुरी क्लब थांपिनेस रोवर्स और भारतीय क्लब ईस्ट बंगाल के बीच मुकाबला मैच फिक्सिंग के दायरे में हैं। यह मैच ईस्ट बंगाल ने 4-2 से जीता था। ब्लूमबर्ग समाचार एजेंसी के अनुसार तीनों रेफरियों को सिंगापुर के अमारा होटल में मैच के दिन एक-एक औरत मुहैया करवाई गईं जिसके बदले में उन्हें मैच फिक्स करवाना था। अगर उक्त आरोप सही पाए जाते हैं तो इन लोगों को पांच साल की जेल और 80 हजार डॉलर का जुर्माना हो सकता है। ये मामला तब सामने आया है जब फुटबॉल मैचों के फिक्स होने का मामला तुल पकड़ता जा रहा है। फुटबॉल की अंतरराष्ट्रीय नियामक संस्था फीफा ने फरवरी में इटली, दक्षिणी कोरिया और चीन में खेल से संबंधित अधिकारियों को पुछताछ की जिन पर मैच-फिक्सिंग करने का आरोप लगा था। वहीं यूरोपीय पुलिस यूरोपोल की एक जांच में यह बात सामने आई है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैचों की हो रही फिक्सिंग में शामिल लोगों का अड्डा सिंगापुर में ही है। यूरोपोल के अनुसार साल 2008 से 2001 के बीच खेले गए कम से कम 680 मैच ऐसे थे जिन्हें शक के दायरे में रखा जा सकता है।