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खेल से खेल तक

शनिवार, 26 जनवरी 2013

धोनी सबसे अमीर क्रिकेटर


कामयाबी औऱ किस्मत जब कारोबार बन जाए तो उसकी शक्ल टीम इंडिया के कप्तान ... महेंद्र सिंह धोनी के जैसी हो जाती है। क्रिकेट की पिच के तो धोनी सुपरहीरो हैं ही ... लेकिन अब धोनी की शक्सियत के एक और पहलू को भी सजदा किया गया है । अमेरिका की नामी मैग्ज़ीन फोर्ब्स की मानी जाए तो धोनी ... आज देश के सबसे चहेते सेलीब्रिटी बन चुके हैं। फिर चाहे बात सचिन तेंदुलकर की हो, सलमान या शाहरूख की ... सभी धोनी के सामने पानी भरते हैं।
YOuTube Link For Story in Video Mode http://www.youtube.com/watch?v=7m5BXNZoQks   सबसे शातिर क्रिकेटर कौन ? सबसे कामयाब कप्तान कौन ? सबसे रईस क्रिकेटर कौन ? सबसे चहेता सेलीब्रिटी कौन ?     जी हां, सवाल भले ही अलग-अलग हों लेकिन जवाब सिर्फ एक है यानी महेन्द्र सिंह धोनी ।  आज जेंटलमैन गेम यानी क्रिकेट की पिच के सबसे कामयाब चेहरे ... महेन्द्र सिंह धोनी की शक्सियत का पूरी दुनिया सजदा कर रही है । दरअसल अमेरिका की नामी पत्रिका फोर्ब्स ने ... साल 2012 में हिंदुस्तान की 100 सबसे कामयाब और लोकप्रिय सेलीब्रिटीज़ की फेहरिस्त जारी की है। जिसके मुताबिक देश में ऐसा कोई दूसरा सेलीब्रिटी नहीं ... जो धोनी की शक्सियत को चुनौती दे सके। खास बात तो है कि लोकप्रियता की इस टक्कर में धोनी ने सलमान खान,  शाहरूख खान औऱ सचिन तेंदुलकर तक को पीछे छोड़ दिया है।       फोर्ब्स के मुताबिक जहां देश में लोकप्रियता के पैमाने पर सबसे फैन्स महेन्द्र सिंह धोनी के पास हैं ... तो वहीं दूसरे नंबर पर सलमान खान ... तीसरे नंबर पर शाहरूख खान आते हैं।  जबकि सचिन तेंदुलकर को चौथा ... और अमिताभ बच्चन को पांचवां स्थान मिला है।     दूसरी तरफ कमाई के मामले में माही देश के तमाम स्पोर्ट्स सेलीब्रिटीज़ से तो आगे हैं ही ... साथ ही इस बार धोनी ने फिल्म जगत के भी कई बड़े नामों को पीछे छोड़ दिया है। 5 साल के कप्तानी के करियर में देश को दो-दो वर्ल्डकप जिताकर ... सुनहरे सपने से रूबरू कराने वाले मैजिक मैन माही  ... आज भी देश के साथ-साथ वर्ल्ड क्रिकेट के सबसे रईस क्रिकेटर हैं। अब इसे धोनी की शक्सियत की ताकत ही कहा जा सकता है कि ... कमाई के मामले में भी माही सेलीब्रिटीज़ की फेहरिस्त में तीसरे नंबर पर हैं। और उनके सामने ना तो सचिन, युवराज जैसे क्रिकेटर टिक पाए और ना ही अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार जैसे बॉलीवुड स्टार ।       फोर्ब्स के मुताबिक बीते साल 2012 में धोनी 135.16 करोड़ की कमाई करते देश के तीसरे सबसे रईस सेलीब्रिटी रहे ... तो वहीं बॉलीवुड के बादशाह खान शाहरूख खान 202.8 करोड़ की कमाई के साथ नंबर एक पर ... जबकि सलमान खान ने 144.2 करोड़ की कमाई कर दूसरे नंबर पर रहे ।     सबसे ज़्यादा कमाई करने वाले सेलीब्रिटीज़ की फेहरिस्त में जहां         अक्षय कुमार चौथे नंबर पर हैं ... तो वहीं अमिताभ बच्चन पांचवें, सचिन तेंदुलकर छठे औऱ करीन कपूर सातवें नंबर पर हैं। इसी तरह से वीरेन्द्र सहवाग को आठवां जबकि विराट कोहली को नवां स्थान मिला है।       मतलब साफ है कि भले ही धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया का बीते साल ... सबसे बुरा प्रदर्शन रहा हो। लेकिन फैन्स की नज़रों में आज भी धोनी देश के सबसे चहेते सेलीब्रिटी हैं।  औऱ यही वजह है कि धोनी की इस लोकप्रियता का असर ... हर दिन उन्हें औऱ कामयाब बनाता जा रहा है।   रजनीश कुमार खेल पत्रकार rajnish17kumar@gmail.com

धर्मशाला में पहला इंटरनेशनल मैच


धर्मशाला में होने वाले सीरीज़ के आखिरी मैच में क्रिकेट फैंस सिर्फ मैच का ही लुत्फ नहीं उठाएंगे... बल्कि ये मैच फैंस को उस खूबसूरत नज़ारे के भी दर्शन कराएगा... जो दूसरे क्रिकेट स्टेडियम्स में नहीं होता। क्योंकि धर्मशाला में बना ये स्टेडियम समुद्र तल से 1450 मीटर से भी अधिक ऊँचाई पर बना हुआ है... जहां से ऊंची ऊंची पहाड़ियों का अदभुत नज़र आता है। YOUTUBE LINK FOR DHARAMSHALA VIDEO DOCUMENTRY http://www.youtube.com/watch?v=LaLdMHPsK9k दुनिया की सबसे दबंग टीम एक बार फिर अंग्रेजों से टक्कर लेने जा रही है... लेकिन इस बार क्रिकेट की कामयाब कहानी... मैदानी इलाकों में नहीं.. बल्कि वादियों में गूंजती हवाओं के बीच लिखी जाएगी...भारत और इंग्लैंड सीरिज की आखिरी लड़ाई हिमाचल प्रदेश के स्टेडियम में लड़ी जाएगी... लामाओं की नगरी मानी जाने वाले धर्मशाला में हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम की खूबसूरती और छटा देखते ही बनती है... क्रिकेट के दीवानों के लिए जश्न मनाने का ये पहला मौका होगा जब भारतीय टीम धर्मशाला के इस खूबसूरत स्टेडियम में कोई  मुकाबला खेलेगी....धर्मशाला इसलिए भी मशहूर है कि दलाई लामा के निवास और यहाँ से तिब्बत की निर्वासित सरकार भी चलती है और अब यहां का क्रिकेट स्टेडियम भी आकर्षण का एक नया केंद्र बन गया है...समुद्र तल से 1450 मीटर से भी अधिक ऊँचाई पर बना यह स्टेडियम तकनीकी रूप से भारत में मौजूद सर्वाधिक उन्नत क्रिकेट के मैदानों में से एक है...इसकी दर्शक दीर्घा से लेकर ड्रेसिंग रूम तक से बर्फ सना माथा लिए दूर खड़ी धौलाधार पर्वत श्रृंखला को नज़रंदाज़ करना नामुमकिन सा हो जाता है... स्टेडियम के स्टैंड से लेकर ड्रेसिंग रूम से क्रिकेट के लुत्फ के साथ साथ वादी के हसीन नजारे का भी लुत्फ उठाया जा सकता है... इस स्टेडियम की खास बात ये भी है कि...क्रिकेट की सुप्रीम संस्था आईसीसी ने यहां की खूबसूरती से प्रभावित होकर यहां तक कह दिया था कि...धर्मशाला में खेलने का मतलब स्वर्ग में क्रिकेट मैच खेलना ....2003 में बनने वाले इस स्टेडियम में 25000 दर्शकों के बैठने की क्षमता है....राजधानी शिमला से यह स्टेडियम 250 किमी की दूरी पर स्थित है...जहां चारों तरफ पहाड़ों से घिरे इस स्टेडियम का नजारा बहुत ही खूबसूरत है...स्टेडियम के साथ साथ धर्मशाला की खूबसूरती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि..यहां दोनों टीम के खिलाड़ी पहुंचते ही सैर सपाटे के साथ साथ प्रैक्टिस में व्यस्त हो गए...हालांकि इससे पहले यहां रणजी और आईपीएल के मैच हो चुके हैं... यहां पहला बड़ा मुकाबला 2010 में किंग्स इलेवन पंजाब और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच खेला गया था...और अब आईसीसी से मुहर लगने के बाद धर्मशाला का ये खूबसूरत स्टेडियम बर्फीले पहाड़ों के बीच सीना ताने मेजबानी करने के लिए तैयार है.. इस स्टेडियम में विंटर रे ग्रास की चादर बिछी हुई है....  भारत में यह पहला स्टेडियम है जिसमें इस प्रकार की घास का उपयोग हुआ है... -साथ ही.... क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि इस स्टेडियम में ज्यादा मैच नहीं कराए जा सकते क्योंकि सर्दी के मौसम में यहां ओले और बारिश अधिक होती है.... - इस सीरीज में यह तीसरा स्टेडियम है जिस पर पहली बार इंटरनेशनल क्रिकेट खेला जाएगा.... - स्टेडियम में साइड स्क्रीन के ठीक पीछे लाल रंग की धार्मिक आकृति बनी है जो काफी आकर्षक है।   बरहहाल प्राकृतिक छटाओं के बीच इस स्टेडिमय को देखकर सुखद अनुभूति तो होती है...लेकिन फैंस को इस बात का इंतजार है कि... टीम इंडिया धर्मशाला में होने वाले पहले वनडे में जीत हासिल कर इतिहास रच पाती है या नहीं।   रजनीश कुमार खेल पत्रकार rajnish17kumar@gmail.com

बुधवार, 15 अगस्त 2012

Review- Ek Tha Tiger

Ek Tha Tiger टिपिकल सलमान खान मूवी है – ‘एक था टाइगर’ बिना दमदार स्क्रिप्ट की एक्शन पैक्ड फिल्म है एक था टाइगर ..जिसे सिर्फ सलमान खान के स्टारडम के लिए देखा जा सकता है ....फिल्म की ओपनिंग से तो साफ है ...कि सलमान ..इस वक्त बॉलिवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार है .....लेकिन वो एक्टर है या नहीं ...ये नहीं कहा जा सकता...एक था टाइगर सलमान खान के फैंस के लिए ईद का तोहफा हो सकती है ...लेकिन जो फिल्म में कहानी या एंटरटेनमेंट तलाश कर रहे हैं...वो मूवी देखने के बाद एक बार फिर कहेंगे..कि सलमान ने इस बार भी अपनी बाकी फिल्मों की तरह एक बार फिर डैश डैश बनाया है...... फिल्म में सलमान बने तो RAW के एजेंट हैं......लेकिन उनकी हरकतें दबंग के चुलबुल पांडे.....जैसी ही है....वो बस अपने एक्शन की वजह से ...फिल्म और फैंस के दिमाग पर छाए हुए हैं.....फिल्म की स्क्रिप्ट इतनी वीक है .....कि पहले हॉफ की स्टोरी ..दूसरे हॉफ से मैच नहीं खाती .....पहले हॉफ में जहां सलमान...लंदन में एक इडिंयन साइनटिस्ट पर नजर रखने के मिशन पर है.......तो दूसरे हॉफ में वो ISI की एजेंट कैटरीना कैफ के प्यार में गिरफ्तार होकर ....एक देश से दूसरे देश में बस भाग ही रहे हैं.......ये ISI एजेंट साइनटिस्ट के घर की केयरटेकर थी..... लेकिन जब से उसे सलमान से प्यार हुआ है ..वो भी नौकरी छोड़ चुकी है......अब दोनों एजेंटों को ...RAW और ISI अपनी इंफॉर्मेशन लीक होने के डर से तलाश कर रहे हैं....खैर वो तो पकड़ में नहीं आते ..लेकिन आखिर में सलमान ये मैसेज जरूर देते हैं—“जब RAW और ISI जैसी एजेंसी खत्म हो जाएंगी तो हम वापस लौट आएंगे” डॉयरेक्टर कबीर खान ने इस फिल्म में सिर्फ सलमान के स्टारडम को भुनाने की कोशिश की है ..वरना ये फिल्म ...एजेंट विनोद की तुलना में कहीं नहीं टिकती.......हां विदेशी लोकेशन्स की वजह से फिल्म की सिनेमाटोग्रॉफी जबरदस्त है .....साजिद-वाजिद का म्यूजिक एक दम औसत है....गाने तो फिल्म में बिलकुल भी फिट नहीं बैठते......फिल्म में सलमान-कैटरीना को छोड़कर 2 कैरेक्टर और है ...रणबीर शौरी सलमान के असिसटेंट के तौर पर अच्छे जमे हैं..गीरीश कर्नाड ने बॉस की भूमिका ठीक-ठीक निभाई है... फिल्म को 15 अगस्त के दिन रिलीज किया गया.....और ईद तक एडवांस बुकिंग फुल नजर आ रही है...यानी बिजनेस तो हिट है......फिल्म भी हिट हो ही जाएगी .... मेरी रेटिंग - **1/2*

मंगलवार, 14 अगस्त 2012


लंदन में नही दिखा विजेंदर का जलवा रिंग के किंग माने जाने वाले भारतीय बॉक्सर विजेंदर सिंह की...विजेंदर सिंह का सफर लंदन ओलंपिक में बिना पदक के ही थम गया... भारत का ये बड़े नाम वाला बॉक्सर क्वार्टरफाइनल से भी आगे नहीं बढ़ सका...लेकिन विजेंदर के इस तरह से बैरंग लौटने के पीछे की वजह उनका खराब प्रदर्शन कम बल्कि ओवर कॉन्फीडेंस ज्यादा लगता है। क्योंकि विजेंदर क्वार्टरफाइनल मुकाबले में उस बॉक्सर से हारे... जिसे वो इससे पहले दो बार हरा चुके थे। कामयाबी जब सिर चढ़ कर बोलने लगे ...तो उसकी आवाज औऱ फितरत...घमंड की शक्ल अख्तियार कर लेती है....क्योंकि कामयाबी का नशा...नशीला ही नहीं बल्कि...ज़हरीला भी होता है....ये बातें आपको लोकोक्ती सी लग रही होंगी...लेकिन ये किसी की हकीकत है...जी हां हम बात कर रहे हैं.... लंदन ओलंपिक में भारतीय बॉक्सिंग टीम के स्टार बॉक्सर विजेंदर सिंह की...जिसने अपने खराब प्रदर्शन से 121 करोड़ हिंदुस्तानियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। 75 किलोग्राम की कैटेगरी में...विजेंदर का सफर क्वार्टरफाइनल मैच में ही थम गया...हार के बाद इस बड़बोले खिलाड़ी ने यहां तक कह दिया कि...कई बार गलतियां हो जाती हैं....जिसके बारे में वो कुछ भी नहीं कर सकते है.... लेकिन यही गलती अगर ओवर कॉफिडेंस के चलते हो तो उसे क्या कहा  जाता है ये पूरी दुनिया जानती है.....बीजिंग में ब्रॉज जीतने के बाद..विजेंदर पर स्टारडम इस कदर हावी हुआ कि...लंदन में उसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा....हालांकि 2010 में हुए एशियन गेम्स में गोल्ड हासिल करने बाद भारत के रॉकी से काफी उम्मीदें भी की जाने लगी थी...लेकिन स्टारडरम एक बार फिर विजेंदर पर सवार हो गया और वो मायानगरी की गलियोँ में गुम होते चले गए....चैलेंज मिलने पर भी ट्रेनिंग में कोताही बरतने और ग्लैमर की दुनिया में मौज करने के लिए विजेंदर की अक्सर  आलोचना की जाने लगी... विजेंदर ने 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल से संतुष्ट होकर...2011 के अपनी फॉर्म खोते चले गए...जिसकी वजह से लंदन ओलंपिक में उन्होंने मेडल पर संदेहों की गुंजाइश छोड़ दी ....और विजेंदर ने बॉक्सिंग स्टार का तमगा जो हासिल किया.. वो भी संभाल नहीं सके....जिसका खामियाजा उन्हें इस अंदाज में भुगतना पड़ेगा ये विजेंदर ने सपने में भी नहीं सोचा होगा.....मिशन ओलंपिक चाहे मामला बदकिस्मती का हो या विशुद्ध आत्मसंतोष का...क्वार्टरफाइनल में मिली हार से विजेंदर अपने चरम से कोसों दूर हो गए...औऱ इसका जिम्मेदार कोई औऱ नहीं बल्कि खुद...विजेंदर सिंह ही हैं...क्योंकि अपने फैन्स की उम्मीदों पर पानी फेरने की वजह...अगर सिर्फ खेल होती तो बात कुछ औऱ होती....लेकिन विजेंदर के ओवर कॉफिडेंस पंच ने एक ही झटके में सब कुछ खत्म कर दिया...अब देखना ये दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में विजेंदर सिंह...तीखे सवालों का जवाब...तीखे अंदाज में देते हैं या फिर अपने खेल से देंगे...

लंदन ओलंपिक में भारतीय तीरंदाज ऐसा नहीं है कि उम्मीदों को तोड़ने में सिर्फ टेनिस खिलाड़ी औऱ शूटर्स ही सबसे आगे रहे...बल्कि तीरंदाजी टीम ने भी फैंस को निराशा के भंवर में धकेल दिया....ओलंपिक की शुरूआत से ही भारतीय तीरंदाजी टीम की नाकामी शुरू हो गई....एक के बाद एक तीरंदाज...अपने खराब प्रदर्शन की वजह से मेडल की उम्मीदों को तोड़ते चले गए....आलम ये रहा कि...दीपिका कुमारी जैसे टॉप तीरंदाज भी मेडल पर निशाना साधने में नाकाम रहे.... खेलों के सबसे बड़े महाकुंभ में मेडल की उम्मीद लिए जब भारतीय तीरंदाजी टीम ने लंदन की सरजमी पर कदम रखा...तो हर किसी की जुबां पर यही था... कि अर्जुन की नगरी से उसका दूत आया है... और इस बार भारतीय तीरंदाज..मेडल पर सटीक निशाना साधेंगे...तीरंदाजी में लगातार कई साल से पदक के सूखे को खत्म करने के लिए...भारतीय तीरंदाज भी..इंडिविजुअल और टीम इवेंट में अपनी मजबूत चुनौती का दावा कर रहे थे...लेकिन कहते हैं ना कि...हवाओं का ऱूख कभी भी...नतीजे को बदल सकता है.... और हुआ भी ऐसा ही...तीरंदाजी टीम के सपने इसी हवा की भेंट चढ़ गए...3 महिला और 3 पुरूष खिलाड़ी समेत 6 सदस्यीय तीरंदाजी टीम ने लंदन ओलंपिक में फैंस को निराशा कर दिया... कोई भी तीरंदाज मेडल राउंड की दहलीज़ तक भी नहीं पहुंच सके...   भारतीय पुरूष तीरंदाजी टीम भारतीय पुऱूष तीरंदाजी टीम ने लंदन ओलंपिक में अपने अभियान की शुरूआत जब लार्ड्स के मैदान से की...तो ऐसा लगा कि इस बार मेडल मिलना तय है... लेकिन शायद किस्मत में हार और निराशा काफी पहले से तय थी....टीम इवेंट में भारतीय पुरुषा टीम को प्री क्वार्टरफाइनल मुकाबले में जापान के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा...जयंत ताल्लकुदार, राहुल बनर्जी और तरूणदीप रॉय की तिकड़ी ने अपने निराशाजनक प्रदर्शन से फैंस को उम्मीदों को तोड़ने का शुभारंभ कर दिया....और भारतीय तीरंदाजी टीम सबसे आखिरी पायदान 12वें नंबर पर रही... भारतीय महिला तीरंदाजी टीम भारत की पुरुष तीरंदाजी टीम की शिकस्त के बाद.. महिला टीम भी लंदन ओलंपिक में निराशाजनक प्रदर्शन जारी रखा और हार के दर्द को दोगुना कर दिया...लॉ‌र्ड्स के मैदान पर टीम इवेंट के क्वार्टर फाइनल में भारतीय महिला तीरंदाजी टीम को डेनमार्क ने 211-210 से अंतर से हराया...दुनिया की नंबर वन तीरंदाज दीपिका कुमारी, बोम्बाल्या देवी और सी. सुरो की टीम महज 1 प्वाइंट से हार गई....   व्यक्तिगत स्पर्धा में भारतीय तीरंदाज   टीम इवेंट में मिली हार के बाद...जब भारतीय तीरंदाज अपने अपने इंडिविजुअल मुकाबले में उतरे...तो यहां भी...नाकामी ने पीछा नहीं छोड़ा...राहुल बनर्जी..जयंत तालुकदार...तरूणदीप रॉय जैसे दिग्गज तीरंदाज अपने अपने मुकाबले में...मेडल राउंड तक भी नहीं पहुंच सके...इंडिविजुअल इवेंट में भी राहुल...जयंत औऱ तरूणदीप सटीक निशाना साधने में नाकाम रहे...महिला टीम में शामिल सी सुरो... दीपिका कुमारी औऱ बोम्बाल्या देवी की हालत भी हार के रंग में रंगी रही...सी सुरो व्यक्तिगत एलिमिनेशन राउंड में हारी तो.... बोम्बाल्या देवी ने अपने निशाने का थोड़ दम दिखाया लेकिन..उनकी भी किस्तम में हार ही लिखी थी...ओलंपिक में बची कुची कसर दीपिका ने पूरी कर दी...भारत की सबसे बड़ी उम्मीद दीपिका कुमारी मैच के पहले ही राउंड में हारकर हंसते हुए बाहर हो गई...दीपिका की हार के साथ ओलंपिक के तीरंदाजी खेल में भारत की चुनौती बिना कोई मेडल हासिल किए खत्म हो गई..उम्मीदों के रथ पर सवार होकर भारतीय तीरंदाजी टीम लंदन तो बहुत कुछ लेकर पहुंची थी लेकिन जब देश वापस लौटी तो उनके हाथ खाली और चेहरे पर निराशा के सिवा कुछ भी नहीं था...क्योंकि फैंस के साथ साथ खुद खिलाड़ी को भी मेडल ना हासिल होने का दर्द था...

लंदन ओलंपिक में भारतीय शूटर लंदन ओलंपिक में अगर भारत को किसी ने जोर का झटका दिया है...वो हैं भारत के दिग्गज शूटर्स...खेलों के इस महाकुंभ में शूटिंग ही एक वो इंवेट था...जिसके इम्तिहान में भारत को अव्वल आने की सबसे ज्यादा उम्मीद थी...लेकिन क्या बीजिंग ओलंपिक के गोल्ड ब्वाय अभिनव बिंद्रा...और क्या रॉन्जन सोढ़ी और मानवजीत सिंह संधू...2 दो छोड़ दिया जाए...तो बाकी 9निशानेबाज़ों के प्रदर्शन ने भारत को निराश ही किया। लंदन ओलंपिक में उम्मीदें बड़े नामों का बदहाल प्रदर्शन 9 शूटर्स के निशानों पर ''गिरी गाज'' हासिल हो सके सिर्फ 2 मेडल       TAKE MONTANGE ON INDIAN SHOOTERS...   अभिवन बिंद्रा...गगन नांरग...रॉन्जन सोढ़ी...और मानवजीत सिंह संधू जैसे...बड़े-बड़े धुरंधर भारतीय निशानेबाजों ने जब लंदन ओलंपिक के लिए उड़ान भरी...तो सभी को उम्मीद थी कि हो ना हो...शूटिंग में कम से कम हमारे शूटर्स शानदार प्रदर्शन कर दुनिया को अपना लोहा ज़रुर मनवा देंगे...लेकिन ओलंपिक जैसे महाकुंभ के मैदान में जैसे ही भारतीय निशानेबाज़ों ने किस्मत आज़मानी शुरु की...मानों निशानेबाज़ों के बाहर होने की ऐसी आंधी चली...कि भारतीय उम्मीदें हवा हो गई... hold... लंदन ओलंपिक से...सबसे पहले खबर आई...बीजिंग ओलंपिक के गोल्डन ब्वॉय अभिवन बिंद्रा के बाहर होने की...बिंद्रा के लिए लंदन ओलंपिक किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हुआ...   TAKE GFX PLATE... लंदन ओलंपिक में अभिनव बिंद्रा 10 मीटर एयर राइफल के फाइनल में भी अपनी जगह नहीं बनाए पाए...इवेंट के पहले ही दौर में बाहर हो गए...बिंद्रा ने क्वालीफाइंग राउंड में लक्ष्य से दूर निशाने लगाए...और 60 गोलियां चलाने के बाद उनका स्कोर महज 578 ही रहा। GFX OUT...   हालाकि इसके बाद गगन नांरग की गरज ने कुछ हद तक भारत को तस्सली ज़रुर दी...   take gfx plate... नांरग ने 10 मीटर एयर राइफल मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए 701.1 पॉइंट हासिल कर ब्रॉन्ज मेडल जीता।   gfx out...   नांरग के निशाने के बाद फिर ये उम्मीद जगी...कि शूटर्स रंग में लौट रहे हैं...लेकिन ये उम्मीद टूटने में भी देर नहीं लगी...क्योंकि इसके बाद गगन फिर भारतीय उम्मीदों को पंख नहीं लगा पाए... GFX IN... तो रॉन्जन भी एक ही झटके में टूर्नामेंट से बाहर हो गए...शूटिंग के मेन्स डबल ट्रैप मुकाबले में सोढ़ी फाइनल के लिए क्वॉलिफाई भी नहीं कर सके... GFX OUT...   भारत के जॉयदीप करमाकर लंदन ओलम्पिक की पुरुषों की 50 मीटर प्रोन रायफल स्पर्धा के फाइनल में चौथे नंबर पर रहे और कांस्य पदक से चूक गए। करमाकर ने 50 निशानेबाजों के क्वालीफाइंग दौर में 595 अंक हासिल किए और संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर रहे। फाइनल में टॉप 8 में से वे चौथे नंबर पर रहे और पदक से चूक गए।   तीन ओलंपिक खेलों में हिस्सा ले चुके मानवजीत सिंह का अनुभव भी किसी काम नहीं आया... GFX IN... मानवजीत सिंह संधू मेंस ट्रैप शूटिंग इवेंट में 16वें स्थान पर रहे... जबकि उस इवेंट में टॉप छह शूटर ही फाइनल के लिए क्वॉलिफाई करते हैं। GFX OUT...    लेकिन इस मायूसी के आलम में विजय कुमार ने सिल्वर मेडल जीत... भारतीय शूटर्स की नाकामी पर जरूर मरहम लगाया...    TAKE GFX PLATE... विजय ने 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल के क्वालिफाइंग राउंड में कुल 585 अंक हासिल किए थे...और फाइनल में छह निशानेबाज़ों के बीच उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया। GFX OUT...   बस इन्हीं दो मेडल के साथ ही लंदन ओलंपिक से भारतीय निशानेबाज़ों के निराशाजनक सफर का अंत हो गया...लेकिन इन सबके बीच...बड़ा सवाल ये है कि क्या भारत ने अपने 11 धुरंधर निशानेबाज़ों से सिर्फ एक ब्रॉन्ज़ और एक सिल्वर मेडल की ही उम्मीद की थी...शायद नहीं क्योंकि बीजिंग के बाद लंदन की लड़ाई में शूटिंग ही एक वो इंवेट था...जिसके इम्तिहान में भारत को अव्वल आने का भरोसा था...जिस पर हमारे शूटर्स खरे नहीं उतर सके।

लंदन ओलंपिक में भारतीय बॉक्सर इस बार भारत के 8 -8 मुक्केबाज़ों ने जब लंदन ओलंपिक के लिए उड़ान भरी...तो उम्मीद थी कि कुछ भी हो...भारतीय मुक्केबाज़ इसबार मेडल टैली में अपनी एंट्री ज़रुर करवाएंगे...लेकिन लंदन की सरज़मी पर कुछ साज़िशों के चलते...तो कुछ अपने बेहाल प्रदर्शन की वजह से...बॉक्सिंग में शामिल 8 में 7 पुरुष बॉक्सर फेल हो गए...लेकिन इनमें शामिल महिला मुक्केबाज़ यानि एमसी मैरीकॉम ने वो कमाल कर दिखाया...जिसने दुनिया भर में देश का नाम रौशन कर दिया। खेलों के सबसे बड़े महाकुंभ में शामिल हुए थे... भारत के 8-8 मुक्केबाज़ 7 सितारों ने तोड़ दिए सपने लेकिन एक अकेली महिला मैरीकॉम ने बॉक्सिंग में बचाई भारत की साख      take montange indian boxers...     खेलों के सबसे बड़े मंच यानि ओलंपिक में इस बार...भारतीय फैंस की निगाहें इस महाकुंभ में अपने उन 8 मुक्केबाज़ों पर टिकी थी...जिनमें विजेंदर सिंह जैसे स्टार खिलाड़ी शामिल थे...इस बार ओलंपिक में आस थी...कि हो ना हो...हमारे बॉक्सर्स देश का नाम ज़रुर बढ़ा करेंगे...लेकिन जिन स्टार खिलाड़ियों से सबसे ज्यादा उम्मीदें थी...वो एक ही झटके में हवा हो गए...जबकि स्टारडम से दूर...ओलंपिक में पहली बार शामिल हुई भारत की महिला मुक्केबाज़ मैरीकॉम ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीत...कुछ हद तक देश की इज्ज़त बचा ली... HOLD... बॉक्सिंग के इवेंट में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद थी...बीज़िंग ओलंपिक के ब्रॉन्ज़ मेडलिस्ट और भारतीय बॉक्सिंग के सबसे बड़े स्टार विजेंदर सिंह से... TAKE GFX... लेकिन क्वार्टरफाइनल का पड़ाव पार करते ही...सेमीफाइनल घमासान में विजेंदर का वार कुंद पड़ गया...और भारत को लगा जोर का झटका... GFX OUT...  विजेंदर के अलावा आस जय भगवान से भी थी...लेकिन उनका सफर तो प्री-क्वार्टर फाइनल में ही थम गया... GFX PLATE... जयभगवान को कजाकिस्तान के गानी जैलावुवोव ने 16-8 से हराया...तो वहीं ओलंपिक में हिस्सा ले रहे भारत के सबसे युवा बॉक्सर शिव थापा तो अपना पहला ही मैच हार कर बाहर हो गए...उन्हें मैक्सिको के मुक्केबाज वालदेज़ फेरेरो के हाथों हार झेलनी पड़ी GFX OUT...  हालाकि इस सबके बीच...भारतीय मुक्केबाज़ विकास कृष्षन से मेडल की उम्मीद बंधी... TAKE GFX IN... लेकिन लंदन की लड़ाई में अमेरिकी जोर ने भारतीय बॉक्सर की जीत को हार में तब्दील करवा उन उम्मीदों को परवान चढने से पहले ही हवा कर दिया... GFX OUT...     लंदन की लड़ाई में भारतीय बॉक्सर्स के साथ बेइमानी का ये सिलसिला...सुमित सांगवान की हार के साथ शुरु हुआ... TAKE GFX IN... सुमित को जीते हुए मुकाबले में...ब्राजील के यामागूची फालकाओ फ्लोरेंटिनो के हाथों 14-15 से हारा हुआ घोषित किया गया...इस फैसले पर भारत ने आपत्ति भी दर्ज कराई...लेकिन हासिल कुछ ना हो सका... GFX OUT...  विकास और सुमित की ही तरह...धोखेबाजी का ये मामला...भारतीय मुक्केबाज़ मनोज के साथ भी पेश आया... TAKE GFX IN... मनोज कुमार को 64 किलो ग्राम वर्ग में लोकल बॉक्स थामस स्टाकर के हाथों 16-20 से हारा हुआ घोषित किया गया...जिसपर मनोज ने कई सवाल खड़े किए... GFX OUT...     और आखिर में उम्मीदें देवेंद्रों पर आकर टिकी थी... TAKE GFX IN... लेकिन 49 किग्रा वर्ग में लैशराम देवेंद्रो सिंह क्वार्टर फाइल मुकाबले में आयरलैंड के पैडी बार्नस से हार कर ओलंपिक्स से बाहर हो गए। GFX OUT...    यानि एक-एक कर भारत के सात स्टार बॉक्सर खेलों के सबसे बड़े महाकुंभ से बिना मेडल जीते बाहर हो गए...यानि चारों ओर मायूसी का माहौल...लेकिन इन सबके बीच सामने आया...एमसी मैरीकॉम का वो नाम...जिन्होनें मायूसी भरे माहौल में भारतीय फैंस को मुस्कुराने का एक नायाब मौका दे दिया...ओलंपिक में पहली बार शामिल की गई महिला बॉक्सिंग में मैरीकॉम के मुक्कों ने दुनिया भर में भारत का नाम रौशन कर दिया...2 बच्चों की मां मैरीकॉम की मेहनत खूब रंग लाई...हालाकि 5 बार की इस विश्वविजेता से उम्मीदें गोल्ड की थी...लेकिन सेमीफाइनल में मिली हार ने उन उम्मीदों को तो पूरा नहीं होने दिया...लेकिन बॉक्सिंग के इवेंट में मैरी ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीत...उन स्टार मुक्कों बाज़ों की नाक ज़रुर बचा ली...जिन्होनें बॉक्सिंग में भारत को जीत दिलाने के दावे किए थे।   RISHABH SHARMA,LIVE INDIA, LONDON