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खेल से खेल तक

सोमवार, 4 फ़रवरी 2013

IPL ने खोली मैक्सवेल कि किस्मत....रजनीश कुमार


रिकी पोंटिंग और माइकल क्लार्क भले ही अपनी बेस प्राइस पर बिके हों... लेकिन ऑस्ट्रेलिया का ही एक और खिलाड़ी आईपीएल सीज़न 6 की नीलामी में बाज़ी मारने में कामयाब हुआ... दूसरे लफ्ज़ों में कहें......तो मैक्सवेल नाम के इस ऑलराउंड खिलाड़ी की लॉटरी लग गई... क्योंकि मुंबई इंडियन्स ने मैक्सवेल को नीलामी की सबसे ऊंची बोली पर खरीदा।
ना तजुर्बा है... ना परफॉर्मेंस ... लेकिन क्रिकेट की मंडी में... फिर मारी बाज़ी ... मैक्सवेल का निकला जैकपॉट ...अब इसे जैकपॉट ना कहें तो और क्या कहें ...आईपीएल सीज़न 6 की नीलामी में जिस खिलाड़ी की बेस प्राइस 1 करोड़ थी...वो सबसे मंहगे बिका... उसपर फ्रेंचाइजीज़ ने जमकर दांव लगाया... हालांकि ऐसा नहीं था कि ऑस्ट्रेलिया के इस ऑलराउंडर के पास शानदार फॉर्म और तजुर्बा थोक में था... बल्कि कंगारु खेमे का ये वो खिलाड़ी है जिसने पिछले साल अगस्त 2012 में ही अपने इंटरनेशनल क्रिकेट की शुरूआत की थी... जो अभी क्रिकेट की एबीसीडी ही सीख रहा है... लेकिन जब ऑक्शन में बोली लगने की बारी आई... तो मैक्सवेल सबसे महंगे क्रिकेटर बिके ...   मैक्सवेल को मुंबई इंडियन्स ने बेस प्राइस से करीब 5 गुना कीमत यानि 5 करोड़ 31 लाख रुपये में खरीदा...   हैरानी की बात ये रही कि इस ऑलराउंडर के अलावा दूसरे क्रिकेटर्स को खरीदने के लिए फ्रेंचाइजी ने इतनी दिलचस्पी नहीं दिखाई... जितना की मैक्सवेल के लिए उनका उतावलापन रहा...और यही वजह रही कि मैक्सवेल को खरीदने के लिए  मुंबई इंडियन्स और नई फ्रेंचाइजी हैदराबाद सनराइज के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली...    .. मैक्स वेल अब तक सिर्फ 8 ही वनडे मैच खेल चुके हैं... जिनमें उनके बल्ले से 32.83 की औसत से 197 रन ही निकले हैं.. जबकि इतने मैचों में उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला... ट्वेंटी -20 की बात करें तो मैक्सवेल ने अबतक ऑस्ट्रेलिया के लिए 9 ट्वेंटी-20 मैच खेले हैं... जिनमें मैक्सवेल ने 15.66 की मामूली औसत से 47 रन बनाए हैं... ..   ज़ाहिर है आंकड़े साफ दिखाते हैं कि मैक्सवेल की किस्मत का ताला आईपीएल ने सोने की चाबी से खोला है। रजनीश कुमार पत्रकार

IPL नीलामी में क्लार्क-पोटिंग पर नोटों की बरसात....रजनीश कुमार


आईपीएल सीज़न 6 के लिए की गई नीलामी में वैसे तो जमकर नोटों की बरसात हुई... लेकिन बावजूद इसके फ्रेंचाइजीज़ ने दिखा दिया कि महंगा बिकने के लिए सिर्फ नाम ही काफी नहीं है... दरअसल उम्मीद थी कि ऑस्ट्रेलियाई पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग और मौजूदा कप्तान माइकल क्लार्क की सबसे ज्यादा बोली लगेगी... लेकिन दोनों ही क्रिकेटर अपनी बेस प्राइस से 1 पैसा भी आगे नहीं बढ़ सके।
आईपीएल -6 के लिए  जब क्रिकेटरों की मंडी फिर से सजने जा रही थी तो माना जा रहा था कि इन 108 खिलाड़ियों की नालामी में कंगारू खिलाड़ी रिकी पोंटिंग और माइकल क्लार्क छा जाएंगे और तमाम फ्रेंचाइजी इन्हें अपने पाले में रखने के लिए अपने बटुए का मुंह खोल देंगी..लेकिन ऐसा कुछ भी ना हुआ... ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग और उनसे कंगारू टीम की कप्तानी की बागडोर संभालने वाले माइकल क्लार्क को इस नीलामी में बेहद ठंडा रिस्पोंस मिला.. और दोनो ही खिलाड़ी अपनी बेस प्राइस से आगे नहीं बढ़ सके..   मुंबई ने जताया पोटिंग पर भरोसा   आईपीएल -1 में  कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से खेल चुके पोटिंग आपीएल -6 की नीलामी के पहले क्रिकेटर थे..  4 लाख अमरीकी डॉलर यानी करीब दो करोड़ 11 लाख रुपए की बेस प्राइस वाले पोंटिंग पर इतनी ही कीमत के लिए मुंबई इंडियनंस ने दाव लगाया तो किसी और फ्रेंचाइजी ने उनकी इससे ज्यादा कीमत लगाने की जहमत नहीं उठाई और    पोंटिंग  अपनी बेस प्राइस यानी दो करोड़ 12 लाख पर ही बिक गए.. नहीं काम आई सुपर फॉर्म   पोटिंग तो खैर ऱिटायर्ड खिलाड़ी ठहरे लेकिन  जब बारी  कंगारू कप्तान माइकल क्लार्क की आई तो यहां भी पुणें वॉरियर को छोड़कर किसी और फ्रेंचाइजी ने क्लार्क में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई... यहां तक की किसी भी फ्रेंचाइजी को साल 2012 में क्लार्क की सुपर फॉर्म की भी याद नहीं आई...   और क्लार्क अपनी बेस प्राइस यानी दो करोड़ 12 लाख पर ही बिक गए..   क्लार्क इससे पहले आईपीएल -5 में भी पुणे वॉरियर्स का हिस्सा रह चुके थे... और तब उनकी कीमत का खुलासा भी नहीं किया गया था... बहरहाल इन दोनों कंगारु खिलाड़ियों के अपने बेस प्राइस से आगे ना बढ़ पाने से... साबित हो गया है कि आईपीएल में  अब रिकॉर्ड्स से ज्यादा उपयोगिता देख कर बोली लगाई जाने लगी है.. रजनीश कुमार पत्रकार

मंगलवार, 29 जनवरी 2013

देश के लिए कुछ खास नहीं कर सके मेस्सी


यूं तो मेस्सी फुटबॉल की दुनिया में रोज नए-नए रिकॉर्ड बनाते जा रहे हैं ... लेकिन अभी भी मेस्सी के इस शानदार करियर में कुछ कमी बाकी है। मेस्सी कई मौके मिलने के बावजूद अब तक अपने देश अर्जेंटीना के लिए कोई खास कमाल नहीं दिखा पाए हैं ... और शायद  इसीलिए उन पर देश की बजाय क्लब को ज्यादा तरजीह देने के आरोप भी लगते रहे हैं... अपने हुनर के दम पर फुटबॉल की दुनिया में राज करने वाले फुटबॉल के इस जादूगर लियोनल मेस्सी पर देश की बजाय अपने क्लब को तरजीह देने के ओरोप भी लगते रहे हैं... कहा जाता रहा कि मेस्सी जब अपने देश अर्जेंटीना की टीम के लिए उतनी शिद्दत के साथ नहीं खेलते जितना कि अपने क्लब बार्सिलोना के लिए... मेस्सी के करियर के आंकड़े भी यही बयां करते हैं कि उनकी किक से देश के लिए कम और क्लब के लिए ज्यादा गोल निकले हैं...   मेस्सी ने अपने क्लब बार्सिलोना के लिए अभी तक खेले गए 361 मैचों में  297  गोल दागे हैं..यानी हर 10 मैच में मेस्सी के नाम 8 गोल रहे.. वहीं दूसरी ओर मेस्सी ने अपने देश अर्जेंटीना के लिए 76 मैचों में महज 31 गोल ही दागे हैं... यानी हर 10 मैचों में चार गोल..य     मेस्सी  अभी तक अपने देश के खेलते हुए कई बड़े मौकों पर फ्लॉप भी साबित हुए हैं...   2010 वर्ल्ड कप में नहीं किया कोई गोल    साल 2010 में जब अर्जेंटीना की टीम फीफा वर्ल्डकप खेलने साउथ अफ्रीका पहुंची तो उम्मीद थी कोच माराडोना और मेस्सी की ये जोड़ी कुछ कमाल करके दिखाएगी..लेकिन मेस्सी पूरे वर्ल्डकप में एक गोल भी नहीं दाग सके और उनकी टीम क्वार्टर फाइनल में जर्मनी से 0-4 से हार कर बाहर हो गई..   कोपा अमेरिका में नहीं चले     वर्ल्डकप की नाकामी के के बाद उम्मीद थी कि मेस्सी अपनी सरज़मीं पर साल 2011 में होने वाले कोपा अमेरिका में कुछ कमाल करके दिखाएंगे..लेकिन यहां भी मेस्सी की झोली सूनी ही रही..और अर्जेंटीना का सफर क्वार्टर फाइनल से आगे नहीं बढ़ सका...   बहरहाल मेस्सी अभी महज 25 साल के ही हैं और अभी उन्हें कई और बड़े इंटरनेशनल टूर्नामेंट भी खेलने हैं ... ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए कि अगले साल यानि 2014 में होने वाले फुटबॉल वर्ल्डकप में मेस्सी अपनी शानदार फॉर्म का फायदा उठाते हुए ... ऐसा दमदार प्रदर्शन दिखाएंगे.. जो उन्हें देश के लिए भी बड़ा खिलाड़ी साबित कर देगा।  रजनीश कुमार ॉ पत्रकार sportskhabar@gmail.com

लियोनल मेस्सी....फैशनेबल अमीर खिलाड़ी


सिर्फ मैदान पर ही नहीं बल्कि फुटबॉल के मैदान के बाहर भी मेस्सी जैसा कोई नहीं है। दरअसल अपने खेल से मेस्सी ने आज खेल प्रेमियों को अपना इस कदर मुरीद बना रखा है ... कि वो बाज़ार की भी पहली पसंद बन गए हैं । बड़े से बड़ा ब्रांड आज मेस्सी से जुड़ने के लिए बेताब है ... और यही वजह है कि मेस्सी कमाई करने के मामले में दुनिया से सबसे महंगे खिलाड़ी हैं। ताज़ा आंकड़ों की मानी जाए तो मेस्सी की सिर्फ एक साल की कमाई 500 करोड़ है।
मैदान पर मैजिक दिखा कर सबको अपना मुरीद बनाने वाले अर्जेंटिना के स्टार फुटबॉलर लियोनेल मेस्सी...का जादू मैदान के बाहर भी इस कदर छाया हुआ है कि दुनिया का हर बड़ा ब्रैंड मेस्सी के नाम को अपने साथ जोड़ने के लिए बेताब है... लगातार चार बार फीफा फुटबॉलर ऑफ द ईयर का खिताब अपने नाम करने वाले मेस्सी ना सिर्फ फुटबॉल जगत के सबसे मंहगे प्लेयर हैं... बल्कि कमाई के मामले मे भी मेस्सी ने वर्ल्ड स्पोर्ट्स के तमाम दिग्गज खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया है   साल 2012 में मेस्सी के कॉन्ट्रैक्ट और विज्ञापनों से होने वाली कमाई का करार 43 मिलियन डॉलर तक पहुच गया था... जिसमें से 21 मिलियन डॉलर उन्हें अकेले अपने BRAND ENDORSEMENT से कमाए थे...इसके अलावा 19 मिलियन डॉलर उन्हें अपनी लीग टीम एफसी बार्सिलोना से मिले.. इसके अलावा अपनी धरेलू टीम अर्जेंटिना से भी मेसी को कॉन्ट्रैक्ट के तहत 4 मिलिन डॉलर तहत मिलते है 4GFX OUT   फिलहाल मेसी 30 से भी ज्यादा ब्रॉड के साथ जुड़े हुए हैं...  कमाई के मामले मे मेस्सी ने फेमस फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो और डेविड बेकहम को भी पीछे छोड़ दिया है..   FORBES MAGZINE ने भी पिछले साल मेस्सी को दुनिया के सबसे अमीर खिलाड़ियों की सूची में टॉप पर रखा था...इतना ही नहीं मेस्सी की कमाई के सामने टीम इंडिया के कप्तान धोनी की कमाई भी फीकी पड़ जाती है। GFX IN:- मेस्सी की साल भर की कुल कमाई जहां 500 करोड़ रुपए हुई... तो वहीं धोनी की कमाई एक साल में 135 करोड़ रुपए के आस पास है   कमाई में भी वह बेकम और रोनाल्डो को पछाड़ नंबर वन बन चुके हैं। हर हफ्ते लगभग चार करोड़ रुपए कमा लेते हैं। हर रोज कोई 55 लाख रुपए।   TIME MAGZINE जैसी कई पॉपुलर मैगजीन के कवर पेज पर आ चुके मेस्सी दुनिया के सबसे बड़े SPORTS AWARD LAUREUS SPORTSPERSON अवॉर्ड को भी जीत चुके हैं...     फुटबॉल ग्राउंट पर अपने डेयरिंग और जादुई खेल के साथ-साथ स्टाइल और फैशन के मामले में भी मेस्सी किसी से कम नहीं है...अपने लुक्स और UNIQUE स्टाइल के चलते मेस्सी के नाम के मैजिक को भुनाने वालों की कतार आने वाले दिनों मे और भी बढ़ सकती है।   रजनीश कुमार पत्रकार sportskhabar@gmail.com

दुनिया का सबसे कामयाब फुटबॉलर...लियोनल मेस्सी


मेस्सी को आज फुटबॉल की दुनिया का जादूगर कहा जाता है। जहां आज फुटबॉल की रिकॉर्ड बुक्स से जुड़े ... ज़्यादातर रिकॉर्ड्स मेस्सी के नाम हैं। तो बकाया रिकॉर्ड्स भी मौजूदा वक्त में मेस्सी की पकड़ में नज़र आ रहे हैं। आलम ये है कि बात चाहे रिक़ॉर्ड्स की हो ... या अवॉर्ड्स की हर जगह सिर्फ एक आवाज़ सुनने को मिलती है कि मेस्सी जैसा कोई नहीं। लियोनल आंद्रे मेस्सी ... या कहें फुटबॉल की दुनिया का वो जादूगर जिसने सिर्फ 25 साल की उम्र में पूरी दुनिया को अपना दीवाना बना दिया है। सिर्फ 7 साल के करियर के बाद आज मेस्सी वो नाम हैं जिनके खिलाफ ... खेलने से पहले विरोधी अपनी रणनीति 100 बार बदलते हैं।  कम उम्र में फुटबॉल की दुनिया में दस्तक देकर ... मेस्सी ने हर वो मुकाम हासिल किया है ... जिसका सपना हर फुटबॉलर देखता है। 16 अक्टूबर 2004  को पहली बार लीग फुटबॉल में कदम ऱखने वाले मेस्सी के हुनर को ... स्पेनिश फुटबॉल क्लब बार्सिलोना ने छोटी उम्र में ही पर पहचान लिया था।   और बार्सिलोना ही वो क्लब है जिसके लिए मेस्सी अब तक लीग में 235 मैच खेलते हुए रिकॉर्ड 202 गोल कर चुके हैं।     हालांकि जब बात देश की आती है तो मेस्सी के खेल ... अर्जेटीनी टीम को चैंपियन बनाने के लिए परवान चढ़ जाता है। जून 2004 में  पराग्वे के खिलाफ़ अंडर-20 फ्रैंडली मैच के साथ ... मेस्सी को अर्जेंटीनी नेशनल टीम के लिए अपने इंटरनेशनल करियर के आगाज़ का मौका मिला। लेकिन मेस्सी को असली पहचान मिली 2005 नीदरलैंड FIFA वर्ल्ड यूथ चैम्पियनशिप में ...   जहां अपने बेमिसाल प्रदर्शन के चलते मेस्सी को ना सिर्फ गोल्डन बॉल का खिताब मिला ... बल्कि इसी के साथ मेस्सी गोल्डन बूट के लिए भी बाज़ी मारी। वो मेस्सी का ही खेल था जिसकी बदौलत इस टूर्नामेंट में अर्जेटीना खिताब जीतने में काम हासिल करने में कामयाब रहा।     अगस्त 2005 में सिर्फ 18 साल की उम्र में हंगरी के खिलाफ़ ... मेस्सी को अर्जेटीना की सीनियर टीम के लिए खेलने का मौका मिला। जिसके बाद मेस्सी को 2006 में अर्जेटीना के लिए पहली बार FIFA वर्ल्डकप की टीम में शामिल किया गया। हैरानी की बात ये थी कि उस वर्ल्डकप में मेस्सी को ज्यादातर मैचों में ... बेंच पर ही बिठाए रखा गया ।     लेकिन 2010 वर्ल्डकप में मेस्सी सीजन के सबसे फेवरेट खिलाड़ी का ओहदा हासिल करने में कामयाब रहे।   वर्ल्डकप में तो मेस्सी अर्जेनटीना को चैंपियन नहीं  बना सके ... लेकिन साल 2012 आते-आते मेस्सी ने गोल करने के मामले में एक नया इतिहास ज़रूर रच दिया।     इस साल मेस्सी ने गर्ड म्यूलर के एक साल में 85 गोल के 40 साल पुराने रिकार्ड को तोड़ दिया । औऱ तो औऱ इसी साल मेस्सी ने लगातार चौथी बार फुटबॉल की दुनिया के ऑस्कर कहे जाने वाले ... बेलोन-द-ओर अवॉर्ड को भी जीता।       2012 में ही मेस्सी को फीफा प्लेयर ऑफ द इयर के खिताब से भी नवाजा गया।
ये वो रिकॉर्ड है जो बैकहम औऱ ज़िदान को भी लगातार मुंह चिढ़ाता था ... लेकिन लियोनेल मेस्सी ने जो चाहा वो हासिल किया।   1 साल में किए 91 गोल   दरअसल 2012 लियोनेल मेस्सी के लिए वो साल रहा ... जहां अपने प्रदर्शन के दमपर उन्हें FIFA भी ... फुटबॉलर ऑफ द ईयर खिताब देने के लिए मजबूर हो गया।  दरअसल स्पेनिश लीग में बार्सिलोना के लिए खेलते हुए ... जैसे ही मेस्सी ने रीयाल बेटिस पर ये गोल दागा तो उन्होंने जर्मनी के गिर्ड मूलर उस रिकॉर्ड को तोड़ दिया ... जो उन्होंने 40 साल पहले एक साल में 85 गोल करते हुए बनाया था।     हालांकि साल 2012 में मेस्सी सिर्फ 86 गोल पर ही रूक जाते ऐसा कैसे हो सकता था ... अपने रिकॉर्ड को और सुधारते हुए मेस्सी ने साल 2012 में ... पूरे 91 गोल कर दिए। जिसमें अर्जेनटीना के लिए 12 जबकि बार्सिलोना के लिए 79 गोल किए।   मेस्सी की यही वो उपलब्धि भी रही जिसके बाद ... वर्ल्ड फुटबॉल में उन्हें पेले, माराडोना और ज़िदान से भी बेहतर मानते हुए ... ऑल टाइम बेस्ट फुटबॉलर का खिताब दिए जाने को लेकर भी आवाज़ बुलंद हो गई।   बनते रहे नए-नए रिकॉर्ड्स   साल 2012 में मेस्सी की फॉर्म इतनी ज़बरदस्त थी कि इसी साल उन्होंने ... अपने करियर में 300वां गोल भी करने में देर नहीं लगाई।     अपने क्लब बार्सिलोना के लिए खेलते हुए मेस्सी अब तक 361 मैचों में रिकॉर्ड 297 गोल कर चुके हैं। खास बात ये है कि अब तक क्लब फुटबॉल में किसी भी खिलाड़ी के नाम ये रिकॉर्ड दर्ज नहीं है। वहीं अर्जेनटीना के लिए मेस्सी के नाम फिलहाल 31 गोल हैं         फुटबॉल के मैदान पर मेस्सी के बढ़ते कद का अंदाज़ा उनके खेल के कुछ औऱ आंकड़े भी देते हैं ... मसलन         2004-05 सीज़न में अपने करियर का आगाज़ करने वाले मेस्सी पहले सीज़न में सिर्फ 1 गोल की कर सके थे।   2005-06 सीज़न  में ये आंकड़ा बढ़कर 7 गोल तक पहुंचा।     2006-07 सीज़न में मेस्सी के नाम 19 गोल रहे।    2007-08 सीज़न में ये गिनती 20 गोल की रही ।   जबकि 2008-09 में मेस्सी ने गोलों की ये गिनती 42 कर दी ।   2009-10 सीज़न में मेस्सी का ये ग्राफ 49 गोल तक पहुंचा।   इसी तरह 2010-11 सीज़न में मेस्सी ने 51 गोलकर पहली बार एक कैलेंडर ईयर में 50 गोल करने का रिकॉर्ड भी बनाया।   2011-12 सीज़न में मेस्सी का ये रिकॉर्ड 77 गोल तक पहुंच चुका था ।         इसी साल चैंपियन्स लीग के इतिहास में मेस्सी एक ही मैच में 5 गोल करने वाले ... फुटबॉल इतिहास के पहले फुटबॉलर भी बन गए। साफ है मौजूदा वक्त में जब मेस्सी का खेल और फॉर्म अपने उफान पर है ... उम्मीद की जा सकती है कि साल 2013 में फुटबॉल के मैजिक मैन मेस्सी ... एक कैलेंडर ईयर में गोल करने का शतक भी लगा देंगे। रजनीश कुमार खेल पत्रकार sportskhabar@gmail.com

शनिवार, 26 जनवरी 2013

फोर्ब्स में धोनी की धूम


फोर्ब्स मैग्ज़ीन के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक महेन्द्र सिंह धोनी कमाई के मामले में ... देश के नंबर-1 क्रिकेटर हैं। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि धोनी ने पहली बार ... सबसे ज़्यादा कमाई का ये रिकॉर्ड बनाया हो। हकीकत तो ये है कि धोनी साल 2009 से लगातार सिर्फ हिंदुस्तान ही नहीं ... बल्कि वर्ल्ड क्रिकेट में सबसे ज़्यादा कमाई करने वाले क्रिकेटर बने हुए हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि साल 2011 में तो धोनी ने कमाई के मामले में नोवाक जोकोविक औऱ उसेन बोल्ट को भी मात दे दी थी।  
    साल 2012 में देश की सबसे लोकप्रिय सेलीब्रिटी बनकर अगर धोनी ने इतिहास रचा है ... तो ऐसा भी नहीं है कि शौहरत के इस आसमान पर धोनी ने पहली बार कदम रखा हो। हकीकत में दुनिया भर में रईसी और रसूख का पैमाना बन चुकी अमेरिकी मैग्जीन फोर्ब्स की लिस्ट में आना ... मैन इन ब्ल्यब के कप्तान महेंन्द्र सिंह धोनी की आदत में शुमार है। साल 2007 में पहले ट्वेंटी-20 वर्ल्डकप की ट्रॉफी उठाने के बाद से ही ... धोनी के धनवान बनने का ग्राफ इतनी तेजी से बढ़ा है कि फोर्ब्स को भी उनका सजदा करने के लिए मजबूर होना पड़ा।   साल 2009 में मिली जगह   साल 2008 में क्रिकेट को बदल देने वाली ट्वेंटी-20 लीग IPL के के आगमन के बाद ... तमाम क्रिकेटरों के साथ-साथ धोनी की आमदनी इतनी ज्यादा बढ़ गई कि उन्होंने ... करीब ढेढ दशक से देश मे सबसे अमीर क्रिकेटर की कुर्सी पर काबिज़ रहे सचिन तेंदुलकर को भी पीछे छोड़ दिया । साल 2009 ही वो साल था जब कमाई के मामले में वो दुनिया के सबसे रईस क्रिकेटर बन चुके थे। फोर्ब्स के मुताबिक साल 2009 तक धोनी की सालाना आमदनी ... 10 मिलियन डॉलर आंकी गई यानी करीब 50 करोड़ रूपए आंकी गई थी। जिसके बाद साल 2010 में भी धोनी वर्ल्ड क्रिकेट के सबसे अमीर क्रिकेटर की कुर्सी पर काबिज़ रहे।   साल 2011 में बदली किस्मत   साल 2011 में देश को 28 साल बाद वन-डे क्रिकेट का वर्ल्डकप जिताने के बाद तो ... धोनी की किस्मत को तो मानो कामयाबी के पंख ही लग गए। इसी की बदौलत जब साल 2012 में फोर्ब्स ने इस बार ... दुनिया भर की तमाम स्पोर्ट्स सेलीब्रिटीज़ की आमदनी के पैमाने के साथ नई फेहरिस्त जारी की तो माही ने यहां भी अच्छे-अच्छों  को पीछे छोड़ दिया।   2011 के लिए धोनी फोर्ब्स के मुताबिक कमाई के मामले में दुनिया में 31वे नंबर के खिलाड़ी रहे। लिस्ट में जहां नोवाक जोकोविच को 62वां स्थान मिला ... तो वहीं फर्राटा रेस के चैंपियन उसैन बोल्ट को 63वें और सचिन तेंदुलकर 78वें स्थान पर मौजूद थे।     खास बात ये भी थी कि इस लिस्ट में धोनी की मार्केट वेल्यू गोल्फ के मास्टर टाइगर वुड्स के बराबर आंकी गई थी। रजनीश कुमार खेल पत्रकार rajnish17kumar@gmail.com

धोनी कैसे बने पूरी दुनिया के धोनी


भारत औऱ इंग्लैंड के बीच होने वाला तीसरा वन-डे...अगर रांची जैसे छोटे शहर को मिल पाया...तो इसके पीछे सिर्फ एक नाम ज़िम्मेदार है...वो नाम जिसे आज वर्ल्ड क्रिकेट महेन्द्र सिंह धोनी के नाम से जानता है..लेकिन छोटे से शहर में रहने वाला महेंद्र नाम का ये अदना सा लड़का...कैसे इतना बढ़ा सितारा बन गया...क्या है पर्दे के पीछे धोनी की असल कहानी...
youTube Link for Video Story : Dhoni;s Life Documentary: http://www.youtube.com/watch?v=NE3UoIiz0JE महेन्द्र सिंह धोनी ... या कहें माही ! टीम इंडिया के कैप्टन कूल के चर्चे आज भले ही आम हो ... भले ही वर्ल्ड क्रिकेट उनके रुतबे को सलाम करता हो ... लेकिन गरीब परिवार में जन्में धोनी का बचपन ऐसा बिलकुल नहीं रहा ... जैसा होने पर कोई नाज़ करे। RELIEF सुनकर भले ही हैरानी हो ... लेकिन हकीकत ये है कि माही का जन्म रांची के एक ऐसे गरीब परिवार में हुआ था ... जहां उनके पिता पानसिंह के पास अपने बेटे की चाहत यानी क्रिकेट को परवान चढ़ाने तक के पैसे नहीं थे। धोनी के पास अपना क्रिकेट बैट तक नहीं था ... स्कूल की टीम के साथ खेलने के लिए मौका मिल जाए इसीलिए धोनी ने ... ना चाहते हुए भी विकेटों के पीछे कीपिंग करना स्वीकार कर लिया। पिता ने बैट खरीदकर नहीं दिया ... तो बार-बार चिढ़ाने वाले साथी लड़कों से बचने के लिए धोनी ने खुद ही बैट के लिए पैसे जोड़ने शुरू कर दिए। छोटी से उम्र में मैदान पर लंबे छक्के लगाने वाले धोनी की डिमांड थी ... तो माही ने भी दोस्तों से कहा कि मैच खेलने के लिए अब वो 5 रूपए लिया करेंगे । मुफलिसी के इस दौर में अक्सर धोनी ने पड़ोसियों के कहने पर राशन की लाइन में लगने का भी काम किया ... जिसे उनका खर्चा चल सके। इसी कमाई से उन्होंने अपना पहला क्रिकेट बैट औऱ किट खरीदी । धोनी के लिए अपने सपनों की उड़ान पकड़ने का जुनून ऐसा था ... कि उनके स्कूल के क्रिकेट कोच के.आर बैनर्जी भी उन्हें बिना किसी फीस कोचिंग देने के लिए तैयार हो गए। 7 साल तक स्कूली स्तर पर आक्रामक क्रिकेट खेलकर अब धोनी मशहूर हो चुके थे ... अखबार में उनके खेल की खबरें छपने लगीं थी। इसी बीच उन्हें CCL क्लब से खेलने का मौका मिला ... जहां माही के हुनर को तराशने का काम किया कोच चंचल भट्टाचार्य ने। वक्त गुज़रा और धोनी को अपने खेल की बदौलत रेलवे में टिकट चैकर यानी TTE की नौकरी भी मिल गई। लेकिन क्रिकेट की कोहीनूर यहां कहां थम सकता था ... बिहार के लिए रणजी ट्रॉफी में अपनी काबिलियत दिखाने के बाद धोनी को इसके बाद इंडिया-ए के लिए खेलने का मौका मिला ... जिसके बाद धोनी ने कभी पीछे मुढ़कर नहीं देखा। धोनी के इरादों की मज़बूती के सामने तमाम मंज़िले खुद बा खुद सजदा करने लगीं ... । मुफलिसी औऱ संघर्ष के लंबे दौर के बाद फिर आय़ा साल 2004 ... जब माही टीम इंडिया का हिस्सा बन चुके थे। इसके बाद तो धोनी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा ... टीम में बतौर बल्लेबाज़ खुद को साबित करने के बाद ... धोनी टीम इंडिया के कप्तान बने औऱ देश को दो-दो वर्ल्डकप के अलावा टेस्ट क्रिकेट में नंबर-1 होने का रूतबा भी दिया दिया। रजनीश कुमार खेल पत्रकार rajnish17kumar@gmail.com