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खेल से खेल तक

गुरुवार, 25 अप्रैल 2013

सचिन तेंदुलकर...एक कामयाब क्रिकेटर


  सचिन तेंदुलकर... ये नाम आज किसी पहचान का मोहताज नहीं।  लेकिन 23 साल पहले जब 1989 में टीम इंडिया के पाकिस्तान दौरे पर ... महज़ 16 साल की छोटी सी उम्र के सचिन को टीम इंडिया में जगह मिली थी ... तो शायद ही किसी ने ये सोचा था कि भविष्य में जेंटलमैन गेम को यही छोटा सा बच्चा ... ना सिर्फ देश में बल्कि पूरी दुनिया में एक नई परिभाषा और पहचान दे देगा। हकीकत तो ये है कि आज क्रिकेट की पहचान सचिन से है ... इंटरनेशनल क्रिकेट में करीब 24 साल से जारी सचिन का सफर आज भी पहले की तरह जारी है ... अपने जज़्बे और बल्ले से प्रदर्शन से क्रिकेट की सबसे बड़ी मिसाल बन चुके सचिन को ... हाथ में बल्ला थमाने के असली श्रेय उनके बड़े भाई अजित तेंदुलकर को जाता है। मुंबई के शारदाआश्रम विद्यामंदिर में पढ़ाई के दौरान जो सचिन ने ... अपने कोच रमाकांत अचरेकर से क्रिकेट के गुर सीखे ... वो आज रिकॉर्ड बुक्स में असंख्य आंकड़ों के साथ मील का पत्थर बन चुके हैं। हालांकि शुरूआत में सचिन तेज़ गेंदबाज़ बनना चाहते थे ... औऱ इसी के गुर सीखने के लिए वो एमआरएफ़ पेस फ़ाउंडेशन भी गए। लेकिन डेनिस लिली की सलाह पर उन्होंने गेंदबाज़ी छोड़कर ... अपना ध्यान बल्लेबाज़ी पर दिया। इसी के बाद रमाकांत अचरेकर की देखरेख में सचिन की बल्लेबाज़ी फली-फूली । आचरेकर का विकेट पर 1 रूपए का सिक्का रखकर ... नेट्स में गेंदबाज़ों को सचिन को आउट करने का चैलेंज देना ... औऱ हर बार नॉट-ऑउट रहने पर सचिन का लगातार 13 सिक्के जीतना ... क्रिकेट के भगवान की ज़िंदगी से जुड़ी ऐसी कहानी है जो देश का बच्चा-बच्चा जानता है। सचिन की ज़िंदगी की एक और कहानी भी साल 1988 में देश भर में सुर्खियां बटोरने की वजह बन गई थी। इस दौरान लॉर्ड हैरिस शील्ड इंटर स्कूल मैच में GFX सचिन ने विनोद कांबली के साथ मिलकर ...664 रनों की नाबाद पार्टनरशिप की ... जो दशकों तक अजेय रिकॉर्ड रही। हालांकि अपने पहले ही टेस्ट में सचिन सिर्फ़ 15 रन बनाकर ... वक़ार यूनुस की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए थे। लेकिन जिस तरह से मैच में सचिन ने पाकिस्तानी गेंदबाज़ों का सामना किया ... सचिन अपनी अलग पहचान बना चुके थे। इसी दौरे पर एक बाउंसर से चोट खाने के बाद सचिन की नाक से ख़ून निकलने लगा था ... लेकिन उन्होंने पैवेलियन लौटने से इंकार कर दिया ... क्रिकेट के लिए सचिन का ये वो समर्पण जिसकी पूरी दुनिया कायल हो गई। एक प्रदर्शनी मैच में अब्दुल क़ादिर की गेंदों पर छक्के लगाते हुए सचिन का सिर्फ़ 18 गेंदों पर 53 रन बनाना भी ... उन्हें छोटी सी उम्र में फैन्स का चहेता बना गया। बात चाहे इंग्लैंड के ख़िलाफ़ 1990 में ओल्ड ट्रैफ़र्ड के मैदान पर बनाए ... करियर के पहले टेस्ट शतक की हो ... या 1991-92 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर सिडनी टेस्ट में खेली नाबाद 148 रनों की ज़िम्मेदार पारी की ... सचिन का करियर मैच दर मैच सिर्फ परवान ही चढ़ा। 1994 में पहली बार उन्हें वन-डे क्रिकेट में टीम के लिए ... पारी की शुरुआत करने का मौका मिला जिसके बाद ... इसी साल उन्होंने वनडे फॉर्मेट अपना पहला शतक लगाकर ... उम्मीदों के नए सिलसिले का आगाज़ कर दिया। इंग्लैंड में 1999 वर्ल्डकप के दौरान अपने पिता की मृत्यु के बावजूद ... टीम की ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए ... सचिन का शोक के बावजूद वापस वर्ल्डकप खेलने जाना और देश के लिए शतक बनाना ... सचिन की शक्सियत की ऐसी मिसाल बनीं जिसने किसी भी दूसरे क्रिकेटर से ... उन्हें कोसों आगे पहुंचा दिया।  क्रिकेट की पिच पर करीब-करीब बिताए अपने ढाई दशक के करियर में सचिन के नाम आज इतनी उपलब्धियां औऱ रिकॉर्ड हैं कि क्या कहें ... सबसे ज़्यादा रन ... सबसे ज़्यादा शतक ... सबसे लंबा करियर ... और वर्ल्ड क्रिकेट का सबसे सफल क्रिकेटर होने की उपलब्धियों के साथ आज सचिन क्रिकेट की असली पहचान हैं। जिस पर आने वाली पीढ़ियां सिर्फ नाज़ ही करेंगी।

एक बार फिर सचिन का जन्मदिन


तस्वीरें भले ही पुरानी हों लेकिन क्रिकेट को धर्म की तरह पूजने वाले देश हिंदुस्तान में 24 अप्रैल का दिन हर साल ऐसे ही मनाया जाता है ।  वजह भी साफ है ... क्योंकि इसी रोज़ जेंटलमैन गेम यानी क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का जन्मदिन जो है । GFX मुंबई में 24 अप्रैल 1973 को जन्मे सचिन तेंदुलकर ... बुधवार को अपने 40वां जन्मदिन मनाएंगे।  किसी गैर-भारतीय के लिए ये चौंकाने वाली बात हो सकती है लेकिन 1989 में सिर्फ 16 साल की उम्र में अपने इंटरनेशनल करियर का आगाज़ करने वाले सचिन का जन्मदिन ... हर साल देश में करोड़ों फैन्स किसी त्यौहार की तरह ही मनाते रहे हैं।  इसे सचिन के लिए उनके फैन्स की चाहत नहीं तो औऱ भला क्या कहा जाएगा ... कि इस रोज़ कहीं देश में फैन्स मास्टर ब्लास्टर की सलामती औऱ लंबी उम्र के लिए भगवान के दरबार में  पूजा-अर्चना करते हैं ... कहीं गरीबों में दान दिया जाता है ... तो कहीं सचिन के नाम केक काटकर सेलीब्रेट किया जा सकता है।  यूं तो क्रिकेट के कोहीनूर सचिन को चाहने वालों के लिए ये दिन हमेशा ही खास रहा है ... लेकिन बीते साल की तरह इस बार भी सचिन के फैन्स अपने हीरो को ... क्रिकेट की पिच पर खेलते हुए देख पाएंगे।  जी हां ... खुशकिस्मती से इस बार भी 24 अप्रैल की शाम IPL में सचिन की टीम मुंबई इंडियन्स ... मैदान पर खेलती नज़र आएगी। जहां उसका मुकाबला पिछले साल की डिफेंडिग चैंपियन कोलकाता नाइट राइडर्स से उसी के घरेलू मैदान ईडेन गार्ड्न्स पर होगा।  वन-डे क्रिकेट से संन्यास का ऐलान करने के बाद क्रिकेट की पिच पर सचिन तेंदुलकर का ये पहला जन्मदिन होगा ... वैसे भी मैदान औऱ फॉर्मेट चाहे जो भी हो लेकिन अगर सचिन खेल रहे हैं ... तो फैन्स का तांता तो लगना तय ही है।  हालांकि ये टक्कर कोलकाता की घरेलू टीम केकेआर के खिलाफ होने जा रही है ... लेकिन सचिन मेनिया के सामने  कोई और जादू चलेगा इस बात की संभावना ना के बराबर है। फिर उम्मीद की जा सकती है है कि ईडेन के मैदान पर ... जब बर्थ-डे ब्वॉय़ सचिन के बल्ले से बनने वाले हर रन पर 75 हज़ार से ज़्यादा दर्शक एक सुर में सचिन-सचिन के नारे के साथ मास्टर ब्लास्टर का जन्मदिन मनाएंगे ... तो नज़ारा देखने वाला होगा।

सचिन एक कामयाब पति...एक कामयाब पिता ...

क्रिकेट के PERFECTIONIST कहे जाने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर... सिर्फ मैदान पर ही एक बल्लेबाज के तौर पर परिपक्व नहीं हैं... बल्कि मैदान से बाहर अपनी निजी जिंदगी में भी अपना हर किरदार उतनी ही शिद्दत से निभाते आए हैं फिर चाहे वो किरदार एक पति का हो...या फिर एक पिता का ... पारिवारिक पिच पर भी सचिन उतने ही PERFECT हैं जितने क्रिकेट की पिच पर... सचिन के छोटे से परिवार में उनकी पत्नी अंजलि और उनके दो बच्चे हैं...बड़ी बेटी सारा तेंदुलकर हैं... और छोटा बेटा अर्जुन तेंदुलकर है...अपने BUSY SCHEDULE के बावजूद सचिन ने कभी भी अपने परिवार को नजरअंदाज नहीं किया...खेल के साथ-साथ मास्टर ब्लास्टर फैमिली लाइफ भी BALANCE करना जानते हैं...परिवार में एक पति पिता के तौर पर सचिन ने उन सारी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है ... जो उन्हें एक PERFECT FAMILY MAN बनाता है... एक पिता के तौर पर सचिन ने अपने बच्चों को ना सिर्फ अच्छी परवरिश दी है बल्कि उन्हें वो शिक्षा और संस्कार भी दिए जो उन्हें उनके माता पिता ने दिए थे... विदेशी दौरों के चलते अपना ज्यादातर वक्त घर से दूर बिताने के बाद जब भी सचिन घर आते हैं तो वो अपना सारा वक्त अपने बच्चों के मन-मुताबिक बिताना पसंद करते हैं...BYTE SACHIN TENDULKAR (NOT MORE THAN 15 SEC) क्रिकेट से छुट्टियां मिलते ही सचिन अपने परिवार के साथ घूमने के लिए निकल जाते हैं फिर चाहे वो मंसूरी की वादियां हो या फिर LONDON... क्रिकेट के लिए अपने प्यार के बावजूद सचिन ने कभी भी अपने बेटे को क्रिकेटर बनने के लिए नहीं मजबूर किया... उन्होंने अपने दोनों बच्चों को खुद अपनी जिंदगी के फैसले लेने की पूरी आज़ादी दी... हालांकि सचिन के बेटे अर्जुन ने जहां अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए... क्रिकेट को ही अपनी पसंद बनाया... तो वहीं सचिन की बेटी सारा अपनी मां की तरह मेडिकल लाइन में जाने की तैयारी कर रही हैं। साफ है एक आदर्श पिता बनकर सचिन ने साबित कर दिया की वो सिर्फ क्रिकेट ही नहीं... बल्कि जिंदगी के हर मोर्चे पर बाजी मारने का माद्दा रखते हैं ... वो एक LEGENDARY क्रिकेटर होने के साथ-साथ एक आइडियल पती और पिता भी हैं।

सोमवार, 22 अप्रैल 2013

क्रिकेटर्स की प्रेम कहानी


तेरा मेरा प्यार अमर कहते हैं हर इंसान की जिंदगी में एक मौका ऐसा आता है....जब उसका दिल किसी के लिए धड़कने लगता है, शायद इसी को प्यार कहते हैं। सचिन तेंदुलकर की लाइफ में भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब उनका दिल किसी के लिए जोरों से धड़कने लगा। सचिन का दिल चुराने वाली कोई और नहीं बल्कि उनकी पत्नी अंजली थीं, 17 साल के तेंदुलकर और 21 साल की अंजली की मुलाकत मुंबई एयरपोर्ट पर हुई। सचिन 1990 में इंग्लैंड दौरे पर अपना पहला शतक लगाकर वापस लौटे थे और अंजली अपनी मां को लेने एयरपोर्ट आई थीं, दोनों ने एक-दूसरे को देखा और इनके प्यार ने सात जन्मों की उड़ान भर दी। कहने को अंजली सचिन से चार साल बड़ी थीं और वो एक गुजराती परिवार से थी, लेकिन प्यार तो प्यार है, सचिन ने अंजलि को प्रपोज किया और अंजलि सारी दुनिया छोड़कर सचिन के साथ आ गई। फिर 24 मई 1995 को सचिन-अंजलि सात जन्मों के लिए के हो गए। अंजलि अच्छी तरह जानती थीं कि सचिन क्रिकेट नहीं छोड़ सकते हैं, क्योंकि उनका खेलना देश के लिए जरुरी है। ऐसे में अंजलि ने अपना मेडिलक करियर छोड़ दिया, क्योंकि उस समय सचिन को अंजलि की ज्यादा जरुरत थी। शादी से पहले इन दोनों ने अपने दोस्तों के साथ फिल्म देखने का प्लान बनाया और सचिन को कोई पहचान न पाए इसके लिए सचिन को नकली दाढ़ी लगाकर चश्मा पहना दिया, लेकिन जब लोगों ने इन्हें पहचान लिया तो फिल्म को आधी छोड़कर ही भागना पड़ा। शादी से पहले और शादी के बाद सचिन-अंजलि की जिंदगी में ऐसे कई वाक्ये हुए, जो इनके यादगार लम्हों में शामिल हैं। शादी के दो साल बाद सचिन-अंजलि की जिंदगी में उस समय खुशियों की बारिश हुई जब 12 अक्टूबर 1997 को इनके घर एक नन्ही परी ने जन्म लिया। अंजली ने इसका सचिन के नाम पर सारा रखा। सारा के साथ अभी खुशियों के दो साल पूरे भी नहीं हुए थे, कि 24 सितंबर 1999 को सचिन के घर लिटिल तेंदुलकर का जन्म हुआ और सचिन ने इसका नाम अंजलि के नाम पर अर्जुन रखा गया। अर्जुन के आने से सचिन की परिवार पूरा हो गया और ये कंप्लीट हो गई सचिन की फैमली। क्रिकेट के बाद सचिन के लिए उनका परिवार ही सबकुछ है। सचिन कितने भी बिजी रहें लेकिन वो अपने परिवार के लिए हमेशा वक्त निकाल ही लेते हैं। उन्हें जब भी मौका मिलता है वो अपनी बेटी सारा और बेटे अर्जुन के साथ वक्त बिताते हैं। सचिन ने कभी भी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ा, फिर वो खेलप्रेमियों के लिए रही हों या फिर उनके परिवार के लिए। वाकई सचिन तुम्हारी और अंजलि की जोड़ी सुपरहिट है और तुम रीयल हीरो। रब ने बना दी जोड़ी धड़ल्ले से चौके-छक्के मारने वाले माही ने चुपके चुपके मोहब्बत की किताब भी पढ़ डाली और धोनी ने छुपे रुस्मत की तरह 4 जुलाई 2010 को साक्षी रावत से शादी रचा ली। लेकिन धोनी और साक्षी की मुकालात कब हुई, कैसे माही का दिल साक्षी ने चुरा लिया, ये सवाल हर कोई नहीं जानता। तो आप खुद ही पढ़ लीजिए कि कब साक्षी ने टीम इंडिया के कैप्टन कूल को क्लीन बोल्ड कर दिया। दरअसल साक्षी रावत उन दिनों औरंगाबाद के इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रही थीं और वो कोलकाता के होटल ताज में इंटर्नशिप कर रही थीं। उन्हीं दिनों जॉन अब्राहम ने एक पार्टी दी, जिसमें टीम इंडिया को भी न्यौता भेजा गया। इसी पार्टी के दौरान पहली बार धोनी की नजर साक्षी पर पड़ी और फिर वो उनकी खूबसूरती के दीवाने हो गए। फिर क्या धोनी ने साक्षी को प्रपोज कर दिया और दोनों के बीच प्यार परवान चढ़ने लगा। ऐसे में धोनी ने शादी के बारे में अपने परिवार से बात की और महेंद्र सिंह धोनी की शादी खूबसूरत साक्षी से तय हो गई। साक्षी से धोनी की सगाई तो हो गई है लेकिन धोनी और साक्षी का ये सिर्फ एक मुलाकात में हुआ प्यार नहीं था। धोनी, साक्षी से मिलने के लिए कभी कोलकाता, कभी मसूरी तो कभी औरंगाबाद के चक्कर लगाते नजर आए। जाहिर है माही और साक्षी की मुलाकात कोई नई नहीं थी। धोनी और साक्षी की मुलाकात कभी भी हुई हो, लेकिन माही ने कभी भी साक्षी को सुर्खियों में नहीं आने दिया। धोनी की इसी अदा सभी को दीवान बना देती है। इन दोनों के बीच प्यार की बगिया ऐसे ही महकती रहे, माही के फैन्स की यही शुभकामनाएं हैं। मोहब्बत जिंदाबाद घर के पड़ोस में रहने वाली लड़की या लड़के को आपस में प्यार हो जाए, ये किस्सा कोई नया नहीं है। इस तरह के सीन ज्यादातर हिन्दी फिल्मों में देखने को मिल जाते हैं, लेकिन तारीफ तो उन प्यार करने वालों की है। जो इस प्यार को शादी का सर्टिफिकेट दिला दे। प्यार की ऐसी ही स्टोरी टीम इंडिया को पूर्व कप्तान सौरव गांगुली और उनकी पत्नी डोना की है। डोना और गांगुली के परिवार पड़ोसी थे, यहां तक की कोलकाता के बेहाला स्थित इन दोनों घरों की बाउंड्री वॉल एक ही थी और फिल्मी कहानी की तरह दोनों परिवारों में दुश्मनी थी, लेकिन सौरव और डोना तो बचपन से ही एक दूसरे को चाहने लगे थे। गांगुली सेंट जेवियर में पढ़ा करते थे और डोना लोरेटो कॉन्वेंट में, गांगुली डोना की एक झलक पाने के लिए उनके स्कूल के चक्कर काटा करते थे और किसी दिन वो नहीं दिख पाती थी, तो गांगुली उन्हें याद करके ही मुस्कुरा लिया करते थे। जब डोना 12वीं क्लास में आईं तो दोनों अपने रिश्ते को लेकर सीरियस हो गए, लेकिन दोनों के परिवार इस शादी के खिलाफ थे। खासकर गांगुली की फैमिली किसी गैर ब्राह्ममिन लड़की को अपनी बहू नहीं बनाना चाहते थे। समय अपनी रफ्तार से चलता रहा और दोनों अपने-अपने करियर को संवारने में लग गए। सौरव का चयन भारतीय टीम में हो चुका था। इंग्लैंड के लॉर्ड्स मैदान पर अपने पहले ही मैच में शतक जमाकर सौरव मशहूर हो गए और फिर दोनों ने कोर्ट मैरिज करने का फैसला कर लिया। गांगुली ने इसके लिए अपने साथी खिलाड़ी मोलोय बेनर्जी को राजी कर लिया, लेकिन मीडिया से बचने के लिए गांगुली ने रजिस्ट्रार को बेनर्जी के घर ही बुलवा लिया और 12 अगस्त 1996 में सौरव और डोना कानूनी तौर पर एक-दूसरे के हो गए। उस समय सौरव 23 और डोना 20 साल की थीं, लेकिन शादी की बात भला कब तक छुपती। जल्द ही दोनों परिवारों को मिस्टर एंड मिसेज गांगुली के बारे में पता चल गया। पहले दोनों के परिवार वाले नाराज हुए, लेकिन बाद में अपने बच्चों की खुशी में शरीक हो गए और 21 फरवरी 1997 को दोनों परिवारों ने मिलकर एक बार फिर दोनों की शादी रस्मो-रिवाज के साथ करवा दी। गांगुली और डोना की ये थी फिल्मी लव स्टोरी, लेकिन रीयल। नज़र न लगे प्यार की कोई जुबां नहीं होती इसे तो महसूस किया जाता है और जब कोई इंसान इसे समझने लगता है। तो वो प्यार में डूब जाता है। भारत के ज्यादातर क्रिकेटरों की कुछ ऐसी ही कहानी है। किसी का दिल साधारण सी लड़की पर आ गया, तो किसी का दिल बॉलीवुड की हसीना पर। प्यार की कुछ ऐसी ही कहानी टीम इंडिया के वीरेंद्र सहवाग की है। तब वीरू नौ साल के थे और आरती छह साल की। आरती की बुआ वीरेंद्र सहवाग की नजदीकी रिश्तेदारी में ब्याही थीं, लिहाजा दोनों ही एक-दूसरे को बचपन से जानते थे और दोनों का एक दूसरे के यहां आना जाना भी रहता था, लेकिन दोनों की बीच नजदीकियां 2001 में आईं। वीरू, आरती के इस कदर कायल हुए कि उन्होंने अपने दिल की बात उन्हें बता दी। वैसे आरती को इस दिन का इंतजार बहुत पहले से था। लेकिन दोनों की शादी इतनी आसान नहीं थी। फिर भी दोनों ने अपने प्यार की ताकत पर घरवालों को मना लिया और हमेशा के लिए एक दूसरे के हो गए। ये कहानी है एक क्रिकेटर और साधारण लड़की की। जिन्होंने दिखा दिया कि प्यार के आगे दुनिया को भी झुकाया जा सकता है। जोड़ी कमाल की अब आपको बताते हैं एक क्रिकेटर और बॉलीवुड एक्ट्रेस की रीयल लव स्टोरी। इस लव स्टोरी के हीरो हैं टीम इंडिया के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन और हीरोइन हैं संगीता बिजलानी। कहने को जब इन्हें एक दूसरे से प्यार हुआ तो दोनों शादीशुदा थे। लेकिन प्यार किसी चीज का मोहताज नहीं होता, वो तो कभी भी किसी से हो सकता है। अजहर, संगीता के प्यार में इस कदर डूबे, कि उन्होंने अपनी पहली पत्नी को तलाक दे दिया। तो संगीता भी अपना सबकुछ छोड़कर अजहर के पास चली आईं। एक दूजे के लिए सफेद रंग के गाउन में लारा दत्ता और ब्लैक रंग के सूट में महेश भूपति जैसे-जैसे आगे बढ़ रहे थे, उनका एक-एक सपना सच होता जा रहा था। वो सपने जो इस दिन से पहले दोनों ने एक साथ अपनी पलकों पर संजोए थे। लारा दत्ता को देखकर तो ऐसा लग रहा था, मानों आसमान से कोई परी जमीं पर आ गई हो। तो वहीं भूपति ब्लैक आउटफिट में किसी हीरो से कम नहीं दिख रहे थे। दोनों अपनी शादी में ऐसे झूमकर नाचे, कि कुछ देर के लिए वो सारी दुनिया भूल गए। टेनिस के स्टार खिलाड़ी महेश भूपति और बॉलीवुड की हसीन तारिका लारा दत्ता एक दूसरे के पास कैसे आ गए। ये सवाल आप सभी के जहन में दस्तक दे रहा होगा। अपनी शादी पर 32 साल की हो चुकीं लारा दत्ता ने 2000 में मिस यूनिवर्स बनी। न्यूयॉर्क में रहते हुए कुछ दिनों तक उन्होंने बेसबॉल खिलाड़ी डेरेक जेटर के साथ डेटिंग की। महेश भूपति भी अमेरिका में रह चुके हैं और उनकी पहली शादी 2001 में मॉडल श्वेता जयशंकर से हुई थी। इसी बीच दोनों की मुलाकात हुई और पहली नजर में प्यार भी हो गया, फिर क्या दोनों ने सात जन्मों तक साथ रहने के वादे कर लिए और साथ जीने-मरने की कसमें खा लीं। फिर क्या दोनों ने जरा भी देर नहीं की और शादी से कुछ दिनों पहले मुंबई में कोर्ट मैरिज कर ली। दोनों ने अपनी कोर्ट मैरिज की गोवा में अपने चाहने वालों को दावत भी दी और फिर वो दिन आ गाय जब 16 फरवरी 2011 को दोनों ने ईसाई रीति रिवाज से एक बार फिर शादी रचा ली। शादी के वक्त महेश भूपति ने जहां लारा को पूरा साथ देने का वादा किया। तो वहीं लारा की आंखों से खुशी के आंसू निकल आए। इन दोनों के चेहरे की चमक बता रही थी कि वाकई ये जोड़ी एक-दूजे के लिए बनी है। BaBa Mehta

शनिवार, 6 अप्रैल 2013

IPL-6: बीसीसीआई को होगी 950 करोड़ की कमाई!


आईपीएल का सीज़न सिक्स। सिर्फ टाइटल ही 396.8 करोड़ रुपए में बिका है। पांच साल तक रही डीएलएफ की स्पांसरशिप से दोगुना। आईपीएल-6 से बीसीसीआई को 950 करोड़ की कमाई का अनुमान है। आईपीएल अब खेल से ज्यादा मनोरंजन बन गया है। इसलिए भास्कर ने एक कदम आगे बढ़कर आईपीएल की आलोचनात्मक तुलना सबसे ज्यादा देखे गए टीवी प्रोग्राम, हाल की हिट फिल्म और अन्य स्‍पोर्ट्स से की। दबंग-2 से तो लगभग चार गुना कमाई करने जा रहा है। लेकिन विज्ञापन केबीसी पर एक लाख रुपए महंगा था। अब भी चार स्पोर्ट्स ब्रांड आईपीएल से बड़े दुनिया में फीफा, विंबलडन, सुपरबॉल और एफ1 के बाद सबसे बड़ा स्‍पोर्ट्स ब्रांड आईपीएल। सुपरबॉल में दस सेकंड के विज्ञापन की दर 22 करोड़ रुपए तक पहुंच जाती है। ऑस्ट्रेलिया ने बिग बैश टी-20 टूर्नामेंट और इंग्लैंड ने अपने टी-20 टूर्नामेंट को आईपीएल के बराबर सफल बनाने की कोई कोशिशें की, जो नाकाम रही। फिर होगी कोला-वॉर पेप्सी आईपीएल का ऑफिशियल पार्टनर है। तो कोकाकोला भी दस-दस सेकंड के स्पॉट खरीदकर अपनी मार्केटिंग कर रहा है। यह जंग शुरू हुई थी 1996 के क्रिकेट विश्वकप से। जब कोकाकोला को ऑफिशियल पार्टनर बनाया गया था। तब पेप्सी ने स्पॉट खरीदकर हर ओवर के बाद मार्केटिंग की थी- ‘नथिंग ऑफिशियल अबाउट इट’।

फुटबॉल में मैच फिक्सिंग के बदले लिया 'मुफ्त सेक्स सेवा'


दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेलों में शुमार फुटबॉल की खास पर एक के बाद एक दाग लगता जा रहा है। फुटबॉल जगत अभी मैच फिक्सिंग के आरोपों से निजात पाने की कोशिश में जुटा ही था कि इस खेल से जुड़े एक और विवाद ने खेल प्रेमियों को स्तब्ध कर दिया है। एक रेफरी और उसके दो सहयोगियों पर एशियन फुटबॉल कांडफेडरेशन कप के एक मैच के दौरान 'मुफ्त सेक्स सेवा' के बदले मैच फिक्स कराने का केस दर्ज किया गया है। सिंगापुर की भ्रष्टाचार विरोधी जांच ब्यूरो के अनुसार तीनों लोग लेबनान के नागरिक हैं और तीनों पर एक ही मामले का केस दर्ज किया गया है। ब्यूरो ने बताया कि जिन पर सेक्स सेवा का उपयोग करने का आरोप है उनके नाम रेफरी अली साबाग और दो सहायक रेफरी अली ईद और अब्दल्लाह तालेब है। 33 साल के साबाग फीफा से मान्यता प्राप्त रेफरी हैं जिन्होंने 2014 विश्व कप क्वालीफायर्स के लिए काम किया हुआ है। आज शुक्रवार को तीनों आरोपियों की पेशी होनी है। भ्रष्टाचार निरोधी एजेंसी ने कहा कि जांच उस आरोप के बाद शुरू की गई जिसमें कहा गया था कि बुधवार को सिंगापुरी क्लब थांपिनेस रोवर्स और भारतीय क्लब ईस्ट बंगाल के बीच मुकाबला मैच फिक्सिंग के दायरे में हैं। यह मैच ईस्ट बंगाल ने 4-2 से जीता था। ब्लूमबर्ग समाचार एजेंसी के अनुसार तीनों रेफरियों को सिंगापुर के अमारा होटल में मैच के दिन एक-एक औरत मुहैया करवाई गईं जिसके बदले में उन्हें मैच फिक्स करवाना था। अगर उक्त आरोप सही पाए जाते हैं तो इन लोगों को पांच साल की जेल और 80 हजार डॉलर का जुर्माना हो सकता है। ये मामला तब सामने आया है जब फुटबॉल मैचों के फिक्स होने का मामला तुल पकड़ता जा रहा है। फुटबॉल की अंतरराष्ट्रीय नियामक संस्था फीफा ने फरवरी में इटली, दक्षिणी कोरिया और चीन में खेल से संबंधित अधिकारियों को पुछताछ की जिन पर मैच-फिक्सिंग करने का आरोप लगा था। वहीं यूरोपीय पुलिस यूरोपोल की एक जांच में यह बात सामने आई है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैचों की हो रही फिक्सिंग में शामिल लोगों का अड्डा सिंगापुर में ही है। यूरोपोल के अनुसार साल 2008 से 2001 के बीच खेले गए कम से कम 680 मैच ऐसे थे जिन्हें शक के दायरे में रखा जा सकता है।

रविवार, 24 मार्च 2013

आज सचिन का दिन है.....क्या ये यादगार विदाई थी ?


टीम इंडिया ने तो सचिन की विदाई को यादगार बना दिया... लेकिन जिस तरह से दिल्ली टेस्ट और पूरी सीरीज़ में सचिन ने औसत प्रदर्शन दिखाया ... वो जरूर फैंस को निराश कर गया...खासतौर पर दिल्ली टेस्ट की दोनों पारियों में जिस तरह से सचिन आउट हुए... वो ये दिखाता है कि अब सचिन पर उनकी उम्र हावी होने लगी है। क्रिकेट फैंस की हज़ारों उम्मीदों के बीच एक बार फिर सचिन दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में उतरे... उम्मीद था कि जो कसर... जो कसक ...पहली पारी में अधूरी रह गई थी... उसको टीम इंडिया का ये भगवान दूसरी पारी में जरूर जीत के साथ पूरा करेगा... क्योंकि जिस वक्त सचिन तेंदुलकर विकेट पर आए थे... उस वक्त टीम इंडिया जीत से महज़ 32 रन दूर थी... सबको लगा कि यहां से सचिन तेंदुलकर टीम इंडिया को जीत दिलाकर ही लौटेंगे... लेकिन इसे सचिन की किस्मत कहें... या फिर बढ़ती उम्र का तकाजा ... मास्टर ब्लास्टर चाहकर भी फैंस की इस ख्वाहिश पूरी नहीं कर सके... अभी सचिन विकेट पर खड़े ही हुए थे कि नाथन लियोन की एक गेंद ने सचिन को अपने आकिरी टेस्ट में एक बार फिर सस्ते में लौटने पर मजबूर कर दिया... सचिन दूसरी पारी में भी महज़ 1 रन पर आउट हो गए... इसे इत्तेफाक कहें... या फिर सचिन की बदकिस्मती ... लेकिन हकीकत यही रही कि सचिन कोटला के मैदान में मौजूदा हज़ारों फैंस की उम्मीदों को तोड़कर मायूस होकर पवेलियन लौट गए... वैसे ये पहला मौका नहीं था... जब सचिन के बल्ले ने खामोशी इख्तियार की थी...बल्कि चेन्नई टेस्ट को छोड़ दिया जाए... तो सीरीज़ में ज्यादातर मौकों पर मास्टर के बल्ले ने मायूसी ही दिखाई... और यही वजह रही कि सीरीज़ में जहां चेतेश्वर पुजारा... और मुरली विजय जैसे बल्लेबाज़ रनों का अंबार लगा गए ...वहां सचिन 200 रनों का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके...   सचिन ने 4 टेस्ट मैचों की 7 पारियों में 32.00 की औसत से सिर्फ 192 रन ही बनाए .. जिसमें चेन्नई टेस्ट की 81 रनों की पारी भी शामिल रही... यानि चेन्नई की पारी को छोड़ दिया जाए... तो सचिन के बल्ले से बाकी 6 पारियों में सिर्फ 111 रन ही निकले...   बहरहाल ये बहुत मुमकिन है कि सचिन को अब भारत में खेलने को नहीं मिले... ऐसे में अगर मास्टर ब्लास्टर घेरलू सरज़मीं पर बल्ले से ब्लास्ट दिखाते ...तो ये सीरीज़ टीम इंडिया के साथ साथ ... सचिन के लिए भी ऐतिहासिक हो सकती थी। लेखक रजनीश कुमार