गुरुवार, 14 नवंबर 2013
सचिन... दीवानों के दिल से....संकलन रजनीश बाबा मेहता
बुधवार, 13 नवंबर 2013
डॉक्यूमेंट्री सचिन 'रिकॉर्ड' तेंदुलकर की....रजनीश बाबा मेहता
सचिन रिकॉर्ड तेंदुलकर
यादों के झरोखों से कुछ वही किस्से...आज हम आपके सामने लेकर आए हैं....सचिन के वो रिकॉर्ड जो हमारे...आपके...आने वाली हर पीढ़ी के लिए एक मिसाल बनकर सामने हैं....आज हम आपको दिखाएंगे क्रिकेट के मैदान पर सचिन के पहले...और आखिरी कदम तक का वो सफर...जो छोड़ गए रिकॉर्ड के अनगिनत आंकड़े...
सचिन यानी क्रिकेट....सचिन यानी हिन्दुस्तान....सचिन यानी हम....सचिन यानी आप.....सचिन यानी वो जज्बात जिन्होंने परम्पराओं की बंदिश तोड़ दी....सचिन यानी एहसास जिसपर हर हिन्दुस्तानी इतराता है....
(मोंटाज़....)
सचिन कौन हैं...सचिन की बिसात क्या है....ये सवाल खुद से पूछीए......ज़ेहन के पन्ने उलटिए.. और याद कीजिए वो लम्हे, जो जिन्दगी का हिस्सा बनकर रह गए....
ALPHA GFX...
24 फरवरी, 1988 ....मुंबई की गलियों में सचिन का नाम पहली बार गूंजा था.... मौका था हैरिस शील्ड टूर्नामेंट का...स्कूल के दिन थे... लेकिन लड़कपन की इस उम्र में भी सचिन करिश्मा वो कर गए... जिसे टूटने में 20 साल लग गए... विनोद कांबली के साथ सचिन ने 664 रन की साझेदारी की... और क्रिकेट इतिहास का एक नया रिकॉर्ड बना डाला...
ALPHA GFX---10 दिसंबर 1988
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मुंबई की रणजी टीम में सचिन का नाम शामिल हुआ... और कलम की ये स्याही भी एक नया रिकॉर्ड बना गई... 15 बरस की कच्ची उमर में इससे पहले कोई खिलाड़ी रणजी टीम में नही आया था... मैदान पर उतरते ही सचिन ने फिर रिकॉर्ड बनाया... और रणजी ट्रॉफी, दिलीप ट्रॉफी और ईरानी ट्रॉफी के पहले ही मैच में शतक लगाने वाले देश के इकलौते खिलाड़ी बन गए....
ALPHA GFX
15 नवंबर 1989 ....पाकिस्तान की जमीन पर सचिन तेन्दुलकर करियर का पहला मैच खेलने उतरे... बाउंड्री के उस पार सचिन का वो कदम भी एक रिकॉर्ड था...क्योंकि 16 साल की उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाला ये लड़का ...दुनिया इकलौता खिलाड़ी था...
ALPHA GFX- 1996, वर्ल्डकप
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सफर का अगला पड़ाव था...1996 का वर्ल्डकप....अपनी ही सरजमीं पर सचिन एक नया मुकाम छूने जा रहे थे....87 की औसत... दो शतक...और 523 रन... भारतीय टीम सेमीफाइनल में हार गई... लेकिन एक वर्ल्डकप में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड सचिन के खाते में आ गया....
ALPHA GFX.. 1998
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यही वो साल था... जब सचिन की रफ्तार ने क्रिकेट के तमाम सूरमाओं को पीछे छोड़ दिया....GFX IN..9 शतक..और 1894 रन....एक केलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा रन और सबसे ज्यादा शतक... 15 साल बाद भी ये रिकॉर्ड आज सचिन की शख्सियत का सबूत बनकर सामने है....GFX OUT...
(शारजाह और तमाम दूसरी पारियों के शॉट्स लगाएं 1998 वाली)
वो पारियां...वो तेवर...और हुनर...क्रिकेट को एक नई परिभाषा दे गए...
(मोंटाज़...)
ALPGA GFX. 28 अक्टूबर 1998
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ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इस मुकाबले में सचिन नया करिश्मा कर गए....पहले शतक और फिर चार विकेट....GFX..एक ही पारी में सेंचुरी और चार विकेट लेने वाले सचिन दुनिया के पहले खिलाड़ी बने GFX OUT
(शॉट्स+ होल्ड)
1999 में सचिन ने राहुल द्रविड़ के साथ मिलकर वनडे में 331 रनों की रिकॉर्ड पार्टनरशिप की..
1990 से लेकर 1998 के बीच लगातार 185 मैच खेलने वाले सचिन दुनिया के एक मात्र क्रिकेटर है.. जिनके नाम ये उपलब्धि दर्ज है...
ज्यादातर मौकों पर सचिन ने वनडे के एक कैलेंडर इयर में 1000 से ज्यादा रन बनाने का कारनामा 7 बार किया... जो आज भी वर्ल्ड रिकॉर्ड है......
वनडे में सचिन ने 1994, 1996, 1997, 1998, 2000, 2003 और 2007 में 1000 रनो से ज्यादा का स्कोर किया...
alpha - 23 August 2002
सचिन तेंदुलकर ने इंग्लैंड के खिलाफ लीड्स में करियर का 30वां शतक लगाकर ब्रैडमैन के रिकॉर्ड को तोड़ दिया ..ये वो वक्त था जब सचिन लगातार एक के बाद एक नए मुकाम हासिल करते जा रहे थे...
alpha - 2003 वर्ल्ड कप में सचिन
वर्ल्ड कप में सचिन के रनों की कहानी हर फैंस को मालूम थी.. औऱ जब मौका 2003 वर्ल्ड कप का आया .. तो यहां सचिन ने 673 रन बनाकर... खुद के रिकॉर्ड को ही तोड़ डाला... सचिन अब ऐसे मुकाम पर पहुंच चुके थे.. जहां वो खुद के रिकॉर्ड को तोड़कर नए रिकॉर्ड बनाने लगे...सचिन की आतिशी बल्लेबाजी की बदौलत ही ... टीम इंडिया 2003 वर्ल्ड कप के फाइनल तक का सफर तय कर पाई थी...
alpha - 4 जनवरी 2004
वर्ल्ड कप के बाद सचिन टेस्ट मैच खेलने ऑस्ट्रेलिया जा पहुंचे.. जहां उन्होंने टेस्ट में पहली बार सर्वाधिक स्कोर बनाया... सचिन ने.. कंगारूओं के खिलाफ इस मुकाबले में 241 रनों की नाबाद पारी खेली..
12 दिसंबर 2004
सचिन अपने टेस्ट करियर में सबसे ज्यादा 248 रनों के स्कोर तक पहुंचे... सचिन ने बांग्लादेश के खिलाफ इस टेस्ट में 248 रनों नाबाद पारी खेलकर.. सुनील गावस्कर के टेस्ट क्रिकेट में 34 शतकों के रिक़र्ड की बराबरी
तारीख - 22 दिसंबर 2005
दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में करियर के 124वें टेस्ट में श्रीलंका के खिलाफ 35वां शतक लगाकर... सचिन ने ना सिर्फ गावस्कर का रिकॉर्ड तोड़ा बल्कि क्रिकेट की दुनिया के सिरमौर भी बन गए..
2008 में तोड़ा ब्रायन लारा का रिक़ॉर्ड
सचिन के करियर में सबसे बड़ा मोड़ उस वक्त आया... जब क्रिकेट के इस भगवान ने टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रनों का रिक़ॉर्ड तोड़ा... मौका था मोहाली टेस्ट और विरोधी ऑस्ट्रेलियाई टीम थी... सचिन ने पहला टेस्ट खेल रहे पीटर सिडल की इस गेंद पर 1 रन लेकर ब्रायन लारा के टेस्ट में सर्वाधिक 11953 रनों के रिकॉर्ड को तोड़ कर नया रिकॉर्ड बना डाला..
वनडे क्रिकेट में बनाए नए नए रिकॉर्ड
टेस्ट की तर्ज पर ही सचिन का वनडे में भी रनों का सैलाब जारी था... क्योंकि..सचिन वनडे की दुनिया में एक मात्र ऐसे क्रिकेटर बन गए..... जिन्होंने वनडे में 14000 रनों का आंकड़ा ही नहीं बल्कि 15000, 16000, 17000 औऱ 18000 रनों का आंकड़ा पार किया.. जो कि वर्ल्ड रिकॉर्ड है..
ptc
अब तक सचिन टेस्ट और वनडे क्रिकेट में अनगिनत मुकाम हासिल कर चुके थे.. लेकिन इस रिकॉर्ड के दौरान कई ऐसे रिकॉर्ड अपने आप बनते चले गए.. जो कि इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया..
सचिन तेंदुलकर वनडे क्रिकेट में ऐसे पहले क्रिकेटर हैं... जिन्होंने 866 क्रिकेटर के साथ क्रिकेट खेला है... जिनमें साथी खिलाडी के साथ साथ विरोधी खिलाड़ी भी शामिल हैं...
सचिन एक मात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जो लगातार 10 साल तक आईसीसी टेस्ट रैकिंग की टॉप 10 खिलाड़ियों में शामिल रहे...
सचिन तेंदुलकर वनडे क्रिकेट के ऐसे पहले खिलाड़ी हैं जिन्होंने अब तक सबसे ज्यादा रन चौकों से बनाए... सचिन ने वनडे में 2016 चौके लगाए.. जिसकी बदौलत सचिन ने 8064 रन चौकों की बदौलत हासिल किए....
रिकॉर्ड के मामले में सचिन दुनिया के पहले ऐसे क्रिकेटर हैं जिन्हें थर्ड अंपायर सिस्टम के तहत पहली बार आउट दिया गया...
ओपनिंग पार्टनरशिप के मामले में सचिन और सौरव गांगुली की जोडी ने 136 मैच में 21 शतक औऱ 23 अर्धशतक के साथ 6609 रन बनाए.. जो कि आज भी वर्ल्ड रिकॉर्ड है..
हालांकि रिकॉर्ड के झरोखों से देखें तो क्रिकेट की दुनिया में सिर्फ औऱ सिर्फ एक ही चेहरा नजर आता है .. वो हैं मास्टर ब्लास्टर यानि सचिन तेंदलकर का.. जिसके रिकॉर्ड को तोड़ना अब क्रिकटर्स के लिए सपना भर ही है..
(ptc - इन महान उपलब्धियों के बाद भी वनडे का एक ऐसा रिकॉर्ड बाकी था...जिस तक पहुंचने का सपना खुद सचिन भी लगातार कई साल से देखते आ रहे थे.. )
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(क्रिकेट की हर मुश्किल दहलीज को लांघकर मास्टर ब्लास्टर ने... यूं तो कामयाबी के कई नए आयाम लिखे...लेकिन अभी भी एक रिकॉर्ड था... जो सिर्फ औऱ सिर्फ सचिन का ही इंतजार कर रहा था... वो रिकॉर्ड था वनडे में सर्वाधिक रनों का ....)
तारीख - 24 फरवरी 2010
स्टेडियम - कैप्टन रूप सिंह स्टेडियम ग्वालियर
तारीख - 24 फरवरी 2010
स्टेडियम - कैप्टन रूप सिंह स्टेडियम ग्वालियर
short montage of sachin 200th inning in odi with fans celebration and board
सचिन के इस ऐतिहासिक शॉट के बाद... ग्वालियर के इस स्टेडियम में शोर थमने का नाम नहीं ले रहा था ...यां यूं कहें कि फैंस इस ऐतिहासिक शोर को थमने ही नहीं दे रहे थे... क्योंकि ये वो लम्हा था.. जो क्रिकेट की दुनिया में पहली बार करिश्माई अंदाज में सबके सामने आया था... ये वो लम्हा था... जिसे हासिल करने के लिए खुद मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को ... 21 बरस इंतज़ार करना पड़ा था... लिहाज़ा 200 रनों का आंकड़ा छूते ही ना सिर्फ ग्वालियर के गलियारों से ... बल्कि वर्ल्ड क्रिकेट के हर मुल्क से ये आवाज़ आ रही थी कि सचिन जैसा कोई नहीं ... सचिन सिर्फ तुम्ही इसी कारनामे को अंजाम दे सकते हो... और होता भी क्यों नहीं... दरअसल क्रिकेट के इतिहास में ये पहला मौका था... जब किसी बल्लेबाज़ के बल्ले से इतनी बड़ी पारी निकली थी... और ये पारी सचिन तेंदुलकर के बल्ले से निकली थी...
sachin back four on parnell bowlshots of
ग्वालियर के मैदान में जब 24 फरवरी को जब सचिन ने कदम रखते ही... दूसरे ओवर मे वेन पार्नेल की गेंद पर बैक टू बैक 2 चौके लगाकर अपने इरादे जाहिर कर दिए...
hold
ग्वालियर में तीसरे ओवर की आखिरी गेंद डेल स्टेन डाल रहे थे.. औऱ सामने मास्टर ब्लास्टर अपने मजबूत इरादे लिए खड़े थे.. स्टेन की गेंद पर सचिन का ये तीसरा चौका ..फैंस को झूमने पर मजबूर कर दिया..
सचिन का जो ये कारवां चल निकला था.. वो थमने का नाम नहीं ले रहा था... क्योंकि रनों के पहाड़ की ओर चल निकले..सचिन ने मुकाबले में चौथा चौका भी स्टेन की गेंदों पर लगाया..
हर ओवर के साथ सचिन चौके पे चौका लगाते जा रहे थे..और यही आलम मैच के अंत तक रहा... सचिन अपनी इस ऐतिहासिक पारी में अंत तक टिके रहे.. एक छोर पर दूसरे बल्लेबाज आते औऱ चले जाते.. लेकिन सचिन अपने ऐतिहासिक स्कोर की ओर बढ़ते जा रहे थे..
सचिन ऩे अपने इस वर्ल्ड रिकॉर्ड में वेन पार्नेल की 24 गेंदों पर 46 रन बनाए... hold with sachin boundry on parnell
जैक कैलिस की 15 गेदों पर 24 रन ....hold with sachin boundry on kallis ...मर्व की 32 गेदों पर 43 रन सचिन ने बनाए.. मास्टर ने तूफानी अंदाज में गेंदबाजी वाले डेल स्टेन की 31 गेंदों पर 37 रन ठोक डाले..hold sachin boundry shots on steyn... सचिन जे पी ड्यूमिनी के 17 गेंदों पर 20 रन और चार्ल लैग्वेल्ड की 28 गेदों पर 30 रन बनाए... hold sachin boundry shots... जैसे जैसे वक्त गुजर रहा था.. सचिन के रनों की बरसात बढ़ती जा रही थी.. आखिरकार वो लम्हा भी आ गया.. जब सचिन ने पहले तो वनडे में सर्वाधिक 194 रनों के वर्ल्ड रिकॉर्ड को तोड़कर सनसनी फैला दी.. .. मैच के 46वें ओवर की तीसरी गेंद पर सचिन ने 2 रन देकर वनडे का नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बना डाला.... वेन पार्नेल की गेंद पर सचिन ने इतिहास रच डाला........
सचिन के इस शॉट के साथ ही एक ऐसा वर्ल्ड रिकॉर्ड बन गया जिसे पाने की तमन्ना लगातार कई सालों से दुनिया का हर क्रिकेटर देख रहा था.. अब मास्टर की नजर दोहरे शतक पर जा टिकी.. )
हालांकि वो लम्हा भी जल्द करीब आ गया....जब मास्टर ने मैच के आखिरी ओवर की तीसरी गेंद पर 1 रन लेकर.. दोहरा शतक पूरा किया ... फिर क्या था.. इस जश्न को मैदान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में महसूस किया गया... और क्रिकेट की हर किताब में ये रिकॉर्ड अपने आप ही छपता चला गया.... इस रिकॉर्ड के बाद सचिन को क्रिकेट के सुपरमैन के नाम से भी बुलाया जाने लगा ।)
वनडे क्रिकेट में सचिन ने दोहरा शतक लगा एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया.. जो कि इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया.. हालांकि फैंस ने इस मौके पर जश्न तो खूब मनाया..लेकिन खुद सचिन के साथ साथ उनके चाहने वालों की ख्वाहिश महाशतक तक पहुंचना था.. औऱ उसका महाइंतजार अभी भी जारी था।)
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short montage of sachion sachin in tension
क्रिकेट के हर रिकॉर्ड पर अपना नाम लिखवाने वाले सचिन रमेश तेंदुलकर .. अभी भी लगातार 33 पारियों से.. एक ऐसी समस्या से जूझ रहे थे.. जो उन्हें सोने नहीं दे रही थी.. लेकिन कहते हैं ना कि. . जब मास्टर एक बार जिद ठान लें तो फिर... हर सूखे को खत्म कर देते हैं... और आखिरकार जिस महाशतक का इंतजार हिंदुस्तान को ही नहीं... बल्कि पूरी दुनिया के फैंस को था.. वो मास्टर के बल्ले से निकला 16 मार्च 2012 को
लगातार 33 पारियों में शतक ना लगा पाने की कसक लिए.. सचिन तेंदुलकर आखिरकार.. एशिया कप खेलने बांग्लादेश जा पहुंचे.... हालांकि यहां भी उम्मीदों का दामन थामे सचिन ही नहीं बल्कि फैंस को सिर्फ औऱ सिर्फ महाशतक का इंतजार था ।)
sachin---- मैं जहां भी जाता हूं हर कोई महाशतक का ही जिक्र करता है.....)
तारीख - 16 मार्च 2012
स्टेडियम - शेरे बांग्ला नेशनल स्टेडियम मीरपुर
टूर्नामेंट - एशिया कप
रिकॉर्ड पर नजर.. औऱ महाशतक के इंतजार को खत्म करने का प्रण लिए.. सचिन तेंदुलकर ने जब एशिया कप के चौथे मुकाबले में ... बल्लेबाजी करने मैदान पर जैसे ही कदम ऱखा.. वैसे ही फैंस ने मास्टर का जबरदस्त इस्तकबाल किया... हालांकि ये जश्न आने वाली खुशियों का इशारा था.... औऱ जब मुकाबला शुरू हुआ तो फिर मैच के दूसरे ओवर की तीसरी गेंद पर... चौका लगाकर... सचिन ने अपने मजबूत आत्मविश्वास का परियच भी दे दिया... धीऱे धीरे सचिन इस मैच में अपनी मंजिल की ओर बढ़ते चले जा रहे थे... औऱ फैंस की सांसें थमती जा रही थी.. मैच का 19वां ओवर खत्म होने के बाद... सचिन तेंदुलकर 7 चौके औऱ 1 छक्का लगाकर अर्धशतक के पार पहुंच चुके थे... लेकिन भरोसा अब भी डगमगा रहा था... क्योंकि फैंस को रह-रह वही पारियां याद आ रही थीं... जो पिछले कई महीनों से मास्टर को महाशतक से दूर किए हुए थीं... बहरहाल सचिन विकेट पर डटे औऱ अपने कदम उस ऐतिहासिक मंजिल की ओर बढ़ाते रहे .... इस बीच सचिन के सामने चुनौती सिर्फ महाशतक की नहीं थी... बल्कि मुकाबले में टीम को मजबूत स्कोर तक भी ले जाने की थी... एक छोर पर.. टीम के दिग्गज बल्लेबाज आउट होते जा रहे थे.... तो वहीं दूसरी छोर पर सचिन मजबूती के साथ क्रीज पर टिके हुए थे... लेकिन सचिन ने खुद को संभाल लिया... औऱ फिर रनों के कारवां को मंजिल की ओर ले जाना शुरू कर कर दिया... औऱ आखिरकार वो लम्हा भी सबके सामने आ गया....जब सचिन ने महाशतक के लिए बल्ला उठाया... और नीचे वाले भगवान ने उपर वाले भगवान का शुक्रिया अदा किया... ....hold full celebration of sachin tendulkar...mahasshatak... सचिन ने महाशतक 138 गेंद खेलकर 10 चौके औऱ 1 छक्के की मदद से पूरा किया...hold shots of sachin....ज़ाहिरतौर पर ये वो ऐतिहासिक शतक है... जिसे क्रिकेट की रिकॉर्ड बुक में सबसे पहला स्थान मिला... और इसके ख्वाबगीर खुद मास्टर ब्लास्टर सचिन तेदुलकर हैं... जिन्हें क्रिकेट में कई सदियों तक कोई भूला नहीं पाएगा...
(महाशतक की मंजिल पर पहुंचते ही.....हमारे औऱ आपके दुलारे सचिन तेंदुलकर को सचिन रिकॉर्ड तेंदुलकर के नाम से पुकारा जाने लगा....क्रिकेट के इस रिकॉर्ड पुरूष ने कामयाबी की कई दास्तान लिखी... औऱ जब जब इस दुनिया में क्रिकेट का जिक्र होगा... तब तब क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर का भी नाम लिया जाएगा...क्योंकि क्रिकेट का मतलब सचिन औऱ सचिन का मतलब रिकॉर्ड।)
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SEG- 1- http://www.youtube.com/watch?v=WKW3Z_QW1nQ
SEG -2- http://www.youtube.com/watch?v=hFtKOuTZXtg
SEG -3- http://www.youtube.com/watch?v=OWB9BP8NjSw
रजनीश बाबा मेहता
शनिवार, 20 जुलाई 2013
भारत रत्न ! मेज़र ध्यानचंद
रविवार, 28 अप्रैल 2013
मास्टर से महान माही !

गुरुवार, 25 अप्रैल 2013
कब मिलेगा सचिन को भारत रत्न ?
MA. पद्म विभुषण जिसे मिला... पद्मश्री से जिसको नवाज़ा गया... राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड से... जिसको सम्मानित किया गया ... अपार कामयाबियों के लिए... जिसको दिया गया अर्जुन अवॉर्ड... उसे कब मिलेगा देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ... ? ... जी हां... बात सचिन की महानता की चली है... तो एक बार फिर ज़िक्र भारत रत्न का आ गया है... क्योंकि यही वो सम्मान है... जिससे सचिन अब तक महरूम है... दुनिया जानती है और मानती है कि सचिन देश के सबसे बड़े रत्न हैं... उन्होंने अपने शानदार खेल के दम पर पूरी दुनिया में हिन्दुस्तान का जो नाम रौशन किया है... वो शायद कोई दूसरे क्रिकेटर नहीं कर सका है... ऐसे में सवाल यही है कि सचिन को देश का ये सबसे बड़ा नागरिक सम्मान आखिर कब मिलेगा... हालांकि ऐसा नहीं है कि सचिन इस सम्मान के लायक नहीं हैं... बल्कि क्रिकेट के इस भगवान का पिछले 24 साल का बेमिसाल करियर लगातार ये मांग कर रहा है कि अगर कोई स्पोर्ट्स मैन भारत रत्न का सबसे बड़ा हकदार है... तो वो सिर्फ और सिर्फ सचिन तेंदुलकर हैं... और यही वजह है कि हिन्दुस्तान के कौने-कौने से एक बार नहीं बल्कि सैंकड़ों पार ये आवाज़ उठी है कि सचिन को भारतरत्न से नवाज़ा जाना चाहिए... क्या खास और क्या आम ... क्या बॉलीवुड की हस्तियां और क्या राजनेता... हर कोई चाहता है कि सचिन को देश का ये सबसे बड़ा नागरिक सम्मान अब दे देना चाहिए... USE CELEBRITIES BYTE ON SACHIN BYTE ... और तो और अब तो भारतरत्न और सचिन के बीच आने वाली वो दीवार भी गिर चुकी है... जो सचिन को भारतरत्न बनने से रोक रही थी... दरअसल भारतरत्न दिए जाने वालों में खेल और खिलाड़ी शामिल नहीं थे... लेकिन स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री की पहल के बाद ... इसके भी नियमों में बदलाव किया जा चुका है... यानि सारी अड़चने खत्म हो चुकी हैं... वैसे भी ऑस्ट्रेलिया जैसा मुल्क भी सचिन को अपने देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान यानि ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया देकर ये दिखा चुका है कि सचिन की शख्सियत क्या है... सचिन का क्रिकेट की दुनिया में क्या रूतबा है...ऐसे में भारत सरकार ... सचिन को भारत रत्न से नवाजती है... तो फिर सचिन और उनके फैंस के लिए उनके चालीसवें जन्मदिन पर इससे बड़ा तोहफा कोई और नहीं हो सकता।
सच्चू से सचिन तेंदुलकर तक का सफर
बच्पन ... शरारतों का वो दौर... जहां हर बच्चे को मस्ती सूझती है... लेकिन सच्चू के सचिन बनने की कहानी इसी बचपन से शुरू हुई ... सचिन एक आदर्श स्टुडेंट और एक आदर्श शिष्य की तरह अपने गुरू की हर बात मानते चले गए... हालांकि सचिन को उनका पहला गुरु उनके घर में ही यानि बड़े भाई के रुप में मिला... वो बड़े भाई अजीत तेंदुलकर ही थे... जिन्होंने टेनिस प्लेयर बनने की चाहत रखने वाले सचिन को क्रिकेट से रूबरू कराया... शायद अजीत ने दूर कहीं आने वाले सचिन तेंदुलकर को... अपने इस भाई में देख लिया था... और यही वजह रही कि उन्होंने सचिन को ... क्रिकेट के उस द्रोणाचार्या से मिलवाया ... जिसके मार्ग दर्शन में सच्चू आज सचिन बने... और वो थे बॉम्बे के मशहूर क्रिकेट कोच रमाकांत आचरेकर ... आचरेकर साहब पहली बार सचिन से मुंबई के शिवाजी पार्क में मिले... और उन्होंने सचिन के टैलेंट को पहचाना और सच्चू को सचिन बनाने की कामयाब कोशिशें शुरू कर दी... और यही से शुरू हुआ एक आदर्श शिष्य का क्रिकेटिंग करियर ... हालांकि सचिन के लिए सर रमाकांत आचरेकर से क्रिकेट की बारीकियां सीखना आसान नहीं था... क्योंकि जहां आचरेकर सचिन को कोचिंग दिया करते थे... वो क्रिकेट के इस भगवान के घर से दूर था... लिहाज़ा आचरेकर साहब ने सचिन को दादर के पास ही शरदआश्रम स्कूल में शिफ्ट करने की सलाह दी ... सचिन ने भी आदर्श शिष्य की तरह अपने गुरु की बात को माना और अपना दाखिला शरदआश्रम में करा लिया ... अब सचिन के सामने स्कूल और कोचिंग दोनों की जिम्मेदारियां थी... लिहाज़ा सचिन अर्ली मोर्गिंग प्रैक्टिस करके स्कूल जाते और फिर शाम को दोबारा प्रैक्टिस करने के लिए आ जाते... सचिन के बारे में कहा जाता है कि वो घंटों प्रैक्टिस किया करते थे... आचरेकर को भी सचिन को प्रैक्टिस करवाने में बड़ा मज़ा आता था... सचिन जब प्रैक्टिस करके थक जाते थे... तो आचरेकर साहब विकेट पर एक एक रुपये का सिक्का रखते... और गेंदबाज़ से कहते कि जो इस सिक्के को गिराएगा ... सिक्का उसी का हो जाएगा... लेकिन वो नौबत कभी नहीं आई ... क्योंकि पूरे सेशन तक कोई भी गेंदबाज सचिन को आउट नहीं कर पाता था... लिहाज़ा एक रुपये का सिक्का ज्यादातर मौकों पर सचिन का ही हो जाता था...आज भी सचिन के पास अपने गुरू के दिए 13 सिक्के मौजूद हैं... इतना ही महान सचिन तेंदुलकर बनने के बाद भी जब कभी भी सचिन अपने गुरू आचरेकर से मिलते हैं... तो एक आदर्श शिष्य बनकर ही मिलते हैं।
युवओं को प्रेरित करते हैं सचिन तेंदुलकर
ख्वाहिशें जब परवान चढ़ती हैं... तो सचिन तेंदुलकर का चेहरा सामने आता है... तमन्नाएं जब जवां होती हैं... तो सचिन का खेल रास्ता दिखाता है ... नाकामियों से जब वास्ता पड़ता है... तो सचिन का करियर सहारा देता है... जी हां... सचिन के बेमिसाल 24 साल के करियर को अगर हकीकत के आइने में उतारा जाए... तो कुछ ऐसी ही तस्वीरें सामने आती हैं... क्योंकि सचिन तेंदुलकर क्रिकेट की दुनिया का वो कोहिनूर हीरा हैं... जिसकी चमक से ना जाने कितने बैट और गेंद पकड़ने वाले नौसिखिए खिलाड़ी ... क्रिकेटर बन चुके हैं... सचिन को आदर्श मानकर ... सैकड़ों क्रिकेटर्स ने वर्ल्ड क्रिकेट में अपना मुकाम हासिल किया है... और जिसकी मिसाल मौजूदा टीम इंडिया में ही दी जा सकती है... सचिन का 24 साल का क्रिकेटिंग करियर इस बात का गवाह है कि सचिन से एक नहीं दो नहीं ... बल्कि तीन तीन पीढ़ियां ...क्रिकेट की बारीकियां सीखीं हैं...कपिल देव से लेकर मौजूदा कप्तान धोनी की टीम में कई ऐसे युवा क्रिकेटर्स आए ... जिन्होंने सचिन को अपना आदर्श मानकर क्रिकेट सीखा और साथ में खेला... और यही वजह है कि जब उन क्रिकेटर्स का ड्रेसिंग रूम में सचिन से सामना होता है ... तो उनकी की भी खुशी का ठिकाना नहीं रहता ... उन्हें विश्वास नहीं होता कि जो क्रिकेटर उनके लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहा... वो उसी के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर कर रहे हैं...... सचिन के साथ खेलने की ये कहानी सिर्फ भारतीय युवा क्रिकेटर्स की ही नहीं होती है... बल्कि वर्ल्ड क्रिकेट के ऐसे सैकड़ों क्रिकेटर हैं... जिनका सपना ... भारतीय क्रिकेट का ये भगवान पूरा करता है... क्योंकि हिन्दुस्तान की सरज़मीं पर जब भी कोई विदेशी टीम खेलने आती है... तो उनके युवा बल्लेबाज़ों की ख्वाहिश सचिन जैसा ही बनने की होती है... बल्लेबाज़ तो बल्लेबाज़ वर्ल्ड क्रिकेट में ऐसे गेंदबाज़ों की भी कमी नहीं होती ... जो सचिन का विकेट हासिल करके खुद को धन्य समझते हैं... हालांकि इसे सचिन की कमज़ोरी कहें या फिर कुछ और ... अक्सर सचिन भी ऐसे युवा गेंदबाज़ों को अपना विकेट थमा देते हैं ... जो इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू कर रहे होते हैं... लेकिन हकीकत यही है कि सचिन की इस नाकामी में भी ... विदेशी क्रिकेटर्स के सपने सच होते हैं...
सचिन तेंदुलकर...एक कामयाब क्रिकेटर
सचिन तेंदुलकर... ये नाम आज किसी पहचान का मोहताज नहीं।
लेकिन 23 साल पहले जब 1989 में टीम इंडिया के पाकिस्तान
दौरे पर ... महज़ 16 साल की छोटी सी उम्र के सचिन को टीम इंडिया में जगह मिली थी ... तो शायद ही किसी ने ये सोचा था कि भविष्य में जेंटलमैन गेम को यही छोटा सा बच्चा ... ना सिर्फ देश में बल्कि पूरी दुनिया में एक नई परिभाषा और पहचान दे देगा। हकीकत तो ये है कि आज क्रिकेट की पहचान सचिन से है ... इंटरनेशनल क्रिकेट में करीब 24 साल से जारी सचिन का सफर आज भी पहले की तरह जारी है ... अपने जज़्बे और बल्ले से प्रदर्शन से क्रिकेट की सबसे बड़ी मिसाल बन चुके सचिन को ... हाथ में बल्ला थमाने के असली श्रेय उनके बड़े भाई अजित तेंदुलकर को जाता है। मुंबई के शारदाआश्रम विद्यामंदिर में पढ़ाई के दौरान जो सचिन ने ... अपने कोच रमाकांत अचरेकर से क्रिकेट के गुर सीखे ... वो आज रिकॉर्ड बुक्स में असंख्य आंकड़ों के साथ मील का पत्थर बन चुके हैं। हालांकि शुरूआत में सचिन तेज़ गेंदबाज़ बनना चाहते थे ... औऱ इसी के गुर सीखने के लिए वो एमआरएफ़ पेस फ़ाउंडेशन भी गए। लेकिन डेनिस लिली की सलाह पर उन्होंने गेंदबाज़ी छोड़कर ... अपना ध्यान बल्लेबाज़ी पर दिया। इसी के बाद रमाकांत अचरेकर की देखरेख में सचिन की बल्लेबाज़ी फली-फूली । आचरेकर का विकेट पर 1 रूपए का सिक्का रखकर ... नेट्स में गेंदबाज़ों को सचिन को आउट करने का चैलेंज देना ... औऱ हर बार नॉट-ऑउट रहने पर सचिन का लगातार 13 सिक्के जीतना ... क्रिकेट के भगवान की ज़िंदगी से जुड़ी ऐसी कहानी है जो देश का बच्चा-बच्चा जानता है। सचिन की ज़िंदगी की एक और कहानी भी साल 1988 में देश भर में सुर्खियां बटोरने की वजह बन गई थी। इस दौरान लॉर्ड हैरिस शील्ड इंटर स्कूल मैच में GFX सचिन ने विनोद कांबली के साथ मिलकर ...664 रनों की नाबाद पार्टनरशिप की ... जो दशकों तक अजेय रिकॉर्ड रही। हालांकि अपने पहले ही टेस्ट में सचिन सिर्फ़ 15 रन बनाकर ... वक़ार यूनुस की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए थे। लेकिन जिस तरह से मैच में सचिन ने पाकिस्तानी गेंदबाज़ों का सामना किया ... सचिन अपनी अलग पहचान बना चुके थे। इसी दौरे पर एक बाउंसर से चोट खाने के बाद सचिन की नाक से ख़ून निकलने लगा था ... लेकिन उन्होंने पैवेलियन लौटने से इंकार कर दिया ... क्रिकेट के लिए सचिन का ये वो समर्पण जिसकी पूरी दुनिया कायल हो गई। एक प्रदर्शनी मैच में अब्दुल क़ादिर की गेंदों पर छक्के लगाते हुए सचिन का सिर्फ़ 18 गेंदों पर 53 रन बनाना भी ... उन्हें छोटी सी उम्र में फैन्स का चहेता बना गया। बात चाहे इंग्लैंड के ख़िलाफ़ 1990 में ओल्ड ट्रैफ़र्ड के मैदान पर बनाए ... करियर के पहले टेस्ट शतक की हो ... या 1991-92 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर सिडनी टेस्ट में खेली नाबाद 148 रनों की ज़िम्मेदार पारी की ... सचिन का करियर मैच दर मैच सिर्फ परवान ही चढ़ा। 1994 में पहली बार उन्हें वन-डे क्रिकेट में टीम के लिए ...
पारी की शुरुआत करने का मौका मिला जिसके बाद ... इसी साल उन्होंने वनडे फॉर्मेट अपना पहला शतक लगाकर ... उम्मीदों के नए सिलसिले का आगाज़ कर दिया। इंग्लैंड में 1999 वर्ल्डकप के दौरान अपने पिता की मृत्यु के बावजूद ... टीम की ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए ... सचिन का शोक के बावजूद वापस वर्ल्डकप खेलने जाना और देश के लिए शतक बनाना ... सचिन की शक्सियत की ऐसी मिसाल बनीं जिसने किसी भी दूसरे क्रिकेटर से ... उन्हें कोसों आगे पहुंचा दिया। क्रिकेट की पिच पर करीब-करीब बिताए अपने ढाई दशक के करियर में सचिन के नाम आज इतनी उपलब्धियां औऱ रिकॉर्ड हैं कि क्या कहें ... सबसे ज़्यादा रन ... सबसे ज़्यादा शतक ... सबसे लंबा करियर ... और वर्ल्ड क्रिकेट का सबसे सफल क्रिकेटर होने की उपलब्धियों के साथ आज सचिन क्रिकेट की असली पहचान हैं। जिस पर आने वाली पीढ़ियां सिर्फ नाज़ ही करेंगी।
एक बार फिर सचिन का जन्मदिन
तस्वीरें भले ही पुरानी हों लेकिन क्रिकेट को धर्म की तरह पूजने वाले देश हिंदुस्तान में 24 अप्रैल का दिन हर साल ऐसे ही मनाया जाता है । वजह भी साफ है ... क्योंकि इसी रोज़ जेंटलमैन गेम यानी क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का जन्मदिन जो है । GFX मुंबई में 24 अप्रैल 1973 को जन्मे सचिन तेंदुलकर ... बुधवार को अपने 40वां जन्मदिन मनाएंगे। किसी गैर-भारतीय के लिए ये चौंकाने वाली बात हो सकती है लेकिन 1989 में सिर्फ 16 साल की उम्र में अपने इंटरनेशनल करियर का आगाज़ करने वाले सचिन का जन्मदिन ... हर साल देश में करोड़ों फैन्स किसी त्यौहार की तरह ही मनाते रहे हैं। इसे सचिन के लिए उनके फैन्स की चाहत नहीं तो औऱ भला क्या कहा जाएगा ... कि इस रोज़ कहीं देश में फैन्स मास्टर ब्लास्टर की सलामती औऱ लंबी उम्र के लिए भगवान के दरबार में पूजा-अर्चना करते हैं ... कहीं गरीबों में दान दिया जाता है ... तो कहीं सचिन के नाम केक काटकर सेलीब्रेट किया जा सकता है। यूं तो क्रिकेट के कोहीनूर सचिन को चाहने वालों के लिए ये दिन हमेशा ही खास रहा है ... लेकिन बीते साल की तरह इस बार भी सचिन के फैन्स अपने हीरो को ... क्रिकेट की पिच पर खेलते हुए देख पाएंगे। जी हां ... खुशकिस्मती से इस बार भी 24 अप्रैल की शाम IPL में सचिन की टीम मुंबई इंडियन्स ... मैदान पर खेलती नज़र आएगी। जहां उसका मुकाबला पिछले साल की डिफेंडिग चैंपियन कोलकाता नाइट राइडर्स से उसी के घरेलू मैदान ईडेन गार्ड्न्स पर होगा। वन-डे क्रिकेट से संन्यास का ऐलान करने के बाद क्रिकेट की पिच पर सचिन तेंदुलकर का ये पहला जन्मदिन होगा ... वैसे भी मैदान औऱ फॉर्मेट चाहे जो भी हो लेकिन अगर सचिन खेल रहे हैं ... तो फैन्स का तांता तो लगना तय ही है। हालांकि ये टक्कर कोलकाता की घरेलू टीम केकेआर के खिलाफ होने जा रही है ... लेकिन सचिन मेनिया के सामने कोई और जादू चलेगा इस बात की संभावना ना के बराबर है। फिर उम्मीद की जा सकती है है कि ईडेन के मैदान पर ... जब बर्थ-डे ब्वॉय़ सचिन के बल्ले से बनने वाले हर रन पर 75 हज़ार से ज़्यादा दर्शक एक सुर में सचिन-सचिन के नारे के साथ मास्टर ब्लास्टर का जन्मदिन मनाएंगे ... तो नज़ारा देखने वाला होगा।
सचिन एक कामयाब पति...एक कामयाब पिता ...
क्रिकेट के PERFECTIONIST कहे जाने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर... सिर्फ मैदान पर ही एक बल्लेबाज के तौर पर परिपक्व नहीं हैं... बल्कि मैदान से बाहर अपनी निजी जिंदगी में भी अपना हर किरदार उतनी ही शिद्दत से निभाते आए हैं फिर चाहे वो किरदार एक पति का हो...या फिर एक पिता का ... पारिवारिक पिच पर भी सचिन उतने ही PERFECT हैं जितने क्रिकेट की पिच पर... सचिन के छोटे से परिवार में उनकी पत्नी अंजलि और उनके दो बच्चे हैं...बड़ी बेटी सारा तेंदुलकर हैं... और छोटा बेटा अर्जुन तेंदुलकर है...अपने BUSY SCHEDULE के बावजूद सचिन ने कभी भी अपने परिवार को नजरअंदाज नहीं किया...खेल के साथ-साथ मास्टर ब्लास्टर फैमिली लाइफ भी BALANCE करना जानते हैं...परिवार में एक पति पिता के तौर पर सचिन ने उन सारी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है ... जो उन्हें एक PERFECT FAMILY MAN बनाता है...
एक पिता के तौर पर सचिन ने अपने बच्चों को ना सिर्फ अच्छी परवरिश दी है बल्कि उन्हें वो शिक्षा और संस्कार भी दिए जो उन्हें उनके माता पिता ने दिए थे...
विदेशी दौरों के चलते अपना ज्यादातर वक्त घर से दूर बिताने के बाद जब भी सचिन घर आते हैं तो वो अपना सारा वक्त अपने बच्चों के मन-मुताबिक बिताना पसंद करते हैं...BYTE SACHIN TENDULKAR (NOT MORE THAN 15 SEC) क्रिकेट से छुट्टियां मिलते ही सचिन अपने परिवार के साथ घूमने के लिए निकल जाते हैं फिर चाहे वो मंसूरी की वादियां हो या फिर LONDON...
क्रिकेट के लिए अपने प्यार के बावजूद सचिन ने कभी भी अपने बेटे को क्रिकेटर बनने के लिए नहीं मजबूर किया... उन्होंने अपने दोनों बच्चों को खुद अपनी जिंदगी के फैसले लेने की पूरी आज़ादी दी... हालांकि सचिन के बेटे अर्जुन ने जहां अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए... क्रिकेट को ही अपनी पसंद बनाया... तो वहीं सचिन की बेटी सारा अपनी मां की तरह मेडिकल लाइन में जाने की तैयारी कर रही हैं।
साफ है एक आदर्श पिता बनकर सचिन ने साबित कर दिया की वो सिर्फ क्रिकेट ही नहीं... बल्कि जिंदगी के हर मोर्चे पर बाजी मारने का माद्दा रखते हैं ... वो एक LEGENDARY क्रिकेटर होने के साथ-साथ एक आइडियल पती और पिता भी हैं।
सोमवार, 22 अप्रैल 2013
क्रिकेटर्स की प्रेम कहानी
शनिवार, 6 अप्रैल 2013
IPL-6: बीसीसीआई को होगी 950 करोड़ की कमाई!
आईपीएल का सीज़न सिक्स। सिर्फ टाइटल ही 396.8 करोड़ रुपए में बिका है। पांच साल तक रही डीएलएफ की स्पांसरशिप से दोगुना। आईपीएल-6 से बीसीसीआई को 950 करोड़ की कमाई का अनुमान है। आईपीएल अब खेल से ज्यादा मनोरंजन बन गया है। इसलिए भास्कर ने एक कदम आगे बढ़कर आईपीएल की आलोचनात्मक तुलना सबसे ज्यादा देखे गए टीवी प्रोग्राम, हाल की हिट फिल्म और अन्य स्पोर्ट्स से की। दबंग-2 से तो लगभग चार गुना कमाई करने जा रहा है। लेकिन विज्ञापन केबीसी पर एक लाख रुपए महंगा था।
अब भी चार स्पोर्ट्स ब्रांड आईपीएल से बड़े
दुनिया में फीफा, विंबलडन, सुपरबॉल और एफ1 के बाद सबसे बड़ा स्पोर्ट्स ब्रांड आईपीएल। सुपरबॉल में दस सेकंड के विज्ञापन की दर 22 करोड़ रुपए तक पहुंच जाती है। ऑस्ट्रेलिया ने बिग बैश टी-20 टूर्नामेंट और इंग्लैंड ने अपने टी-20 टूर्नामेंट को आईपीएल के बराबर सफल बनाने की कोई कोशिशें की, जो नाकाम रही।
फिर होगी कोला-वॉर
पेप्सी आईपीएल का ऑफिशियल पार्टनर है। तो कोकाकोला भी दस-दस सेकंड के स्पॉट खरीदकर अपनी मार्केटिंग कर रहा है। यह जंग शुरू हुई थी 1996 के क्रिकेट विश्वकप से। जब कोकाकोला को ऑफिशियल पार्टनर बनाया गया था। तब पेप्सी ने स्पॉट खरीदकर हर ओवर के बाद मार्केटिंग की थी- ‘नथिंग ऑफिशियल अबाउट इट’।
फुटबॉल में मैच फिक्सिंग के बदले लिया 'मुफ्त सेक्स सेवा'
दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेलों में शुमार फुटबॉल की खास पर एक के बाद एक दाग लगता जा रहा है। फुटबॉल जगत अभी मैच फिक्सिंग के आरोपों से निजात पाने की कोशिश में जुटा ही था कि इस खेल से जुड़े एक और विवाद ने खेल प्रेमियों को स्तब्ध कर दिया है। एक रेफरी और उसके दो सहयोगियों पर एशियन फुटबॉल कांडफेडरेशन कप के एक मैच के दौरान 'मुफ्त सेक्स सेवा' के बदले मैच फिक्स कराने का केस दर्ज किया गया है।
सिंगापुर की भ्रष्टाचार विरोधी जांच ब्यूरो के अनुसार तीनों लोग लेबनान के नागरिक हैं और तीनों पर एक ही मामले का केस दर्ज किया गया है। ब्यूरो ने बताया कि जिन पर सेक्स सेवा का उपयोग करने का आरोप है उनके नाम रेफरी अली साबाग और दो सहायक रेफरी अली ईद और अब्दल्लाह तालेब है। 33 साल के साबाग फीफा से मान्यता प्राप्त रेफरी हैं जिन्होंने 2014 विश्व कप क्वालीफायर्स के लिए काम किया हुआ है। आज शुक्रवार को तीनों आरोपियों की पेशी होनी है। भ्रष्टाचार निरोधी एजेंसी ने कहा कि जांच उस आरोप के बाद शुरू की गई जिसमें कहा गया था कि बुधवार को सिंगापुरी क्लब थांपिनेस रोवर्स और भारतीय क्लब ईस्ट बंगाल के बीच मुकाबला मैच फिक्सिंग के दायरे में हैं। यह मैच ईस्ट बंगाल ने 4-2 से जीता था।
ब्लूमबर्ग समाचार एजेंसी के अनुसार तीनों रेफरियों को सिंगापुर के अमारा होटल में मैच के दिन एक-एक औरत मुहैया करवाई गईं जिसके बदले में उन्हें मैच फिक्स करवाना था। अगर उक्त आरोप सही पाए जाते हैं तो इन लोगों को पांच साल की जेल और 80 हजार डॉलर का जुर्माना हो सकता है। ये मामला तब सामने आया है जब फुटबॉल मैचों के फिक्स होने का मामला तुल पकड़ता जा रहा है। फुटबॉल की अंतरराष्ट्रीय नियामक संस्था फीफा ने फरवरी में इटली, दक्षिणी कोरिया और चीन में खेल से संबंधित अधिकारियों को पुछताछ की जिन पर मैच-फिक्सिंग करने का आरोप लगा था।
वहीं यूरोपीय पुलिस यूरोपोल की एक जांच में यह बात सामने आई है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैचों की हो रही फिक्सिंग में शामिल लोगों का अड्डा सिंगापुर में ही है। यूरोपोल के अनुसार साल 2008 से 2001 के बीच खेले गए कम से कम 680 मैच ऐसे थे जिन्हें शक के दायरे में रखा जा सकता है।
रविवार, 24 मार्च 2013
आज सचिन का दिन है.....क्या ये यादगार विदाई थी ?
रवींद्र जडेजा ने रचा इतिहास...सबसे कामयाब ऑलराउंडर
दिल्ली टेस्ट में टीम इंडिया को जीत दिलाने में रवींद्र जडेजा ने भी अहम रोल अदा किया... कोटला में वो जडेजा की ही फिरकी का कमाल था कि ऑस्ट्रेलियाई टीम दूसरी पारी में 164 रनों पर ढेर हो गई... जडेजा ने पूरी सीरीज़ में 24 विकेट झटके।
टीम इंडिया को मिला फिरकी का नया फनकार...सीरीज़ का सबसे बड़ा सरताज...रवींद्र जडेजा ने खुद को साबित किया सबसे बड़ा जांबाज़..
जी हां...कंगारूओं के खिलाफ सीरीज़ में वो रवींद्र जडेजा ही रहे जिन्होनें गेंद से ऐसा जलवा बिखेरा...जिसने फैंस का दिल जीत लिया...
कोटला टेस्ट के चौथे 272 रनों पर सिमटने के बाद...कंगारूओं ने पिच के पेंच को समझते हुए...तीखे तेवरों के साथ वॉर्नर के साथ मैक्सवेल को मारममार मचाने के लिए मैदान पर उतारा..
कंगारूओं ने तेज़ी से 15 रन भी जोड़ लिए...जिसके बाद कप्तान ने जडेजा ने हाथों में गेंद थमा दी...और फिर क्या था...फिरकी के इस नए फनकार ने कंगारूओं को अपनी फिरकी में फंसाना शुरु कर दिया...पहले मैक्सवेल और फिर वॉर्नर के वार को थाम...रवींद्र जडेजा ने जीत की उम्मीदों को परवान चढ़ाना शुरु कर दिया...लेकिन कोटला में कड़ी चुनौती देने की कसम खा चुके कंगारू फिर भी प्रहार करने से बाज़ नहीं आए...और कोटला की कंरट देती पिच पर...लंच तक कंगारू टीम ने 5 विकेट खोकर 89 रन जोड़ लिए..
लेकिन लंच के बाद जैसे ही जडेजा ने अपने पहले ओवर के लिए गेंद थामी...कंगारूओं को काम तमाम होना शुरु हो गया....पहली गेंद पर क्रीज़ पर जमे एड कोवॉन...और जडेजा की अगली ही डिलिवरी मिचेल जॉनसन की गिल्लियां ले उड़ी...
हालाकि इसके बाद जडेजा टेस्ट करियर की पहली हैट्रिक से चूक गए...लेकिन अपने करियर में उन्होनें पहली बार 5 विकेट हासिल करने का कारनामा कर दिखाया...ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 4 टेस्ट मैचों में रवींद्र जडेजा 24 विकेट हासिल कर अश्विन के बाद दूसरे सबसे ज्यादा सफल गेंदबाज़ रहे
ज़ाहिर है...कंगारूओं के खिलाफ रवींद्र जडेजा फिरकी के वो फनकार रहे...जिनके जलवे ने ना सिर्फ टीम इंडिया की सीरीज़ जीत में अहम भूमिका निभाई...बल्कि इस सीरीज़ से जडेजा ने खुद को टेस्ट टीम के लिए पूरी तरह से फिट भी साबित कर दिया।
लेखक
रजनीश कुमार
आर. अश्विन बने मैन ऑफ द सीरीज
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक जीत हासिल करने में भारतीय स्पिनर्स का भी अहर रोल रहा... खासतौर पर आर अश्विन की फिरकी कंगारुओं के लिए किसी काल से कम साबित नहीं हुई... अश्विन ने सीरीज़ में सबसे ज्यादा 29 विकेट हासिल किए... और मैन ऑफ द सीरीज़ भी बने।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज़ में चली ये टीम इंडिया के फिरकी के फनकार...यानि आर.अश्विन की आंधी ही थी...जिसने पूरी सीरीज़ के दौरान कंगारूओं की कमर तोड़े रखी...पहले घमासान से लेकर आखिरी मुकाबले तक अश्विन की मार से कंगारू थर्राते ही नज़र आए...
ज़रा इन आंकड़ों पर नजर डालिए
सीरीज़ के पहले यानि चेन्नई टेस्ट में आर.अश्विन ने कुल 12 कंगारूओं का शिकार किया...हैदराबाद में अश्विन ने 6 विकेट झटके...और मोहाली में फिरकी के इस उस्ताद को 4 विकेट हासिल हुए...और कोटला में तो कंगारूओं पर अश्विन सबसे बड़ी आफत बन कर टूटे...सीरीज़ के आखिरी टेस्ट में अश्विन ने 7 विकेट झटक...सीरीज़ में अपनी विकेटों की संख्या...29 तक पहुंचा दी...
कंगारूओं के खिलाफ फिरकी के उस्ताद..यानि आर.अश्विन के आंतक की यही वो कहानी रही...जिसने बल्लेबाज़ों के बोलबाले के बीच...खुद की ऐसी कहानी लिखी...जिसकी वजह से उन्हें इस ऐतिहासिक सीरीज़ के बीच मैन ऑफ द सीरीज़ के खिताब से नवाज़ा गया...
ज़ाहिर है...कंगारूओं के खिलाफ चेन्नई से शुरु हुए आर.अश्विन के सफर ने... दिल्ली तक आते-आते भारतीय स्पिन के इतिहास में वो इम्तिहान पास किया...जिसके बाद ये कहा जा सकता है...कि भारतीय क्रिकेट में फिरकी के फनकार रहे कुंबले और हरभजन सिंह जैसे दिग्गजों की विरासत सही हाथों में है...जिसकी सबसे बड़ा उदहारण...आर.अश्विन की उड़ान के रुप में दुनिया के सामने है।
लेखक
रजनीश कुमार
क्या खत्म हो सचिन तेंदुलकर का टेस्ट करियर ?
सचिन की उम्र और घरेलू सरज़मीं पर टीम इंडिया की अगली टेस्ट सीरीज़ को देखकर ये माना जा रहा है कि सचिन भारत में अपना आखिरी मैच खेल रहे हैं... लेकिन अगर बीसीसीआई ने चाहा तो फिर मास्टर ब्लास्टर को घरेलू सरज़मीं पर खेलने का एक और मौका मिल सकता है।
टीम इंडिया भले ही कोटला की किंग बनती नज़र आ रही हो...भले धोनी के धुरंधर इस टेस्ट को क्लीन स्वीप के साथ सचिन के लिए यादगार बनाने की कोशिशों में जुटे हों... लेकिन बावजूद इसके मुमकिन है ... ये टेस्ट भारतीय सरज़मी पर सचिन के टेस्ट करियर का आखिरी टेस्ट ना हो ... मुमकिन है कि घरेलू फैंस को एक बार फिर भारतीय पिचों पर सचिन के दीदार हो जाए... सचिन क्रीज़ पर एक बार बल्ला थामे नज़र आए... हालांकि इसकी संभावना लगभग ना के बराबर हैं... लेकिन अगर BCCI ने चहा और श्रीलंका बोर्ड ने उनकी इस ख्वाहिश को हरी झंडी दे दी तो सचिन का भारतीय सरज़मीं पर कम से कम एक दफे और संग्राम दिख सकता है ....
दरअसल ICC की FPC के मुताबिक टीम इंडिया को मौजूदा सीरीज़ के बाद घरेलू सरज़मीं पर अपनी अगली सीरीज़ अक्टूबर 2014 में खेलनी है ...
तब तक सचिन के टेस्ट क्रिकेट में बने रहने की उम्मीद ना के बराबर ही है ... लिहाजा सचिन की विदाई को यादगार बनाने इरादे से ...
BCCI टीम इंडिया के नवंबर में होने वाले अफ्रीकी दौरे से पहले सितंबर-अक्टूबर के महीने में श्रीलंका के साथ दो मैचों की सीरीज़ का आयोजन कर सकती है ...
और अगर ऐसा हुआ तो कुछ हद तक मुमकिन भी है कि भारतीय फैंस... मास्टर के दिलकश शॉट्स का नजारा भारतीय सरज़मी पर एक बार फिर देख सकें।
लेखक
रजनीश कुमार
क्या धोनी ने दी सचिन को शानदार विदाई ?
दिल्ली टेस्ट की पहली पारी में जब सचिन तेंदुलकर 32 रन और दूसरी पारी में 1 रन पर आउट हुए तो लगा कि कहीं भारत में सचिन का आखिरी मैच फीका ना रह जाए... लेकिन टीम इंडिया ने सचिन की इस विदाई को फीका नहीं होने दिया...
दिल्ली में जीत का चौका लगाकर धोनी ब्रिगेड ने साबित कर दिया कि सचिन भले ही बल्ले से नाकाम रहे हों... लेकिन उनकी विदाई शानदार ही होगी।
सचिन का बल्ला ना चला ..तो ना सही ...सचिन दूसरी पारी में भी 1 रन के स्कोर पर आउट हुए ...तो कोई नहीं ... लेकिन धोनी के बल्ले से निकला जीत का ये चौका ऐलान है अपने उस सरताज़ के लिए जिसने 24 सालों तक अपने फैंस को जश्न मनाने के ना जाने कितने ही मौके दिए....RELIEF ...ना जाने कितने ही मौकों पर भारतीय क्रिकेट में नई जान फूंकी ...RELIEF ... और शायदा इनको ही देख ... ना जाने ऐसे कितने ही युवाओं ने क्रिकेट को अपनी ज़िदगी बनाया...relief ...लेकिन जब बारी आई ... सचिन को उन्हीं के अंदाज़ में सज़दा करने की ...तो माही ने भी अपने मतवालों के साथ मिलकर 4-0 की जीत के साथ सचिन को विदाई देने में कोई कसर नहीं छोड़ी... क्योंकि खुद टीम इंडिया का कप्तान भी ये अच्छी तरह समझ चुके थे कि अब शायद ही उनकी सरपस्ती में सचिन अगली दफे... अपनी घरेलू सरज़मनी पर खेलते दिखाई दें..वो भी तब जब भारत में अगली सीरीज़ अक्टूबर 2014 में होगी ... जहां सचिन के खेलने की संभावना अब लगभग ना के बराबर ही है... जिसे मास्टर के भावनात्मक पलों के देखकर आसानी से समझा जा सकता है ...Relief ...हालांकि विदाई को शानदार बनाने की शुरूआत तो माही ने चेन्नई टेस्ट से ही कर दी ती ...जहां दोहरा शतक लगा कंगारुओं को पूरे तरह नकार दिया ...इसके बाद...हैदराबाद और मोहाली में भी वही जो सचिन की सानदार विदाई के लिए बेहद ज़रूरी था ...RELIEF .... फिर टीम कोटला पहुंची को तमाम उतार चढ़ाव के बाद दिन... भारतीय सरज़मी पर सचिन के आखिरी मुकाबले का था तो ... जडेजा दम भरा ...और इन 5 विकेटों के साथ जीत तय़ कर दी ... बारी बल्लेबाज़ी की आई तो माही ने पुजारा के साथ मिलकर... विजय की ऐसी उदघोष्णा की ...कि 4-0 की इतिहासिक जीत के साथ कंगारुओं के गुरूर को कुचलते हुए ऐलान कर दिया कि ..सचिन तुझे सलाम ।
लेखक
रजनीश कुमार
ले लिया बदला...धोनी ब्रिगेड की यादगार जीत
ज़ख्म क्या होते हैं...ये कोई टीम इंडिया के पूछे ... जो ऑस्ट्रेलिया ने उसे अपने घर में दिए थे ... लेकिन जख्मों को पाला कैसे जाता ये भी माही के मतवालों से बेहतर भला कौन बता सकता है ... तभी तो उनका हिसाब भी ठीक उसी अंदाज़ में चुकता किया गया जैसा कि ऑस्ट्रेलिया ने किया था .... बदले हर वो किस्त के साथ जख्मों पर मरहम हू ब ही उसी अंदाज़ में लगाया गया जिस अंदाज़ में कंगारुओं ने दिए थे ... RELIEF ...
बदले की पहली किस्त
ऑस्ट्रेलिया गए तो ..पहले मुकाबले यानी मेलबर्न टेस्ट में कंगारुओं ने टीम इंडिया को 122 रनों से हराया ...तो टीम इंडिया ने मेहमानों को चेन्नई टेस्ट में 8 विकेट से चित बदले की पहली किस्त वसूल कर ली
बदले ही दूसरी किस्त
मौका सिडनी टेस्ट का आया तो टीम इंडिया को पारी और 68 रनों से हार का सामना करना पड़ा ... तो दूसरी किस्त के तौर पर टीम इंडिया ने हैदराबाद टेस्ट में कंगारुओं की किस्मत में पारी और 135 रनों से ऐसी हार लिखी कि ऑस्ट्रेलियाई मीडिया...ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की मौत का ऐलान करने को भी मज़बूर हो गई
बदले की तीसरी किस्त
ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर टीम इंडिया ने तीसरा टेस्ट पर्थ में गवांया...जहां उसे पारी और 37 रनों से हार का सामना करना पड़ा... तो बदले का मौका मोहाली में मिला ... इस बार टीम इंडिया बदले को इतनी बेताब थी कि ... बारिश के चलते 1 दिन का खेल धुलने के बावजूद...नतीजा ना आने वाले मैच में भी उसने कंगारुओं के 4 दिन में चित करते हुए 6 विकेट से सानदार जीत दर्ज की
बदले की आखिरी किस्त
शुरूआती 3 मुकाबले से टीम इंडिया के इरादे साफ हो चुके थे ...सीरीज़ पर वो 3-0 से कब्जा कर चुकी थी ..लेकिन इरादा था ...कि बदला तो लेकर रहेंगे ...हर हार का हिसाब तो होकर रहेगा...नतीजा ...298 रनों के जख्म जो कंगारुओं ने उसे चौथे यानी एडिलेड टेस्ट में दिए थे ..उसके ऐवज में टीम इंडिया ने 3 दिन में ही दिल्ली टेस्ट पर कब्जा कर कंगारु-क्रिकेट के ताबूत में वो आखिरी कील भी ठोंक दी ...जिसका फैंस को बेसब्री से इंतज़ार था RELIEF ... जिसके साथ ही टीम इंडिया और उसके फैंस ने जश्न से ऐलान कर दिया... कि हार हिसाब अब पूरा हुआ।
लेखक
रजनीश कुमार
दिल्ली में टीम इंडिया ने रचा इतिहास ---ऑस्ट्रेलिया को 4-0 से हराया
दिल्ली टेस्ट में जीत... भारतीय क्रिकेट के इतिहास की सबसे बड़ी जीत है... वो जीत जो टीम इंडिया को 81 साल के लंबे अंतराल के बाद मिली है... दूसरे लफ्जों में कहें... तो जो कारनामा सुनील गावस्कर ... कपिल देव ... और अज़हरुद्दीन जैसे कप्तान नहीं कर सके वो धोनी ने कर दिखाया।
भारतीय क्रिकेट का सबसे सुनहरा दिन
इतिहास के पन्नों में अमर हो गई
24 मार्च 2013 की तारीख
क्योंकि मिली है
इतिहास की सबसे
'बड़ी जीत'
जी हां...भारतीय क्रिकेट के इतिहास में जीत तो बहुत सी देखी...लेकिन ऐसी ऐतिहासिक जीत 81 सालों के लंबे इतिहास में पहली बार नसीब हुई है...टीम इंडिया को हासिल हुआ है वो मुकाम...जिसे पटौदी...अहज़र...कपिल...गावस्कर...और गांगुली जैसे धुरंधर भी हासिल ना कर सके...4-0 की क्लीन स्वीप का ऐसा धमाका...धोनी के धुरंधरों ने कर दिखाया है...वो भी मज़बूत मानी जाने वाली कंगारू टीम के खिलाफ...
relief
टीम इंडिया ने हासिल की ऐसी जीत...जिसने 15 महीने पहले ऑस्ट्रेलिया में मिले हार के उन जख्मों पर ठीक वैसा ही मरहम लगाया...जैसे ही शिक्स्त के घाव सीने पर लगे थे...इस जीत के मायने कामयाबियों के इतिहास में सबसे खास है...
क्योंकि कंगारूओं के खिलाफ इससे पहले कभी भी टीम इंडिया को 4-0 से जीत नहीं मिली...और तो और कभी वर्ल्डक्रिकेट पर राज करने वाली खुद कंगारू टीम को 43 सालों के इतिहास में पहली बार 0-4 की बड़ी हार का सामना करना पड़ा है...
और तो और इस सीरीज़ में सबसे खास रहा...टीम इंडिया का गिर कर संभलना...और यंगिस्तान का वो जलवा...जिसने कंगारूओं के गुरुर को रौंध कर रख दिया...ज़ाहिर है 24 मार्च का ऐतिहासिक दिन जश्न का दिन है...भारतीय क्रिकेट में उस त्यौहार का दिन है...जिसने होली से पहले ही जीत के रंगों से सराबौर कर करोड़ों फैंस को ऐसी जीत का तोहफा दिया है...जैसी इससे पहले ना कभी देखी...ना सुनी।...वाकई ये भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे बड़ी जीत के जश्न का दिन है।
लेखक
रजनीश कुमार
बुधवार, 20 मार्च 2013
टेस्ट टीम में वापसी को बेताब है युवराज- शबनम सिंह
कैंसर से जंग जीतने की बात हो या फिर वर्ल्डकप कप ट्रॉफी हाथों में उठाने का सपना...युवराज ने क्रिकेट की पिच पर अपना हर ख्वाब पूरा किया है...लेकिन युवराज की एक ख्वाहिश ऐसी भी है...जो अभी तक अधूरी है...जो अंदर ही अंदर युवराज को हमेशा सालती है...और वो है टेस्ट टीम में जगह बनाने की...जिसका खुलासा ना सिर्फ युवराज सिंह ने...बल्कि उनकी मां शबनम सिंह ने भी किया।
... SHABNAM SINGH MOTHER OF YUVRAJ SINGH ON TEST CRICKET ... ( मैं इसकी मां हूं ... ये बोलता नहीं है लेकिन एक क्रिकेटर होने के नाते हर किसी का ख्वाब होता है कि वो टेस्ट क्रिकेट खेले। ये टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहता है ... )
एक बेटे को क्या चाहिए ... मां सब जानती है । आपने सही सुना वर्ल्ड क्रिकेट के सबसे बड़े फाइटर युवराज सिंह के दिल में देश के लिए ... फिर से टेस्ट क्रिकेट खेलने की हसरत आज भी उतनी ही शिद्दत के साथ घर किए हुए है ... जितना कैंसर से खिलाफ ज़िंदगी की जंग के दौरान ... वो ठीक होकर जीना चाहते थे। औऱ एक बार जो युवराज की किताब के लांच के दौरान उनकी मां ने अपने बेटे की ये ख्वाहिश जगज़ाहिर की ... तो युवी ने ये कहने में हिचकिचाहट नहीं दिखाई ... कि टेस्ट टीम में फिर से अपनी जगह बनाने के लिए उनकी कोशिश जारी रहेगी।
अपने 12 साल के करियर के दौरान कभी फिटनेस तो कभी फॉर्म की फांस में फंसने के चलते ... अक्सर टेस्ट टीम से ड्रॉप होते आए युवराज को आज भी भरोसा है कि एक दिन उनकी मेहनत उन्हें टेस्ट टीम का Permanent सदस्य ज़रूर बना देगी।
शायद यही वजह भी है कि अब युवराज अपनी फिटनेस पर भी ज़्यादा मेहनत कर रहे हैं । एक तरफ जहां उन्होंने अपना काफी वज़न कम किया है ... तो वहीं वो टीम में अपनी जगह वो फिर से पक्का करने के लिए वो भविष्य में मिलने वाले हर मौके वो भुनाना चाहते हैं ... जिससे उन्हें सेलेक्टर्स का भरोसा एक बार फिर हासिल हो सके। बहरहाल अपने 40 टेस्ट के करियर में 1900 रन बनाने वाले युवी की मेहनत कब रंग लाएगी ... या फिर से उन्हें टेस्ट टीम में कब खेलने का मौका मिलेगा ... ये तो आने वाला वक्त बताएगा ... लेकिन युवी के कभी न हार मानने वाले जज़्बे को देखते हुए उम्मीद ज़रूर की जा सकती है कि ... युवराज भी अपनी मंज़िल को हासिल किए बिना ... चैन से नहीं बैठेंगे। रजनीश कुमार के साथ, ऋषभ शर्मा के साथ लाइव इंडिया दिल्ली ।
लेखक
रजनीश कुमार
http://www.youtube.com/watch?v=Jp0bQYLYGZ0
युवराज मेरा दोस्त नहीं ..भाई है---हरभजन सिंह
कैंसर के खिलाफ इस जंग में वैसे तो युवराज सिंह का कई साथियों ने साथ दिया...तो वहीं फैंस की दुआएं भी रंग लाईं ...लेकिन युवी का एक दोस्त ऐसा भी रहा ... जिसने युवराज को इस गंभीर बीमारी से निजात दिलाने के लिए एक ऐसा तरीका अपनाया ... जिसे जानकार शायद आपके होंठो पर भी मुस्कान आ जाए ... तो युवराज को तो हंसना ही था ... कौन है युवराज का वो दिलचस्प साथी
क्रिकेट की पिच पर जीत का जश्न मनाते ... औऱ आपस में मज़ाक करते युवराज और हरभजन सिंह की दोस्ती की ऐसी हज़ारों तस्वीरें ... कई बार देखने को मिली हैं। लेकिन कैंसर से ज़िंदगी की जंग लड़ने के दौरान ... दोस्ती की जो मिसाल भज्जी ने पेश की ... उसे युवराज अपने दिल के सबसे करीब मानते हैं। अपनी किताब में युवराज ने लिखा है कैसे इलाज के दौरान ... उनसे मिलने और बात करने वाला हर शक्स ... उनकी सेहत और जल्द ठीक होने की बातें किया करता था। लेकिन इस दौरान वो सिर्फ हरभजन सिंह ही थे जिन्होंने कभी ... युवी को इस बात का अहसास नहीं होने दिया कि उनकी जंग कैंसर जैसी बीमारी से जारी थी।
Harbhajan Singh ... (मैं उसके हालात समझ सकता था क्योंकि मैं भी कुछ ऐसे ही हालात से गुज़र चुका था ... जब मैं काफी छोटा था तब मेरे पिता की मौत हो गई थी । लेकिन यहां सवाल परिवार में किसी की जान का नहीं ... बल्कि खुद युवराज की ज़िंदगी का था औऱ वो लड़ाई भी आसान नहीं थी )
यही वजह थी कि युवराज के किसी दूसरे शुभचिंतक की तरह भज्जी ने युवराज से कभी उनके दर्द की बात नहीं की ... दिल में अपने दोस्त की ज़िंदगी की दुआ और ज़ुबान पर मज़ाकिया लहज़े में भज्जी लगातार युवराज से उन लम्हों की बातें किया करते थे ... जब दोनों ने एक साथ मिलकर क्रिकेट की ABCD सीखने के अलावा ... ज़िंदगी की नीजि बातें भी साझा की थीं ।
Harbhajan Singh (मैं युवी से बातें करता था कि याद है जब हम साथ में Under-16-19 क्रिकेट खेला करते थे। उस दौरान हम कैसे मज़ाक करते थे ... मैं इससे लड़कियों की बातें भी करता था कि आजकल किसे घुमा रहा है ... कल किसे घुमाएगा ...मुझे किससे मिलवाएगा ?)
अपने इलाज के दौरान भज्जी का यही वो अपनापन था ... जिसके युवराज भी कर्ज़दार बन गए ... और इसीलिए उन्होंने ये कहने में भी बिल्कुल देर नहीं लगाई कि हरभजन मेरा दोस्त नहीं ... बल्कि भाई है।
वैसे भी कहते हैं कि सच्चा दोस्त वही होता है ... जो अच्छे और बुरे हर हालात में आपका साथ दे ... ऐसे में युवी और भज्जी की जोड़ी को दोस्तों की सबसे मज़बूत जोड़ियों में गिना जा सकता है ... जो आज एक मिलास भी बन चुकी है।
लेखक
रजनीश कुमार
http://www.youtube.com/watch?v=Nsj7YWuj9yA
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