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खेल से खेल तक

मंगलवार, 14 अगस्त 2012


लंदन ओलंपिक में भारतीय बैडमिंटन लंदन ओलंपिक अब अपने आखिरी पड़ाव पर आ चुका है... और अब भारत की मेडल की उम्मीदें सिर्फ रेसलर्स से ही बची हैं... लेकिन खेलों के इस महाकुंभ में रेसलिंग के अलावा दूसरे ऐसे कई खेल थे... जिनमें भारत को सफलता कम और निराशा ज्यादा हाथ लगी। बात करे बैडमिंटन की... तो यहां सायना नेहवाल ने जहां सबसे बड़ी सफलता हासिल की... और भारत को मेडल दिलाया... तो भारत के दूसरे बैडमिंटन खिलाड़ी पूरी तरह फ्लॉप ही रहे। लंदन ओलंपिक 2012 में भारतीय शटल स्टार्स ने किया कमाल 'बैडमिंटन क्वीन' सायना नेहवाल ने.. मेडल जीतकर रचा इतिहास तो कश्यप ने भी जीता दिल लेकिन ज्वाला, पोनप्पा और दीजू..  हुए पूरी तरह फेल   खेलों के महाकुंभ यानि लंदन ओलंपिक के बैडमिंटन इवेंट में भारतीय शटलर्स ने वो कर दिखाया जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद थी...सुपर सायना ने बैडमिंटन मे भारत को पहला पदल दिलाकर  इस स्पोर्ट को नए मुकाम तक पहुचा दिया...वहीं मेंस सिंगल्स मे पी कश्यप पदक तो नहीं दिला सके लेकिन उन्होंने से अपने खेल से सभी को impress जरूर किया....लेकिन ज्वाला पोनप्पा और दीजू उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए...आईए एक नजर डालते है भारतीय बैडमिंटन के ओलंपिक सफर पर...  सबसे पहले बात करते है लंदन ओलंपिक में सुपर हिट साबित हुई सायना नेहवाल की     PLATE GFX :- सायना नेहवाल रही सुपर हिट   लंदन ओलंपिक में भारत के लिए बैडमिंटन में पहला मेडल जीत कर इतिहास रचने वाली सायना नेहवाल ने दिखाया कि उन्हें यूँ ही भारत की बैंडमिंटन क्वीन नहीं कहा जाता....अपनी मेहनत, हिम्मत और लगन से खेलों के महाकुंभ कहे जाने वाले ओलंपिक मे ब्रान्ज़ मेडल जीत भारत की सायना ने आसमान की ऊंचाइयों पर अपना नाम लिख लिया है...लंदन ओलंपिक में सायना के सफर की बात करें तो ...  अपना आक्रमक खेल दिखाने वाली सायना ने बड़ी आसानी से ग्रुप स्टेज को पार कर क्वार्टरफाइल में और फिर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की की... जहां उनका समाना हुआ दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी चीन की WANG YIHAN से....WANG की चुनौती को सायना पार नहीं कर पाई और गोल्ड की दौड़ से बाहर हो गईं..लेकिन सायना ने ओलंपिक सेमीफाइनल में जगह बना बैडमिंटन में मेडल जीत.. भारत के लिए इतिहास जरूर रचा दिया...   पारुपल्ली कश्यप   लंदन ओलंपिक के मेन्स बैडमिंटन सिंगल्स में भारत के लिए स्टार बनकर उभरे...पी कश्यप....ओलंपिक शुरू होने से पहले उनसे किसी ने भी कुछ खास उम्मीद नहीं की थी...लेकिन कश्यप ने क्वार्टर फाइनल में जगह पक्की कर ना सिर्फ अपने TALENT क सबूत दिया... बल्कि साबित कर दिया की आगे जाकर वो भारत को ऐसे ही बड़े टूर्नामेंट में पदक दिलाने का मद्दा रखते है. ....ओलंपिक क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाले कश्यप भारत के पहले पुरुष खिलाड़ी बने... हालांकि सेमीफाइनल में वो नहीं पहुंच पाए.... लेकिन दुनिया के नंबर वन खिलाड़ी को उन्होंने अच्छी चुनौती दी...जो काबिलेतारीफ है...   ज्वाला, दीजू और अश्विनी पोनप्पा   सायना नेहवाल और पी कश्यप ने लंदन ओलंपिक के बैंडमिंटन इवेंट के सिंगल्स में... भारत को नई पहचान दिलाई... लेकिन मिक्स्ड डबल्स में ज्वाला गुट्टा और वी दीजू की जोड़ी एकदम फ्लॉप रही...ग्रुप लेवल के अपने सारे मुकाबलों में एकतरफा हार झेलने वाली ज्वाला-दीजू की जोड़ी ने ओलंपिक में अपने फैंस को पूरी तरह निराश कर दिया...ऐसा ही  कुछ हाल महिलाओं के डबल्स में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा का भी रहा... हालाकिं इस जोड़ी ने खराब शुरूआत के बाद वापसी की लेकिन जीत के बावजूद ज्वाला और अश्विनी थोड़ी दुर्भाग्यशाली रही... ग्रुप स्टेज का अपना पहला मुकाबला हारने के बाद...ज्वाला और अश्विनी की जोड़ी ने अपने दूसरे मैच में वापसी की ... लेकिन समीकरणों में उलझकर वो क्वार्टर फाइनल में नहीं पहुंच पाई.

सोमवार, 13 अगस्त 2012


लंदन ओलंपिक में भारतीय पहलवानों का बोलबाला लंदन ओलंपिक में वैसे तो भारत को पहला मेडल 30 जुलाई को मिला था... लेकिन खेलों का आखिरी यानि 17वां दिन भारतीय फैंस के लिए सबसे खास रहा... क्योंकि इस दिन ही पहलवान सुशील कुमार ने मेडल्स का छक्का लगाया। सुशील के सिल्वर मेडल से ही खेलों के सबसे बड़े महाकुंभ में इतिहास रचा गया। और भारतीय पहलवानों का रूसूख इंटरनेशनल लेवल पर और बढ़ गया। लंदन ओलंपिक में ... भारतीय रेसलर्स ने रचा इतिहास सुशील ने तय किया ब्रॉन्ज़ से सिल्वर का सफर तो योगेश्वर ने भी लगाया ... कुश्ती में ब्रॉन्ज़ पर दांव   खेलों के महाकुंभ के आखिरी दिनों में शुरू हुए रेसलिंग इवेंट से करोड़ो हिन्दुस्तानियों को काफी उम्मीदें थी...बीजिंग ओलंपिक में रेसलिंग से मिले मेडल के चलते... लंदन में भी पहलवानों से मेडल टैली में इजाफा करने की आस थी... और भारतीय पहलवान उम्मीदों पर खरे उतरे भी... और जिसमें सबसे अव्वल रहे सुशील कुमार ...सुशील ने लंदन ओलंपिक में भी अपने शानदार प्रदर्शन से ... ब्रॉन्ज़ से सिल्वर मेडल का सफर तय कर नया इतिहास रच दिया...ये कारनामा कर सुशील लगातार दो ओलंपिक खेलों मे मेडल जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए है...साथ ही सुशील रेसलिंग मे भी सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले भारतीय  बन गए है...   सुशील के अलावा योगेश्वर दत्त भी कुश्ती के किंग साबित हुए... हालांकि योगेश्वर के दांव भी सुनहरे साबित तो नहीं हुए... लेकिन ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर भारत के इस पहलवान ने देश को 5वां मेडल दिलाया...  योगेश्वर ने repechage round के दौरान 45 मिनट में 3 विरोधी पहलवानों को चित करके ब्रॉन्ज़ मेडल पर कब्ज़ा किया...    ब्रॉन्ज़ से चूके अमित हालांकि सुशील और योगेश्वर को छोड़ कर बाकी तीन भारतीय पहलवान लंदन ओलंपिक मे मेडल से चूक गए... 55 किलोग्राम वेट कैटेगरी में अमित कुमार के हाथ निराशा लगी... क्वार्टरफाइल मैच में हारने के बाद...अमित के पास repechage round मे ब्रॉन्ज़ जीतने का अच्छा मौका था... लेकिन वो इस मौके को नहीं भुना पाए...    नरसिंग के दांव में नहीं था दम 74 वेट कैरेगरी में नरसिंग पहले ही राउंड में बाहर हो गए... जबकि लंदन में इकलौती महिला रेसलर गीता फोगट के हाथ भी निराशा ही लगी... हालांकि गीता को ब्रॉन्ज जीतने का मौका मिला था... लेकिन गीता उसमें भी नाकाम ही रहीं...  बहरहाल तीन रेसलर्स की नाकामी के बावजूद .... भारतीय रेसलर्स खेलों के महाकुंभ में अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे। रजनीश कुमार खेल पत्रकार

लंदन ओलंपिक में भारतीय टेनिस का निकला दम लंदन ओलंपिक का आगाज़  होने से पहले ही...भारत के टेनिस खिलाड़ी आपसी गुटबाज़ी में उलझे थे...बावजूद इसके फैंस को उम्मीद थी कि लंदन गई बड़े बड़े दिग्गजों की टीम... जरूर कोई कारनामा करेगी.... लेकिन लंदन ओलंपिक में इन दिग्गजों का प्रदर्शन देखकर ऐसा लगा... मानो टेनिस की टेंशन दूर हुई ही नहीं थी। देखिए कैसे खेलों के सबसे बड़े महाकुंभ में भारतीय टेनिस खिलाड़ियों ने उम्मीदों को तार-तार कर दिया। लंदन ओलंपिक में...उदास चेहरों के साथ फैंस की उम्मीदों पर पानी फेरने वाले भारतीय टेनिस के ये खिलाड़ी....ना तो मेडल का सपना पूरा कर पाएं...और ना ही हिंदुस्तानियों का दिल जीतने में कामयाब हो सके....लंदन ओलंपिक से पहले भारतीय टेनिस मे जो विवादों का कड़वा बीज बोया गया था...उसका परिणाम आज पुरी दुनिया के सामने है...लिएंडर पेस...महेश भूपति..सानिया मिर्जा समेत 7 सदस्यीय टीम जब विवादों का दामन थामकर लंदन पहुंचे... तो हर किसी की जुबां पर यही था...कि इस बार टेनिस में मेडल मिलना तय है...लेकिन जब मुकाबला शुरू हुआ...तो महेश भूपति की जिद का असर कोर्ट पर खूब दिखाई दिया....भूपति और बोपन्ना नै मनचाही जोड़ी तो बनाई गई...लेकिन मनचाहा नतीजा देने में हर उनके साथ हर खिलाड़ी नाकाम रहा.... लंदन ओलंपिक में महेश भूपति और रोहन बोपन्ना ओलंपिक में जोड़ी बनाने को लेकर... चयन विवाद को जन्म देने वाले महेश भूपति और रोहन बोपन्ना को इस खेलों के महाकुंभ में मेंस डबल्स के दूसरे राउंड में हार का सामना करना पड़ा... भूपति और बोपन्ना की सातवीं वरीयता प्राप्त जोड़ी को जुलियन बेनातू और रिचर्ड गास्केट की फ्रांसीसी जोड़ी के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा था। विवादों में सबसे आगे रहने वाले भूपति मेडल की दौड़ में सबसे पीछे नजर आए। लंदन ओलंपिक में लिएंडर पेस और विष्णु वर्धन मेंस डबल्स कैटेगरी में लिएंडर पेस और उनके जोड़ीदार विष्णु वर्धन से ...हर फैंस मेडल की उम्मीद लगाए बैठा था...लेकिन पेस और विष्णु की जोड़ी को... दूसरे राउंड में ही शिकस्त का सामना करना पड़ा....हालांकि कमजोर जोड़ीदार होने के बावजूद पेस ने हिम्मत तो दिखाई...लेकिन ग्रास कोर्ट पर ज्यादा देर पेस और विष्णु अपना सफर जारी रखने में कामयाब नहीं हो सके.... सिंगल्स कैटेगरी में भी फेल भारतीय टेनिस के उभरते सितारे सोमदेव देवबर्मन लंदन ओलंपिक में मेंस सिंगल्स कैटेगरी के पहले राउंड में फिनलैंड के जाकरे निमिनेन से हार गए...तो वहीं विष्णु वर्धन भी सिंगल्स कैटेगरी में कोई खास कमाल नहीं दिखा सके थे...डबल्स में निराशा हाथ लगने के बाद सिंगल्स में मेडल की चुनौती काफी पहले खत्म हो गई थी.... सानिया-रूश्मि ने भी तोड़ा दिल ओलंपिक में मेडल की सबसे तगड़ी दावेदार मानी जाने वाली...सानिया और रूश्मि चक्रवर्ती की जोड़ी ने... डबल्स कैटेगरी के पहले राउंड में ही अपने फैंस का दिल तोड़ दिया... मेडल से चूकने के बाद दोनों ने यहां तक कह दिया कि हम कभी मेडल की रेस में थे ही नहीं.... पेस-सानिया का भी नहीं चला जादू लंदन में मेडल की लड़ाई में  सानिया और पेस की जोड़ी फैंस की उम्मीदों पर उतरने की कोशिश तो की...लेकिन वो भी जयादा देर टिक नही पाए...मिक्सड डबल्स कैटेगरी के क्वार्टरफाइनल में पहुंचकर सानिया और पेस ने मेडल की उम्मीद तो जगाई.. लेकिन विवादों का बोझ इतना भारी था कि...सफलता भी पेस और सानिया के कदम चूमने से इनकार कर दिया...सानिया और पेस को क्वार्टरफाइनल में बेलारूस की विक्टोरिया अजारेंका और मैक्स मिर्नी की जोड़ी से 5-7, 6-7  से हार का सामना करना पड़ा... गौरतलब है कि टेनिस में खाली हाथ लौटने के बाद खिलाड़ियों की आलोचना तो नही की जा रही... लेकिन खेल मंत्रालय ने ओलंपिक के लिए टेनिस खिलाडियों की तैयारियों के लिए जिन तीन करोड़ 49 लाख रपए का भारी भरकम खर्च किया ... अब वो बेमानी सा लगने लगा है...क्योंकि लंदन ओलंपिक में टेनिस स्टार मेडल नहीं बल्कि विवादों का ऐसा पुलिंदा छोड़ गए जिसे फैंस कभी नही भूल पाएंगे...बहरहाल अब लंदन ओलंपिक में हार का पोस्टमार्टम कर रहे दिग्गजों का मानना है कि खेलों के इस महाकुंभ में टेनिस का निरर्थक डांस के अलावा कुछ भी देखने को नहीं मिला... रजनीश कुमार खेल पत्रकार

गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

सचिन का महाशतक



साल 2011 में सचिन को अपना महाशतक बनाने के लिए अब सिर्फ एक ही मौका मिलेगा ... और वो होगा मेलबर्न में खेला जाने वाला बॉक्सिंग-डे टेस्ट। वैसे अगर मेलबर्न के मैदान पर सचिन के नाम मौजूद रनों के आंकड़ों को देखा जाए ... तो उम्मीद की जा सकती है ... कि महाशतक का जश्न ज़्यादा दूर नहीं है।

खत्म होगा फैंस का इंतजार
मेलबर्न में जमकर मनेगा जश्न
क्योंकि,
सचिन के बल्ले से निकलेगा
'शतकों का महाशतक'


इन लम्हों के  देखकर क्रिकेट की दुनिया के साथ साथ सचिन भले ही निराशा के भंवर में डूब गए थे...लेकिन वक्त की बयार ने ऐसी करवट ली...जिसके बाद ये लम्हें अब शायद कभी देखने को ना मिले...जी हां लगातार कई महीनों से अर्धशतक और शतक के बीच अपना विकेट गंवाकर... पवेलियन लौटते सचिन के बोझिल कदमों.. और निराश चेहरों का बोझ ..तो फैंस ने की बार ढोया...लेकिन अब यहीं निराशा आशा की ऐसी किरण में बदलने वाली है..जिसे देख सबकी जुबां से यही निकलेगा...महाशतकवीर सचिन तुम महान हो... क्रिकेट की दुनिया के इस भरोसे की बुनियाद खुद सचिन का वो रिकॉर्ड है...जो महाशतक के पूरा होने की गवाही दे रहा है..मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में सचिन ने अब तक कुल 4 टेस्ट मैच खेले हैं...जिनमें उन्होंने 43 की औसत से 344 रन बनाने में कामयाब रहें हैं...तो वहीं इस मैदान पर सचिन के बल्ले ने एक बार शतक के साथ साथ दो बार अर्धशतक का भी स्वाद चखा ...
1999-2000 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे में सचिन ने इस मैदान पर 116 रनों की यादगार पारी खेली थी... ये आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि सचिन अपने 22 साल के क्रिकेट करियर में मेलबर्न के ग्राउंड पर खूब रन बटोरे...अब जब सचिन महाशतक का ट्रेलर प्रैक्टिस मैच में 92 रनों की पारी खेलकर दिखा चुके हैं..तो हर कोई महाशतक के जश्न की तैयारी में लग चुका है...क्योंकि .सचिन कंगारूओं के घर में रनों का लावा जो उगलना शुरू कर दिया ...मेलबर्न मैदान में सचिन के ऐतिहासिक आंकडे और प्रैक्टिस मैच में शानदार 92 रन इतना बताने के लिए काफी है...कि जल्द ही क्रिकेट की दुनिया  मास्टर के बल्ले से महाशतक का दीदार करने वाली है...तो बस तैयार हो जाइए...महाशतक के जश्न में डूबने के लिए...


रजनीश कुमार
खेल पत्रकार

महाशतक पर महासट्टा



सचिन के महाशतक पर महासट्टा

सचिन की शक्सियत पर अगर कंगारू रिसर्च ने मुहर लगा दी है ... तो वहीं क्रिकेट के खेल में सचिन की महानता पर चार चांद लगाने वाले ... महाशतक पर सट्टेबाज़ पैसा लगाते जा रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक अकेले इस बात को लेकर ... कि सचिन का सौंवा शतक कब बनेगा ... दुनिया भर में करीब 5000 करोड़ का सट्टा लग सकता है।


दुनिया के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के महाशतक पर...10 या 20 लाख का नहीं...बल्कि पूरे 2000 करोड़ का महासट्टा लग चुका है...चौंक गए ना आप...लेकिन ऑस्ट्रेलियाई सरमजीं पर सचिन के शतक को भुनाने में सटोरिये जी जान से लग चुके हैं...यही वजह है कि बॉक्सिंग डे के 4 दिन पहले ही..सट्टेबाजी की दुनिया महाशतक पर 2000 करोड़ का सट्टा खेल चुकी है...इतना ही नहीं एक अनुमान के मुताबिक टेस्ट शुरू होने तक सट्टा 5000 करोड़ तक पहुंच जाएगा... ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी खिलाड़ी के एक शतक पर ....करोड़ों का दांव खेला जा रहा है....ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर सचिन के बल्ले की आग को देखते हुए हर किसी की जुबां पर सिर्फ यही है कि...अब खत्म हो जाएगा महाशतक का इंतजार...सचिन के महाशतक पर ऐतिहासिक सट्टा लगाने वाले सटोरियों ने महाशतक पर जहां दोगुना भाव खोल रखा है तो वहीं...साल 2011 में सचिन के आखिरी टेस्ट को लेकर भी  उन दांव लगाया जा रहा है...सटोरियों ने महाशतक के अलावा ...इस बात पर रेट ओपन किया है कि क्या सचिन अपने 2011 के आखिरी टेस्ट यानि मेलबर्न में ही शतकों के महाशतक का इंतजार खत्म कर पाएंगे ? 
12 मार्च, 2011 को साउथ अफ्रीका के खिलाफ वर्ल्डकप मुकाबले में...सचिन के बल्ले से निकले 99वें शतक के लगभग 9 महीनों के बाद ....सटोरियों ने एक बार फिर ऐतिहासिक 2000 करोड़ का सट्टा खेल ...साल का सबसे बड़ा रिस्क ले लिया...ऐसे में अगर सचिन महाशतक का इंतजार अगर खत्म कर देते हैं तो फिर सटोरियों की चांदी होनी तय है... क्योकि सचिन के बल्ले से रनों की बरसात..सटोरियों पर भी करोड़ों की बरसात करवाएंगे....क्योंकि ये है महाशतक पर सटोरियों का महासट्टा।


रजनीश कुमार
खेल पत्रकार

शनिवार, 10 दिसंबर 2011

धोनी-साक्षी का प्यार


Dhoni and Sakshi Rawat’s Love Story

टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की शादी को यूं तो 1 साल से भी ज्यादा का वक्त हो गया है... लेकिन उन्हें एक बार फिर अपनी पत्नी साक्षी से इश्क हो गया है... जिसका नज़ारा रांची में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देखने को मिला... इस प्रोग्राम में साक्षी की कुछ पलों की जुदाई से धोनी परेशान हो उठे । धोनी की बेकरारी का आलम ये था कि पूरे प्रोग्राम के दौरान उनकी नज़रें साक्षी को ही तलाशती रही।  


जीत जिसका जश्न है...कामयाबी जिसकी फितरत...वो जब करता है मोहब्बत... तो दुनिया कहती है...ये इश्क तो माही का है...जी हां दुनिया के दबंग कप्तान और टीम इंडिया के हैडसम हंक महेंद्र सिंह धोनी को एक बार फिर हुआ है इश्क...ऐसा इश्क जिसकी दूरियां धोनी को बर्दाश्त नहीं हो रही...यूं तो धोनी सात जन्मों तक साक्षी का साथ निभाने का वादा कर चुके हैं...लेकिन जवां दिलों की धड़कन धोनी जब अपने शहर रांची में...झारखंड सरकार की ओर से आयोजित ..राष्ट्रीय खेल विजेताओं के सम्मान समारोह में पहुंचे...तो यहां धोनी को अपनी पत्नी साक्षी की दूरियां भारी पड़ रही थी...मंच पर धोनी साक्षी से दूर क्या बैठे...खुद साक्षी की भी हालत धोनी से जुदा नहीं थी...  small montage of dhoni with sakshi ye duriyan
सम्मान समारोह में मस्ती के मूड में पहुंचे धोनी आखिरकार कब तक अपनी महबूबा और संगिनी साक्षी से दूर रहते.. फैंस की भीड़ के बावजूद भी दोनों आंखों ही आंखों से इशारा करने लगे..आखिरकार.एक वक्त आया जब माही  अपने जगह से उठकर साक्षी के पास जाने को मजबूर हो गए...धोनी जैसे ही अपने पत्नी के पास पहुंचे...साक्षी भी कहां पीछे रहने वाली...मंच पर वो कभी धोनी को छेड़ती तो कभी...उनके कानों में कुछ बातें कहकर....खूब हंसती...क्योंकि वो भी धोनी से बेइंतहां मोहब्बत जो करती हैं...कहानी यहीं खत्म नहीं हुई...सम्मान समारोह में धोनी ने साक्षी को इंप्रेस करने का कोई भी मौका नहीं गंवाया...माही कभी साक्षी के लिए ढोल बजाते नजर आए...तो कभी बैड के साथ ,हाथ में माइक थामे, गाना गुनगुनाते दिखाई दिए
अब भला साक्षी धोनी से कहां पीछे रहने वाली थी.. उन्हें भी अपनी मोहब्बत का इजहार जो करना था......tere ishq ishq main haye tere ishq main बहरहाल वर्ल्डकप चैंपियन कप्तान धोनी की हर बातें जगजाहिर है...चाहें वो उनके खेलने का अंदाज हो या फिर उनकी प्रेम कहानी...फैंस तो सिर्फ इतना ही चाहते हैं कि धोनी का इश्क यूं ही परवान चढ़ता रहे...क्योंकि माही का हर अंदाज उन्हें खूब भाता है।

रजनीश कुमार
स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट
http://www.youtube.com/watch?v=HRBi6z-syj0

गुरुवार, 7 अप्रैल 2011

भारत 28 साल बाद फिर बना विश्व चैंपियन

धोनी जैसा कोई नहीं
भारत ने 28 साल बाद क्रिकेट विश्व कप जीत लिया है. श्रीलंका के 274 रनों का पीछा करते हुए भारत ने छह विकेट गँवाकर ये मैच अपने नाम कर लिया.

भारतीय क्रिकेट टीम कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने छक्का मार कर क्रिकेट विश्व कप भारत के नाम किया.
और इस जीत के साथ ही भारत के कई शहरों से जश्न की ख़बरें आने लगीं. मुबंई से लेकर सिलिगुड़ी तक क्रिकेट प्रेमी सड़कों पर उतर आए.

उधर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने टीम के सभी खिलाड़ियों को एक-एक करोड़ रुपए और चयनकर्ताओं को 25-25 लाख रुपए देने का ऐलान किया.

भारत और श्रीलंका के बीच फ़ाइनल मुक़ाबला देखने पहुंची राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने रविवार को भारतीय टीम को राज भवन में एक चाय पार्टी का निमंत्रण दिया है.

इसके अलावा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भारतीय क्रिकेट टीम की जीत पर बधाई दी है.

मैच का हाल

भारत की जीत में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और गौतम गंभीर ने एक अहम भूमिका निभाई. धोनी ने 79 गेंदों में 91 रन बनाकर नॉट आउट रहे जबकि गंभीर 97 रन बनाकर वह तिसारा परेरा की गेंद पर बोल्ड हुए.

शुरुआती झटकों के बाद गौतम गंभीर और विराट कोहली मिलकर पारी को संभाल रहे थे इस साझेदारी की बदौलत भारत ने अपने 100 रन भी पूरे कर लिए थे.

लेकिन 22वें ओवर में विराट कोहली दिलशान की गेंद पर अपना विकेट गंवा बैठे. उन्होंने 49 गेंदों में 35 रन बनाए.

इससे पहले भारत की पारी जैसे ही शुरु हुई तो पहले ही ओवर में लसित मलिंगा की गेंद पर वीरेंदर सहवाग एलबीडब्ल्यू आउट हो गए. जबकि सातवें ओवर में मलिंगा ने सचिन तेंदुलकर को आउट कर दिया.

एक ओर जहाँ लोग सचिन से शतक की उम्मीद लगाए बैठे थे वहीं मलिंगा ने उन्हें 18 रन के स्कोर पर ही पवेलियन लौटा दिया. सचिन के आउट होते ही स्टेडियम में बैठे उनके हज़ारों प्रशंसक मानो हतप्रभ रह गए.

लेकिन फिर गंभीर और विराट कोहली ने पारी को धैर्यपूर्वक आगे बढ़ाया. दोनों के बीच 83 रनों की साझेदारी हुई. कोहली के बाद गंभीर ने कप्तान धोनी के साथ पारी को स्थायित्व देते हुए टीम को जीत की ओर बढ़ाया और दोनों ने 91 रन जोड़े.

इसके बाद विराट कोहली दिलशान के हाथों में कैच दे बैठे. एक बार लगा कि भारतीय पारी मुसीबत में आ गई है लेकिन कप्तान धोनी ने धैर्य से खेलते हुए टीम को जीत दिलाई.

इस विश्व कप में अब तक अपने बल्ले से ज़्यादा कमाल नहीं दिखा पाए धोनी ने फ़ाइनल में एक बेहतरीन पारी खेलते हुए 91 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली.

जयवर्धने का शतक

पहले बल्लेबाज़ी करते हुए श्रीलंका ने छह विकेट के नुक़सान पर 274 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया और इसमें महेला जयवर्द्धने के शतक की अहम भूमिका रही.

भारत पर बैटिंग पावर प्ले भारी पड़ा और श्रीलंका ने अंतिम पाँच ओवरों में 63 रन जोड़े. शुरू के पाँच ओवरों में छह रन देने वाले ज़हीर ख़ान ने अंतिम पाँच ओवरों में 54 रन दिए और उसमें भी अंतिम दो ओवरों में 35 रन.

इस स्कोर तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाने वाली दूसरी पारी तिसारा परेरा की रही जिन्होंने नौ गेंदों में तीन चौके और एक छक्का मारकर 22 रन जोड़ दिए.

वैसे इस टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाली श्रीलंका की सलामी जोड़ी भारत के विरुद्ध कुछ ख़ास नहीं कर सकी. पहले ज़हीर ख़ान ने उपुल तरंगा को विकेट के पीछे पहली स्लिप में वीरेंदर सहवाग के हाथों कैच आउट करा दिया.
उस समय श्रीलंका का स्कोर 17 रन था और ये विकेट सातवें ओवर में गिरा. उसके बाद टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले तिलकरत्ने दिलशान हरभजन सिंह की एक गेंद पर बोल्ड हो गए. उन्होंने 33 रन बनाए थे, इस तरह टूर्नामेंट में उनका कुल स्कोर 500 रन रहा.

श्रीलंका का दूसरा विकेट 60 के स्कोर पर गिरा था जिसके बाद कप्तान संगकारा ने महेला जयवर्द्धने के साथ मिलकर 62 रन और जोड़े. उसके बाद युवराज सिंह की एक गेंद खेलने के चक्कर में संगकारा का कैच विकेट के पीछे धोनी ने लपक लिया.

संगकारा 48 रन बनाकर आउट हुए. इसके बाद जयवर्द्धने ने समरवीरा के साथ मिलकर चौथे विकेट के लिए 57 रनों की साझेदारी की और तभी युवराज की गेंद पर समरवीरा 21 रन बनाकर एलबीडब्ल्यू हो गए.

अगले खिलाड़ी चमारा कपुगडेरा अभी रुककर पिच को समझते कि अगले ही ओवर में ज़हीर ख़ान की गेंद पर उनका कैच शॉर्ट एक्स्ट्रा कवर पर सुरेश रैना ने लपक लिया.

श्रीलंका के लिए हुई कई प्रमुख साझेदारियों में जयवर्द्धने के साथ नुवान कुलसेकरा की भी पारी रही जिन्होंने 66 रन जोड़े और कुलसेकरा ने 30 गेंदों में 32 रन बनाए, जिसमें एक चौका और एक छक्का शामिल था.

टॉस की अनिश्चितता

इससे पहले टॉस को लेकर एक बार अनिश्चितता की स्थिति बन गई थी क्योंकि पहली बार जब सिक्का उछाला गया तो मैच रेफ़री सुन नहीं पाए कि कुमार संगकारा ने क्या कहा.

उसके बाद दोबारा टॉस करना पड़ा और श्रीलंकाई कप्तान कुमार संगकारा ने टॉस जीतने के बाद पहले बल्लेबाज़ी का फ़ैसला किया.

भारत ने सेमीफ़ाइनल में खेले आशीष नेहरा की जगह एस श्रीसंत को टीम में शामिल किया था. नेहरा के घायल होने के बाद आर अश्विन को शामिल किए जाने की चर्चा थी मगर ऐसा नहीं हुआ.

श्रीलंका ने एंजेलो मैथ्यूज़, अजंता मेंडिस, रंगना हेरात और चमारा सिल्वा की जगह तिसारा परेरा, सूरज रंदीव, नुवान कुलसेकरा और चमारा कपुगडेरा को शामिल किया है.