मंगलवार, 14 अगस्त 2012
सोमवार, 13 अगस्त 2012
गुरुवार, 22 दिसंबर 2011
सचिन का महाशतक

साल 2011 में सचिन को अपना महाशतक बनाने के लिए अब सिर्फ एक ही मौका मिलेगा ... और वो होगा मेलबर्न में खेला जाने वाला बॉक्सिंग-डे टेस्ट। वैसे अगर मेलबर्न के मैदान पर सचिन के नाम मौजूद रनों के आंकड़ों को देखा जाए ... तो उम्मीद की जा सकती है ... कि महाशतक का जश्न ज़्यादा दूर नहीं है।
खत्म होगा फैंस का इंतजार
मेलबर्न में जमकर मनेगा जश्न
क्योंकि,
सचिन के बल्ले से निकलेगा
'शतकों का महाशतक'
इन लम्हों के देखकर क्रिकेट की दुनिया के साथ साथ सचिन भले ही निराशा के भंवर में डूब गए थे...लेकिन वक्त की बयार ने ऐसी करवट ली...जिसके बाद ये लम्हें अब शायद कभी देखने को ना मिले...जी हां लगातार कई महीनों से अर्धशतक और शतक के बीच अपना विकेट गंवाकर... पवेलियन लौटते सचिन के बोझिल कदमों.. और निराश चेहरों का बोझ ..तो फैंस ने की बार ढोया...लेकिन अब यहीं निराशा आशा की ऐसी किरण में बदलने वाली है..जिसे देख सबकी जुबां से यही निकलेगा...महाशतकवीर सचिन तुम महान हो... क्रिकेट की दुनिया के इस भरोसे की बुनियाद खुद सचिन का वो रिकॉर्ड है...जो महाशतक के पूरा होने की गवाही दे रहा है..मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में सचिन ने अब तक कुल 4 टेस्ट मैच खेले हैं...जिनमें उन्होंने 43 की औसत से 344 रन बनाने में कामयाब रहें हैं...तो वहीं इस मैदान पर सचिन के बल्ले ने एक बार शतक के साथ साथ दो बार अर्धशतक का भी स्वाद चखा ...
1999-2000 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे में सचिन ने इस मैदान पर 116 रनों की यादगार पारी खेली थी... ये आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि सचिन अपने 22 साल के क्रिकेट करियर में मेलबर्न के ग्राउंड पर खूब रन बटोरे...अब जब सचिन महाशतक का ट्रेलर प्रैक्टिस मैच में 92 रनों की पारी खेलकर दिखा चुके हैं..तो हर कोई महाशतक के जश्न की तैयारी में लग चुका है...क्योंकि .सचिन कंगारूओं के घर में रनों का लावा जो उगलना शुरू कर दिया ...मेलबर्न मैदान में सचिन के ऐतिहासिक आंकडे और प्रैक्टिस मैच में शानदार 92 रन इतना बताने के लिए काफी है...कि जल्द ही क्रिकेट की दुनिया मास्टर के बल्ले से महाशतक का दीदार करने वाली है...तो बस तैयार हो जाइए...महाशतक के जश्न में डूबने के लिए...
रजनीश कुमार
खेल पत्रकार
महाशतक पर महासट्टा

सचिन के महाशतक पर महासट्टा
सचिन की शक्सियत पर अगर कंगारू रिसर्च ने मुहर लगा दी है ... तो वहीं क्रिकेट के खेल में सचिन की महानता पर चार चांद लगाने वाले ... महाशतक पर सट्टेबाज़ पैसा लगाते जा रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक अकेले इस बात को लेकर ... कि सचिन का सौंवा शतक कब बनेगा ... दुनिया भर में करीब 5000 करोड़ का सट्टा लग सकता है।
दुनिया के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के महाशतक पर...10 या 20 लाख का नहीं...बल्कि पूरे 2000 करोड़ का महासट्टा लग चुका है...चौंक गए ना आप...लेकिन ऑस्ट्रेलियाई सरमजीं पर सचिन के शतक को भुनाने में सटोरिये जी जान से लग चुके हैं...यही वजह है कि बॉक्सिंग डे के 4 दिन पहले ही..सट्टेबाजी की दुनिया महाशतक पर 2000 करोड़ का सट्टा खेल चुकी है...इतना ही नहीं एक अनुमान के मुताबिक टेस्ट शुरू होने तक सट्टा 5000 करोड़ तक पहुंच जाएगा... ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी खिलाड़ी के एक शतक पर ....करोड़ों का दांव खेला जा रहा है....ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर सचिन के बल्ले की आग को देखते हुए हर किसी की जुबां पर सिर्फ यही है कि...अब खत्म हो जाएगा महाशतक का इंतजार...सचिन के महाशतक पर ऐतिहासिक सट्टा लगाने वाले सटोरियों ने महाशतक पर जहां दोगुना भाव खोल रखा है तो वहीं...साल 2011 में सचिन के आखिरी टेस्ट को लेकर भी उन दांव लगाया जा रहा है...सटोरियों ने महाशतक के अलावा ...इस बात पर रेट ओपन किया है कि क्या सचिन अपने 2011 के आखिरी टेस्ट यानि मेलबर्न में ही शतकों के महाशतक का इंतजार खत्म कर पाएंगे ?
12 मार्च, 2011 को साउथ अफ्रीका के खिलाफ वर्ल्डकप मुकाबले में...सचिन के बल्ले से निकले 99वें शतक के लगभग 9 महीनों के बाद ....सटोरियों ने एक बार फिर ऐतिहासिक 2000 करोड़ का सट्टा खेल ...साल का सबसे बड़ा रिस्क ले लिया...ऐसे में अगर सचिन महाशतक का इंतजार अगर खत्म कर देते हैं तो फिर सटोरियों की चांदी होनी तय है... क्योकि सचिन के बल्ले से रनों की बरसात..सटोरियों पर भी करोड़ों की बरसात करवाएंगे....क्योंकि ये है महाशतक पर सटोरियों का महासट्टा।
रजनीश कुमार
खेल पत्रकार
शनिवार, 10 दिसंबर 2011
धोनी-साक्षी का प्यार

Dhoni and Sakshi Rawat’s Love Story
टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की शादी को यूं तो 1 साल से भी ज्यादा का वक्त हो गया है... लेकिन उन्हें एक बार फिर अपनी पत्नी साक्षी से इश्क हो गया है... जिसका नज़ारा रांची में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देखने को मिला... इस प्रोग्राम में साक्षी की कुछ पलों की जुदाई से धोनी परेशान हो उठे । धोनी की बेकरारी का आलम ये था कि पूरे प्रोग्राम के दौरान उनकी नज़रें साक्षी को ही तलाशती रही।
जीत जिसका जश्न है...कामयाबी जिसकी फितरत...वो जब करता है मोहब्बत... तो दुनिया कहती है...ये इश्क तो माही का है...जी हां दुनिया के दबंग कप्तान और टीम इंडिया के हैडसम हंक महेंद्र सिंह धोनी को एक बार फिर हुआ है इश्क...ऐसा इश्क जिसकी दूरियां धोनी को बर्दाश्त नहीं हो रही...यूं तो धोनी सात जन्मों तक साक्षी का साथ निभाने का वादा कर चुके हैं...लेकिन जवां दिलों की धड़कन धोनी जब अपने शहर रांची में...झारखंड सरकार की ओर से आयोजित ..राष्ट्रीय खेल विजेताओं के सम्मान समारोह में पहुंचे...तो यहां धोनी को अपनी पत्नी साक्षी की दूरियां भारी पड़ रही थी...मंच पर धोनी साक्षी से दूर क्या बैठे...खुद साक्षी की भी हालत धोनी से जुदा नहीं थी... small montage of dhoni with sakshi ye duriyan
सम्मान समारोह में मस्ती के मूड में पहुंचे धोनी आखिरकार कब तक अपनी महबूबा और संगिनी साक्षी से दूर रहते.. फैंस की भीड़ के बावजूद भी दोनों आंखों ही आंखों से इशारा करने लगे..आखिरकार.एक वक्त आया जब माही अपने जगह से उठकर साक्षी के पास जाने को मजबूर हो गए...धोनी जैसे ही अपने पत्नी के पास पहुंचे...साक्षी भी कहां पीछे रहने वाली...मंच पर वो कभी धोनी को छेड़ती तो कभी...उनके कानों में कुछ बातें कहकर....खूब हंसती...क्योंकि वो भी धोनी से बेइंतहां मोहब्बत जो करती हैं...कहानी यहीं खत्म नहीं हुई...सम्मान समारोह में धोनी ने साक्षी को इंप्रेस करने का कोई भी मौका नहीं गंवाया...माही कभी साक्षी के लिए ढोल बजाते नजर आए...तो कभी बैड के साथ ,हाथ में माइक थामे, गाना गुनगुनाते दिखाई दिए
अब भला साक्षी धोनी से कहां पीछे रहने वाली थी.. उन्हें भी अपनी मोहब्बत का इजहार जो करना था......tere ishq ishq main haye tere ishq main बहरहाल वर्ल्डकप चैंपियन कप्तान धोनी की हर बातें जगजाहिर है...चाहें वो उनके खेलने का अंदाज हो या फिर उनकी प्रेम कहानी...फैंस तो सिर्फ इतना ही चाहते हैं कि धोनी का इश्क यूं ही परवान चढ़ता रहे...क्योंकि माही का हर अंदाज उन्हें खूब भाता है।
रजनीश कुमार
स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट
http://www.youtube.com/watch?v=HRBi6z-syj0
गुरुवार, 7 अप्रैल 2011
भारत 28 साल बाद फिर बना विश्व चैंपियन
धोनी जैसा कोई नहीं
भारत ने 28 साल बाद क्रिकेट विश्व कप जीत लिया है. श्रीलंका के 274 रनों का पीछा करते हुए भारत ने छह विकेट गँवाकर ये मैच अपने नाम कर लिया.
भारतीय क्रिकेट टीम कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने छक्का मार कर क्रिकेट विश्व कप भारत के नाम किया.
और इस जीत के साथ ही भारत के कई शहरों से जश्न की ख़बरें आने लगीं. मुबंई से लेकर सिलिगुड़ी तक क्रिकेट प्रेमी सड़कों पर उतर आए.
उधर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने टीम के सभी खिलाड़ियों को एक-एक करोड़ रुपए और चयनकर्ताओं को 25-25 लाख रुपए देने का ऐलान किया.
भारत और श्रीलंका के बीच फ़ाइनल मुक़ाबला देखने पहुंची राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने रविवार को भारतीय टीम को राज भवन में एक चाय पार्टी का निमंत्रण दिया है.
इसके अलावा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भारतीय क्रिकेट टीम की जीत पर बधाई दी है.
मैच का हाल
भारत की जीत में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और गौतम गंभीर ने एक अहम भूमिका निभाई. धोनी ने 79 गेंदों में 91 रन बनाकर नॉट आउट रहे जबकि गंभीर 97 रन बनाकर वह तिसारा परेरा की गेंद पर बोल्ड हुए.
शुरुआती झटकों के बाद गौतम गंभीर और विराट कोहली मिलकर पारी को संभाल रहे थे इस साझेदारी की बदौलत भारत ने अपने 100 रन भी पूरे कर लिए थे.
लेकिन 22वें ओवर में विराट कोहली दिलशान की गेंद पर अपना विकेट गंवा बैठे. उन्होंने 49 गेंदों में 35 रन बनाए.
इससे पहले भारत की पारी जैसे ही शुरु हुई तो पहले ही ओवर में लसित मलिंगा की गेंद पर वीरेंदर सहवाग एलबीडब्ल्यू आउट हो गए. जबकि सातवें ओवर में मलिंगा ने सचिन तेंदुलकर को आउट कर दिया.
एक ओर जहाँ लोग सचिन से शतक की उम्मीद लगाए बैठे थे वहीं मलिंगा ने उन्हें 18 रन के स्कोर पर ही पवेलियन लौटा दिया. सचिन के आउट होते ही स्टेडियम में बैठे उनके हज़ारों प्रशंसक मानो हतप्रभ रह गए.
लेकिन फिर गंभीर और विराट कोहली ने पारी को धैर्यपूर्वक आगे बढ़ाया. दोनों के बीच 83 रनों की साझेदारी हुई. कोहली के बाद गंभीर ने कप्तान धोनी के साथ पारी को स्थायित्व देते हुए टीम को जीत की ओर बढ़ाया और दोनों ने 91 रन जोड़े.
इसके बाद विराट कोहली दिलशान के हाथों में कैच दे बैठे. एक बार लगा कि भारतीय पारी मुसीबत में आ गई है लेकिन कप्तान धोनी ने धैर्य से खेलते हुए टीम को जीत दिलाई.
इस विश्व कप में अब तक अपने बल्ले से ज़्यादा कमाल नहीं दिखा पाए धोनी ने फ़ाइनल में एक बेहतरीन पारी खेलते हुए 91 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली.
जयवर्धने का शतक
पहले बल्लेबाज़ी करते हुए श्रीलंका ने छह विकेट के नुक़सान पर 274 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया और इसमें महेला जयवर्द्धने के शतक की अहम भूमिका रही.
भारत पर बैटिंग पावर प्ले भारी पड़ा और श्रीलंका ने अंतिम पाँच ओवरों में 63 रन जोड़े. शुरू के पाँच ओवरों में छह रन देने वाले ज़हीर ख़ान ने अंतिम पाँच ओवरों में 54 रन दिए और उसमें भी अंतिम दो ओवरों में 35 रन.
इस स्कोर तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाने वाली दूसरी पारी तिसारा परेरा की रही जिन्होंने नौ गेंदों में तीन चौके और एक छक्का मारकर 22 रन जोड़ दिए.
वैसे इस टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाली श्रीलंका की सलामी जोड़ी भारत के विरुद्ध कुछ ख़ास नहीं कर सकी. पहले ज़हीर ख़ान ने उपुल तरंगा को विकेट के पीछे पहली स्लिप में वीरेंदर सहवाग के हाथों कैच आउट करा दिया.
उस समय श्रीलंका का स्कोर 17 रन था और ये विकेट सातवें ओवर में गिरा. उसके बाद टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले तिलकरत्ने दिलशान हरभजन सिंह की एक गेंद पर बोल्ड हो गए. उन्होंने 33 रन बनाए थे, इस तरह टूर्नामेंट में उनका कुल स्कोर 500 रन रहा.
श्रीलंका का दूसरा विकेट 60 के स्कोर पर गिरा था जिसके बाद कप्तान संगकारा ने महेला जयवर्द्धने के साथ मिलकर 62 रन और जोड़े. उसके बाद युवराज सिंह की एक गेंद खेलने के चक्कर में संगकारा का कैच विकेट के पीछे धोनी ने लपक लिया.
संगकारा 48 रन बनाकर आउट हुए. इसके बाद जयवर्द्धने ने समरवीरा के साथ मिलकर चौथे विकेट के लिए 57 रनों की साझेदारी की और तभी युवराज की गेंद पर समरवीरा 21 रन बनाकर एलबीडब्ल्यू हो गए.
अगले खिलाड़ी चमारा कपुगडेरा अभी रुककर पिच को समझते कि अगले ही ओवर में ज़हीर ख़ान की गेंद पर उनका कैच शॉर्ट एक्स्ट्रा कवर पर सुरेश रैना ने लपक लिया.
श्रीलंका के लिए हुई कई प्रमुख साझेदारियों में जयवर्द्धने के साथ नुवान कुलसेकरा की भी पारी रही जिन्होंने 66 रन जोड़े और कुलसेकरा ने 30 गेंदों में 32 रन बनाए, जिसमें एक चौका और एक छक्का शामिल था.
टॉस की अनिश्चितता
इससे पहले टॉस को लेकर एक बार अनिश्चितता की स्थिति बन गई थी क्योंकि पहली बार जब सिक्का उछाला गया तो मैच रेफ़री सुन नहीं पाए कि कुमार संगकारा ने क्या कहा.
उसके बाद दोबारा टॉस करना पड़ा और श्रीलंकाई कप्तान कुमार संगकारा ने टॉस जीतने के बाद पहले बल्लेबाज़ी का फ़ैसला किया.
भारत ने सेमीफ़ाइनल में खेले आशीष नेहरा की जगह एस श्रीसंत को टीम में शामिल किया था. नेहरा के घायल होने के बाद आर अश्विन को शामिल किए जाने की चर्चा थी मगर ऐसा नहीं हुआ.
श्रीलंका ने एंजेलो मैथ्यूज़, अजंता मेंडिस, रंगना हेरात और चमारा सिल्वा की जगह तिसारा परेरा, सूरज रंदीव, नुवान कुलसेकरा और चमारा कपुगडेरा को शामिल किया है.
भारत ने 28 साल बाद क्रिकेट विश्व कप जीत लिया है. श्रीलंका के 274 रनों का पीछा करते हुए भारत ने छह विकेट गँवाकर ये मैच अपने नाम कर लिया.
भारतीय क्रिकेट टीम कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने छक्का मार कर क्रिकेट विश्व कप भारत के नाम किया.
और इस जीत के साथ ही भारत के कई शहरों से जश्न की ख़बरें आने लगीं. मुबंई से लेकर सिलिगुड़ी तक क्रिकेट प्रेमी सड़कों पर उतर आए.
उधर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने टीम के सभी खिलाड़ियों को एक-एक करोड़ रुपए और चयनकर्ताओं को 25-25 लाख रुपए देने का ऐलान किया.
भारत और श्रीलंका के बीच फ़ाइनल मुक़ाबला देखने पहुंची राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने रविवार को भारतीय टीम को राज भवन में एक चाय पार्टी का निमंत्रण दिया है.
इसके अलावा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भारतीय क्रिकेट टीम की जीत पर बधाई दी है.
मैच का हाल
भारत की जीत में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और गौतम गंभीर ने एक अहम भूमिका निभाई. धोनी ने 79 गेंदों में 91 रन बनाकर नॉट आउट रहे जबकि गंभीर 97 रन बनाकर वह तिसारा परेरा की गेंद पर बोल्ड हुए.
शुरुआती झटकों के बाद गौतम गंभीर और विराट कोहली मिलकर पारी को संभाल रहे थे इस साझेदारी की बदौलत भारत ने अपने 100 रन भी पूरे कर लिए थे.
लेकिन 22वें ओवर में विराट कोहली दिलशान की गेंद पर अपना विकेट गंवा बैठे. उन्होंने 49 गेंदों में 35 रन बनाए.
इससे पहले भारत की पारी जैसे ही शुरु हुई तो पहले ही ओवर में लसित मलिंगा की गेंद पर वीरेंदर सहवाग एलबीडब्ल्यू आउट हो गए. जबकि सातवें ओवर में मलिंगा ने सचिन तेंदुलकर को आउट कर दिया.
एक ओर जहाँ लोग सचिन से शतक की उम्मीद लगाए बैठे थे वहीं मलिंगा ने उन्हें 18 रन के स्कोर पर ही पवेलियन लौटा दिया. सचिन के आउट होते ही स्टेडियम में बैठे उनके हज़ारों प्रशंसक मानो हतप्रभ रह गए.
लेकिन फिर गंभीर और विराट कोहली ने पारी को धैर्यपूर्वक आगे बढ़ाया. दोनों के बीच 83 रनों की साझेदारी हुई. कोहली के बाद गंभीर ने कप्तान धोनी के साथ पारी को स्थायित्व देते हुए टीम को जीत की ओर बढ़ाया और दोनों ने 91 रन जोड़े.
इसके बाद विराट कोहली दिलशान के हाथों में कैच दे बैठे. एक बार लगा कि भारतीय पारी मुसीबत में आ गई है लेकिन कप्तान धोनी ने धैर्य से खेलते हुए टीम को जीत दिलाई.
इस विश्व कप में अब तक अपने बल्ले से ज़्यादा कमाल नहीं दिखा पाए धोनी ने फ़ाइनल में एक बेहतरीन पारी खेलते हुए 91 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली.
जयवर्धने का शतक
पहले बल्लेबाज़ी करते हुए श्रीलंका ने छह विकेट के नुक़सान पर 274 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया और इसमें महेला जयवर्द्धने के शतक की अहम भूमिका रही.
भारत पर बैटिंग पावर प्ले भारी पड़ा और श्रीलंका ने अंतिम पाँच ओवरों में 63 रन जोड़े. शुरू के पाँच ओवरों में छह रन देने वाले ज़हीर ख़ान ने अंतिम पाँच ओवरों में 54 रन दिए और उसमें भी अंतिम दो ओवरों में 35 रन.
इस स्कोर तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाने वाली दूसरी पारी तिसारा परेरा की रही जिन्होंने नौ गेंदों में तीन चौके और एक छक्का मारकर 22 रन जोड़ दिए.
वैसे इस टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाली श्रीलंका की सलामी जोड़ी भारत के विरुद्ध कुछ ख़ास नहीं कर सकी. पहले ज़हीर ख़ान ने उपुल तरंगा को विकेट के पीछे पहली स्लिप में वीरेंदर सहवाग के हाथों कैच आउट करा दिया.
उस समय श्रीलंका का स्कोर 17 रन था और ये विकेट सातवें ओवर में गिरा. उसके बाद टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले तिलकरत्ने दिलशान हरभजन सिंह की एक गेंद पर बोल्ड हो गए. उन्होंने 33 रन बनाए थे, इस तरह टूर्नामेंट में उनका कुल स्कोर 500 रन रहा.
श्रीलंका का दूसरा विकेट 60 के स्कोर पर गिरा था जिसके बाद कप्तान संगकारा ने महेला जयवर्द्धने के साथ मिलकर 62 रन और जोड़े. उसके बाद युवराज सिंह की एक गेंद खेलने के चक्कर में संगकारा का कैच विकेट के पीछे धोनी ने लपक लिया.
संगकारा 48 रन बनाकर आउट हुए. इसके बाद जयवर्द्धने ने समरवीरा के साथ मिलकर चौथे विकेट के लिए 57 रनों की साझेदारी की और तभी युवराज की गेंद पर समरवीरा 21 रन बनाकर एलबीडब्ल्यू हो गए.
अगले खिलाड़ी चमारा कपुगडेरा अभी रुककर पिच को समझते कि अगले ही ओवर में ज़हीर ख़ान की गेंद पर उनका कैच शॉर्ट एक्स्ट्रा कवर पर सुरेश रैना ने लपक लिया.
श्रीलंका के लिए हुई कई प्रमुख साझेदारियों में जयवर्द्धने के साथ नुवान कुलसेकरा की भी पारी रही जिन्होंने 66 रन जोड़े और कुलसेकरा ने 30 गेंदों में 32 रन बनाए, जिसमें एक चौका और एक छक्का शामिल था.
टॉस की अनिश्चितता
इससे पहले टॉस को लेकर एक बार अनिश्चितता की स्थिति बन गई थी क्योंकि पहली बार जब सिक्का उछाला गया तो मैच रेफ़री सुन नहीं पाए कि कुमार संगकारा ने क्या कहा.
उसके बाद दोबारा टॉस करना पड़ा और श्रीलंकाई कप्तान कुमार संगकारा ने टॉस जीतने के बाद पहले बल्लेबाज़ी का फ़ैसला किया.
भारत ने सेमीफ़ाइनल में खेले आशीष नेहरा की जगह एस श्रीसंत को टीम में शामिल किया था. नेहरा के घायल होने के बाद आर अश्विन को शामिल किए जाने की चर्चा थी मगर ऐसा नहीं हुआ.
श्रीलंका ने एंजेलो मैथ्यूज़, अजंता मेंडिस, रंगना हेरात और चमारा सिल्वा की जगह तिसारा परेरा, सूरज रंदीव, नुवान कुलसेकरा और चमारा कपुगडेरा को शामिल किया है.
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