शनिवार, 20 जुलाई 2013
भारत रत्न ! मेज़र ध्यानचंद
रविवार, 28 अप्रैल 2013
मास्टर से महान माही !

गुरुवार, 25 अप्रैल 2013
कब मिलेगा सचिन को भारत रत्न ?
MA. पद्म विभुषण जिसे मिला... पद्मश्री से जिसको नवाज़ा गया... राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड से... जिसको सम्मानित किया गया ... अपार कामयाबियों के लिए... जिसको दिया गया अर्जुन अवॉर्ड... उसे कब मिलेगा देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ... ? ... जी हां... बात सचिन की महानता की चली है... तो एक बार फिर ज़िक्र भारत रत्न का आ गया है... क्योंकि यही वो सम्मान है... जिससे सचिन अब तक महरूम है... दुनिया जानती है और मानती है कि सचिन देश के सबसे बड़े रत्न हैं... उन्होंने अपने शानदार खेल के दम पर पूरी दुनिया में हिन्दुस्तान का जो नाम रौशन किया है... वो शायद कोई दूसरे क्रिकेटर नहीं कर सका है... ऐसे में सवाल यही है कि सचिन को देश का ये सबसे बड़ा नागरिक सम्मान आखिर कब मिलेगा... हालांकि ऐसा नहीं है कि सचिन इस सम्मान के लायक नहीं हैं... बल्कि क्रिकेट के इस भगवान का पिछले 24 साल का बेमिसाल करियर लगातार ये मांग कर रहा है कि अगर कोई स्पोर्ट्स मैन भारत रत्न का सबसे बड़ा हकदार है... तो वो सिर्फ और सिर्फ सचिन तेंदुलकर हैं... और यही वजह है कि हिन्दुस्तान के कौने-कौने से एक बार नहीं बल्कि सैंकड़ों पार ये आवाज़ उठी है कि सचिन को भारतरत्न से नवाज़ा जाना चाहिए... क्या खास और क्या आम ... क्या बॉलीवुड की हस्तियां और क्या राजनेता... हर कोई चाहता है कि सचिन को देश का ये सबसे बड़ा नागरिक सम्मान अब दे देना चाहिए... USE CELEBRITIES BYTE ON SACHIN BYTE ... और तो और अब तो भारतरत्न और सचिन के बीच आने वाली वो दीवार भी गिर चुकी है... जो सचिन को भारतरत्न बनने से रोक रही थी... दरअसल भारतरत्न दिए जाने वालों में खेल और खिलाड़ी शामिल नहीं थे... लेकिन स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री की पहल के बाद ... इसके भी नियमों में बदलाव किया जा चुका है... यानि सारी अड़चने खत्म हो चुकी हैं... वैसे भी ऑस्ट्रेलिया जैसा मुल्क भी सचिन को अपने देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान यानि ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया देकर ये दिखा चुका है कि सचिन की शख्सियत क्या है... सचिन का क्रिकेट की दुनिया में क्या रूतबा है...ऐसे में भारत सरकार ... सचिन को भारत रत्न से नवाजती है... तो फिर सचिन और उनके फैंस के लिए उनके चालीसवें जन्मदिन पर इससे बड़ा तोहफा कोई और नहीं हो सकता।
सच्चू से सचिन तेंदुलकर तक का सफर
बच्पन ... शरारतों का वो दौर... जहां हर बच्चे को मस्ती सूझती है... लेकिन सच्चू के सचिन बनने की कहानी इसी बचपन से शुरू हुई ... सचिन एक आदर्श स्टुडेंट और एक आदर्श शिष्य की तरह अपने गुरू की हर बात मानते चले गए... हालांकि सचिन को उनका पहला गुरु उनके घर में ही यानि बड़े भाई के रुप में मिला... वो बड़े भाई अजीत तेंदुलकर ही थे... जिन्होंने टेनिस प्लेयर बनने की चाहत रखने वाले सचिन को क्रिकेट से रूबरू कराया... शायद अजीत ने दूर कहीं आने वाले सचिन तेंदुलकर को... अपने इस भाई में देख लिया था... और यही वजह रही कि उन्होंने सचिन को ... क्रिकेट के उस द्रोणाचार्या से मिलवाया ... जिसके मार्ग दर्शन में सच्चू आज सचिन बने... और वो थे बॉम्बे के मशहूर क्रिकेट कोच रमाकांत आचरेकर ... आचरेकर साहब पहली बार सचिन से मुंबई के शिवाजी पार्क में मिले... और उन्होंने सचिन के टैलेंट को पहचाना और सच्चू को सचिन बनाने की कामयाब कोशिशें शुरू कर दी... और यही से शुरू हुआ एक आदर्श शिष्य का क्रिकेटिंग करियर ... हालांकि सचिन के लिए सर रमाकांत आचरेकर से क्रिकेट की बारीकियां सीखना आसान नहीं था... क्योंकि जहां आचरेकर सचिन को कोचिंग दिया करते थे... वो क्रिकेट के इस भगवान के घर से दूर था... लिहाज़ा आचरेकर साहब ने सचिन को दादर के पास ही शरदआश्रम स्कूल में शिफ्ट करने की सलाह दी ... सचिन ने भी आदर्श शिष्य की तरह अपने गुरु की बात को माना और अपना दाखिला शरदआश्रम में करा लिया ... अब सचिन के सामने स्कूल और कोचिंग दोनों की जिम्मेदारियां थी... लिहाज़ा सचिन अर्ली मोर्गिंग प्रैक्टिस करके स्कूल जाते और फिर शाम को दोबारा प्रैक्टिस करने के लिए आ जाते... सचिन के बारे में कहा जाता है कि वो घंटों प्रैक्टिस किया करते थे... आचरेकर को भी सचिन को प्रैक्टिस करवाने में बड़ा मज़ा आता था... सचिन जब प्रैक्टिस करके थक जाते थे... तो आचरेकर साहब विकेट पर एक एक रुपये का सिक्का रखते... और गेंदबाज़ से कहते कि जो इस सिक्के को गिराएगा ... सिक्का उसी का हो जाएगा... लेकिन वो नौबत कभी नहीं आई ... क्योंकि पूरे सेशन तक कोई भी गेंदबाज सचिन को आउट नहीं कर पाता था... लिहाज़ा एक रुपये का सिक्का ज्यादातर मौकों पर सचिन का ही हो जाता था...आज भी सचिन के पास अपने गुरू के दिए 13 सिक्के मौजूद हैं... इतना ही महान सचिन तेंदुलकर बनने के बाद भी जब कभी भी सचिन अपने गुरू आचरेकर से मिलते हैं... तो एक आदर्श शिष्य बनकर ही मिलते हैं।
युवओं को प्रेरित करते हैं सचिन तेंदुलकर
ख्वाहिशें जब परवान चढ़ती हैं... तो सचिन तेंदुलकर का चेहरा सामने आता है... तमन्नाएं जब जवां होती हैं... तो सचिन का खेल रास्ता दिखाता है ... नाकामियों से जब वास्ता पड़ता है... तो सचिन का करियर सहारा देता है... जी हां... सचिन के बेमिसाल 24 साल के करियर को अगर हकीकत के आइने में उतारा जाए... तो कुछ ऐसी ही तस्वीरें सामने आती हैं... क्योंकि सचिन तेंदुलकर क्रिकेट की दुनिया का वो कोहिनूर हीरा हैं... जिसकी चमक से ना जाने कितने बैट और गेंद पकड़ने वाले नौसिखिए खिलाड़ी ... क्रिकेटर बन चुके हैं... सचिन को आदर्श मानकर ... सैकड़ों क्रिकेटर्स ने वर्ल्ड क्रिकेट में अपना मुकाम हासिल किया है... और जिसकी मिसाल मौजूदा टीम इंडिया में ही दी जा सकती है... सचिन का 24 साल का क्रिकेटिंग करियर इस बात का गवाह है कि सचिन से एक नहीं दो नहीं ... बल्कि तीन तीन पीढ़ियां ...क्रिकेट की बारीकियां सीखीं हैं...कपिल देव से लेकर मौजूदा कप्तान धोनी की टीम में कई ऐसे युवा क्रिकेटर्स आए ... जिन्होंने सचिन को अपना आदर्श मानकर क्रिकेट सीखा और साथ में खेला... और यही वजह है कि जब उन क्रिकेटर्स का ड्रेसिंग रूम में सचिन से सामना होता है ... तो उनकी की भी खुशी का ठिकाना नहीं रहता ... उन्हें विश्वास नहीं होता कि जो क्रिकेटर उनके लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहा... वो उसी के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर कर रहे हैं...... सचिन के साथ खेलने की ये कहानी सिर्फ भारतीय युवा क्रिकेटर्स की ही नहीं होती है... बल्कि वर्ल्ड क्रिकेट के ऐसे सैकड़ों क्रिकेटर हैं... जिनका सपना ... भारतीय क्रिकेट का ये भगवान पूरा करता है... क्योंकि हिन्दुस्तान की सरज़मीं पर जब भी कोई विदेशी टीम खेलने आती है... तो उनके युवा बल्लेबाज़ों की ख्वाहिश सचिन जैसा ही बनने की होती है... बल्लेबाज़ तो बल्लेबाज़ वर्ल्ड क्रिकेट में ऐसे गेंदबाज़ों की भी कमी नहीं होती ... जो सचिन का विकेट हासिल करके खुद को धन्य समझते हैं... हालांकि इसे सचिन की कमज़ोरी कहें या फिर कुछ और ... अक्सर सचिन भी ऐसे युवा गेंदबाज़ों को अपना विकेट थमा देते हैं ... जो इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू कर रहे होते हैं... लेकिन हकीकत यही है कि सचिन की इस नाकामी में भी ... विदेशी क्रिकेटर्स के सपने सच होते हैं...
सचिन तेंदुलकर...एक कामयाब क्रिकेटर
सचिन तेंदुलकर... ये नाम आज किसी पहचान का मोहताज नहीं।
लेकिन 23 साल पहले जब 1989 में टीम इंडिया के पाकिस्तान
दौरे पर ... महज़ 16 साल की छोटी सी उम्र के सचिन को टीम इंडिया में जगह मिली थी ... तो शायद ही किसी ने ये सोचा था कि भविष्य में जेंटलमैन गेम को यही छोटा सा बच्चा ... ना सिर्फ देश में बल्कि पूरी दुनिया में एक नई परिभाषा और पहचान दे देगा। हकीकत तो ये है कि आज क्रिकेट की पहचान सचिन से है ... इंटरनेशनल क्रिकेट में करीब 24 साल से जारी सचिन का सफर आज भी पहले की तरह जारी है ... अपने जज़्बे और बल्ले से प्रदर्शन से क्रिकेट की सबसे बड़ी मिसाल बन चुके सचिन को ... हाथ में बल्ला थमाने के असली श्रेय उनके बड़े भाई अजित तेंदुलकर को जाता है। मुंबई के शारदाआश्रम विद्यामंदिर में पढ़ाई के दौरान जो सचिन ने ... अपने कोच रमाकांत अचरेकर से क्रिकेट के गुर सीखे ... वो आज रिकॉर्ड बुक्स में असंख्य आंकड़ों के साथ मील का पत्थर बन चुके हैं। हालांकि शुरूआत में सचिन तेज़ गेंदबाज़ बनना चाहते थे ... औऱ इसी के गुर सीखने के लिए वो एमआरएफ़ पेस फ़ाउंडेशन भी गए। लेकिन डेनिस लिली की सलाह पर उन्होंने गेंदबाज़ी छोड़कर ... अपना ध्यान बल्लेबाज़ी पर दिया। इसी के बाद रमाकांत अचरेकर की देखरेख में सचिन की बल्लेबाज़ी फली-फूली । आचरेकर का विकेट पर 1 रूपए का सिक्का रखकर ... नेट्स में गेंदबाज़ों को सचिन को आउट करने का चैलेंज देना ... औऱ हर बार नॉट-ऑउट रहने पर सचिन का लगातार 13 सिक्के जीतना ... क्रिकेट के भगवान की ज़िंदगी से जुड़ी ऐसी कहानी है जो देश का बच्चा-बच्चा जानता है। सचिन की ज़िंदगी की एक और कहानी भी साल 1988 में देश भर में सुर्खियां बटोरने की वजह बन गई थी। इस दौरान लॉर्ड हैरिस शील्ड इंटर स्कूल मैच में GFX सचिन ने विनोद कांबली के साथ मिलकर ...664 रनों की नाबाद पार्टनरशिप की ... जो दशकों तक अजेय रिकॉर्ड रही। हालांकि अपने पहले ही टेस्ट में सचिन सिर्फ़ 15 रन बनाकर ... वक़ार यूनुस की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए थे। लेकिन जिस तरह से मैच में सचिन ने पाकिस्तानी गेंदबाज़ों का सामना किया ... सचिन अपनी अलग पहचान बना चुके थे। इसी दौरे पर एक बाउंसर से चोट खाने के बाद सचिन की नाक से ख़ून निकलने लगा था ... लेकिन उन्होंने पैवेलियन लौटने से इंकार कर दिया ... क्रिकेट के लिए सचिन का ये वो समर्पण जिसकी पूरी दुनिया कायल हो गई। एक प्रदर्शनी मैच में अब्दुल क़ादिर की गेंदों पर छक्के लगाते हुए सचिन का सिर्फ़ 18 गेंदों पर 53 रन बनाना भी ... उन्हें छोटी सी उम्र में फैन्स का चहेता बना गया। बात चाहे इंग्लैंड के ख़िलाफ़ 1990 में ओल्ड ट्रैफ़र्ड के मैदान पर बनाए ... करियर के पहले टेस्ट शतक की हो ... या 1991-92 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर सिडनी टेस्ट में खेली नाबाद 148 रनों की ज़िम्मेदार पारी की ... सचिन का करियर मैच दर मैच सिर्फ परवान ही चढ़ा। 1994 में पहली बार उन्हें वन-डे क्रिकेट में टीम के लिए ...
पारी की शुरुआत करने का मौका मिला जिसके बाद ... इसी साल उन्होंने वनडे फॉर्मेट अपना पहला शतक लगाकर ... उम्मीदों के नए सिलसिले का आगाज़ कर दिया। इंग्लैंड में 1999 वर्ल्डकप के दौरान अपने पिता की मृत्यु के बावजूद ... टीम की ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए ... सचिन का शोक के बावजूद वापस वर्ल्डकप खेलने जाना और देश के लिए शतक बनाना ... सचिन की शक्सियत की ऐसी मिसाल बनीं जिसने किसी भी दूसरे क्रिकेटर से ... उन्हें कोसों आगे पहुंचा दिया। क्रिकेट की पिच पर करीब-करीब बिताए अपने ढाई दशक के करियर में सचिन के नाम आज इतनी उपलब्धियां औऱ रिकॉर्ड हैं कि क्या कहें ... सबसे ज़्यादा रन ... सबसे ज़्यादा शतक ... सबसे लंबा करियर ... और वर्ल्ड क्रिकेट का सबसे सफल क्रिकेटर होने की उपलब्धियों के साथ आज सचिन क्रिकेट की असली पहचान हैं। जिस पर आने वाली पीढ़ियां सिर्फ नाज़ ही करेंगी।
एक बार फिर सचिन का जन्मदिन
तस्वीरें भले ही पुरानी हों लेकिन क्रिकेट को धर्म की तरह पूजने वाले देश हिंदुस्तान में 24 अप्रैल का दिन हर साल ऐसे ही मनाया जाता है । वजह भी साफ है ... क्योंकि इसी रोज़ जेंटलमैन गेम यानी क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का जन्मदिन जो है । GFX मुंबई में 24 अप्रैल 1973 को जन्मे सचिन तेंदुलकर ... बुधवार को अपने 40वां जन्मदिन मनाएंगे। किसी गैर-भारतीय के लिए ये चौंकाने वाली बात हो सकती है लेकिन 1989 में सिर्फ 16 साल की उम्र में अपने इंटरनेशनल करियर का आगाज़ करने वाले सचिन का जन्मदिन ... हर साल देश में करोड़ों फैन्स किसी त्यौहार की तरह ही मनाते रहे हैं। इसे सचिन के लिए उनके फैन्स की चाहत नहीं तो औऱ भला क्या कहा जाएगा ... कि इस रोज़ कहीं देश में फैन्स मास्टर ब्लास्टर की सलामती औऱ लंबी उम्र के लिए भगवान के दरबार में पूजा-अर्चना करते हैं ... कहीं गरीबों में दान दिया जाता है ... तो कहीं सचिन के नाम केक काटकर सेलीब्रेट किया जा सकता है। यूं तो क्रिकेट के कोहीनूर सचिन को चाहने वालों के लिए ये दिन हमेशा ही खास रहा है ... लेकिन बीते साल की तरह इस बार भी सचिन के फैन्स अपने हीरो को ... क्रिकेट की पिच पर खेलते हुए देख पाएंगे। जी हां ... खुशकिस्मती से इस बार भी 24 अप्रैल की शाम IPL में सचिन की टीम मुंबई इंडियन्स ... मैदान पर खेलती नज़र आएगी। जहां उसका मुकाबला पिछले साल की डिफेंडिग चैंपियन कोलकाता नाइट राइडर्स से उसी के घरेलू मैदान ईडेन गार्ड्न्स पर होगा। वन-डे क्रिकेट से संन्यास का ऐलान करने के बाद क्रिकेट की पिच पर सचिन तेंदुलकर का ये पहला जन्मदिन होगा ... वैसे भी मैदान औऱ फॉर्मेट चाहे जो भी हो लेकिन अगर सचिन खेल रहे हैं ... तो फैन्स का तांता तो लगना तय ही है। हालांकि ये टक्कर कोलकाता की घरेलू टीम केकेआर के खिलाफ होने जा रही है ... लेकिन सचिन मेनिया के सामने कोई और जादू चलेगा इस बात की संभावना ना के बराबर है। फिर उम्मीद की जा सकती है है कि ईडेन के मैदान पर ... जब बर्थ-डे ब्वॉय़ सचिन के बल्ले से बनने वाले हर रन पर 75 हज़ार से ज़्यादा दर्शक एक सुर में सचिन-सचिन के नारे के साथ मास्टर ब्लास्टर का जन्मदिन मनाएंगे ... तो नज़ारा देखने वाला होगा।
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