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खेल से खेल तक

शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010

2010 में खेलों की दुनिया के दबंग



खेल खेल में 2010

साल 2010 में 5 दबंग खिलाड़ियों की दबंगई खूब देखने को मिली...क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर ने ऐतिहासिक कारनामा कर साल के नंबर वन दबंग बने तो वहीं दूसरे दबंग धोनी की दबंगई भी चर्चे में रही....क्रिकेट के मैदान से बाहर दूसरे खेलों में गगन नारंग ने अपनी कामयाबी से दबंग की सूची में शुमार हो गए तो वहीं गोल्डन गर्ल सायना नेहवाल जा जादू और बॉक्सर विजेंदर का मुक्का खूब चला।
सबसे बड़े दबंग सचिन
सचिन ने साल 2010 का आगाज किया ... ग्वालियर वन-डे में अपने एतिहासिक दोहरे शतक के साथ । वन-डे क्रिकेट की पहली दोहरी शतकीय पारी से सचिन ने ... पाकिस्तान के सईद अनवर के 194 रनों का रिकॉर्ड तोड़ा ...इसके बाद टेस्ट क्रिकेट में 14 हज़ार रनों का जादुई आंकड़ा भी छुआ...लेकिन सचिन के करियर का सबसे यादगार लम्हा आया ... 19 दिसंबर को ...सेंचुरियन के मैदान पर ...साउथ अफ्रीका के खिलाफ शतक बनाकर सचिन शतकों का अर्द्धशतक बनाने वाले पहले बल्लेबाज़ बन गए। इसके साथ ही सचिन को भारत रत्न दिए जाने की मांग एक बार फिर तेज़ हो गई
कैप्टन कूल धोनी की दबंगई
टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी सफलतम कप्तानों में शुमार हुए...धोनी ने एशिया कप में 15 साल के सूखे को खत्म करते हुए एशियाई बादशाहत हासिल की...साथ ही धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने घर और विदेशी सरज़मीं पर कई वनडे सीरीज़ जीती...बल्लेबाज़ी में भी धोनी छाए रहे...करीब 9 महीने तक धोनी आईसीसी वनडे रैंकिंग में नंबर वन बल्लेबाज़ रहे...
शूटिंग का सबसे बड़ा दबंग
वर्ल्ड शूटिंग चैम्पियन में धमाल मचाने के बाद गगन नारंग ने दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड पर अचूक निशाना लगाया...गगन ने यहां 4 गोल्ड मेडल जीते...हालांकि ग्वांगज़ू एशियन गेम्स में गगन का निशाना चूक गया...और उन्हें ब्रॉन्ज़ मेडल से ही संतुष्ट करना पड़ा..लेकिन बावजूद इसके गगन एशियन रैंकिंग में नंबर वन शूटर बने
गोल्डन गर्ल सायना नेहवाल
बैडमिंटन क्वीन सायना नेहवाल ने सुपर सीरीज़ में हैट्रिक लगाने के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने रैकेट की रफ्तार से शानदार प्रदर्शन दिखाया...और गोल्ड मेडल हासिल करते हुए...ये हैदराबादी गर्ल गोल्डन गर्ल बन गई...हालांकि कॉमनवेल्थ गेम्स की शानदार फॉर्म सायना एशियन गेम्स में जारी नहीं रख सकी...लेकिन हांगकांग सुपर सीरीज़ जीतकर ...सायना रैंकिंग में 8 पायदान से 2 पायदान तक पहुंचीं
विजेंदर सिंह का मुक्का
बीजिंग ओलंपिक के ब्रॉन्ज़ मेडलिस्ट विजेंदर ने कॉमनवेल्थ में गोल्ड मेडल हासिल न कर पाने की कसक एशियन गेम्स में पूरी की...विजेंदर ने एशियन गेम्स में अपने मुक्कों का ज़ोर दिखाते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया...विजेंदर अपने शानदार प्रदर्शन से नंबर वन बॉक्सर बने रहे।
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एशियन गेम्स में भारत का जलवा

कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद भारतीय खिलाड़ियों का अगला मिशन था एशियन गेम्स ... ग्वांगज़ू में हुए 16वें एशियन गेम्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा ... हालांकि इस मिशन में कई नामी खिलाड़ी फ्लॉप भी साबित हुए। लेकिन अच्छी बात ये रही कि कई युवा चेहरों ने देश के लिए मेडल्स के साथ गौरव हासिल किया ।
(पंकज ने दिलाई सुनहरी शुरूआत)
एशियन गेम्स में भारत के लिए गोल्डन अभियान की शुरूआत ... की बिलियर्ड्स के वर्ल्ड चैंपियन पंकज अडवाणी ने ... 2006 दोहा एशियन गेम्स की तरह पंकज ने 2010 में भी देश के नाम गोल्ड मेडल दिलाया।
(एथलीट्स ने रचा इतिहास)
एशियन गेम्स में भारत के लिए सबसे बड़ी सफलता लाए एथलीट्स ... कॉमनवेल्थ गेम्स की तरह भारतीय एथलीटों ने ग्वांगज़ू में भी उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन किया ... एथलीट अश्विनी अकुंजी ने 4X400 मीटर रिले के सिंगल्स और टीम इवेंट ... दोनों में गोल्ड मेडल हासिल किए। पूरे गेम्स के दौरान एथलेटिक्स से भारत को 5 गोल्ड समेत कुल 11 मेडल्स मिले।
(शूटरों ने किया निराश)
हालांकि मेडल्स की सबसे बड़ी उम्मीद रहे भारतीय शूटर्स एशियन गेम्स में फ्लॉप साबित हुए। मेडल्स के सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे ओलंपिक गोल्ड मैडेलिस्ट अभिनव बिंद्रा ... और कॉमनवेल्थ के हीरो रहे गगन नारंग ... गोल्ड पर निशाना लगाने से चूक गए। तो वहीं ट्रैप शूटर रोंजन सोढी ने देश को शूटिंग में इकलौता गोल्ड मैडल दिलाया।
(साइना ने तोड़ी उम्मीद)
शूटर्स की तरह कॉमनवेल्थ गेम्स की गोल्ड मैडेलिस्ट ... औऱ स्टार शटलर सायना नेहवाल से भी ... देश को एशियन गेम्स में भी गोल्ड मेडल की उम्मीद थी। लेकिन ग्वांगज़ू में सायना का सफर गोल्ड मेडल तो दूर सेमीफाइनल से भी पहले खत्म हो गया। सायना कोई भी मेडल नहीं जीत सकीं ।
(बदला मेडल का रंग)
गेम्स में भारत को मेडल टैली में मज़बूती दिलाने के लिए ... बॉक्सर्स की अहम भूमिका रही। जहां ओलंपिक ब्रांज़ मेडेलिस्ट विजेंद्र सिंह ने ... पहली बार किसी बड़े इवेंट में गोल्ड मेडेल जीता ... वहीं विकास कृष्णन औऱ दिनेश कुमार समेत बॉक्सर्स ने पूरे इवेंट में कुल 9 मेडल अपने नाम किए।
(टेनिस ने भी दिखाया दम)
इधर टेनिस इवेंट्स में सानिया मिर्जा ... भले ही एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल नहीं जीत सकीं ... लेकिन मेन्स इवेंट में युवा सोमदेव बरमन ने ... फैंस की उम्मीदों को निराश नहीं होने दिया। सोमदेव ने पहले डब्ल्स औऱ फिर मेन्स सिंगल्स इवेंट में भी ... गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया।
(28 साल पुराना रिकॉर्ड)
ग्वांग्ज़ू में भारतीय दल ने ... 1982 एशियन गेम्स के 57 मेडल्स के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। ग्वांगज़ू में भारत ने कुल 64 मेडल हासिल किए जिसमें 14 गोल्ड, 17 सिल्वर और 33 ब्रांज शामिल रहे। gfx out... हालांकि इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बावजूद ... मेडल्स टेली में भारत छठे स्थान पर ही पहुंच सका।
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खेल खेल में 2010



कॉमनवेल्थ की कहानी

साल 2010 में भारत के नज़रिए से देखा जाए तो सभी की निगाहें टिकीं थी ... इस साल होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स की मेज़बानी पर। तमाम विवादों और National और International Media की Negative Publicity को देखते हुए ... कॉमनवेल्थ गेम्स देश की नाक का सवाल बन गए थे। लेकिन ना सिर्फ भारत ने गेम्स का सफल आयोजन किया ... बल्कि भारतीय खिलाड़ियों ने भी इस बीच अपने प्रदर्शन से मेडल टेली में तिरंगे का मान बढ़ाया।
3 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक पूरी दुनिया ने माना ... दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का लोहा । जिसके साथ ही खत्म हो गया वो डर ... जो गेम्स की अधूरी तैयारियों, विदेशी एथलीट्स के backout ... औऱ बड़े-बड़े-बड़े घोटालों की खबरों के बीच ... हर भारतीय के दिल में पैदा हो गया था।
हैरतअंगेज़ ओपनिंग सेरेमनी
3 अक्टूबर की एतिहासिक शाम ... दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित हुई ... कॉमनवेल्थ गेम्स की यादगार ओपनिंग सेरेमनी। भारतीय संस्कृति, कला, बॉलीवुड के तड़के ... और अविश्वसनिय Arostat गुब्बारे के Effects के तालमेल के साथ ये ऐसी ओपनिंग सेरेमनी थी ... जिसे पूरी दुनिया ने देखा। विवादों के बावजूद ए.आर रहमान के बनाए थीम सांग ने भी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर सुर्खियां बटोंरी। जिसके बाद 4 अक्टबूर से शुरू हुआ 21 खेलों में ... 71 देश के खिलाड़ियों के बीच ... मेडल्स का वो घमासान जिसमें कोई किसी ने कम नहीं था।
भारतीय शूटर्स ने दिखाया शौर्य
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को सबसे ज्यादा मेडल मिले शूटिंग से ... जिसमे शूटर्स ने कुल 30 मेडल हासिल किए। इसमें 14 गोल्ड, 11 सिल्वर और 5 ब्रान्ज शामिल रहे।
नारंग बने गोल्डन ब्वॉय
लेकिन तमाम शूटर्स के बीच अलग पहचान बनाई गगन नारंग ने ... जिन्होंने एक के बाद एक रिकॉर्ड कॉमनवेल्थ गेम्स में 4-4 गोल्ड मेडल हासिल कर कमाल कर दिया। गगन के अलावा विजय कुमार और ओंकार सिंह ने भी अपने अचूक निशाने से गेम्स में 3-3 गोल्ड मेडल्स जीते।
पहलवानों का 'धोबीपछाड़'
शूटर्स के अलावा भारतीय पहलवानों ने भी कॉमनवेल्थ गेम्स में जमकर सोना बटोरा ... सुशील कुमार समेत कई पहलवानों ने भारतीय़ पहलवानी के गुर को ऐसा आज़माया कि गेम्स खत्म होते-होते पहलवानी से भी ... देश की झोली में 10 मेडल्स आ गए।
बॉक्सर्स की हुई बल्ले-बल्ले
वहीं बॉक्सिंग से भी देश की झोली में कुल 7 मेडल्स आए। सुरंजय कुमार, मनोज कुमार और परमजीत समोटा ने जहां अपने मुक्के के दम पर गोल्ड मेडल हासिल किया ... वहीं वर्ल्ड नंबर-1 विजेन्द्र सिंह सिर्फ ब्रांज़ मेडल ही जीत पाए।
लगा मेडल्स का शतक
इसी तरह कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स से भारत ने ... 12 मेडल जीतकर इतिहास बनाया । तो बैडमिंटन में भी सायना नेहवाल और doubles मुकाबले में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने गोल्ड मेडल्स जीते। टेनिस में देश के लिए स्टार रहे युवा सोमदेव देवबर्मन ... जिन्होंने मेन्स सिंग्ल्स में गोल्ड औऱ मिक्सड डबल्स में सिल्वर मेडल जीता। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय हॉकी ने भी रफ्तार पकड़ी ... औऱ मेन्स टीम ने फाइनल तक का सफर तय करते हुए सिल्वर मेडल पर कब्ज़ा किया। कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारतीय खिलाड़ियों औऱ एथलीट्स का ... ये अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन था। पहली बार भारत कॉमनवेल्थ गेम्स की मेडल टैली में दूसरे स्थान पर रहा। पूरे गेम्स में भारत ने 38 गोल्ड, 27 सिल्वर औऱ 36 ब्रांज़ समेत कुल 101 मेडल जीते।
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फीफा वर्ल्ड कप का रोमांच
साल 2010 में खेलों का असली फीवर देखने को मिला ... जून के महीने में । औऱ इस दौरान 31 दिनों तक साउथ अफ्रीका में खेला गया फीफा वर्ल्डकप-2010 । ओपनिंग सेरेमनी से लेकर ... फाइनल मुकाबले तक ... पूरी दुनिया फुटबॉल वर्ल्डकप के रंग में डूबी नज़र आई। जिसके बाद पहली बार फुटबॉल इतिहास में स्पेनिश टीम बनीं ... चैंपियन।
खेलों के मद्देनज़र साल 2010 का सबसे बड़ा इवेंट रहा ... FIFA वर्ल्ड कप । RELIEF पूरी दुनिया के साथ-साथ साउथ अफ्रीकी फिज़ा में भी फुटबॉल वर्ल्ड कप के सुर गूंजने लगे थे। ..TAKE AMBIENCE कहीं ओ अफ्रीका की धुन पर ... जश्न मनाया जा रहा था ... RELIEF तो कहीं लैटिन सिंगर शकीरा का वाका-वाका ... फुटबॉल फैन्स को अपनी धुन पर झूमने को मजबूर किए हुआ था।
RELIEF WITH WAKA WAKA ... आखिरकार WAVING FLAG के नारे औऱ धमाकेदार ओपनिंग सेरेमनी के साथ ... 10 जून को फुटबॉल वर्ल्ड कप का औपचारिक आगाज़ हुआ।
RELIEF जिसके बाद 11 जून 2010 को शुरू हुआ लीग मुकाबलों का सफर ... 31 दिनों तक 32 टीमों के बीच हर रोज़ ... बड़े-बड़े उलटफेर देखने को मिले। RELIEF कई स्टार खिलाड़ी फ्लॉप हुए ... तो कई नए सितारों का जन्म भी हुआ। RELIEF इसी बीच स्टार खिलाड़ियों से सजी फ्रांस, इंग्लैंड ब्राज़ील, इटली और अर्जेंटिना जैसी टीमें अंतिम चार में जगह बना पाने में भी नाकाम रही। RELIEF इधर अपनी काबीलियत और मेहनत के दम पर नीदरलैंड्स, उरूग्वे, जर्मनी और स्पेन की टीमों ने ... सेमीफाइनल में जगह पक्की करते हुए सुर्खियां बटोंरी RELIEF तो साथ ही दुनिया भर की मीडिया का चहेता बन गया .... जर्मनी के Aquarium में बैठा 3 साल का भविष्यवक्ता ऑक्टोपस पॉल । लीग मुकाबले से लेकर सेमीफाइनल तक ... जर्मनी की हर जीत की भविष्यवाणी करने वाले पॉल ने ... सेमीफाइनल में स्पेन की जीत और जर्मनी की हार की भविष्यवाणी की ... जिसके सच साबित होते ही जर्मनी में पॉल की जान पर बन आई। वहीं दूसरे सेमीफाइनल में उरूग्वे को 3-2 से हराकर विजेता रही नीदरलैंड्स ने ... तीसरी बार वर्ल्ड कप के फाइनल में सीट पक्की की। RELIEF फाइनल से पहले एक बार फिर ... ऑक्टोपस ने भविष्यवाणी की ... और इस बार स्पेन को इतिहास रचने का दावेदार बताया । 11 जुलाई 2010 का जोहानिसबर्ग के सॉकर सिटी स्टेडियम में ... खेला गया वर्ल्ड कप के इतिहास का सबसे रोमांचक मुकाबला । RELIEF स्पेन और नीदरलैंड्स के बीच कांटे की टक्कर हुई ... और EXTRA TIME तक खिंचे मुकाबले आंद्रे एनिएस्ता के एक गोल ने ... स्पेन को वर्ल्ड फुटबॉल का बादशाह बना दिया ।
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विवादों से भरा 2010
क्रिकेट में जहां खिलाड़ियों की जीत औऱ हार ने ... भारत में सुर्खियां बटोंरी ... वहीं बीते साल इस खेल से कई ऐसे विवाद भी जुड़े ... जिनकी बदौलत जेंटलमैन गेम बदनाम हो गया। एक नज़र डालते हैं बीते साल ... क्रिकेट के साथ जुड़ी सबसे चर्चित Controversies पर।
आफरीदी की गेंद से छेड़छाड़
हर बार की तरह साल 2010 में भी पाकिस्तान क्रिकेट सबसे ज्यादा विवादों में रहा...साल की शुरुआत में ही पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर एक ऐसा विवाद खड़ा कर दिया...जिसका खमियाज़ा पाकिस्तान के ट्वेंटी ट्वेंटी कप्तान शाहिद आफरीदी को 2 मैचों का बैन झलकर चुकाना पड़ा..ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक ट्वेंटी ट्वेंटी मैच में शाहिद आफरीदी बॉल से छेड़छाड़ करते पकड़े गए...अपनी टीम को हार से बचाने के लिए आफरीदी ने गेंद की सीम को दांत से उधेड़ा...और आफरीदी की यही हरकत कैमरा में कैद हुई..जिसके बाद आफरीदी को 2 ट्वंटी ट्वेंटी मैचों के लिए बैन कर दिया गया...
टीम इंडिया के खिलाफ साज़िश
साल 2010 के अगस्त में टीम इंडिया भी साज़िश का शिकार हुई...और इस साज़िश का शिकार बने टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज़ वीरेंद्र सहवाग...दरअसल वाक्या टीम इंडिया के श्रीलंका दौरे का था...जब धोनी बिग्रेड श्रीलंका में ट्राई सीरीज़ खेलने गई थी... जहां दांबुला में खेले गए वनडे मैच में श्रीलंका टीम ने वीरेंद्र सहवाग के खिलाफ साज़िश रची...सहवाग का शतक रोकने के लिए श्रीलंका के स्पिनर सूरज रनदीव ने जानबूझकर नोबॉल डाली...जिससे सहवाग अपने वनडे करियर का 13वां शतक बनाने से सिर्फ 1 रन से चूक गए...इस साज़िश में रनदीव के साथ कप्तान कुमार संगाकारा और तिलकरत्ने दिलशान भी शामिल थे...जिसके बाद रनदीव को 1 मैच के लिए सस्पेंड कर दिया गया...जबकि दिलशान पर मैच फीस का 50 फीसदी जुर्माना लगाया गया...
स्पॉट फिक्सिंग का जिन्न
साल 2010 का सबसे बड़ा विवाद एक बार फिर पाकिस्तान क्रिकेट के साथ जुड़ा...जिसने पाकिस्तान क्रिकेट को वर्ल्ड क्रिकेट में शर्मसार कर दिया...ब्रिटिश मीडिया ने फिक्सर मज़हर मजीद का एक स्टिंग ऑपरेशन किया ...जिसके वीडियो में मजीद ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान पाकिस्तानी तेज गेंदबाज मोहम्मद आमेर और मोहम्मद आसिफ के साथ नो-बॉल डालने को लेकर फिक्सिंग की है। स्टिंग ऑपरेशन में माजीद ने खुलासा किया कि कैसे पाकिस्तानी तेज गेंदबाज मोहम्मद आमेर ने निर्धारित समय पर लार्ड्स टेस्ट में नो-बॉल फेंके...जिसके बाद आसिफ, आमेर, अकमल और सलमान बट्ट को आईसीसी ने सस्पेंड कर दिया...
गिब्स की टू द प्वाइंट
साउथ अफ्रीकी बल्लेबाज़ हर्शल गिब्स की बुक टू द प्वाइंट भी इस साल खूब चर्चाओं में रही..गिब्स ने अपनी विवादित किबात में सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि कैसे 1997-98 के ऑस्ट्रेलिया दौरों के समय कई महिलाओं के साथ संबंध बनाए।
हर्शल गिब्स ने अपनी आत्मकथा में द्रविड़ पर भी निशाना साधा गिब्स ने लिखा कि डेक्कन चार्जर्स और बेंगलुरु रॉयल चैलेंजर्स के बीच आईपीएल के दूसरे सीज़न के फाइनल से पहले राहुल द्रविड़ घबरा गए थे।
पाकिस्तानी क्रिकेटर गायब
पाकिस्तानी क्रिकेटर जुल्करनैन का अपनी टीम से अचानक गायब हो जाना भी विवादों का हिस्सा रहा...हालांकि दुबई से गायब हुए जुल्करनैन जल्द ही लंदन के एक होटल में तो मिल गए...लेकिन फिक्सिंग के जुड़े जो खुलासे जुल्करनैन ने किए...उससे एक बार फिर पाकिस्तान क्रिकेट बदनाम हुआ ।
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साल 2010 के शर्मनाक लम्हेंबीते साल अगर प्रदर्शन के लिहाज़ से टीम इंडिया अव्वल रही ... तो ऐसा नहीं था कि उसके हिस्से में नाकामियां नहीं आईं । हालांकि नाकामयाबियों की ये फेहरिस्त छोटी थी ... लेकिन इसमें शामिल था ... वेस्टइंडीज़ में खेला गया फटाफट क्रिकेट का सबसे बड़ा महाकुंभ ... ट्वेंटी-20 वर्ल्डकप।
ट्वेंटी-20 वर्ल्डकप में हुए शर्मसार
ढेढ महीने तक आईपीएल में पसीना बहाने औऱ ... खुद को मिली थकावट को लेकर टीम इंडिया मई महीने में पहुंची वेस्टइंडीज़। जहां लीग राउंड में ही बाहर होने के बाद ... धोनी ब्रिगेड को 2009 की तरह ज़िल्लत का सामना करना पड़ा। ट्वेंटी-20 के स्पेशलिस्ट खिलाड़ियों से भरी टीम इंडिया ... वर्ल्डकप में जीत की सबसे मज़बूत ... दावेदारों में से एक मानी जा रही थी। पिछसे दो साल के दौरान खेले गए आईसीसी इवेंट्स में ... ये धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया को मिली ... लगातार तीसरी हार थी।
जिम्बाब्वे में करारी हार
साल 2010 में टीम इंडिया के हाथ एक और नाकामी तब लगी ... जब टीम इंडिया ने जिम्बाब्वे का दौरा किया। ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप के बाद सेलेक्टर्स ने टीम के सीनियर खिलाड़ियों को ... जिम्बाब्वे ट्राई सीरीज़ के लिए आराम का मौका दिया। टीम की कप्तानी रही सुरेश रैना के हाथ में ... लेकिन सेलेक्टर्स का ये experiment तब बुरी तरह fail हो गया जब ज़िम्मबॉब्वे जैसी कमज़ोर टीम भी ... रैना के रणवीरों पर इक्कीस साबित हुई। पूरी सीरीज़ में टीम इंडिया ने 4 मैच खेले ... जिसमें से उसे 3 मैचों में हार का सामना करना पड़ा ।
अफ्रीका में टूटी उम्मीद
टीम इंड़िया के लिए साल 2010 का ... आखिरी इम्तिहान रहा साउथ अफ्रीका में । हालांकि सीरीज़ में टीम इंडिया टेस्ट की नंबर-1 टीम के तौर पर शिरकत कर रही थी ... लेकिन बदकिस्मती ये रही ... कि पहले की तरह एक बार फिर ... उसकी हार का सिलसिला जारी रहा। सेंचुरियन औऱ डरबन में एक ही कहानी बार-बार देखने को मिली ... और अफ्रीकी गेंदबाज़ों की रफ्तार के सामने भारतीय बल्लेबाज़ों ने घुटने टेक दिए। नतीजा ये रहा कि सीरीज़ का आखिरी टेस्ट आने से पहले ही मेहमान ... मेज़बानों के हाथों सीरीज़ गंवा चुके थे।
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टीम इंडिया के लिए अगर साल 2010 यादगार रहा ... तो मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के लिए ... बीता साल एतिहासिक रहा। इस साल सचिन ... रिकॉर्ड्स का भी रिकॉर्ड बनाते नज़र आए।
21 साल क्रिकेट कि पिच पर बिताने वाले सचिन ... मानों साल 2010 में खुद 21 के हो गए ... टेस्ट, वन-डे या टी-20 ... हर फॉर्मेट में क्रिकेट के इस भगवान के बल्ले का ही बोलबाला रहा।
डबल धमाके से किया साल का आगाज
सचिन ने साल 2011 का आगाज किया ... ग्वालियर वन-डे में अपने एतिहासिक दोहरे शतक के साथ । वन-डे क्रिकेट की पहली दोहरी शतकीय पारी से सचिन ने ... पाकिस्तान के सईद अनवर के 194 रनों के ... सर्वाधिक रनों के रिकॉर्ड को तो तोड़ा औऱ ... साथ ही वर्ल्ड क्रिकेट को आगाह कर दिया कि आने वाले साल में ... उनका बल्ला क्या धमाल मचाने वाला है।
IPL में भी जमकर बरसाए रन
वन-डे इतिहास का दोहरा शतक बनाने के बाद बारी आई IPL की ... जहां सचिन अकेले अपने दम पर मुंबई इंडियन्स को टूर्नामेंट के फाइनल तक ले गए। पूरे टूर्नामेंट के दौरान सचिन ने 618 रन बनाए ... और मैन ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब भी उन्हीं के नाम रहा।
टेस्ट में भी बनाए रिकॉर्ड्स
टेस्ट क्रिकेट में लिहाज़ से भी साल 2010 सचिन के ही नाम रहा ... साल खत्म होते-होते सचिन ने टेस्ट क्रिकेट में कई यादगार औऱ बेमिसाल पारियां खेलीं । इसी साल सचिन ने टेस्ट क्रिकेट में 14 हज़ार रनों का जादुई आंकड़ा भी छुआ ... अपने करियर की बेहतरीन फॉर्म से गुज़र रहे सचिन ने इस दौरान 7 शतक जमाए ... जिनमें श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दो दोहरे शतक भी शामिल थे ।
बनाया शतकों का अर्द्धशतक
लेकिन फैन्स के लिए सचिन के करियर का सबसे यादगार लम्हा आया ... 19 दिसंबर को सेंचुरियन के मैदान पर ... जब साउथ अफ्रीका के खिलाफ शतक बनाकर मास्टर ब्लास्टर ... टेस्ट इतिहास में शतकों के अर्द्धशतक को बनाने वाले पहले बल्लेबाज़ बन गए।
उपलब्धियों का मिला सम्मान
वन-डे क्रिकेट में बनाए गए सचिन के पहले दोहरे शतक की मौके को ... अमेरिका की प्रतिष्ठित 'Time' मैगज़ीन साल 2010 के Golden Sporting Moments Of The Year में शामिल किया। इतना ही नहीं सचिन साल 2010 में ... अवॉर्ड्स फंक्शन्स में भी खासे व्यस्त रहे। बीते एक साल में किए बेहतरीन प्रदर्शन पर ... सचिन को आईसीसी ने क्रिकेटर ऑफ द ईयर औऱ People's Choice Award से भी सम्मानित किया। लेकिन फैन्स के लिए सचिन की चाहत सिर्फ यहीं खत्म नहीं हुई ... 2010 में सचिन ने दुनिया भर में हुए Online Voting Polls में भी बार-बार बाज़ी मारी।
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साल 2010 में वर्ल्ड क्रिकेट की सबसे ज़्यादा ... व्यस्त अगर कोई टीम रही ... तो वो थी हमेशा की तरह टीम इंडिया। वन-डे, टेस्ट और ट्वेंटी-20 ... हर फॉर्मेट में भारतीय क्रिकेटर्स ... मैदान पर सबसे ज़्यादा दिन बिताने के मामले में ... पहले नंबर पर रहे। लेकिन अच्छी बात ये रही कि टीम ने ... मैच खेले भी औऱ जीते भी ... एक नज़र बीते साल में टीम इंडिया के जीत के सफर पर ...
बांग्लादेश में किया पहला धमाका
साल 2010 में सबसे पहली जीत टीम इंडिया को मिली बांग्लादेश में ... जहां करीब एक महीने लंबे दौरे पर पहले टीम इंडिया ने श्रीलंका औऱ बांग्लादेश के साथ खेली गई ट्राई सीरीज़ पर कब्ज़ा किया ... और फिर टेस्ट सीरीज़ में अपना परचम लहराते हुए मेज़बानों को 2-0 से रौंद दिया। सीरीज़ के हीरो रहे मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर जिन्होंने ... दो टेस्ट मैचों में दो शतक जमाए।
साउथ अफ्रीका को दी मात
बांग्लादेश को रौंदने के बाद ... टीम इंडिया का इम्तिहान रहा घरेलू सरज़मी पर साउथ अफ्रीका के खिलाफ । हालांकि साउथ अफ्रीका से खेली गई 2 टेस्ट की सीरीज़ में तो कोई नतीजा नहीं निकल सका ... लेकिन टेस्ट के बाद खेली गई वन-डे सीरीज़ में ज़रूर धोनी ब्रिगेड ने अफ्रीका को 2-1 से हरा दिया। यहां भी सीरीज़ के हीरो रहे सचिन तेंदुलकर।
एशिया बादशाहत पर किया कब्ज़ा
इंटरनेशनल क्रिकेट में टीम इंडिया का अगला पड़ाव था ... श्रीलंका जहां धोनी ब्रिगेड ने ट्वेंटी-20 वर्ल्डकप की हार पर मरहम लगाया ... एशिया कप की जीत के साथ । टूर्नामेंट में टीम इंडिया ने पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसी टीमों को एक-तरफा मात दी ... औऱ 15 साल वन-डे क्रिकेट में एशियाई बादशाहत का ताज अपने नाम कर लिया।
हालांकि इसके तुरंत बाद श्रीलंका के साथ खेली टेस्ट सीरीज़ का नतीजा 1-1 के साथ बराबरी पर खत्म हुआ।
कंगारूओं को किया पस्त
इंटरनेशनल क्रिकेट में टीम इंडिया का अगला नंबर लगा घरेलू सरज़मी पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ... जिसे 2-0 से रौंदते हुए पहले टीम इंडिया ने ... बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी पर लगातार दूसरी बार कब्ज़ा किया ... औऱ फिर वनडे सीरीज़ में भी कंगारुओं को 1-0 से मात दी।
कीवियों का सफाया
लेकिन टीम इंडिया के लिए साल 2010 की सबसे ... एक-तरफा सीरीज़ रही न्यूज़ीलैंड के खिलाफ । पूरे दौरे पर मेहमान कीवि जीत के लिए तरसते रहे । हालांकि तीन टेस्ट की सीरीज़ में टीम इंडिया सिर्फ 1-0 से न्यूज़ीलैंड को हरा सकी ... लेकिन वनडे सीरीज़ में कीवियों का सूपड़ा साफ हो गया। सीनियर खिलाड़ियों की गैर-मौजूदगी और गौतम गंभीर की कप्तानी में युवाओं ने ऐसा जोश दिखाया ... कि सीरीज़ पर टीम-इंडिया का 5-0 से कब्ज़ा हो गया।

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खेल खेल में 2010



हार बार की तरह साल की शुरूआत की क्रिकेट से जिसमें साल 2010 के आगाज़ के बाद ... पहला बड़ा इवेंट रहा आईपीएल यानि इंडियन प्रीमियर लीग । लेकिन पिछले साल विदेशी हो चुकी आईपीएळ ... 2010 में एक बार फिर देसी हो गई। पहले दोनों सीज़नों की तरह आईपीएळ का तीसरा सीज़न भी सुपरहिट रहा ... हालांकि विवादों से इस बार भी आईपीएल खुद को बचा नहीं पाया। बीसीसीआई की मल्टी मिलियन लीग आईपीएल के सीज़न-3 का आगाज़ हुआ ... चेयरमैन ललित मोदी की इस speech औऱ शानदार ओपनिंग सेरेमनी के साथ। जिसके साथ ही सीज़न-2 में परदेसी हो गई फटाफट क्रिकेट की मेगा लीग ... एक बार फिर देसी हो गई। PROMO क्रिकेट, कॉर्पोरेट वर्ल्ड औऱ बॉलीवुड के एक और मिलन के बाद अब बारी थी 22 गज के पिच पर ... दनादन क्रिकेट के घमासान की।
सीज़न-2 की डिफेंडिंग चैंपियन डैक्कन चार्जर्स ... और कोलकाता नाइट राइडर्स के मैच के साथ ... सीज़न-3 का कारवां ऐसा शुरू हुआ जो पूरे 60 मैचों तक जारी रहा। उतार-चढ़ाव से भरे सीज़न-3 में ... एक तरफ नाइटराइडर्स ने धमाकेदार आगाज़ किया...RELIEF तो साथ ही सचिन की कप्तानी वाली मुंबई इंडियंस भी ... अपने दमदार खेल से सभी को चौंकाती रही। इसी बीच आईपीएल के लिए की गई ज़बरदस्त मार्केटिंग औऱ प्रोमोशन के ज़रिए ... सीज़न-3 में फैन्स को भी अपने पसंदीदा क्रिकेट सितारों के साथ ... देर रात तक आईपीएल parties attend करने का मौका मिला। ... लीग के रोमांच ने धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ी औऱ सीज़न-1 की चैम्पियन राजस्थान रॉयल्स और दिल्ली डेयरडेविल्स जैसी मज़बूत टीमें भी सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गईं। RELIEF WITH GFX IN पहले सेमीफाइनल में बैंग्लोर रॉयल चैलेंजर्स को रौंदकर मुंबई इंडियंस ने फाइनल में जगह बनाई ... तो वहीं दूसरे सेमीफाइनल में धोनी की कप्तानी वाली चेन्नई सुपर किंग्स ने डिफेंडिंग चैम्पियन डेक्कन चार्जर्स को हराकर फाइनल का टिकट पक्का किया। ... लेकिन जोरदार फाइनल के बाद आखिरकार
बाज़ी हाथ लगी चेन्नई सुपरकिंग्स के नाम। सीज़न-3 में यूं तो अपने खेल से सचिन तेंदुलकर, किरोन पोलार्ड औऱ जैक कालिस जैसे कई खिलाड़ी चर्चाओं में रहे ... लेकिन मैदान से बाहर आईपीएळ की नई टीमों के गठन में अपनी मनमर्ज़ी, गैरज़रूरी ट्विटरबाज़ी ... औऱ पैसों की हेराफेरी जैसे आरोपों ने ललित मोदी को भी मोस्त वाटेंड बना दिया। नतीजा ये रहा कि इधर सीज़न-3 खत्म हुआ ... और उधर बीसीसीआई ने मोदी के पर कतरते हुए ... उनसे लीग के चेयरमैन की कुर्सी छीन ली।
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सोमवार, 27 दिसंबर 2010

धोनी की नजर से साल २०१०


टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की कलम से


साल की शुरुआत हमारे लिए ..बांग्लादेश में ट्राई सीरीज की हार के साथ हुई ..हन श्रीलंका से फाइनल मुकाबला हार गए..लेकिन हमने टेस्ट सीरीज में कब्जा किया....और दोनों ही टेस्ट में सचिन पाजी ने शतक लगाया....लेकिन असली मुकाबला तो अभी बाकी था....साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में हम पहला टेस्ट हार गए......हमारी नंबर वन रैंकिंग दांव पर थी....लेकिन हमारे सबसे बड़े बल्लेबाज ने हमें फिर सहारा दिया सचिन ने शानदार शतक लगाया और उनके इस शतक की बदौलत हमने ना सिर्फ कोलकाता टेस्ट में जीता....बल्कि आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में अपने नंबर वन स्थान को भी बरकरार रखा .....इसके बाद ..मेरी ब्रिगेड ने साउथ अफ्रीका का वन डे सीरीज में 2-1 से सफाया कर दिया.. इस सीरीज के दूसरे मुकाबले में क्रिकेट के भगवान ने वो चमत्कार किया ..जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता ..ग्वालियर में सचिन ने नाबाद 200 रनों की पारी खेलकर वन डे क्रिकेट में नया इतिहास रच दिया......मैं उनके साथ बैटिंग कर रहा था ...सचिन को देखकर मुझे भी जोश आ गया....एक कप्तान के तौर पर ..मेरी जिम्मेदारी थी ज्यादा से ज्यादा रन बनाना..लेकिन साथ ही डर भी ता कि कहीं सचिन का दोहरा शतक ना रुक जाए .....भगवान की कृपा से ऐसा कुछ नहीं हुआ और सचिन ने पाजी ने वन डे क्रिकेट का पहला दोहरा शतक लगाया....

साउथ अफ्रीका को निपटाने के बाद ..मैं और मेरे साथी भारतीय क्रिकेटर्स आईपीएल-3 के महासंग्राम में उतर गए ...जहां बाजी मेरी टीम चेन्नई सुपरकिंग्स के हाथों आई .....हमने मुंबई इंडियंस को मात दी...फाइनल में जैसे ही सचिन आउट हुए ...हमारे लिए काम आसान हो गय़ा..और पहली बार चेन्नई ईपीएल का खिताब जीतने में कामयाब रही
हालाकिं आईपीएल के तुरंत बाद वेस्टइंडिज में खेल गए टी-20 वर्ल्ड कप में हमें मुंह की खानी पड़ी हमारा का खेल बेहद खराब रहा ..और हम सुपर 8 राउंड का एक भी मुकाबला मुकाबला जीतने में नाकाम रहे ...वहीं सेंट लूसिया के एक पब में ....झगड़े की वजह से 7 भारतीय खिलाड़ियों को बीसीसीआई ने नोटिस भेजा..ये दौर हमारे लिए चिंतन का दौर था....
अभी टी-20 वर्ल्ड कप की हार के जख्म भरे भी नहीं थे ..कि सुरेश रैना की कप्तानी वाली यंग टीम इंडिया जिम्बॉब्बे में बुरी तरह पिट गई .....और भारतीय टीम आलोचको के निशाने पर आ गई .....

हालांकि एशिया कप हमारे तमाम फैंस के लिए जश्न का मौका लेकर आया श्रीलंका में खेले गए इस टूर्नामेंट में टीम इंडिया ने जीत की पताका लहराकर एक बार फिर सबका दिल जीत लिया.....वहीं लंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज को 1-1 से ड्रॉ कराके हमने अपने रिकॉर्ड का बरकरार रखा....जहां इस सीरीज के दूसरे टेस्ट में सचिन के बल्ले से दोहरा शतक निकला वहीं आखिरी टेस्ट में शिरकत करके सचिन ने स्टीव वॉ के सबसे ज्य्दा टेस्ट खेलने के रिकॉर्ड को तोड़ दिया..वॉ के नाम 168 टेस्ट खेलने का रिकॉर्ड था ....मैं मानता हूं ये अपलब्धी हम सबके लिए खास थी ..क्योंकि ड्रेसिंग रूम में सचिन हमारे पास अब दुनिया का सबसे बल्लेबाज भी था....
इसी बीच जब क्रिकेट से ब्रेक मिला तो मैंने अपनी लॉन्ग टाइम गर्लफ्रैंड साक्षी रावत के साथ देहरादून में शादी कर ली ..मैंने अपनी शादी को बेहद गोपनीय रखा..क्योंकि मै जानता था ..कि अगर ऐसा नहीं किया....तो मेरे और साक्षी के परिवार को परेशानी भी हो सकती है ...लेकिन मुझे दुख है कि अपनी शादी में मैं टीम इंडिया के कई सितारे जैसे सचिन और सहवाग को शादी का न्योता नहीं भेज सका...
साल के आखिरी महीने तो हमारे लिए बेहद खास रहे .,.पहले हमने ऑस्ट्रेलिया को बॉर्डर-गावस्कर सीरीज में 2-0 से हराया ..इस सीरीज का पहला टेस्ट बेहद रोमांचक रहा और भारत ने वीवीएस लक्ष्मण की संकटमोचक पारी की बदौलत मोहाली टेस्ट को 1 विकेट से जीत लिया........

इस सीरीज की खास बात ये रही कि लगातार दो टेस्ट में दो शतक लगाकर सचिन तेंदुलकर ने टेस्ट में अपने शतकों की संख्या को 49 तक पहुंचा दिया....... और वो मैन ऑफ द सीरीज भी चुने गए ...

वहीं बारिश से प्रभावित वन डे सीरीज में भी हमने कंगारु टीम की 1-0 से छुट्टी कर दी ....
साल के आईसीसी अवॉर्ड्स में भी हम लोगों की धूम रही ......जहां सचिन पाजी को क्रिकेटर ऑफ द ईयर के अलावा पिपुल च्वाइस अवॉर्ड से नवाजा गया....वहीं विरेंद्र सहवाग टेस्ट प्लेयर ऑफ द इयर चुने गए ..इसके अलावा भारत को टेस्ट टीम ऑफ द इयर भी चुना जाना मेरे और मेरी टीम के लिए गर्व की बात थी..........

वहीं न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में हरभजन सिंह ने लगातार दो शतक लगाकर नंबर आठ बल्लेबाज के तौर पर एक नया रिकॉर्ड कांयम किया मै हमेसा मनता हूं की भज्जी में एक ऑलराउंडर बनने की काबिलियत है...इस सीरीज के पहले दो टेस्ट ड्रॉ रहे लेकिन तीसरा टेस्ट जीतकर हमने इस सीरीज को 1-0 से अपने नाम कर लिया.....मेरे लिए अब वक्त ब्रेक का था....और इसलिए न्यूजीलैंड के खिलाफ वन डे सीरीज में सीनीयर खिलाड़ियों को आराम देते हुए गौतम गंभीर को कप्तानी सौंपी गई ..गंभीर ने पहले दो वन डे में शतक लगाते हुए जहां टेस्ट सीरीज की विफलता को पीछे छोड़ दिया...वहीं सीरीज में किवी टीम का क्लीन स्विप करते हुए ....इतिहास रच दिया.....ये सीरीज हमने ने 5-0 से जीती.....

वहीं मैदान के बाहर मैनें दो बड़ी डील साइन की....यूबी ग्रुप के साथ 26 करोड़ की और मैक्स मोबाइल के साथ 29 करोड़ की.....हालांकि इसी दौरान अमेरिका की प्रतिष्ठित पत्रिका टाइम मैगजीन ने बारतीयखेल प्रेमियों को तोहफा दिया... टाइम ने ग्वालियर में खेली गई सचिन की 200 रनों की पारी को साल के 10 यादगार खेलों के पलों में जगह दी......लेकिन टाम के तौहफे के बाद बारी सचिन के रिटर्न गिफ्ट की थी ..सचिन ने सेंचुरियन में टेस्ट करियर का 50वां शतक लगाकर .....टउस टेस्ट को यादगार बना दिया..कुल मिलाकर ये साल ..टेस्ट में टीम इंडिया की बादशाहत और सचिन के लिए ही जाना जाएगा ..मैं उम्मीद करता हूं कि आने वाले साल में हम ऐसा ही प्रदर्शन करेंगे ....अगले साल वर्ल्ड कप भी है ..और मैं देशवासियों से अपील करता हूं कि वो अपना शुभकामनाएं हमें दें....

महेंद्र सिंह धोनी
कप्तान, टीम इंडिया

गुरुवार, 23 दिसंबर 2010

आईपीएल की नीलामी


इंडियन प्रीमियर लीग [आईपीएल] के वर्ष 2011 में होने वाले चौथे संस्करण के लिए अगले साल आठ और नौ जनवरी को बेंगलूर में होने वाली नीलामी की 416 खिलाड़ियों की प्रारंभिक सूची में 49 भारतीय खिलाड़ी शामिल हैं।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड [बीसीसीआई] ने 10 फ्रेंचाइजी टीमों को कहा है कि वे 24 दिसंबर तक बोर्ड को बताएं कि वे किन खिलाड़ियों में इच्छुक हैं। फ्रेंचाइजी जिन खिलाड़ियों में इच्छुक नहीं होगी उन्हें फिर हटा दिया जाएगा और अंतिम सूची टीमों को भेज दी जाएगी। आईपीएल के तीसरे सीजन में भाग लेने वाली आठ टीमों ने चौथे सीजन के लिए जनवरी में होने वाली नीलामी के लिए केवल 12 खिलाड़ियों को ही अपनी टीमों में बरकरार रखा है।
आईपीएल की प्रत्येक टीम अपने चार खिलाड़ियों को अगले सीजन के लिए टीम में बरकरार रख सकती है और उन खिलाड़ियों को नीलामी की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पडे़गा। आईपीएल की आठों टीमों में से केवल मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स ने अपने चार-चार खिलाड़ियों को टीमों में बरकरार रखा है जबकि राजस्थान रायल्स ने अपने कप्तान शेन वार्न और आस्ट्रेलियाई आलराउंडर शेन वाटसन को टीम में बरकरार रखा है। चेन्नई सुपर किंग्स ने भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धौनी, सुरेश रैना, मुरली विजय और एल्बी मोर्केल को टीम में बरकरार रखा है तथा मुंबई इंडियंस ने मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर और हरभजन सिंह के अलावा दो विदेशी खिलाड़ियों कोरेन पोलार्ड और लसिथ मलिंगा को अपनी टीम में रखा है।
डक्कन चार्जर्स, किंग्स इलेवन पंजाब और कोलकाता नाइट राइडर्स ने चौथे सीजन के लिए एक भी खिलाड़ी को अपनी टीम में बरकरार नहीं रखा है। रायल चैलेंजर्स बेंगलूर ने केवल विराट कोहली को टीम में बरकरार रखा है जबकि दिल्ली डेयरडेविल्स ने केवल वीरेंद्र सहवाग को ही अगले सीजन के लिए टीम में रखा है।
आईपीएल नीलामी के लिए चार लाख डालर के टाप ब्रेकेट में तीन भारतीय खिलाड़ी राहुल द्रविड़, अनिल कुंबले और युवराज सिंह शामिल हैं जबकि तीन लाख डालर के दूसरे ब्रेकेट में दो भारतीय खिलाड़ी जहीर खान और यूसुफ पठान शामिल है।
दो लाख डालर के तीसरे ब्रेकेट में सौरव गांगुली, आशीष नेहरा, इरफान पठान, गौतम गंभीर, वीवीएस लक्ष्मण, आरपी सिंह, रोहित शर्मा, दिनेश कार्तिक, शांतिकुमारन श्रीसंथ, प्रवीण कुमार, ईशांत शर्मा, रोबिन उथप्पा, मुरली कार्तिक और प्रज्ञान ओझा शामिल है।
एक लाख डालर के ब्रैकेट में अजित आगरकर, मोहम्मद कैफ, मुनफ पटेल, रवींदर जडेजा, रमेश पोवार, लक्ष्मीपति बालाजी, पीयूष चावला, वेणुगोपाल राव, पार्थिव पटेल, अमित मिश्रा, अशोक डिंडा, जोगिंदर शर्मा, वसीम जाफर, वीआरवी सिंह, अभिमन्यु मिथुन, रविचंद्रन अश्विन, सुब्रमण्यम बद्रीनाथ, आर. विनय कुमार, शिखर धवन, नमन ओझा, मनोज तिवारी, सौरभ तिवारी, चेतेश्वर पुजारा और रिधिमान साहा को रखा गया है।
50 हजार डालर के ब्रैकेट में सुदीप त्यागी, अभिषेक नायर, उमेश यादव, मनप्रीत गोनी, पंकज सिंह और जयदेव उनादकट शामिल है। भारत के ये सभी खिलाड़ी आईपीएल में खेल चुके हैं। इस प्रारंभिक सूची में भारत के अलावा आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, बाग्लादेश, वेस्टइंडीज और जिंबाब्वे के खिलाड़ी शामिल हैं।

मंगलवार, 21 दिसंबर 2010

365 दिन का एक रूप



एक खेल पत्रकार का दर्द
आपको शायद हैरानी होगी..365 में मौसम भी चार होते हैं...तो फिर इतने दिन का एक रुप कैसे हो सकता है...लेकिन चौकिए मत ...वसीम अब्बासी की ज़िंदगी
इस जुमले को पिछले तीन साल से हकीकत में तदबील करती आ रही है...जिसका अंत करना उपर वाला भी करना भूल गया है...हालांकि ऐसा नहीं है कि वसीम ने कभी 365 दिन को अलग रंग देने
की कोशिश न की है...हर रोज़ ये पगला सुबह 7 बजे यही सोचकर उठता है कि उसे ऑफिस जाने से पहले
थोड़ा ज्यादा वक्त मिल जाए...यहां तक की ऑफ वाले दिन तो खुद को छुट्टी का अहसास कराने के लिए
देर से सौना और जल्दी उठना अब इसकी आदत बन चुका है...लेकिन बावजूद इसके एक दिन भी वसीम की ज़िंदगी में इंद्रधनुष के रंग दिखाई नहीं दिए...दरअसल बात 3 साल पुरानी है...जब वसीम ने S1 को
छोड़कर लाइव इंडिया को ज्वाइन किया...नई सस्थान का हिस्सा बनने पर लगा कि ज़िंदगी में बदलाव आएगा...लेकिन ये बदलाव सिर्फ इतना था कि ऑफिस जाने का रास्ता बदल चुका था...अब जामिया से नोएडा के लिए नहीं बल्कि रामाकष्ण मार्ग के लिए आना पड़ता था...खैर बात 365 दिन के एक रुप की बताना चाहता हूं...वैसे तो हर किसी की ज़िंदगी का हर दिन सुबह के सूरज से शुरू होता है...लेकिन वसीम का हर दिन तब शुरू होता है...जब वो रात को ऑफिस से घर के लिए रवाना होता है...क्योंकि इसी वक्त अपनी बाइक पर सवार वसीम ज़िंदगी को बदलने के सपने देखता है...कई बार तो चलती बाइक पर सपना देखना इसके लिए मौत का पैगाम भी लेकर आया...लेकिन ये अड़ियड़ था कि मानता ही नहीं था...खुली आंख से हर रोज़ देखे जाने वाले सपने इतनी ही देर रहते थे कि जब तक चारपाई पर लेटकर इसकी आंखें बंद न हो जाए...क्योंकि अगले दिन की सुबह का सवेरा फिर इसे ऑफिस जाने की टेंशन दे देता था...उठकरक फ्रैश होना...और चाय वाली की दुकान पर नाश्ता करना...यहां तक की ज़िंदगी के इस एक दिन को बदलने के लिए अब तो चाय वाला भी साथ नहीं देता...पहले तो वो भी पूछ लिया करता था कि सर नाश्ते में क्या लोगो...अब तो वो भी जान गया कि वसीम को नाश्ते में सोमवार को क्या चाहिए...और शनिवार को क्या...लेकिन एक चीज़ तो हल हो जाती है रोज़ाना...चाय की चुस्की ही सबसे पहले वसीम को बताती है क्या शाम को स्पोर्ट्स ट्रैक में क्या क्या लिया जा सकता है...भला हो टाइम्स ऑफ इंडिया का...हफ्ते में कम से कम 5 दिन तो वो लीड स्टोरिज़ बनवाता ही है...लेकिन अब इसमें भी मज़ा नहीं रहा...क्योंकि ये भी अब राज़मर्रा की चीज ही बन गया है...नाश्ते और अखबार पढ़ने के बाद...ऑफिस जाने के वक्त तक मिले खाली वक्त में ज़िंदगी को बदलने की कोशिश में तम्बाकू जैसी खतरनाक चीज की भी लत लग गई...शुरआत के दिनों में तो बड़ा अच्छा लगा...हल्का हल्का नशे का सुरूर कुछ पल के बड़ी राहत देता था...लेकिन इसकी राहत भी कब गायब हो गई..पता ही नहीं चला...और जल्द ही ऐसा लगने लगा कि दांतों को गंदा करने के अलावा ये किसी काम का नहीं...और हो भी क्यों न...किसी ने सही कहा है कि जो चीज आम हो जाती है उसकी तासीर जाती रहती है...बहरहाल जब आदत में शूमार हो गया है तो भला छूट कैसे सकता है...एक यही तो है जो नाश्ते और ऑफिस जाने की दूरियों को खत्म करता है...हालांकि इस बीच किसी दोस्त का फोन आ जाता है...लेकिन इन दोस्तों में भी रूटीन बातों ने पीछा नहीं छोड़ा...क्योंकि गिने चुने दोस्तों में 90 फीसदी फोन पर बातें आईबीएन 7 के स्पोर्ट्स पत्रकार रवीष बिष्ट से ही होती है...हालांकि रवीष से बातें करना अच्छा लगता है...ज़िंदगी बदलने के दर्द को एक वही तो है...जो सुन लेता है...पहले तो उनसे भी बातें स्टोरिज़ को लेकर होती थी...लेकिन जबसे लाइव इंडिया छोड़ा...अब गपशप होती है...ये भी एक बदलाव था...लेकिन अब ये भी चार दिन चांदनी रात वाली बात हो गई है... वही तेरे मेरे ऑफिस की गपशप...वहीं पुरानी बातें ... लड़कियों पर डिस्कशन...ईटीसी...चूकी ये भी रूटीन बन गया है इसलिए इसको भी बयां करना जरूरी है...ऑफिस जाने के बाद भी वही रोजाना पैकेज लिखना एस्टन बनाना और पीसीआर में जाकर रन रोल करना...और हफ्ते में तीन दिन बॉस ऋषभ शर्मा की डांट खाना...हमेशा ही की तरह डांट में 80 फीसदी फॉल्ट किसी और का ही होता... लेकिन सौ फीसदी का डोज मुजे मिलता... और तो और 7 दिन के बाद एक दिन आने वाला ऑफ के दिन ने भी ज़िंदगी को नहीं बदला...अम्मी का ज्यादा फोन आया तो खुर्जा का रुख कर लिया...नहीं तो सारा दिन यही सोच कर निकाल गया कि ऑफ खत्म होने में 10 घंटे बचे हैं...कि अब 5...ज़िंदगी कभी ऑफ के दिन बदलती भी थी...एक लड़की थी...जिसकी अक्ल पर पर्दा पड़ गया था..और वो वसीम पर ना जाने कैसे फिदा हो गई थी...ऑफ का सारा दिन उसी के साथ गुज़रता था...लेकिन वो तो गुज़रे ज़माने की बात हो गई...अब तो उसी यादें भी रुटीन में आकर कहीं खत्म हो गईं...उसके बाद बहुत कोशिश की...शेव बनाकर भी गए...ब्रांडिड कपड़े भी पहने...लेकिन किसी भी लड़की ने वसीम की मुहब्बत को नहीं समझा... और दिन ब दिन गुज़र रहे हैं...और वसीम अब्बासी को मौत के करीब पहुंचा रहे हैं।
वसीम अब्बासी

मंगलवार, 14 दिसंबर 2010

सायना नहीं 'सनसनी सायना' कहो


नई उड़ान है सायना नेहवाल

सायना नेहवाल की हॉगकॉग ओपन सुपर सिरीज़ में ख़िताबी जीत ने एक बार फिर इस युवा खिलाड़ी का दृढ़ निश्चय दिखाया है.इस साल सायना की सुपर सिरीज़ में ये चौथी जीत है. इससे पहले उन्होंने इंडियन ओपन, सिंगापुर ओपन और इंडोनेशियाई ओपन जीता था। सायना ने राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण पदक जीतकर भारत को पदक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुँचाया था।उस फ़ाइनल में सायना पहला गेम हार चुकी थीं. उसके बाद लगातार दो गेम जीतकर स्वर्ण पदक जीतना एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी.
कुछ ऐसा ही करिश्मा सायना ने हॉन्गकॉन्ग ओपन में कर दिखाया. पहला गेम वो 15-21 से हार चुकी थीं.
उसके बाद लगातार दो गेम जीतना और वो भी चीन की प्रतिद्वन्द्वी के विरुद्ध आसान काम नहीं था.
मगर सायना ने फ़ोकस बनाए रखते हुए साल की चौथी सुपर सिरीज़ जीत ली.
सायना की कामयाबी
ये जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले ही महीने चीन के ग्वांगजो में हुए एशियाई खेलों में वह क्वॉर्टर फ़ाइनल में हार गई थीं.
उन्हें वहाँ हॉगकॉग की यिप पुइ यिन ने हराया था. उस दिन सायना कोर्ट पर ठीक से मूव नहीं कर पा रहीं थीं और न ही उनके खेल में वो धार थी.
मैच के बाद बात करते हुए सायना काफ़ी निराश थीं और ऐसा लगा था जैसे वो ख़ुद भी उस हार से दंग थीं.
मगर उस हार से उबरकर एक महीने के भीतर उन्होंने हॉन्गकॉन्ग ओपन सुपर सीरीज़ जीती.
इस टूर्नामेंट में उन्होंने यिप पुइ यिन को भी हराया और न सिर्फ़ हराया बल्कि आसानी से हराया, जैसे यिप का और उनका कोई मुक़ाबला ही नहीं था.
सायना की इससे पहले की ख़िताबी जीतों में ये कहा जाता रहा है कि उनके सामने चीनी प्रतिद्वन्द्वी नहीं पड़ते थे और इसीलिए वह आसानी से जीत हासिल कर लेती थीं.
मगर इस बार फ़ाइनल में उन्होंने वो भी कर दिखाया. चीन की वॉन्ग शिशियान को उन्होंने कड़े मुक़ाबले में मगर बेहतरीन प्रदर्शन के साथ हराया.
इस जीत के साथ सायना में भी एक आत्मविश्वास आएगा कि उनके लिए किसी भी खिलाड़ी को हराना मुश्किल नहीं है.
इसमें बहस की शायद ही गुंजाइश हो कि सायना बैडमिंटन में आज तक की भारत की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के तौर पर उभर रही हैं.
सीखने की उनकी ललक उनसे बातचीत में ही झलकती है जबकि उन्होंने तीनों सुपर सिरीज़ में जीत के बाद हैदराबाद में मुझसे बातचीत करते हुए कहा था कि वो जब भी कोर्ट पर उतरती हैं कुछ नए तरह के शॉट्स सीखना चाहती हैं.
इस पूरी प्रक्रिया में उनके कोच पुलेला गोपीचंद भी हमेशा उनके साथ खड़े नज़र आते हैं जो साइना को लगातार बेहतर बनाने में कोई क़सर छोड़ना नहीं चाहते.
अब साइना की नज़र ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन और ओलंपिक के स्वर्ण पदक पर होगी. अगर इसी प्रतिबद्धता के साथ और पूरी लगन के साथ साइना का अभ्यास जारी रहा तो उनके लिए ये मुक़ाम भी मुश्किल नहीं होंगे.
नंबर वन पर सायना का निशाना
भारत की बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल ने हॉगकॉग ओपन सुपर सिरीज़ प्रतियोगिता जीत ली है.
उन्होंने फ़ाइनल में चीन की वॉग शिशियान को हराया.
इसके साथ ही वो बैंडमिंटन में दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी बन सकती हैं.
आधिकारिक रूप से रैंकिंग की घोषणा बाद की जानी है.
कड़े संघर्ष में सायना ने वांग शिशियान को 15-21, 21-16 और 21-16 से हराया.
सेमीफ़ाइनल में साइना ने जर्मनी की खिलाड़ी जूलियन शेंक को कड़े मुकाबले में 21-19,17-21, 21-12 से हराया था.
इससे पहले क्वार्टर फ़ाइनल में सायना ने एशियाई खेलों में मिली हार का बदला लेते हुए हॉगकॉग की यिप पुइ यिन को 21-11, 21-10 से हराया था और सेमीफ़ाइनल में जगह बनाई थी.
पिछले महीने ग्वांगज़ो में हुए एशियाड में यिप ने सायना को क्वार्टर फ़ाइनल में हराया था.
वैसे साल 2010 साइना के करियर में सबसे बेहतरीन रहा है.

क्रिकेटिंग देशों के बोर्ड का इतिहास








खेल मंत्रालय औऱ बीसीसीआई आमने सामने

मुश्किल में BCCI
ज़रा सोचिए अगर सचिन तेंदुलकर देश के लिए ना खेलकर किसी कंपनी के लिए खेलें... औऱ महेन्द्र सिंह धोनी टीम इंडिया के कप्तान ना होकर सिर्फ... किसी कंपनी के कप्तान हों, तो क्या होगा । चौंकिए मत  क्योंकि अगर बीसीसीआई ने ... जल्द खेल मंत्रालय के साथ समझौता नहीं किया तो... टीम इंडिया देश की टीम ना होकर सिर्फ एक कंपनी की टीम रह जाएगी। दरअसल बीसीसीआई को  खेल मंत्रालय ने एक खत लिखकर ... अपनी शर्तें मानने का नोटिस भेजा है। खेल मंत्रालय चाहता है कि बीसीसीआई भी ... देश के तमाम दूसरे Sports Federations और Associations की तरह ... मंत्रालय द्वारा बनाए गए rules and regulations  औऱ working pattern की guidelines को follow करे। खास बात ये है कि इन निर्देशों को नहीं मानने पर बीसीसीआई के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है ... जिसके तहत खेल मंत्रालय से उसे मिली मान्यता रद्द हो जाएगी।  जिसके बाद BCCI की चुनी हुई टीम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किसी भी टूर्नामेंट में ... देश का प्रतिनिधित्व करने की हकदार नहीं होगी।
BCCI HISTORY
बीसीसीआई का गठन आज़ादी से पहले 1928 में हुआ था ... औऱ तभी से ये संस्था अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का ... क्रिकेट के खेल में प्रतिनिधित्व करती है। हालांकि बीसीसीआई ने कभी भी किसी सरकार से आर्थिक मदद नहीं ली ... लेकिन इसके बावजूद खेल मंत्रालय की बीसीसीआई के लिए खास दलील है। खेल मंत्रालय के मुताबिक
1. बीसीसीआई भारत सरकार के रिकॉर्ड्स में एक National Sports Federations के तौर पर रजिस्टर्ड है। इसीलिए इसकी Parent Body खेल मंत्रालय को ही माना जाएगा।
 
2. सरकारी मान्यता के आधार पर ही बीसीसीआई देश में क्रिकेट के संचालन की monopoly बरकरार रख पाई है।
 
3. बीसीसीआई भी अन्य खेल संघों की तरह सरकार से टैक्स में रियायत लेती है। इसीलिए उसे मंत्रालय के निर्देश मानने ही होंगे।
 
4. किसी भी मैच या टूर्नामेंट के आयोजन के दौरान बीसीसीआई को सरकार से सुरक्षा के लिए पुलिस जैसी मुफ्त सुविधाएं दी जाती हैं।
 
5. Sports Goods के विदेशों से Import में भी बीसीसीआई सरकार से Custom Duty में रियायत हासिल करती है।

मौजूदा वक्त में बीसीसीआई को खेल मंत्रालय की तरफ से मान्यता ज़रूर प्राप्त है ... लेकिन हकीकत में ये मान्यता उसे ब्रिटिश काल में आज़ादी से पहले 1928 में ही मिल गई थी। तब बीसीसीआई को कलकत्ता क्रिकेट क्लब कहा जाता था 2009 तक बीसीसीआई की छवि भी साफ थी ...  लेकिन आईपीएल जैसे commercial event से हुई अरबों की कमाई के बावजूद ... जब बीसीसीआई ने सरकार को टैक्स देने से मना कर दिया ... तो सरकार के तेवर बदल गए। 2009 में पहले सरकार ने आईपीएल की कमाई पर ... टैक्स की रियायतें खत्म कीं ... औऱ बोर्ड को खेल मंत्रालय को अपनी Parent Body मानने के लिए खत लिखा। हालांकि ये बात और है कि महीनों तक बार-बार खत भेजने के बावजूद ... बीसीसीआई इस मुद्दे पर अभी तक चुप्पी लिए हुए है।

खेल मंत्रालय ने बेशक बीसीसीआई को अपनी Guidelines Follow करने के निर्देश देकर ... अपना रूख साफ कर दिया हो ... लेकिन बीसीसीआई भी क्रिकेट की सत्ता को इतनी आसानी से गंवाने के मूड में नहीं है...।  
बीसीसीआई पिछले 2 साल से मंत्रालय के निर्देशों को टालती आ रही है । ताज़ा खत के अलावा आखिरी बार ... बीसीसीआई को खेल मंत्रालय ने 2009 में खत लिखा था ... जिसका आज तक बीसीसीआई ने जवाब नहीं लिखा है। मान्यता के मसले पर बीसीसीआई सरकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए भी पूरी तरह तैयार है।  आजादी के बाद से देश की सरकारें बीसीसीआई के प्रति काफी नर्म रहीं ... 80 के दशक तक देश में क्रिकेट सिर्फ एक खेल था ... और हॉकी औऱ कबड्डी जैसे खेल क्रिकेट के बराबर लोकप्रिय थे। लेकिन 1983 वर्ल्डकप की जीत के बाद ... देश में क्रिकेट की पहचान बदल गई। 2000 आते-आते ये एक धर्म बना ... और 2008 में आईपीएल के बाद पैसा बनाने की फैक्ट्री।

दूसरे क्रिकेट खेलने वाले देशों का इतिहास
ऑस्ट्रेलिया
खेल मंत्रालय की दलील है कि दुनिया भर में ... मौजूद क्रिकेट बोर्ड्स को भी अपने देशों की स्थानीय सरकारों से मान्यता लेनी पड़ती है। हम आपको बताते हैं वर्ल्ड क्रिकेट के कुछ नामी क्रिकेट बोर्ड्स की सच्चाई ... बीसीसीआई के बाद दुनिया का दूसरा सबसे ताकतवर बोर्ड है ...
Cricket Australia ... जिसे Australian Cricket Board भी कहते हैं। इसका गठन 1905 में Australian Public Company limited के नाम से किया गया था। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलियाई सरकार के खेल मंत्रालय की तरफ से मान्यता के अलावा ... तमाम अन्य खेल संघों की तरह रियायतें भी मिली हुई हैं।  क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के किसी भी काम-काज में सरकारी दखल न के बराबर होता है । लेकिन हर दो साल में होने वाले Cricket Australia के अध्यक्ष पद के चुनाव ... सरकारी नियंत्रण में कराए जाते हैं।
साउथ अफ्रीका
वहीं South Africa में क्रिकेट के खेल के लिए काम कर रही गवर्निंग बॉडी Cricket South Africa पर ... अफ्रीकी सरकार का काफी नियंत्रण है। हालांकि ये एक Auto-nomous Body है ... लेकिन साउथ अफ्रीका में नस्लीय भेदभाव यानि काले औऱ सफेद रंग में फर्क को दूर करने के लिए ... इसके working pattern को ... सरकार मान्यता दिलाना आवश्यक होता है।  यहां तक की नियुक्ति के बाद ... Office Bearers और टीम को चुनने वाले Selectors की लिस्ट भी ... सरकार के पास भेजी जाती है।

इंग्लैंड
इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड दुनिया का सबसे पुराना क्रिकेट बोर्ड है ... और 1997 तक ये एक Independent Body के तौर पर ... अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इंग्लैंड का क्रिकेट में प्रतिनिधित्व किया करता था। लेकिन 1997 में इंग्लैंड के House Of Commons में उठी मांग के बाद ... ईसीबी को सरकार से औपचारिक मान्यता लेनी पड़ी।
बीसीसीआई की तरह ईसीबी भी ... इंग्लैंड सरकार से आर्थिक मदद नहीं लेती है। लेकिन ये भी हकीकत है ईसीबी के कामकाज में भी ... इंग्लैंड की सरकार का कोई दखल नहीं है।

पाकिस्तान
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की अगर बात की जाए तो ... पीसीबी तो पूरी तरह से ही पाकिस्तान सरकार के नियंत्रण में चलने वाली संस्था है । पाकिस्तान का राष्ट्रपति पीसीबी का Chief Patron होता है ... इतना ही नहीं पीसीबी के अध्यक्ष की नियुक्ति भी पाकिस्तान का राष्ट्रपति ही करता है। पीसीबी को भी पाकिस्तान में मान्यता के साथ-साथ टैक्स जैसी तमाम रियायतें मिली हैं ... लेकिन उस पर पाकिस्तानी सरकार के खेल मंत्रालय का कोई नियंत्रण नहीं होता।

सोमवार, 13 दिसंबर 2010

अफीकन सफारी पर टीम इंडिया


अफ्रीकन सफारी पर रिकॉर्ड

टीम इंडिया मिशन फाइनल फ्रंटियर के तहत साउथ अफ्रीका से भिड़ने को तैयार है...टेस्ट में बेस्ट माही ब्रिगेड कामयाबी की उड़ान भर रही है.....पहले ऑस्ट्रेलिया....फिर न्यूजीलैंड को रौंदने के बाद अब बारी है....साउथ अफ्रीका की....अफ्रीकन सरजमीं पर जहां टेस्ट की महाटक्कर होगी तो वहीं टीम इंडिया के कई खिलाड़ियों के निशाने पर होगा रिक़ॉर्ड... रिकॉर्ड की रेस में..मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर...दीवार द्रविड़....वीवीएस लक्षमण....कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी...स्टार बल्लेबाज गौतम गंभीर...फिरकी किंग हरभजन सिंह औऱ स्पीड स्टर ईशांत शर्मा शामिल हैं....
सबसे पहले बात सचिन तेंदुलकर की
सचिन के निशाने पर एक नहीं बल्कि दो रिकॉर्ड होंगे... न्यूजीलैंड के खिलाफ मास्टर ब्लास्टर भले ही शतकों के अर्धशतक से चूक गए हों...लेकिन अफ्रीका में सचिन अपने शतकों के अर्धशतक के जश्न मनाने की पूरी तैयारी कर चुके हैं...तो वहीं अफीकन सरजमीं पर सचिन एक हजार रन पूरे करने से सिर्फ 165 रन दूर हैं...सचिन ने अब तक साउथ अफ्रीका में 12 मैच खेलें हैं जिसमें उन्होंने 39.76 की औसत से कुल 835 रन बनाए हैं...सचिन अगर 1000 रन पूरे कर लेते हैं तो वो पहले भारतीय और दुनिया के दूसरे बल्लेबाज बन जाएंगे...इससे पहले इंग्लैंड के वॉली हैमंड ही दक्षिण अफ्रीका में 1000 रनों के आंकड़ें के छू पाए हैं...
द्रविड़ के निशाने पर दो रिकॉर्ड
सचिन के निशाने पर जहां दो रिकॉर्ड हैं... तों वहीं टीम इंडिया की दीवार राहुल द्रविड़ भी दो रिकॉर्ड बनाने की पूरी तैयारी में हैं...द्रविड़ इस सीरीज में 11 रन बनाते ही वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा को पीछे छोड़कर दुनिया में सर्वाधिक टेस्ट रन बनाने वाले खिलाड़ियों की सूची में तीसरे नंबर पर पहुंच जाएंगे।द्रविड़ के नाम पर 147 टेस्ट में 53.31 की औसत से 11,943 रन दर्ज हैं, जो लारा के 11,953 से 10 रन कम हैं। इसके साथ द्रविड़ अगर एक कैच लपकते ही कैचों का दोहरा शतक पूरा करने वाले दुनिया के पहले फील्डर बन जाएंगे।
लक्षमण के निशाने पर रिकॉर्ड
टीम इंडिया की रीढ़ और वेरी वेरी स्पेशल बल्लेबाज लक्षमण के पास भी इस सीरीज में 8 हजार रन पूरा करने का भरपूर मौका होगा...लक्षमण ने अब तक 117 टेस्ट में 47.57 की औसत से 7707 रन बनाए हैं..अगर लक्षमण अफ्रीकर सरजमीं पर 293 रन बनाने में कामयाब हो जाते हैं तो वो 8 हजार टेस्ट रना का आंकड़ा छूने वाले भारत के चौथे औऱ दुनिया के 22वें बल्लेबाज बन जाएंगे...
इसके अलावा कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी और स्टार बल्लेबाज गौतम गंभीर को पास टेस्ट में तीन हजारी बनाने का पूरा मौका होगा ...गंभीर टेस्ट में तीन हजार रनों से जहां 8 रन दूर हैं तो कप्तान धोनी 254 रन दूर हैं...तो वहीं न्यूजीलैंड के खिलाफ दो शतक लगाने वाले हभजन सिंह भी टेस्ट में 2000 रन बनाने वालों के क्लब में शामिल होना चाहेंगे..हरभजन सिंह के नाम अभी तक टेस्ट में 1916 रन दर्ज है..
शतकवीर बनेंगे ईशांत
बल्लेबाज जहां रनों की बरसात कर रिकॉर्ड किंग बनने की तैयारी कर रहें हैं...तो वहीं टीम इंडिया के स्पीड स्टर ईशांत की ख्वाहिश है शतकवीर बनने की...ईशांत टेस्ट मैचौं में 100 विकेट हासिल करने से सिर्फ 17 विकेट दूर हैं...ईशांत अब तक 28 मैचों में 3.42 की बेहतरीन इकॉनमी से कुल 83 विकेट हासिल कर चुके है....टीम इंडिया के लिए ये पहला मौका होगा जब उनके आधे प्लेयर्स के निशाने पर रिकॉर्ड होगा...अब फैंस यही दुआ कर रहे हैं टीम इंडिया की ख्वाहिश पूरी हो..