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खेल से खेल तक

मंगलवार, 14 दिसंबर 2010

सायना नहीं 'सनसनी सायना' कहो


नई उड़ान है सायना नेहवाल

सायना नेहवाल की हॉगकॉग ओपन सुपर सिरीज़ में ख़िताबी जीत ने एक बार फिर इस युवा खिलाड़ी का दृढ़ निश्चय दिखाया है.इस साल सायना की सुपर सिरीज़ में ये चौथी जीत है. इससे पहले उन्होंने इंडियन ओपन, सिंगापुर ओपन और इंडोनेशियाई ओपन जीता था। सायना ने राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण पदक जीतकर भारत को पदक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुँचाया था।उस फ़ाइनल में सायना पहला गेम हार चुकी थीं. उसके बाद लगातार दो गेम जीतकर स्वर्ण पदक जीतना एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी.
कुछ ऐसा ही करिश्मा सायना ने हॉन्गकॉन्ग ओपन में कर दिखाया. पहला गेम वो 15-21 से हार चुकी थीं.
उसके बाद लगातार दो गेम जीतना और वो भी चीन की प्रतिद्वन्द्वी के विरुद्ध आसान काम नहीं था.
मगर सायना ने फ़ोकस बनाए रखते हुए साल की चौथी सुपर सिरीज़ जीत ली.
सायना की कामयाबी
ये जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले ही महीने चीन के ग्वांगजो में हुए एशियाई खेलों में वह क्वॉर्टर फ़ाइनल में हार गई थीं.
उन्हें वहाँ हॉगकॉग की यिप पुइ यिन ने हराया था. उस दिन सायना कोर्ट पर ठीक से मूव नहीं कर पा रहीं थीं और न ही उनके खेल में वो धार थी.
मैच के बाद बात करते हुए सायना काफ़ी निराश थीं और ऐसा लगा था जैसे वो ख़ुद भी उस हार से दंग थीं.
मगर उस हार से उबरकर एक महीने के भीतर उन्होंने हॉन्गकॉन्ग ओपन सुपर सीरीज़ जीती.
इस टूर्नामेंट में उन्होंने यिप पुइ यिन को भी हराया और न सिर्फ़ हराया बल्कि आसानी से हराया, जैसे यिप का और उनका कोई मुक़ाबला ही नहीं था.
सायना की इससे पहले की ख़िताबी जीतों में ये कहा जाता रहा है कि उनके सामने चीनी प्रतिद्वन्द्वी नहीं पड़ते थे और इसीलिए वह आसानी से जीत हासिल कर लेती थीं.
मगर इस बार फ़ाइनल में उन्होंने वो भी कर दिखाया. चीन की वॉन्ग शिशियान को उन्होंने कड़े मुक़ाबले में मगर बेहतरीन प्रदर्शन के साथ हराया.
इस जीत के साथ सायना में भी एक आत्मविश्वास आएगा कि उनके लिए किसी भी खिलाड़ी को हराना मुश्किल नहीं है.
इसमें बहस की शायद ही गुंजाइश हो कि सायना बैडमिंटन में आज तक की भारत की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के तौर पर उभर रही हैं.
सीखने की उनकी ललक उनसे बातचीत में ही झलकती है जबकि उन्होंने तीनों सुपर सिरीज़ में जीत के बाद हैदराबाद में मुझसे बातचीत करते हुए कहा था कि वो जब भी कोर्ट पर उतरती हैं कुछ नए तरह के शॉट्स सीखना चाहती हैं.
इस पूरी प्रक्रिया में उनके कोच पुलेला गोपीचंद भी हमेशा उनके साथ खड़े नज़र आते हैं जो साइना को लगातार बेहतर बनाने में कोई क़सर छोड़ना नहीं चाहते.
अब साइना की नज़र ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन और ओलंपिक के स्वर्ण पदक पर होगी. अगर इसी प्रतिबद्धता के साथ और पूरी लगन के साथ साइना का अभ्यास जारी रहा तो उनके लिए ये मुक़ाम भी मुश्किल नहीं होंगे.
नंबर वन पर सायना का निशाना
भारत की बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल ने हॉगकॉग ओपन सुपर सिरीज़ प्रतियोगिता जीत ली है.
उन्होंने फ़ाइनल में चीन की वॉग शिशियान को हराया.
इसके साथ ही वो बैंडमिंटन में दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी बन सकती हैं.
आधिकारिक रूप से रैंकिंग की घोषणा बाद की जानी है.
कड़े संघर्ष में सायना ने वांग शिशियान को 15-21, 21-16 और 21-16 से हराया.
सेमीफ़ाइनल में साइना ने जर्मनी की खिलाड़ी जूलियन शेंक को कड़े मुकाबले में 21-19,17-21, 21-12 से हराया था.
इससे पहले क्वार्टर फ़ाइनल में सायना ने एशियाई खेलों में मिली हार का बदला लेते हुए हॉगकॉग की यिप पुइ यिन को 21-11, 21-10 से हराया था और सेमीफ़ाइनल में जगह बनाई थी.
पिछले महीने ग्वांगज़ो में हुए एशियाड में यिप ने सायना को क्वार्टर फ़ाइनल में हराया था.
वैसे साल 2010 साइना के करियर में सबसे बेहतरीन रहा है.

क्रिकेटिंग देशों के बोर्ड का इतिहास








खेल मंत्रालय औऱ बीसीसीआई आमने सामने

मुश्किल में BCCI
ज़रा सोचिए अगर सचिन तेंदुलकर देश के लिए ना खेलकर किसी कंपनी के लिए खेलें... औऱ महेन्द्र सिंह धोनी टीम इंडिया के कप्तान ना होकर सिर्फ... किसी कंपनी के कप्तान हों, तो क्या होगा । चौंकिए मत  क्योंकि अगर बीसीसीआई ने ... जल्द खेल मंत्रालय के साथ समझौता नहीं किया तो... टीम इंडिया देश की टीम ना होकर सिर्फ एक कंपनी की टीम रह जाएगी। दरअसल बीसीसीआई को  खेल मंत्रालय ने एक खत लिखकर ... अपनी शर्तें मानने का नोटिस भेजा है। खेल मंत्रालय चाहता है कि बीसीसीआई भी ... देश के तमाम दूसरे Sports Federations और Associations की तरह ... मंत्रालय द्वारा बनाए गए rules and regulations  औऱ working pattern की guidelines को follow करे। खास बात ये है कि इन निर्देशों को नहीं मानने पर बीसीसीआई के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है ... जिसके तहत खेल मंत्रालय से उसे मिली मान्यता रद्द हो जाएगी।  जिसके बाद BCCI की चुनी हुई टीम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किसी भी टूर्नामेंट में ... देश का प्रतिनिधित्व करने की हकदार नहीं होगी।
BCCI HISTORY
बीसीसीआई का गठन आज़ादी से पहले 1928 में हुआ था ... औऱ तभी से ये संस्था अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का ... क्रिकेट के खेल में प्रतिनिधित्व करती है। हालांकि बीसीसीआई ने कभी भी किसी सरकार से आर्थिक मदद नहीं ली ... लेकिन इसके बावजूद खेल मंत्रालय की बीसीसीआई के लिए खास दलील है। खेल मंत्रालय के मुताबिक
1. बीसीसीआई भारत सरकार के रिकॉर्ड्स में एक National Sports Federations के तौर पर रजिस्टर्ड है। इसीलिए इसकी Parent Body खेल मंत्रालय को ही माना जाएगा।
 
2. सरकारी मान्यता के आधार पर ही बीसीसीआई देश में क्रिकेट के संचालन की monopoly बरकरार रख पाई है।
 
3. बीसीसीआई भी अन्य खेल संघों की तरह सरकार से टैक्स में रियायत लेती है। इसीलिए उसे मंत्रालय के निर्देश मानने ही होंगे।
 
4. किसी भी मैच या टूर्नामेंट के आयोजन के दौरान बीसीसीआई को सरकार से सुरक्षा के लिए पुलिस जैसी मुफ्त सुविधाएं दी जाती हैं।
 
5. Sports Goods के विदेशों से Import में भी बीसीसीआई सरकार से Custom Duty में रियायत हासिल करती है।

मौजूदा वक्त में बीसीसीआई को खेल मंत्रालय की तरफ से मान्यता ज़रूर प्राप्त है ... लेकिन हकीकत में ये मान्यता उसे ब्रिटिश काल में आज़ादी से पहले 1928 में ही मिल गई थी। तब बीसीसीआई को कलकत्ता क्रिकेट क्लब कहा जाता था 2009 तक बीसीसीआई की छवि भी साफ थी ...  लेकिन आईपीएल जैसे commercial event से हुई अरबों की कमाई के बावजूद ... जब बीसीसीआई ने सरकार को टैक्स देने से मना कर दिया ... तो सरकार के तेवर बदल गए। 2009 में पहले सरकार ने आईपीएल की कमाई पर ... टैक्स की रियायतें खत्म कीं ... औऱ बोर्ड को खेल मंत्रालय को अपनी Parent Body मानने के लिए खत लिखा। हालांकि ये बात और है कि महीनों तक बार-बार खत भेजने के बावजूद ... बीसीसीआई इस मुद्दे पर अभी तक चुप्पी लिए हुए है।

खेल मंत्रालय ने बेशक बीसीसीआई को अपनी Guidelines Follow करने के निर्देश देकर ... अपना रूख साफ कर दिया हो ... लेकिन बीसीसीआई भी क्रिकेट की सत्ता को इतनी आसानी से गंवाने के मूड में नहीं है...।  
बीसीसीआई पिछले 2 साल से मंत्रालय के निर्देशों को टालती आ रही है । ताज़ा खत के अलावा आखिरी बार ... बीसीसीआई को खेल मंत्रालय ने 2009 में खत लिखा था ... जिसका आज तक बीसीसीआई ने जवाब नहीं लिखा है। मान्यता के मसले पर बीसीसीआई सरकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए भी पूरी तरह तैयार है।  आजादी के बाद से देश की सरकारें बीसीसीआई के प्रति काफी नर्म रहीं ... 80 के दशक तक देश में क्रिकेट सिर्फ एक खेल था ... और हॉकी औऱ कबड्डी जैसे खेल क्रिकेट के बराबर लोकप्रिय थे। लेकिन 1983 वर्ल्डकप की जीत के बाद ... देश में क्रिकेट की पहचान बदल गई। 2000 आते-आते ये एक धर्म बना ... और 2008 में आईपीएल के बाद पैसा बनाने की फैक्ट्री।

दूसरे क्रिकेट खेलने वाले देशों का इतिहास
ऑस्ट्रेलिया
खेल मंत्रालय की दलील है कि दुनिया भर में ... मौजूद क्रिकेट बोर्ड्स को भी अपने देशों की स्थानीय सरकारों से मान्यता लेनी पड़ती है। हम आपको बताते हैं वर्ल्ड क्रिकेट के कुछ नामी क्रिकेट बोर्ड्स की सच्चाई ... बीसीसीआई के बाद दुनिया का दूसरा सबसे ताकतवर बोर्ड है ...
Cricket Australia ... जिसे Australian Cricket Board भी कहते हैं। इसका गठन 1905 में Australian Public Company limited के नाम से किया गया था। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलियाई सरकार के खेल मंत्रालय की तरफ से मान्यता के अलावा ... तमाम अन्य खेल संघों की तरह रियायतें भी मिली हुई हैं।  क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के किसी भी काम-काज में सरकारी दखल न के बराबर होता है । लेकिन हर दो साल में होने वाले Cricket Australia के अध्यक्ष पद के चुनाव ... सरकारी नियंत्रण में कराए जाते हैं।
साउथ अफ्रीका
वहीं South Africa में क्रिकेट के खेल के लिए काम कर रही गवर्निंग बॉडी Cricket South Africa पर ... अफ्रीकी सरकार का काफी नियंत्रण है। हालांकि ये एक Auto-nomous Body है ... लेकिन साउथ अफ्रीका में नस्लीय भेदभाव यानि काले औऱ सफेद रंग में फर्क को दूर करने के लिए ... इसके working pattern को ... सरकार मान्यता दिलाना आवश्यक होता है।  यहां तक की नियुक्ति के बाद ... Office Bearers और टीम को चुनने वाले Selectors की लिस्ट भी ... सरकार के पास भेजी जाती है।

इंग्लैंड
इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड दुनिया का सबसे पुराना क्रिकेट बोर्ड है ... और 1997 तक ये एक Independent Body के तौर पर ... अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इंग्लैंड का क्रिकेट में प्रतिनिधित्व किया करता था। लेकिन 1997 में इंग्लैंड के House Of Commons में उठी मांग के बाद ... ईसीबी को सरकार से औपचारिक मान्यता लेनी पड़ी।
बीसीसीआई की तरह ईसीबी भी ... इंग्लैंड सरकार से आर्थिक मदद नहीं लेती है। लेकिन ये भी हकीकत है ईसीबी के कामकाज में भी ... इंग्लैंड की सरकार का कोई दखल नहीं है।

पाकिस्तान
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की अगर बात की जाए तो ... पीसीबी तो पूरी तरह से ही पाकिस्तान सरकार के नियंत्रण में चलने वाली संस्था है । पाकिस्तान का राष्ट्रपति पीसीबी का Chief Patron होता है ... इतना ही नहीं पीसीबी के अध्यक्ष की नियुक्ति भी पाकिस्तान का राष्ट्रपति ही करता है। पीसीबी को भी पाकिस्तान में मान्यता के साथ-साथ टैक्स जैसी तमाम रियायतें मिली हैं ... लेकिन उस पर पाकिस्तानी सरकार के खेल मंत्रालय का कोई नियंत्रण नहीं होता।

सोमवार, 13 दिसंबर 2010

अफीकन सफारी पर टीम इंडिया


अफ्रीकन सफारी पर रिकॉर्ड

टीम इंडिया मिशन फाइनल फ्रंटियर के तहत साउथ अफ्रीका से भिड़ने को तैयार है...टेस्ट में बेस्ट माही ब्रिगेड कामयाबी की उड़ान भर रही है.....पहले ऑस्ट्रेलिया....फिर न्यूजीलैंड को रौंदने के बाद अब बारी है....साउथ अफ्रीका की....अफ्रीकन सरजमीं पर जहां टेस्ट की महाटक्कर होगी तो वहीं टीम इंडिया के कई खिलाड़ियों के निशाने पर होगा रिक़ॉर्ड... रिकॉर्ड की रेस में..मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर...दीवार द्रविड़....वीवीएस लक्षमण....कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी...स्टार बल्लेबाज गौतम गंभीर...फिरकी किंग हरभजन सिंह औऱ स्पीड स्टर ईशांत शर्मा शामिल हैं....
सबसे पहले बात सचिन तेंदुलकर की
सचिन के निशाने पर एक नहीं बल्कि दो रिकॉर्ड होंगे... न्यूजीलैंड के खिलाफ मास्टर ब्लास्टर भले ही शतकों के अर्धशतक से चूक गए हों...लेकिन अफ्रीका में सचिन अपने शतकों के अर्धशतक के जश्न मनाने की पूरी तैयारी कर चुके हैं...तो वहीं अफीकन सरजमीं पर सचिन एक हजार रन पूरे करने से सिर्फ 165 रन दूर हैं...सचिन ने अब तक साउथ अफ्रीका में 12 मैच खेलें हैं जिसमें उन्होंने 39.76 की औसत से कुल 835 रन बनाए हैं...सचिन अगर 1000 रन पूरे कर लेते हैं तो वो पहले भारतीय और दुनिया के दूसरे बल्लेबाज बन जाएंगे...इससे पहले इंग्लैंड के वॉली हैमंड ही दक्षिण अफ्रीका में 1000 रनों के आंकड़ें के छू पाए हैं...
द्रविड़ के निशाने पर दो रिकॉर्ड
सचिन के निशाने पर जहां दो रिकॉर्ड हैं... तों वहीं टीम इंडिया की दीवार राहुल द्रविड़ भी दो रिकॉर्ड बनाने की पूरी तैयारी में हैं...द्रविड़ इस सीरीज में 11 रन बनाते ही वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा को पीछे छोड़कर दुनिया में सर्वाधिक टेस्ट रन बनाने वाले खिलाड़ियों की सूची में तीसरे नंबर पर पहुंच जाएंगे।द्रविड़ के नाम पर 147 टेस्ट में 53.31 की औसत से 11,943 रन दर्ज हैं, जो लारा के 11,953 से 10 रन कम हैं। इसके साथ द्रविड़ अगर एक कैच लपकते ही कैचों का दोहरा शतक पूरा करने वाले दुनिया के पहले फील्डर बन जाएंगे।
लक्षमण के निशाने पर रिकॉर्ड
टीम इंडिया की रीढ़ और वेरी वेरी स्पेशल बल्लेबाज लक्षमण के पास भी इस सीरीज में 8 हजार रन पूरा करने का भरपूर मौका होगा...लक्षमण ने अब तक 117 टेस्ट में 47.57 की औसत से 7707 रन बनाए हैं..अगर लक्षमण अफ्रीकर सरजमीं पर 293 रन बनाने में कामयाब हो जाते हैं तो वो 8 हजार टेस्ट रना का आंकड़ा छूने वाले भारत के चौथे औऱ दुनिया के 22वें बल्लेबाज बन जाएंगे...
इसके अलावा कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी और स्टार बल्लेबाज गौतम गंभीर को पास टेस्ट में तीन हजारी बनाने का पूरा मौका होगा ...गंभीर टेस्ट में तीन हजार रनों से जहां 8 रन दूर हैं तो कप्तान धोनी 254 रन दूर हैं...तो वहीं न्यूजीलैंड के खिलाफ दो शतक लगाने वाले हभजन सिंह भी टेस्ट में 2000 रन बनाने वालों के क्लब में शामिल होना चाहेंगे..हरभजन सिंह के नाम अभी तक टेस्ट में 1916 रन दर्ज है..
शतकवीर बनेंगे ईशांत
बल्लेबाज जहां रनों की बरसात कर रिकॉर्ड किंग बनने की तैयारी कर रहें हैं...तो वहीं टीम इंडिया के स्पीड स्टर ईशांत की ख्वाहिश है शतकवीर बनने की...ईशांत टेस्ट मैचौं में 100 विकेट हासिल करने से सिर्फ 17 विकेट दूर हैं...ईशांत अब तक 28 मैचों में 3.42 की बेहतरीन इकॉनमी से कुल 83 विकेट हासिल कर चुके है....टीम इंडिया के लिए ये पहला मौका होगा जब उनके आधे प्लेयर्स के निशाने पर रिकॉर्ड होगा...अब फैंस यही दुआ कर रहे हैं टीम इंडिया की ख्वाहिश पूरी हो..

शनिवार, 30 अक्टूबर 2010

वेस्टइंडीज़ एक इम्तिहान एक चैलेंज पार्ट-4



वेस्टइंडीज़ एक इम्तिहान एक चैलेंज पार्ट-4

वो ऐतिहासिक रात......


सेंट लूशिया में ...मैच कवरेज के दौरान एक बार फिर रवि , जिग्नेश और भवेश मिल गए ....(जो बारबाडोस में मिले थे....) हमें तो भारत की हर जीत या हार पर कमेंट करने वाले भारतीय चाहिए होते थे ..फीड भी जल्दी भेजनी होती थी ..इसलिए रोज उनको पकड़ लेते थे .......उन्हे क्रिकेट का अच्छा ज्ञान
भी था .....दोस्ती इतनी गहरी हो गई ..कि हमने उनके लंदन के नंबर भी ले लिए...वर्ल्ड कप में भारत का प्रदर्शन बेदह खराब रहा ...और धोनी की टीम वर्ल्ड कप से बाहर हो गई ..आधे जर्नालिस्ट ने सोचा ..कि अब वापसी करना ही बेहतर है.....क्योंकि फाइनल 6 दिन बाद था ......जिनकी प्लाइट बाद की थी ...उन्होंने सोचा कि क्यों ना पार्टी की जाए ..भारतीय टीम के होटल के करीब एक भारतीय रेस्टोरेट था ...राजमाताज ..सबने फैसला किया कि आज रात की पार्टी वहीं मनाई जाएगी ....हमें भी बुला लिया गया......मैं और मेरे कैमरापर्सन ..वाइन नहीं लेते थे ..इसलिए हम कोक पर ही खुश थे .... जाम पर जाम टकरा रहे थे ..क्योंकि खाने का किसी का मूड
नहीं था .....रात के करीब 10:30 बजे जिग्नेश मेरे पास आया ..और बोला ..कि बगल के बार में खिलाड़ियों का झगड़ा हुआ है....और एक फैन ने आशीष नेहरा कि शर्ट फाड़ने की कोशिश की ........इतना बोलते ही वो वहां से भाग गया...सबने सुना ..और बोले क्या बकवास करते हैं लोग.......खाना आ चुका था ..और हम लोग खाने पर टूट पड़े ..तभी मुझे ध्यान आया..कि जिग्नेश कुछ बोलकर गया है ..मैंने फौरन ...ऑफिस फोन लगाया ...और अपने
सीनीयर ऋषभ शर्मा को इसकी जानकारी दी ....जिग्नेश कहां है मुझे नहीं पता था..... इसी खबर पर सुबह के बुलेटिन में मेरा फोनो चलने लगा ..तभी मैंने एक बार फिर जिग्नेश , रवी और भवेश को ..सड़क पर देखा ..मैं भागते -भागते उनके पास गया ..और उनको फोन पर ले लिया.......इसके बाद मुझे ऋषभ भाई का फोन आया कि ये तुम्हारी जिंदगी की सबसे बड़ी स्टोरी हो सकती है ..इसलिए आई विटनेस्स की बाइट......बार ( टकिला जोस) का
वॉक थ्रू ..और बार मालिक की बाइट करो.....हमने होटल का बिल चुकाया..और भागते भागते होटल पहुंचे...रात के 12 बज चुके थे .....वापस जाने के लिए कोई टैक्सी नहीं मिली ...मुझे भारत से दूसरे चैनल्स के कॉल आने लगे.....मैंने फोन उठाना बंद कर दिया.......लेकिन इतनी रात कौन आईविटनेस मिलता......संयोग से .....रवी का लंदन वाला नंबर लग गया...मैंने उसको कहा कि मैं होटल आ रहा हूं ..तुम लोगों की बाइट लेनी है...होटल की मर्सिडिस
लेकर मैं उनके पास पहुंचा ... और उनसे पूरा झगड़े की आंखोंदेखी ली.....इसके बाद ....पैदल ही टकिला जोएस जाकर ..बार ओनर की बाइट रिकॉर्ड की ..जिसमें उसने झगड़े की बात कबूली.....अभी मैं बार का वॉक थ्रू कर ही रहा था ...कि कुच और फैंस ने आकर बताया कि ...वो भी झगड़े के दौरान वहीं मौजूद थे....उन्होने मुझे फोटो भी दिखाई लेकिन देने से इंकार कर दिया.....मैंने उनकी बाइट भी रिकॉर्ड कर ली......इसके बादज हम अपने होटल
आए...लेकिन कमरे का नेट डाउन था ...हमे रिसेप्शन पहुंचे...सारी लाइट्स ऑन की ..रात के 2 बज चुके थे ..स्पीड बहुत कम थी.....फिर भी कैप्चर करके भेजने की कोशिश की ..टेंशन बढ़ता जा रहा था....किसी तरह से नेट ठीक हो गया......और फीड जाने लगी ...उसके बाद ...हम अपने कमने में सोने के लिए पहुंचे...लेकिन तब तक खबर इतनी बड़ी हो चुकी थी ..कि मैं सारी रात सो ही नहीं पाया......हर बुलेटेन में फोनों चल रहा था ..और दूसरे
चैनल्स से भी फोन पर फोन आ रहे थे......सुबह हमारे चेनल के सीईओ सुधीर जी ने फोन करके मुबारक बाद दी ..तो लगा ..कि सचमें ही कुछ कर दिया है ...इतने मेल आ रहे जिसमें तारिफों के पुल बंधे थे ....इस दौरान जब मैं ..एक बार फिर टकिला जोएस पहुंचा तो वहां सारे पत्रकार मौजूद थे .....वो मुझे घूर रहे थे और किसी ने भी हैलो तक नहीं कहा .......बाद में पता लगा कि उन्होंने हमारा बॉयकॉट कर दिया है ..और अब वो......इस स्टोरी के खिलाफ
नेगेटिव स्टोरी चलाएंगे .......मैं थोड़ा नर्वस हो गया....लेकिन मन में विश्वास था ..कि सब ठीक हो जएगा......इस इरादे के साथ मैं फिर अपने काम में मस्त हो गया..... हम हर मौके पर मौजूद होते थे इसलिए किसी ट्रांसफर की जरुरत नहीं पड़ी ..जिसको चाहिए होता था ..वो हमसे ही लेता था ..वेस्टइंडिज
छोड़ने के बाद जब मैं लंदन पहुंचा ..तो एयरपोर्ट में मुझे नवभारत टाइम्स मिला..जिसके फ्रंट पेज पर लिखा था....7 भारतीय खिलाड़ियों को नोटिस..ये मेरी खबर पर मोहर लगने जैसा था ...मैं अखबार को उठाकर ...प्लेन में दौड़ने लगा .....सब लोग मुझे देख रहे थे ....एक पैसेंजर ने पूछा -क्या हुआ ......मैंने
कहा... कुछ नहीं .... बस आज खुद को सलाम करने का मन कर रहा है.........

वेस्टइंडीज़ एक इम्तिहान एक चैलेंज पार्ट-3



वेस्टइंडीज़ एक इम्तिहान एक चैलेंज पार्ट-3



वेस्टइंडीज़ एक इम्तिहान एक चैलेंज पार्ट-3
बारबाडोस पहुंचे ..तो रेसोर्ट में एंट्री ली ..समुद्र के क्या शानदार रिसोर्ट था...बेहद खूबसूरत ...रिसोर्ट में हर चीज़ थी ...आप अपनी फैमिली ...को लेकर यहां आ सकते हैं...हनीमून के लिए तो ..इससे बढिया जगह शायद ना मिले....
किचन में कुकिंग का सारा सामान था.....हमें लगा बाहर खाने की झंझट भी खत्म.....अगले दिन भारतीय टीम को बारबाडोस आना था ....हमने टैक्सी बुक की ...और एयरपोर्ट जाने लगे....रास्ते में ड्राइवर ने हमें बताया कि एयरपोर्ट के पास मैल्कम मार्शल की कब्र हैं ..और कब्र के पास बने चर्च से मार्शल का पुराना नाता था इसलिए उसे वहीं दफनाया गया....मैंने.ड्राइवर से कहा कि मुझे वहीं जाना है ..जीतू भाई के बेहतरीन कैमरा वर्क से मैंने उस दिन
का स्टोरी की ...और बाद में एयरपोर्ट पहुंचा....टीम गाडी में आई और निकल गई ...बस यही एक शॉट मिला ..लेकिन मार्शल की स्टोरी ऑफिस में सबको पसंद आई ...उसे स्पोर्ट्स टीम ने बहुत बढ़िया एडिट कराया था....इसके अगले दिन मैंने टीम होटल का रुख किया...जहां वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने तमाम टीम आई थी.....खुद को ट्यूरिस्ट बताकर हम होटल में घुसे ..लेकिन कोई खिलाड़ी नहीं दिखा...हां लंदन से आए कुछ भारतीय होटल से सटे बीच
में क्रिकेट खेल रहे थे ....मुंझे नहीं पता कि जिन लोगों से मैं मिलने जा रही हूं ..वो इस टूउर में मेरे लिए सबसे अहम साबित होंगे ..और शायद मैं उन्हे कभी नहीं भूल पाउंगा.......रवि, भवेश ...और जिग्नेश के साथ क्रिकेट खेलकर मैंने बीच क्रिकेट की स्टोरी तो कर ली ...लेकिन अभी इन तीनों के जरिए मेरा
मास्टर स्ट्रोक बाकी था....हम रोज़ टीम इंडिया की प्रैक्टिस को कवर करने के बाद....टीम होटल आते ..और रोज किसी ना किसी टीम के नहाने के शाट्स जरुर लेते .....बिलकुल पापाराजी( वो पत्रकार जो लोगों की निजी तस्वीरें उतारते हैं) हो गए थे...खैर बारबाडोस से हमें फिर सेंट लूशिया जाना था ..और
नेट पर सस्ते दामों पर एक ही होटल मिला ...हमने फोन पर वही बुक करा लिया......सेंट लूशिया पहुंचने पर पता चला कि ..ये होटल ...30 मील की दूरी पर पहाड़ों में है......और वहां से स्टेडियम पहुंचने में 2 घंटे लग जाएंगे .....कैंसेंल कर नही सकते थे ..क्योंकि 120 डॉलर जाते .....जीतू भाई बेहद नाराज
थे कि मैंने क्या कर दिया...मुझे खुद अफसोस हो रहा था ..लेकिन क्या करता ......हां मैनें उस होटल की दो दिन की बुकिंग को कैंसल कर सिर्फ एक दिन का कर दिया.......और एयरपोर्ट पर मौजूद अधिकारियों ने हमारे लिए स्टेडियम के पास ..एक होटल भी बुक करा दिया........हम पहाड़ी वाले रास्ते से उस होटल में पहुंचे...मुझे रास्ते में उल्टी भी आ गई ..हालत खराब हो गई थी ..सोच रहा था कि ये मैंने क्या कर दिया.....फिर भी उस होटल में पहुंचकर
मुझे पता लगा कि ...कि जिसे मैं अपनी बेवाकूफी समझ रहा हूं..वो मेरे लिए लाइफटाइम चांस बनने वाला है ....दुनिया का एकमात्र ड्राइव-इन ज्वालामुखी (ला सूफियरे) मेरी नजरों के सामने था ..और होटल से सिर्फ 10 मिनट की दूरी पर ...सुबह होते ही हम वहां पहुंच गए .....एक रोमांचित कर देने वाली जगह ...सिर्फ सुना था ..देखा पहली बार ....पहाड़ से निकलता लावा........हर तरफ धुंआ ही धुंआ.....मेरे मुंह से निकला क्या स्टोरी है ब़ॉस......इसके बाद बॉटनिकल गार्डन गए ..जहां वेस्टइंडिज से मिलने वाले हर फूल मौजूद थे.......दो बेहतरीन स्टोरी करने के बाद ......अब मूड सोने का था ..और ला सूफियरे को अलविदा कहने का .......वहां से लौट कर मैं बहुंत खुश था ..रास्ते में समुद्र पड़ा ..जिसमें एक बड़ा क्रूजर खड़ा था.......मैंने गाड़ी रुकवाकर
..फोटो खिंचवाई ..और हम अपने नए होटल में पहुंच गए....

वेस्टइंडीज़ एक इम्तिहान एक चैलेंज पार्ट-2



वेस्टइंडीज़ एक इम्तिहान एक चैलेंज पार्ट-2



वेस्टइंडिज की यात्रा मेरी जिंदगी की पहली हवाई यात्रा थी इसलिए मन में काफी डर था ..लेकिन जैसे ही जहाज में बैठा...कुछ रोमांचित सा लगने लगा ..जहांज ने टेक ऑफ किया ...तो रोमांच की सारी सीमाएं ही टूट गई.......ऐसा लगा कि ...कि दुनिया कितनी छोटी है ........विंडो सीट से तो नजारा ही अद्भुत था.....सब कुछ छोटा होता जा रहा था......सिर्फ लाइटें नजर आ रही थी ....और कुछ मिनटों की यात्रा के बाद ......हम कब पाकिस्तान पहुंच गए
पता ही नहीं लगा ....हम बादलों के उपर आ गए थे.....और इसके बाद तो ..मैंने नीचे देखना ही छोड़ दिया... यात्रा के साथ साथ समय भी बदल रहा था .और देखते ही देखते हम दुबई पहुंच चुके थे ....यहां से हमें लंदन की उड़ान भरनी थी .......दुबई एक शानदार जगह है .....रेगिस्तान के बीच बिलकुल
महल से लगता हैं....सड़के चौड़ी-चौड़ी ..और एयरपोर्ट एकदम भव्य....लेकिन लंदन तो जन्नत जैसा था ...साफ सफाई ...हरियाली...और वातावरण में ठंड....लंदन तक का सफर एमिरेट्स से कटा था ..इसलिए कोई खास परेशानी नहीं हुई ...क्योंकि सुविधाएं भी अच्छी थी ..और एयरहोस्टेस्स भी ( हाहाहा)
खैर लंदन से हमें बारबाडोस जाना था ...लेकिन ब्रिटिश एयरवेज ने हमारे सामान को एक्सट्रा लगेज करार दे दिया और हमें 70 डॉलर भरने को कहा गया......हमने अपना ट्रैवल कार्ड का इस्तेमाल करना चाहा ..तो उसने भी धोखा दे दिया.......एटीएम मशीन ने कार्ड को स्वीकार करने से इंकार कर दिया.....हमारे फोन भी बंद थे.....इसके बाद अपनी जेब से पैसा भरने के अलावा कोई चारा नहीं रह गया ..मैंने और जीतू भाई ने अपनी पर्सनल मनी को
वहां जमा करा दिया ....और ब्रिटिश एयरवोज की फ्लाइट में सवार हो गए.....
ये सफर मेरे लिए काफी कष्टकारी रहा ..क्योंकि ...मैं एक शाकाहारी इंसान हूं...और ब्रिटिश एयरवेज का नियम है कि शाकाहारी खाने के लिए पहले से लिखना होता है .......इसलिए अब मुझे ...ये सफर भूखे ही बिताना था ....हां ये एयरलाइन उन लोगों के लिए बिलकुल फिट है ...जो वाइन का मजा लेना
चाहते हैं ..दुर्भाग्यवश मैंने ऐसा कोई शौक नहीं पाला था ...इसिलए मुझे तो कॉफी और चॉकलेट से ही पूरा हवाई रास्ता तय करना पड़ा........जब हम बारबाडोस पहुंचे तो मैं हैरान रह गया कि ..ऐसा भी कोई एयरपोर्ट हो सकता है..बिलकुछ खाली ...खुला खुला सा...... लग रहा था ..कि हम अलग ही
दुनिया में आ गए हैं.... ....भारत का पहला मैच सेंट लूशिया( वेस्टइंडीज का एक अलग आइलैंड) में था .....इसलिए हमें ...बारबाडोस से भी आगे जाना
था ...मेरे साथ ट्रैजिडी ये थी ...कि अपना ना ..होटल बुक था ..और ना ही टूर्नामेंट के लिए इंटरनल फ्लाइट्स......फिर भी मैं ..पासपोर्ट के साथ अभी सिक्योरिटी क्लिरेंस के लिए रुका ही था ..कि किसी ने मुझे आवाज दी ......मुझे लगा कि यहां मुझे कौन जानता है ......तो देखा हर्षा भोगले थे ......मेरे लिए हर्षा इसलिए खास हैं क्योंकि मैंने अपने करियर की शुरुआत उन्ही के क्विज शो से की थी ....अब हर्षा भी हमारे साथ हो लिए ..और हम लोग
एयरपोर्ट पर क्रिकेट की बातें करने लगे .......इसी दौरान टाइम्स नाउ के बोरिया मजूमदार भी वहां पहुंच गए .......और हमारा अच्छा कास टाइम पास होने लगा ..अचानक बोरिया ने मुझसे पूछा ..कि ..क्या मैंने होटल और इंटरनल प्लाइट बुक करा लिए हैं....एक पल के लिए मानो मेरी धड़कन रुक गई ....मैंने झूठ में हां कह दिया......उसने कहा - "अच्छा किया ..क्योंकि अब नहीं मिलने वाली ..सब फुल हो चुकी है ......." मेरे तो पैरों तले धरती ही खिसक गई फिर भी मैनें...दिल पे हाथ रखा और कहा ..ऑल इज वेल.....
सेंट लूशिया में हमने अपने रहने के इंतजाम की बात इंडिया टीवी के सीनियर रिपोर्टर ..रोहित विश्वकर्मा से की थी ....इसलिए वहां पहुंचते ही ...उन्हें कॉल किया...रोहित इतने अच्छे इंसान थे ..कि उन्होंने एक टैक्सी ड्राइवर को एयरपोर्ट पहले से ही भेजा हुआ था....लेकिन मैंने ..पहले इंटरनल टिकट बुक कराना जरूरी समझा.....मैच के आगे-पीछे की डेट के साथ ..हमें बुकिंग मिल गई ...लेकिन किस्मत इतनी खराब थी कि एयरपोर्ट का एटीएम ही खराब
था ...इसलिए टिकट यहां भी कन्फर्म नहीं हो सकी....खैर हम अपने होटल पहुंचे....और 10 मिनट की दूरी के लिए 30 डॉलर देते ही मुझे अहसास हो गया ...कि वेस्टइंडीज़ कितना मंहगा है.....रूम अच्छा था ...नेट का कनेक्शन भी था ..और हमने सिर्फ चिप्स खाकर सोना ही बेहतर समझा...सुबह नींद जल्दी खुल गई.....हमने सोचा कि सबसे पहले ...सिम ...प्लग सॉकेट...और डाटा कार्ड खरीद लें.....साथ ही हमें एयर टिकट भी बुक करानी
थी........हमारा ट्रैवल कार्ड चलने लगा था ..और हमने अपनी एयरटिकट बुक करा ली ...इसके बाद हम ..सेंट लूशिया के स्टेडियम पहुंचे ....और वहां पर पिच के बॉक थ्रू ..के अलावा अफगानिस्तान के खिलाड़ियों का इंटरव्यू भी किया.....भारतीय टीम दूसरी जगह प्रैक्टिस कर रही थी ...भारत के तमाम पत्रकार वहीं थे ......हम भी वहां पहुंच गए .....बाकी पत्रकार हमें हैरानी से देख रहे थे....कि लो ये लाइव इंडिया वाले भी यहां आ गए.....उनका नजरिया
हमारी तरफ बिलकुल अच्छा नहीं था.....मुझे सबकुछ अजीब लग रहा था.....मन कर रहा था ..कि वापस भारत आ जाऊं ......ये मेरे बस की चीज़ नहीं है ...फिर लगा ....कि अगर इतनी जल्दी हार मान ली ..तो खुद को माफ नहीं कर पाउंगा....दिन बीतते जा रहे थे ....और हम रोज दिन गिनते थे ..कि एक एक दिन और कम हो गया......अब हम जल्द भारत लौट आएंगे .....सेंट लूशिया में खाने की बहुत दिक्कत हो रही थी ..रोज रात को भारत से ले गई मैगी खाकर हम बोर हो चुके थे ..पर कुछ खा नहीं सकते थे ....क्योंकि पैसे खत्म हो जाने का डर
था ....इसलिए हम रोज रात को स्टेडियम से पानी की बोतल लेकर आते थे .....क्योंकि वहां मिनरल वॉटर भी 3 यूएस डॉलर का मिलता था ...थक हारकर मुझे अंडा भी खाना पड़ा लेकिन जब 4 अंडों का बिल 48 डॉलर आया ..तो हमें लगा कि अब कुछ और ही सोचना पडेगा ....सेंट लूशिया में भारत ने एक आसान मैच जीता ....औमर अब टीम इंडिया का अगला पड़ाव ....बारबाडोस था .....हमारी बुकिंग मैच के दिन की थी ...लेकिन अचानक फोन पर पता चला कि ... ....एक दिन पहले कि 2 सीटे खाली है ......यहां तक कि बारबाडोस में हमें होटल भी मिल गया....वो भी
ठीकठाक दामों पर .....रास्ता साफ था ....और भगवान हमारे साथ....

शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2010

एशियाड की नजर में भारत


एशियाड के इतिहास के आइने में भारत


जापान के टोक्यो में 1958 में खेले गए तीसरे एशियाई खेलों में पहली बार हाकी को शामिल किया गया, जब भारत और पाकिस्तान के बीच फाइनल मुकाबला ड्रा रहने के बावजूद गोल औसत में पिछड़ने के कारण बलबीर सिंह सीनियर की कप्तानी वाली भारतीय टीम को रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा।

दक्षिण कोरिया के खिलाफ 2-1 से जीत दर्ज करने वाली भारतीय टीम गोल औसत में पाकिस्तान से पिछड़ गई। फाइनल मैच गोल-रहित ड्रा रहा लेकिन पाकिस्तान को बेहतर गोल औसत के आधार पर स्वर्ण पदक मिल गया। इन खेलों में भारत का जलवा एक बार फिर ट्रैक और फील्ड पर दिखा। फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह के लिए यह साल बेहतरीन था और कार्डिफ राष्ट्रमंडल खेलों के साथ एशियाड में भी उन्होंने सोना बटोरा। पुरुषों की 200 मीटर और 400 मीटर दौड़ क्रम से 21.6 और 47 सेकंड में पूरी करने वाले मिल्खा ने स्वर्ण पदक जीता। भारत की झोली में आए पांचों स्वर्ण पदक एथलेटिक्स से ही थे। इसके अलावा भारत ने 1958 एशियाड में चार रजत और चार कांस्य समेत 13 पदक अपने नाम किए।

त्रिकूद में मोहिंदर सिंह गिल ने 15.62 मीटर की दूरी तय करके स्वर्ण पदक जीता तो गोलाफेंक में प्रदुम्न सिंह [15.04 मीटर] ने बाजी मारी। चक्काफेंक में बलकार सिंह 47.66 मीटर के साथ पहले स्थान पर रहे।

महिलाएं भी पदक जीतने के मामले में पीछे नहीं रही। स्टेफी डिसूजा ने 200 मीटर दौड़ में रजत पदक हासिल किया जबकि भालाफेंक में एलिजाबेथ डेवनपोर्ट ने दूसरा स्थान हासिल किया। महिलाओं की चार गुणा 100 मीटर रिले टीम ने कांस्य पदक अपने नाम किया। भारत को एथलेटिक्स में पांच स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदक मिले। मुक्केबाजी में भी भारतीयों का प्रदर्शन अच्छा रहा। लाइटवेट [60 किलो] वर्ग में सुंदर राव को कांस्य पदक मिला। वहीं मिडिलवेट [75 किलो] में हरि सिंह ने चांदी का तमगा जीता। फुटबाल में भारत पदक से चूककर चौथे स्थान पर रहा। ग्रुप चरण में भारतीय टीम दूसरे स्थान पर रही। क्वार्टर फाइनल में उसने हांगकांग को 5-2 से हराया जबकि सेमीफाइनल में कोरिया से 1-3 से हार गया। कांस्य पदक के लिए प्लेआफ मुकाबले में भारत को इंडोनेशिया के हाथों 1-4 से पराजय का सामना करना पड़ा।