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खेल से खेल तक

बुधवार, 19 जनवरी 2011

लारा नहीं बाबा ऑक्टोपस पॉल कहो


लारा करेंगे भविष्यवाणी

क्रिकेट के महाकुंभ से पहले हुई है सबसे बड़ी भविष्यवाणी । वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा ने किया है ऐलान कि टीम इंडिया ही रचेगी साल 2011 में इतिहास ।
ये बातें हकीकत में कितनी बदलती है ये तो वक्त बताएगा लेकिन आईपीएल में नहीं बिके लारा अब नई भूमिका में दिखने वाले हैं.। जी हां लारा अब बाबा ऑक्टोपस पॉल की भूमिका में फीवर 2011 यानि क्रिकेट के सबसे बड़े महाकुंभ वर्ल्ड कप में अपनी भविष्यवाणी से सबका ध्यान अपनी ओर खीचेंगे।पूर्व कैरेबियाई कप्तान और कभी वर्ल्ड क्रिकेट पर राज करने वाले...वेस्टइंडीज़ के पूर्व बल्लेबाज़ ब्रायन चार्ल्स लारा ने...बिना किसी हिचक के साफ ऐलान कर दिया है...कि वर्ल्ड कप 2011 में अगर किसी टीम की तूती बोलेगी....तो वो सिर्फ और सिर्फ टीम इंडिया ही होगी लारा इस बात से भली भांति वाकिफ हैं...कि एशियन सबकॉन्टिनेंट...खासकर भारतीय पिचों पर टीम इंडिया के खिलाफ मोर्चा खोलना...विरोधी टीमों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा... फिर चाहे डिफेंडिंग चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया...इनफॉर्म इंग्लैंड...साउथ अफ्रीका या फिर खुद कैरेबियाई टीम वेस्टइंडीज़ ही क्यों ना हो..
लारा वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया की जीत का दावा कर रहे हैं...तो इसके पीछे वो सिर्फ टीम इंडिया के दमदार खेल को ही वजह नहीं बता रहे.। लारा के मुताबिक...वर्ल्ड कप 2011 का खिताब भारत की झोली में आएगा..और इस कारनामे को अंजाम देगा..क्रिकेट का भगवान...सचिन रमेश तेंदुलकर...जो खुद लारा के भी भगवान हैं.।लारा ने क्रिकेट के सबसे बड़े महाकुंभ से पहले...भारत के जीत की भविष्यवाणी कर...टीम इंडिया को तो खुश किया ही है....साथ ही उन्होंने क्रिकेट क्रेज़ी इस देश के करोड़ों फैंस को भी अपना दीवाना बना लिया है।

 
 
 
 

धोनी का Survival Plan


करनी होगी एक नई शुरूआत

धोनी के इन अल्फाज़ ने टीम इंडिया के रणबांकुरों में ऐसा जोश भरा कि..केपटाउन में प्रोटियाज मेन इन ब्लूज के कदमों में नजर आई...वर्ल्ड कप की ड्रीम टीम का सेलेक्शन होने के बाद...माही के मतवालों पर बेहतरीन प्रदर्शन का दवाब भी था...लेकिन धोनी के एक प्लान ने साउथ अफ्रीका पर बैक टू बैक 2 वनडे में  रोमांचक जीत हासिल कर सबको चौका दिया...
दरअसल धोनी ने... डरबन वनडे में 135 रनों से मिली करारी शिकस्त के बाद...टीम इंडिया की जीत के लिए बनाया था...एक survival plan...एक ऐसा प्लान जिसका भविष्य खुद धोनी को भी पता नहीं था....डरबन वनडे में मिली शर्मनाक हार से टीम इंडिया की वर्ल्ड कप  की तैयारियों पर क्रिकेट पंडितों के साथ साथ फैंस ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए थे....जो कि  कैप्टन कूल को कतई बर्दाश्त नहीं था....और धोनी ने अपने  survival plan के तहत अनहोनी को होनी करने की ठान ली...survival Plan...के जरिए टीम इंडिया को पुरानी लय पाने के साथ साथ फैंस का भरोसा भी हासिल करना था...धोनी के 11 सूरमाओं ने survival Plan के तहत पहले जोहानिसबर्ग की जंग को अपने नाम किया....फिर आई केपटाउन की बारी...जिसमें धोनी की आर्मी ब्रिगेड छोटा लक्ष्य पाने के बावजूद बिखर रही थी....बल्लेबाजों ने केपटाउन में ऐसा करिश्मा किया कि...जिसमें स्मिथ एंड कंपनी का गणित गड़बड़ा गया....जोहानिस बर्ग के बाद केपटाउन में भी आखिर वो लम्हा आया जब survival Plan ने अपनी मंजिल तक का सफर रोमांचक तरीके से पूरा कर लिया...बहरहाल धोनी के अनोखे प्लान के सामने प्रोटियाज बार बार ढ़ेर हो रहे ही..अब तो फैंस को यही उम्मीद है कि सीरीज में बचे दोनों वनडे में जीत हासिल कर धोनी वर्ल्ड कप की तैयारियों का पुख्ता सबूत पेश करेगें...क्योंकि फीवर 2011 का चैंपियन बनना है तो survival Plan पर भरोसा करना ही होगा...

स्पोर्ट्स खबर

मंगलवार, 11 जनवरी 2011

फंस गए ओबामा नहीं, फंस गए रवीश !

IBN7 की स्पोर्ट्स डेस्क पर बैठे ..एक इंटर्न ने मुझसे पूछा कि ...सर आप क्या पहले से ही रिपोर्टर बनना चाहते थे.....मुझे समझ नहीं आया कि मैं क्या जवाब दूं..फिर भी मैंने ... हां कहते हुए सिर हिला दिया......तो उसका अगला सवाल था ..कि आपने कब इसके बारे में सोचा .....उसका ये सवाल सुनते ही मैंने अपने होंठ दबा लिए ..और मैं सीधे ...अपने बचपन में पहुंच गया.....मेरी बड़ी दीदी ने मेरा नाम रवीश इसलिए रखा ..क्योंकि .....जब स्कॉवड्रन लीडर राकेश शर्मा चांद पर गए थे..तो उस मिशन के विंग कमांडर रवीश मलहोत्रा थे ...क्योंकि राकेश मेरे बड़े भाई का नाम था ..इसलिए मेरा नाम रवीश रख दिया गया....और मुझे बचपन से ही ये बताया गया कि जब कोई पूछे कि क्या बनना है ..तो मुझे कहना है SUADOURN LEADER .....हांलाकिं मुझे तो पता भी नहीं था कि ये होता क्या है ....फिर भी घर पर मेहमान आते और मेरा जवाब यही होता ....थोड़ा बड़ा होने पर मेरा इंटरेस्ट क्रिकेट की तरफ बड़ गया .....पापा से बैट लाने को जिद की ..तो अगले दिन वो बैट ले आए और कहने लगे कि तू डेविड बून है........ मैंने सोचा कि सचिन के बाद ..अगला नाम मेरा ही होगा ....पड़ोस में दो-तीन लोगों ने मेरे खेल की तारीफ भी कर दी..बस क्या था ...मुझे तो लगा कि ..मेरा जन्म ही क्रिकेट के लिए हुआ है.......हमने अपनी टीम बना ली ..बैट मेरा था तो कप्तान भी मैं बन गया....अब हर संडे को दूसरे मोहल्ले की टीम से मैच होता .....जल्द ही मुझे समझ आने लगा ..कि क्रिकेट मेरे बस की बात नहीं.....लेकिन हां पड़ोस के अंकल ने मुझे कॉमेंट्री करते हुए सुना और कहा - तू कॉमेन्टेटर बनेगा ...

इसके बाद जी...लॉन टेनिस की धुन सवार हो गई ..बोरिस बेकर ने विंबल्डन जीता .....और मुझ पर उसका जूनुन सवार हो गया.....फिर आंद्रे अगासी ..जिम कूरियर ..पीट सैम्प्रास.,..मेरे सपने में आने लगे......बैडमिटन के रैकेट से ही मैं टेनिस खेलने लगा..जब मेरी दीदी ने देखा कि मैने रैकेट खराब कर दिया है ..तो उन्होंने ...रैकेंट ही छुपा दिया.....कई दिनों तक ढूंडा लेकिन नहीं मिला ...तो मैंने सोचा छोड़ों ..कुछ नया करते हैं .....
1994 फुटबॉल वर्ल्ड कप शुरु हो गया.....और मोहल्ले के बड़े भाई लोग फुटबॉल की बातें करते थे ..अमर उजाला में फुटबॉलर्स की फोटो छपती थी....रोमारियो..बौजियो....सिलाइची..ना जाने क्या क्या....

और अब मैं भी पूरी तरह से ठान चुका था कि ...मुझे मैराडोना बनना है..पापा फुटबॉल ले आए....खेल शुरु हुआ ....हमारे घर में एक गैलरी थी...और उसकी दीवारों का सारा सीमेंट मैनें फुटबॉल मार-मार का निकाल दिया था ...उसके बाद मेरे घर वालों ने मेरी धुनाई करके ..मेरे फुटबॉलर होने का सारा भूत भी निकाल दिया.....
अब मैं क्या करता .....घर में टीवी देखता था .....दुरदर्शन पर परमवीर चक्र दोबारा शुरु हुआ ..बहुत जोश आया.....मन किया बड़ा होकर फौजी बनना है ...मेरे मामा भी कर्नल थे....वो तो मेरे हीरो हो गए....किताब में अब्दुल हमीद का चैपटर पढ़ा तो बस देशभक्ती का क्रेज हो गया........एक दिन मम्मी के साथ आर्मी कैंटिन गया...
वहां एक लियो की टॉय गन रखी थी ...गन बहुत बड़ी थी ....लेकिन बिलकुल असली थी .....मैंने मम्मी से कहा मुझे ये चाहिए ...मंहगी होने की वजह से मम्मी ने मना कर दिया.....मैं रोता रहा ...फिर मेरे मामा आए ..और उन्होने वो गन खरीदकर मुझे दे दी.....मैं सोता भी उसी गन के साथ था ..और स्कूल के बाद उसी के साथ खेलता.....स्कूल में भी कोई पूछता कि क्या बनोगे तो मेरा जवाब लेफिट्नेंट ही होता....
देखते देखते मेरे पापा के मार्गदर्शन में मेरा जनरल नॉलेज बहुत तेज हो गया....मैं स्कूल की क्विज को टॉप करने लगा...प्रिंसिपल ने स्टेज पर बुलाकर मुझे ईनाम दिया..और कंधे पर हाथ रखकर कहा ..आईएस बनेगा !......यानी एक और नया करियर ...इस दौरान प्राइम स्पोर्टस नाम से स्पोर्टस चैनल आ चुका था ..और उसमें हम लोग चारू शर्मा को माइक लेकर ...बोलते हुए देखते थे....मैंने भी अखबार और कागज से वैसा ही माइक बनाया....और उसे अपनी स्टडी टेबल के पास रखा करता था ..जैसे ही पठाई के बीच में कोई नहीं होता था ..मैं उसे हाथ में लेकर कॉमेंट्री करता था....लेकिन फिर भी दिमाग मे था कि आईएएस बनना है ....एक दिन हमारे उतराखंड की मंत्री इंदिरा ह्रदेश से मुलाकात हुई ..वो मेरी मम्मी को जानती थी..तो मझसे पूछा कि क्या बनोगे ..मैंने तपाक से जवाब दिया आईएएस .....वो चौंक गई ...बोली तुम जानते हो आईएएस क्या होता है...इसके लिए बहुत मेहनत करनी होती है ...मैंने दिल में सोचा पागल है ये ..मेरे बारे में कुछ नहीं जानती.....जब बन जाउंगा तब पता लगेगा......खैर वो तो चली गई लेकिन इस दौरान मुझे साइंस में इंटरेस्ट आने लगा .....मेरे सभी भाई-बहन सांस स्टूडेंट थे ..इसलिए घर में साइंस का माहौल था....फिजिक्स पढ़कर मुझे लगा कि साइंटिस्ट बनना क्या बुरा है....फिर उन दिनों आईआईटी वाले लोग आईएस बन रहे थे...तो लगा पहले इंजिनियरिंग ..फिर आइएएस..क्या आईडिया था.....12वीं खत्म हुई इंजिनिरिंग की कोचिंग शुरु.....पहले दो महीने बाद लग गया....नहीं यार ..मुझे नहीं करनी ...इंजिनियरिंग ....ङर वाले 50 हजार के करीब फीस भर चुके थे ..इसलिए कोचिंग चलती रही ..लेकिन दिल कही और था....खैर जगह-जगह काउंसलिंग के लिए गया.....लेकिन उतराखंड के पहाड़ों में बसे कॉलेजों से मैने तौबा कर ली.....और साफ-साफ कह दिया ..कि मुझे इंजिनियर नहीं बनना .....मुझे खबी भी पहाड़ों में जिंदगी बिताना पसंद नहीं था ...इसलिए मम्मी से कहा कि आपने जो पैसे कोचिंग में खर्च किए हैं वो वापस कर दूंगा.....इसके बाद मैंने कॉलेज में एडमिशन ले लिया....कॉलेड में एडमिशन के दौरान पहला साल तो ऐसे ही गुजर गया....अब कोई पूछता कि क्या बनना है ..तो मैं कहता पहले बीएसी कर लूं फिर सोचूंगा....सच कहं मैं उस दौरान लोगों से कतराने लगा था ....क्योंकि उनके पास इसके अलावा कोई सवाल नहीं होता था ...और मेरे पास कोई जवाब नही था...फर्स्ट ईयर तो ऐसे ही गुजर गया..सेकेंड ईयर में मैंने..फिर से क्विज ....भाषण ..जनरल नॉलेज शुरु कर दिया.....मैं मिमिकरी अच्छी करता था ..इसलिए कॉलेज में नाटक में भाग लेना का मुझे ..चांस मिल गया.,....अब मैं खुद नाटक लिखता ..और उसमें एक्ट भी करता.....कभी डॉक्टर बनता ..तो कभी गांधी जी.....अब दिन कट रहे थे.....लेकिन लक्ष्य का पता नही था....
मेरे पापा कि बहुत तमन्ना था कि मैं फौज में जाऊं ..उनका कहना था ...कि इसमें ट्रेनिंग के दौरान भी तनख्वाह मिलती है ..और ऑफिसर की लाइफ बेस्ट है......मैंने CDS का एक्जॉम दिया.....और क्वालिफाइ भी कर लिया....लेकिन फिर भी दिल कह रहा था...कि अगर फौज में जांगा ..तो मुझे कौन जानेगा....भगवान ने सुन ली ..और मैं फाइनल राउंड में बाहर हो गय़ा....पापा बहुत निराश हुए......लेकिन मुझे अब समझ में आ रहा था.....कि क्या करना है.... कॉलेज के नाटक में मैं रिपोर्टर बना.....और लोगों ने उसकी बहुत तारीफ की ...सबने कहा तुम रिपोर्टर बनो......मैंने गढवाल यूनिवर्सि का फॉर्म भरा ..हजारों स्टूडेंट्स में से मुझे तीसरा स्थान मिला...अब घर छोड़ने का वक्त आ गया.....लेकिन फिर वही चक्कर पहाड़ में कॉलेज था .और मुझे वहां नहीं रहना था ...मैंने फिर मना कर दिया.....अगले साल आईएमएमसी और भारतीय विघा भवन..और जामिया का फॉर्म लाया...लेकिन किस्मत ले गई....भारतीय विघा भवन....पापा ने रिजल्ट देखा ..फिर कुछ देर सोचा ..और बोले ...क्या बनेगा तू ? मैंने कहा रिपोर्टर......पापा बोले-- ठीक है तू यही बन ..लेकिन हां ...ये सोच ले ..कि तुझे नंबर वन बनना है ....आज मैं रिपोर्टर तो बन गया....और टीवी में देखने के बाद मेरे पापा को यही लगता कि ....अगर मैं रिपोर्टर बन सकता हूं ..तो कोई भी बन सकता है ....

शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010

2010 में खेलों की दुनिया के दबंग



खेल खेल में 2010

साल 2010 में 5 दबंग खिलाड़ियों की दबंगई खूब देखने को मिली...क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर ने ऐतिहासिक कारनामा कर साल के नंबर वन दबंग बने तो वहीं दूसरे दबंग धोनी की दबंगई भी चर्चे में रही....क्रिकेट के मैदान से बाहर दूसरे खेलों में गगन नारंग ने अपनी कामयाबी से दबंग की सूची में शुमार हो गए तो वहीं गोल्डन गर्ल सायना नेहवाल जा जादू और बॉक्सर विजेंदर का मुक्का खूब चला।
सबसे बड़े दबंग सचिन
सचिन ने साल 2010 का आगाज किया ... ग्वालियर वन-डे में अपने एतिहासिक दोहरे शतक के साथ । वन-डे क्रिकेट की पहली दोहरी शतकीय पारी से सचिन ने ... पाकिस्तान के सईद अनवर के 194 रनों का रिकॉर्ड तोड़ा ...इसके बाद टेस्ट क्रिकेट में 14 हज़ार रनों का जादुई आंकड़ा भी छुआ...लेकिन सचिन के करियर का सबसे यादगार लम्हा आया ... 19 दिसंबर को ...सेंचुरियन के मैदान पर ...साउथ अफ्रीका के खिलाफ शतक बनाकर सचिन शतकों का अर्द्धशतक बनाने वाले पहले बल्लेबाज़ बन गए। इसके साथ ही सचिन को भारत रत्न दिए जाने की मांग एक बार फिर तेज़ हो गई
कैप्टन कूल धोनी की दबंगई
टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी सफलतम कप्तानों में शुमार हुए...धोनी ने एशिया कप में 15 साल के सूखे को खत्म करते हुए एशियाई बादशाहत हासिल की...साथ ही धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने घर और विदेशी सरज़मीं पर कई वनडे सीरीज़ जीती...बल्लेबाज़ी में भी धोनी छाए रहे...करीब 9 महीने तक धोनी आईसीसी वनडे रैंकिंग में नंबर वन बल्लेबाज़ रहे...
शूटिंग का सबसे बड़ा दबंग
वर्ल्ड शूटिंग चैम्पियन में धमाल मचाने के बाद गगन नारंग ने दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड पर अचूक निशाना लगाया...गगन ने यहां 4 गोल्ड मेडल जीते...हालांकि ग्वांगज़ू एशियन गेम्स में गगन का निशाना चूक गया...और उन्हें ब्रॉन्ज़ मेडल से ही संतुष्ट करना पड़ा..लेकिन बावजूद इसके गगन एशियन रैंकिंग में नंबर वन शूटर बने
गोल्डन गर्ल सायना नेहवाल
बैडमिंटन क्वीन सायना नेहवाल ने सुपर सीरीज़ में हैट्रिक लगाने के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने रैकेट की रफ्तार से शानदार प्रदर्शन दिखाया...और गोल्ड मेडल हासिल करते हुए...ये हैदराबादी गर्ल गोल्डन गर्ल बन गई...हालांकि कॉमनवेल्थ गेम्स की शानदार फॉर्म सायना एशियन गेम्स में जारी नहीं रख सकी...लेकिन हांगकांग सुपर सीरीज़ जीतकर ...सायना रैंकिंग में 8 पायदान से 2 पायदान तक पहुंचीं
विजेंदर सिंह का मुक्का
बीजिंग ओलंपिक के ब्रॉन्ज़ मेडलिस्ट विजेंदर ने कॉमनवेल्थ में गोल्ड मेडल हासिल न कर पाने की कसक एशियन गेम्स में पूरी की...विजेंदर ने एशियन गेम्स में अपने मुक्कों का ज़ोर दिखाते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया...विजेंदर अपने शानदार प्रदर्शन से नंबर वन बॉक्सर बने रहे।
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खेल खेल में 2010




एशियन गेम्स में भारत का जलवा

कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद भारतीय खिलाड़ियों का अगला मिशन था एशियन गेम्स ... ग्वांगज़ू में हुए 16वें एशियन गेम्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा ... हालांकि इस मिशन में कई नामी खिलाड़ी फ्लॉप भी साबित हुए। लेकिन अच्छी बात ये रही कि कई युवा चेहरों ने देश के लिए मेडल्स के साथ गौरव हासिल किया ।
(पंकज ने दिलाई सुनहरी शुरूआत)
एशियन गेम्स में भारत के लिए गोल्डन अभियान की शुरूआत ... की बिलियर्ड्स के वर्ल्ड चैंपियन पंकज अडवाणी ने ... 2006 दोहा एशियन गेम्स की तरह पंकज ने 2010 में भी देश के नाम गोल्ड मेडल दिलाया।
(एथलीट्स ने रचा इतिहास)
एशियन गेम्स में भारत के लिए सबसे बड़ी सफलता लाए एथलीट्स ... कॉमनवेल्थ गेम्स की तरह भारतीय एथलीटों ने ग्वांगज़ू में भी उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन किया ... एथलीट अश्विनी अकुंजी ने 4X400 मीटर रिले के सिंगल्स और टीम इवेंट ... दोनों में गोल्ड मेडल हासिल किए। पूरे गेम्स के दौरान एथलेटिक्स से भारत को 5 गोल्ड समेत कुल 11 मेडल्स मिले।
(शूटरों ने किया निराश)
हालांकि मेडल्स की सबसे बड़ी उम्मीद रहे भारतीय शूटर्स एशियन गेम्स में फ्लॉप साबित हुए। मेडल्स के सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे ओलंपिक गोल्ड मैडेलिस्ट अभिनव बिंद्रा ... और कॉमनवेल्थ के हीरो रहे गगन नारंग ... गोल्ड पर निशाना लगाने से चूक गए। तो वहीं ट्रैप शूटर रोंजन सोढी ने देश को शूटिंग में इकलौता गोल्ड मैडल दिलाया।
(साइना ने तोड़ी उम्मीद)
शूटर्स की तरह कॉमनवेल्थ गेम्स की गोल्ड मैडेलिस्ट ... औऱ स्टार शटलर सायना नेहवाल से भी ... देश को एशियन गेम्स में भी गोल्ड मेडल की उम्मीद थी। लेकिन ग्वांगज़ू में सायना का सफर गोल्ड मेडल तो दूर सेमीफाइनल से भी पहले खत्म हो गया। सायना कोई भी मेडल नहीं जीत सकीं ।
(बदला मेडल का रंग)
गेम्स में भारत को मेडल टैली में मज़बूती दिलाने के लिए ... बॉक्सर्स की अहम भूमिका रही। जहां ओलंपिक ब्रांज़ मेडेलिस्ट विजेंद्र सिंह ने ... पहली बार किसी बड़े इवेंट में गोल्ड मेडेल जीता ... वहीं विकास कृष्णन औऱ दिनेश कुमार समेत बॉक्सर्स ने पूरे इवेंट में कुल 9 मेडल अपने नाम किए।
(टेनिस ने भी दिखाया दम)
इधर टेनिस इवेंट्स में सानिया मिर्जा ... भले ही एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल नहीं जीत सकीं ... लेकिन मेन्स इवेंट में युवा सोमदेव बरमन ने ... फैंस की उम्मीदों को निराश नहीं होने दिया। सोमदेव ने पहले डब्ल्स औऱ फिर मेन्स सिंगल्स इवेंट में भी ... गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया।
(28 साल पुराना रिकॉर्ड)
ग्वांग्ज़ू में भारतीय दल ने ... 1982 एशियन गेम्स के 57 मेडल्स के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। ग्वांगज़ू में भारत ने कुल 64 मेडल हासिल किए जिसमें 14 गोल्ड, 17 सिल्वर और 33 ब्रांज शामिल रहे। gfx out... हालांकि इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बावजूद ... मेडल्स टेली में भारत छठे स्थान पर ही पहुंच सका।
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खेल खेल में 2010



कॉमनवेल्थ की कहानी

साल 2010 में भारत के नज़रिए से देखा जाए तो सभी की निगाहें टिकीं थी ... इस साल होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स की मेज़बानी पर। तमाम विवादों और National और International Media की Negative Publicity को देखते हुए ... कॉमनवेल्थ गेम्स देश की नाक का सवाल बन गए थे। लेकिन ना सिर्फ भारत ने गेम्स का सफल आयोजन किया ... बल्कि भारतीय खिलाड़ियों ने भी इस बीच अपने प्रदर्शन से मेडल टेली में तिरंगे का मान बढ़ाया।
3 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक पूरी दुनिया ने माना ... दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का लोहा । जिसके साथ ही खत्म हो गया वो डर ... जो गेम्स की अधूरी तैयारियों, विदेशी एथलीट्स के backout ... औऱ बड़े-बड़े-बड़े घोटालों की खबरों के बीच ... हर भारतीय के दिल में पैदा हो गया था।
हैरतअंगेज़ ओपनिंग सेरेमनी
3 अक्टूबर की एतिहासिक शाम ... दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित हुई ... कॉमनवेल्थ गेम्स की यादगार ओपनिंग सेरेमनी। भारतीय संस्कृति, कला, बॉलीवुड के तड़के ... और अविश्वसनिय Arostat गुब्बारे के Effects के तालमेल के साथ ये ऐसी ओपनिंग सेरेमनी थी ... जिसे पूरी दुनिया ने देखा। विवादों के बावजूद ए.आर रहमान के बनाए थीम सांग ने भी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर सुर्खियां बटोंरी। जिसके बाद 4 अक्टबूर से शुरू हुआ 21 खेलों में ... 71 देश के खिलाड़ियों के बीच ... मेडल्स का वो घमासान जिसमें कोई किसी ने कम नहीं था।
भारतीय शूटर्स ने दिखाया शौर्य
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को सबसे ज्यादा मेडल मिले शूटिंग से ... जिसमे शूटर्स ने कुल 30 मेडल हासिल किए। इसमें 14 गोल्ड, 11 सिल्वर और 5 ब्रान्ज शामिल रहे।
नारंग बने गोल्डन ब्वॉय
लेकिन तमाम शूटर्स के बीच अलग पहचान बनाई गगन नारंग ने ... जिन्होंने एक के बाद एक रिकॉर्ड कॉमनवेल्थ गेम्स में 4-4 गोल्ड मेडल हासिल कर कमाल कर दिया। गगन के अलावा विजय कुमार और ओंकार सिंह ने भी अपने अचूक निशाने से गेम्स में 3-3 गोल्ड मेडल्स जीते।
पहलवानों का 'धोबीपछाड़'
शूटर्स के अलावा भारतीय पहलवानों ने भी कॉमनवेल्थ गेम्स में जमकर सोना बटोरा ... सुशील कुमार समेत कई पहलवानों ने भारतीय़ पहलवानी के गुर को ऐसा आज़माया कि गेम्स खत्म होते-होते पहलवानी से भी ... देश की झोली में 10 मेडल्स आ गए।
बॉक्सर्स की हुई बल्ले-बल्ले
वहीं बॉक्सिंग से भी देश की झोली में कुल 7 मेडल्स आए। सुरंजय कुमार, मनोज कुमार और परमजीत समोटा ने जहां अपने मुक्के के दम पर गोल्ड मेडल हासिल किया ... वहीं वर्ल्ड नंबर-1 विजेन्द्र सिंह सिर्फ ब्रांज़ मेडल ही जीत पाए।
लगा मेडल्स का शतक
इसी तरह कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स से भारत ने ... 12 मेडल जीतकर इतिहास बनाया । तो बैडमिंटन में भी सायना नेहवाल और doubles मुकाबले में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने गोल्ड मेडल्स जीते। टेनिस में देश के लिए स्टार रहे युवा सोमदेव देवबर्मन ... जिन्होंने मेन्स सिंग्ल्स में गोल्ड औऱ मिक्सड डबल्स में सिल्वर मेडल जीता। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय हॉकी ने भी रफ्तार पकड़ी ... औऱ मेन्स टीम ने फाइनल तक का सफर तय करते हुए सिल्वर मेडल पर कब्ज़ा किया। कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारतीय खिलाड़ियों औऱ एथलीट्स का ... ये अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन था। पहली बार भारत कॉमनवेल्थ गेम्स की मेडल टैली में दूसरे स्थान पर रहा। पूरे गेम्स में भारत ने 38 गोल्ड, 27 सिल्वर औऱ 36 ब्रांज़ समेत कुल 101 मेडल जीते।
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खेल खेल में 2010



फीफा वर्ल्ड कप का रोमांच
साल 2010 में खेलों का असली फीवर देखने को मिला ... जून के महीने में । औऱ इस दौरान 31 दिनों तक साउथ अफ्रीका में खेला गया फीफा वर्ल्डकप-2010 । ओपनिंग सेरेमनी से लेकर ... फाइनल मुकाबले तक ... पूरी दुनिया फुटबॉल वर्ल्डकप के रंग में डूबी नज़र आई। जिसके बाद पहली बार फुटबॉल इतिहास में स्पेनिश टीम बनीं ... चैंपियन।
खेलों के मद्देनज़र साल 2010 का सबसे बड़ा इवेंट रहा ... FIFA वर्ल्ड कप । RELIEF पूरी दुनिया के साथ-साथ साउथ अफ्रीकी फिज़ा में भी फुटबॉल वर्ल्ड कप के सुर गूंजने लगे थे। ..TAKE AMBIENCE कहीं ओ अफ्रीका की धुन पर ... जश्न मनाया जा रहा था ... RELIEF तो कहीं लैटिन सिंगर शकीरा का वाका-वाका ... फुटबॉल फैन्स को अपनी धुन पर झूमने को मजबूर किए हुआ था।
RELIEF WITH WAKA WAKA ... आखिरकार WAVING FLAG के नारे औऱ धमाकेदार ओपनिंग सेरेमनी के साथ ... 10 जून को फुटबॉल वर्ल्ड कप का औपचारिक आगाज़ हुआ।
RELIEF जिसके बाद 11 जून 2010 को शुरू हुआ लीग मुकाबलों का सफर ... 31 दिनों तक 32 टीमों के बीच हर रोज़ ... बड़े-बड़े उलटफेर देखने को मिले। RELIEF कई स्टार खिलाड़ी फ्लॉप हुए ... तो कई नए सितारों का जन्म भी हुआ। RELIEF इसी बीच स्टार खिलाड़ियों से सजी फ्रांस, इंग्लैंड ब्राज़ील, इटली और अर्जेंटिना जैसी टीमें अंतिम चार में जगह बना पाने में भी नाकाम रही। RELIEF इधर अपनी काबीलियत और मेहनत के दम पर नीदरलैंड्स, उरूग्वे, जर्मनी और स्पेन की टीमों ने ... सेमीफाइनल में जगह पक्की करते हुए सुर्खियां बटोंरी RELIEF तो साथ ही दुनिया भर की मीडिया का चहेता बन गया .... जर्मनी के Aquarium में बैठा 3 साल का भविष्यवक्ता ऑक्टोपस पॉल । लीग मुकाबले से लेकर सेमीफाइनल तक ... जर्मनी की हर जीत की भविष्यवाणी करने वाले पॉल ने ... सेमीफाइनल में स्पेन की जीत और जर्मनी की हार की भविष्यवाणी की ... जिसके सच साबित होते ही जर्मनी में पॉल की जान पर बन आई। वहीं दूसरे सेमीफाइनल में उरूग्वे को 3-2 से हराकर विजेता रही नीदरलैंड्स ने ... तीसरी बार वर्ल्ड कप के फाइनल में सीट पक्की की। RELIEF फाइनल से पहले एक बार फिर ... ऑक्टोपस ने भविष्यवाणी की ... और इस बार स्पेन को इतिहास रचने का दावेदार बताया । 11 जुलाई 2010 का जोहानिसबर्ग के सॉकर सिटी स्टेडियम में ... खेला गया वर्ल्ड कप के इतिहास का सबसे रोमांचक मुकाबला । RELIEF स्पेन और नीदरलैंड्स के बीच कांटे की टक्कर हुई ... और EXTRA TIME तक खिंचे मुकाबले आंद्रे एनिएस्ता के एक गोल ने ... स्पेन को वर्ल्ड फुटबॉल का बादशाह बना दिया ।
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